Tag: Jivitputrika Vrat

  • आज जितिया व्रत पर बन रहा है खास संयोग जानें पूजा का सही समय व्रत कथा और पारण से जुड़े जरूरी नियम

    आज जितिया व्रत पर बन रहा है खास संयोग जानें पूजा का सही समय व्रत कथा और पारण से जुड़े जरूरी नियम


    नई दिल्ली। जितिया व्रत 2026 का पर्व आज 3 अक्टूबर शनिवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से किया जाता है। बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश और आसपास के कई क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माताएं निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करके संतान की सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। व्रत के दौरान पूजा के शुभ मुहूर्त सामग्री और पारण के समय का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    आज 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है जितिया व्रत

    हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू हुई है और 4 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और प्रदोष काल की परंपरा को ध्यान में रखते हुए आज ही मुख्य व्रत रखा जा रहा है। इससे पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय की परंपरा निभाई गई थी। आज महिलाएं निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करेंगी और व्रत कथा सुनेंगी।

    जितिया व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त

    जितिया व्रत में प्रदोष काल के दौरान भगवान जीमूतवाहन की पूजा करना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार 3 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का समय बताया गया है। इस दौरान महिलाएं विधि विधान से पूजा कर सकती हैं। व्रत का संकल्प लेने के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक बताया गया है। ध्यान रखें कि शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।

    जितिया व्रत की पूजा सामग्री

    भगवान जीमूतवाहन की पूजा के लिए उनकी प्रतिमा या चित्र कुश गोबर धूप दीप रोली सिंदूर अक्षत फूल फल और प्रसाद जैसी सामग्री रखी जाती है। इसके अलावा पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है। कई क्षेत्रों में महिलाएं घर के आंगन में छोटा पोखर बनाकर भी पूजा करती हैं। हालांकि पूजा की विधि और सामग्री परिवार तथा क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    क्यों की जाती है भगवान जीमूतवाहन की पूजा

    जितिया व्रत की परंपरा राजा जीमूतवाहन की कथा से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प लिया था। उनकी करुणा और त्याग की कथा इस व्रत में विशेष रूप से सुनी जाती है। महिलाएं पूजा के दौरान भगवान जीमूतवाहन का स्मरण कर संतान की लंबी उम्र और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं।

    4 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण

    जितिया व्रत का पारण रविवार 4 अक्टूबर को किया जाएगा। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद पारण का समय बताया गया है। व्रत समाप्त करने के बाद महिलाएं पूजा अर्चना करके भोजन ग्रहण करती हैं। पारण से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में जितिया व्रत को मातृत्व प्रेम त्याग और संतान के कल्याण का प्रतीक माना जाता है।

  • महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी

    महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हिंदू पंचांग में व्रत और त्योहारों की लंबी श्रृंखला भी शुरू हो जाती है। खासकर महिलाओं के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और उपवास पड़ते हैं। करवा चौथ से लेकर अहोई अष्टमी और जितिया के बाद छठ पूजा तक कई ऐसे अवसर आने वाले हैं जिनका धार्मिक और महत्व माना जाता है। दशहरा दिवाली धनतेरस और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी इसी दौरान पड़ेंगे।

    सबसे पहले करवा चौथ का व्रत आएगा। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं। शाम के समय करवा चौथ की पूजा की जाती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। करवा चौथ को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी देखने को मिलता है।

    इसके बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है। यह व्रत खास तौर पर संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना जाता है। माताएं इस दिन उपवास रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं परिवार की सुख शांति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।

    महिलाओं के प्रमुख व्रतों में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत का भी विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु और उनकी सुरक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन कठिन उपवास करती हैं। खासकर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में जितिया व्रत को लेकर विशेष धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।

    इसके बाद छठ पूजा का पर्व आता है जो केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है लेकिन इसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। व्रती महिलाएं और पुरुष दोनों ही कठोर नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। छठ पूजा खास तौर पर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

    इन व्रतों के बीच दशहरा धनतेरस दिवाली और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी आएंगे। ऐसे में आने वाले सप्ताह धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाजारों में भी त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और घरों में पूजा पाठ के साथ खरीदारी का सिलसिला बढ़ जाता है।

    करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा जैसे व्रत भारतीय परंपराओं में परिवार संतान और सुख समृद्धि से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाते हैं। अलग अलग क्षेत्रों में इनके नियम और पूजा विधियां अलग हो सकती हैं इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या परंपरा के अनुसार तिथि और पूजा समय की जानकारी देखना उचित रहता है।