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  • एमएसएमई क्षेत्र में बढ़त, Jitan Ram Manjhi के अनुसार उद्यम पोर्टल पर 7.83 करोड़ पंजीकरण और करोड़ों रोजगार

    एमएसएमई क्षेत्र में बढ़त, Jitan Ram Manjhi के अनुसार उद्यम पोर्टल पर 7.83 करोड़ पंजीकरण और करोड़ों रोजगार


    नई दिल्ली। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने गुरुवार को संसद में जानकारी दी कि उद्यम पोर्टल पर 2020 से 28 फरवरी 2026 तक करीब 7.83 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पंजीकृत हुए हैं। इन उद्यमों से लगभग 34.50 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे देश में स्वरोजगार और उद्यमिता को मजबूती मिली है।

    बंद हुए उद्यम और कारण
    लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया कि इस अवधि में 1.37 लाख एमएसएमई बंद हुए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी उद्यम का बंद होना या पंजीकरण रद्द होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मालिक में बदलाव, प्रमाण पत्र की आवश्यकता न होना, दोहरा पंजीकरण या अन्य प्रशासनिक कारण।

    सरकार की पहलें और योजनाएँ
    मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कोशिशों में सहयोग कर रही है। इनमें शामिल हैं:

    प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

    सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी योजना

    सूक्ष्म एवं लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम

    एमएसएमई प्रदर्शन में सुधार और गति प्रदान करने वाली योजनाएँ

    एसआरआई फंड (आत्मनिर्भर भारत कोष)

    प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना

    एमएसएमई चैंपियंस योजना

    आपातकालीन ऋण और कोविड-19 सहायता
    कोविड-19 महामारी के दौरान एमएसएमई और अन्य व्यवसायों के लिए 5 लाख करोड़ रुपए की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना लागू की गई थी। मंत्री ने बताया कि इस योजना के तहत 31 मार्च 2023 तक 1.13 करोड़ एमएसएमई को गारंटी प्रदान की गई।स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 23 जनवरी, 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खाते बचाए गए, जिनमें से 98.3 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यम थे।

    गैर-कर लाभ और इक्विटी निवेश
    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई की स्थिति सुधारने पर तीन वर्षों के लिए गैर-कर लाभ भी प्रदान किया गया। इसके अलावा, आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश किया गया, जिसमें सरकार का योगदान 10,000 करोड़ रुपए और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल फंड का 40,000 करोड़ रुपए है। इस योजना का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र की योग्य इकाइयों को विकास पूंजी प्रदान करना है।

    पीएमईजीपी के माध्यम से स्वरोजगार
    एमएसएमई मंत्रालय पीएमईजीपी कार्यक्रम का कार्यान्वयन करता है, जो ऋण-आधारित सब्सिडी योजना है। इसका लक्ष्य पारंपरिक कारीगरों और ग्रामीण/शहरी बेरोजगार युवाओं को गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में सहायता करना और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है।

    मंत्री ने कहा कि पीएमईजीपी के कुल लाभार्थियों में 39 प्रतिशत महिलाएँ हैं, और उन्हें गैर-विशेष श्रेणी (25 प्रतिशत तक) की तुलना में अधिक 35 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाती है।

    एमएसएमई क्षेत्र में विकास और रोजगार
    इस प्रकार, सरकार की योजनाओं और पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से एमएसएमई क्षेत्र में विकास और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 7.83 करोड़ पंजीकृत उद्यम न केवल देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, बल्कि लाखों लोगों के लिए स्थायी रोजगार और स्वरोजगार का अवसर भी प्रदान कर रहे हैं।

  • रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि एमएसएमई रोजगार पैदा करने का सबसे मजबूत और प्रभावी मंच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो एमएसएमई सेक्टर को और मजबूती देनी होगी। मांझी गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने के लिए आमंत्रित एमएसएमई लाभार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान

    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि देश की समृद्धि को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र का ही आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान है। यह सेक्टर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अवसर पैदा करता है, जिससे संतुलित विकास संभव हो पाता है।” मांझी ने एमएसएमई की भूमिका को अहम और निर्णायक बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार करार दिया।

    गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि बने कारीगर

    इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय की ओर से एमएसएमई से जुड़े लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थी, खादी विकास योजना के तहत प्रशिक्षित 199 कारीगर, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड के 50 लाभार्थी और महिला कॉयर योजना की 50 उत्कृष्ट महिला कारीगर अपने जीवनसाथियों के साथ शामिल रहीं। यह आयोजन कारीगरों और उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक बना।

    ‘मिनी इंडिया’ जैसा दृश्य: शोभा करंदलाजे

    एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ‘मिनी इंडिया’ देख रही हूं।” उन्होंने कहा कि सभी अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आए हैं, लेकिन देश की प्रगति के लिए एकजुट हैं। करंदलाजे ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनसे प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    मेहनत से आगे बढ़ रहा देश: सचिव

    एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि देश की प्रगति आप सभी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया और भरोसा दिलाया कि एमएसएमई मंत्रालय लगातार लाभार्थियों से जुड़ा रहेगा, ताकि और लोग आगे बढ़ सकें।

    पीएम विश्वकर्मा और एसआरआई फंड की अहम भूमिका

    पीएम विश्वकर्मा योजना 18 पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम कर रही है। वहीं, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड एमएसएमई को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम सरकारी पहल साबित हो रहा है।