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  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।