Tag: jobs

  • मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मध्य प्रदेश: में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से कुल 1.24 लाख पद स्वीकृत किए हैं। इनमें ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, गृह और परिवहन विभाग सहित अन्य पद शामिल हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना सामने आई है।

    स्वीकृत पदों की संख्या के लिहाज से ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। हालांकि, पदों को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साथ शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों को संबंधित विभागों की आधिकारिक भर्ती अधिसूचनाओं और नियुक्ति कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा विभाग में 52 हजार पदों को मंजूरी दी गई है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47 हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों विभागों में पदों की संख्या सबसे अधिक है। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विभिन्न योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गृह विभाग में 9,662 और परिवहन विभाग में 1,800 पद स्वीकृत किए गए हैं। राज्य में तीन नए जिलों के लिए भी 1,240 पदों को मंजूरी मिली है। इन विभागों और नए जिलों से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया किस चरण में और कब शुरू होगी, इसकी जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों और भर्ती सूचनाओं से मिलेगी।

    पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी भर्ती बोर्ड से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिए अलग बोर्ड गठित करने की योजना है। फिलहाल इसका गठन प्रस्तावित है और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। बोर्ड के गठन के बाद पुलिस भर्ती से संबंधित व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, भर्ती बोर्ड के गठन, पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

    सरकार की योजना में नियमित नियुक्तियों के साथ संविदा और आउटसोर्स पद भी शामिल हैं। इसलिए मंजूर किए गए 1.24 लाख पदों को एक साथ निकलने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या समझना सही नहीं होगा। स्वीकृत पदों में से किस विभाग में कितनी नियुक्तियां होंगी और भर्ती किस चरण में आगे बढ़ेगी, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अब विभागवार भर्ती विज्ञापनों पर नजर रखना अहम होगा। आवेदन करने से पहले पद का विवरण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से जांचनी चाहिए। पदों को मंजूरी मिलना भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक अवसरों की स्थिति भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के 20 पदों पर भर्ती, ग्रेजुएट उम्मीदवार 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में नौकरी पाने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए भर्ती का अवसर सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट मास्टर (शॉर्टहैंड) के 20 संभावित रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 25 अक्टूबर 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 15 नवंबर 2026 को रात 11:55 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवारों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक की डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही अंग्रेजी शॉर्टहैंड में 120 शब्द प्रति मिनट की गति और कंप्यूटर संचालन का ज्ञान होना चाहिए। उम्मीदवार की कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड कम से कम 40 शब्द प्रति मिनट होनी जरूरी है।

    शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता के अलावा संबंधित पदों पर कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों के पास सरकारी विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या वैधानिक निकायों में प्राइवेट सेक्रेटरी, सीनियर पर्सनल असिस्टेंट, पर्सनल असिस्टेंट या सीनियर स्टेनोग्राफर के पद पर कम से कम पांच वर्ष की नियमित सेवा का अनुभव होना चाहिए। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित शैक्षणिक, तकनीकी और अनुभव संबंधी शर्तों को पूरा करते हैं।

    भर्ती के लिए न्यूनतम आयु सीमा 30 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 45 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 1 अक्टूबर 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। अभ्यर्थियों को आवेदन करने से पहले अपनी आयु और श्रेणी से संबंधित पात्रता की जांच कर लेनी चाहिए।

    उम्मीदवारों का चयन कई चरणों में किया जाएगा। सबसे पहले प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग होगी। इसके बाद वस्तुनिष्ठ प्रकार की परीक्षा, अंग्रेजी शॉर्टहैंड परीक्षा, कंप्यूटर पर अंग्रेजी टाइपिंग स्पीड टेस्ट और व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के सभी निर्धारित चरणों को पूरा करने वाले उम्मीदवारों के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

    कोर्ट मास्टर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 67,700 रुपये से लेकर 2,08,700 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अतिरिक्त नियमानुसार अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे। वेतनमान को देखते हुए यह भर्ती उन योग्य अभ्यर्थियों के लिए अवसर है, जिनके पास आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के साथ शॉर्टहैंड, टाइपिंग और संबंधित कार्य का अनुभव है।

    आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। सामान्य और अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 1,500 रुपये और बैंक शुल्क निर्धारित है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग की नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी और पूर्व सैनिकों के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये तथा बैंक शुल्क देना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट मास्टर के इन पदों पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवारों को 15 नवंबर की अंतिम समयसीमा का ध्यान रखना होगा। आवेदन से पहले पात्रता,

  • Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल

    Survey: भारत में कम नहीं हुए रोजगार के अवसर… लेकिन AI के दौर में पहली नौकरी पाना हुआ मुश्किल


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) (Artificial Intelligence – AI) भारत (India) में नौकरियों को निगल नहीं रहा लेकिन कॅरिअर की पहली सीढ़ी को संकरा जरूर कर रहा है। विश्व बैंक (World Bank) की ताजा रिपोर्ट इंडिया डेवलपमेंट अपडेट अक्तूबर 2026 में यह दावा किया गया है। 

    रिपोर्ट के मुताबिक, 10 शहरों की 651 आईटी कंपनियों के सर्वे में एआई के कारण कुल रोजगार में कमी नहीं मिली लेकिन 55 फीसदी कंपनियों ने नए कर्मचारियों की भर्ती घटा दी। मध्यम स्तर की भर्ती घटाने वाली कंपनियां 25 फीसदी और वरिष्ठ पदों पर घटाने वाली 14% थीं। रिपोर्ट का आकलन है कि समायोजन अब तक मुख्यतः धीमी भर्ती के रास्ते हुआ है, मौजूदा कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी से नहीं। रूटीन कोडिंग, टेस्टिंग, डॉक्यूमेंटेशन और डेटा प्रोसेसिंग जैसे काम, जो आम तौर पर फ्रेशर्स के हिस्से आते थे, एआई के लिए सबसे आसान हैं।

    आईटी क्षेत्र की तस्वीर बंटी हुई है। छह सबसे बड़ी आईटी-सेवा कंपनियों ने 17 लाख के संयुक्त कार्यबल में से करीब 64 हजार कम किए। इसी दौरान जीसीसी (ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर) समेत बाकी टेक-सेवा क्षेत्र ने तीन साल में करीब सात लाख लोगों को जोड़ा। इससे इस क्षेत्र का कुल रोजगार लगभग 44 लाख पहुंच गया। रिपोर्ट इसे पूरे उद्योग का सिकुड़ना नहीं, चुनिंदा बड़ी कंपनियों में कर्मचारी संख्या की छंटाई मानती है।

    नोमुरा के मुताबिक, 2022 से अगस्त 2026 के बीच एशिया की 69 कंपनियों की घोषणाओं में करीब 1.31 लाख एआई-संबंधी भर्तियां और 61 हजार छंटनी दर्ज हुए। भारत में 83,100 भर्तियां और 31,921 छंटनी हुईं, यानी शुद्ध करीब 51 हजार पदों की बढ़त।


    किस पर और कितना प्रभाव?

    भारत में कुल रोजगार का केवल 22 प्रतिशत हिस्सा एआई के ‘उच्च जोखिम’ के दायरे में आता है, जबकि उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा लगभग 60 प्रतिशत है। इसका मुख्य कारण भारत में कृषि और मैनुअल कार्यों की अधिकता है।

    22 प्रतिशत हिस्से में से 8 प्रतिशत कार्य ऐसे हैं जहां एआई काम का स्वरूप बदल देगा (जैसे वित्तीय और दूरसञ्चार सेवाएं), जबकि 14 प्रतिशत हिस्से (जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा) में उत्पादकता बढ़ने की संभावना है। एआई का प्रभाव मुख्य रूप से शहरी, उच्च शिक्षित और पेशवर युवाओं पर पड़ रहा है, जबकि खेत मजदूरों और निर्माण श्रमिकों पर इसका असर नगण्य है।


    कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी हो रहा इस्तेमाल

    एआई और भारत का श्रम बाजार आमने-सामने नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक बनकर खड़े हो रहे हैं। वैश्विक मंच पर एआई को अपनाने के मामले में भारत 83 अर्थव्यवस्थाओं में 10वें स्थान पर है।


    कृषि में क्रांति:

    केरल का काथिर प्लेटफॉर्म (केरल कृषि प्रौद्योगिकी केंद्र और सूचना भंडार) और महाराष्ट्र का महाविस्तार-एआई उपग्रह तस्वीरों और एआई एनालिटिक्स के जरिये किसानों को उनकी अपनी स्थानीय भाषा में बोलकर कीट नियंत्रण, मौसम और मंडी भाव की सटीक जानकारी दे रहे हैं।


    स्वास्थ्य सेवा में चमत्कार:

    एआई-संचालित चेस्ट एक्स-रे टूल्स दूरदराज के गांवों में बिना इंटरनेट के भी गंभीर बीमारियों की पहचान पारंपरिक तरीकों से कहीं अधिक सटीकता और बेहद कम खर्च में कर रहे हैं।

  • अमेरिका में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका…. पढ़ते हुए नौकरी करना पड़ेगा महंगा!

    अमेरिका में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका…. पढ़ते हुए नौकरी करना पड़ेगा महंगा!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों (Foreign Students) के लिए साथ में नौकरी करना अब महंगा हो सकता है. ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (Optional Practical Training- OPT) कार्यक्रम में शामिल होने पर भारी भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, यह रकम छात्रों से सीधे नहीं, बल्कि संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ली जाएगी।

    दरअसल, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने विदेशी छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम में शुरुआती आवेदन पर 70,000 डॉलर (भारतीय ₹67.72 लाख रुपये) की भारी भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है. हर नए छात्र के OPT कार्यक्रम में शुरुआती आवेदन के लिए स्कूल को 70,000 डॉलर देने होंगे. वहीं, कार्यक्रम को आगे बढ़ाने या नवीनीकरण के लिए 30,000 डॉलर फीस प्रस्तावित है।


    क्या है OPT कार्यक्रम?

    OPT के तहत विदेशी छात्रों को अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में अमेरिका में काम करने का मौका मिलता है. आम तौर पर छात्र ग्रेजुएशन के बाद एक साल तक काम कर सकते हैं. वहीं, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM विषयों के छात्रों को अतिरिक्त दो साल तक काम करने का मौका मिल सकता है.

    इस प्रस्ताव से अमेरिकी कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों को दाखिला देते हैं. विदेशी छात्र इन संस्थानों के लिए फीस के एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं. इसके अलावा टेक कंपनियों और उन दूसरे उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है, जहां विदेशी छात्रों की बड़ी संख्या में भर्ती होती है।


    सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

    होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस शुल्क को वीजा कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग रोकने की कोशिश बताया है. विभाग ने OPT को सस्ते विदेशी श्रम के लिए इस्तेमाल होने वाला माध्यम बताया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन NAFSA ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. संगठन की CEO फांटा अव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका से दूर करने से अमेरिकी नवाचार, आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक नेतृत्व पर असर पड़ सकता है।


    प्रस्ताव पर 60 दिन तक मांगी जाएगी राय

    यह अभी अंतिम फैसला नहीं है. प्रस्ताव पर जनता को 60 दिनों तक अपनी राय और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा. इसके बाद DHS इसे अंतिम रूप देकर लागू कर सकता है. हालांकि, उच्च शिक्षा संस्थानों और कारोबारी संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है. ऐसी कानूनी कार्रवाई से इसके लागू होने में देरी हो सकती है।

  • भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील

    भारत-स्विट्जरलैंड के बीच कई समझौतों पर बनी सहमति…. नौकरी से लेकर व्यापार तक हुई कई डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को भारत यात्रा (India Trip) पर आए स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाई पारमेलिन (Swiss President Guy Parmelin) से द्विपक्षीय वार्ता की। इस मौके पर हरित ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी, परिवहन, आवाजाही समेत कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। बैठक के बाद संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) देशों के साथ हुए व्यापार समझौते से अगले 15 सालों में देश में सौ अरब डॉलर का निवेश आएगा और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

    एफ्टा यूरोपीय देशों का एक मुक्त व्यापार संगठन है जिसे 1960 में स्थापित किया गया था। इसमें चार देश स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बयान में कहा कि राष्ट्रपति पारमेलिन के सहयोग से एफ्टा देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ है। यह यूरोप के किसी भी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला समझौता है जो निवेश, नवाचार और साझा समृद्धि का दस्तावेज है।

    मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड की मित्रता सदियों पुरानी है। 19वीं सदी में स्वामी विवेकानंद ने स्विस आल्प्स में हिमालय की झलक देखी थी। महात्मा गांधी ने भी स्विट्जरलैंड में समय बिताया और वहां के लोगों से संवाद किया। इन ऐतिहासिक यात्राओं की स्मृतियां हमारी मित्रता में गूंजती हैं। मोदी ने स्विट्जरलैंड के पार्मेलिन को भारत की तीन विशेष चीज़- गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर तथा हाथ से नक्काशी किया कश्मीरी अखरोट की लकड़ी का दीवार पैनल भेंट किया।


    स्विस बाजार में पहुंच बढ़ेगी

    मोदी ने कहा कि बैठक में हमने अपनी साझेदारी को एक नई गति और नई ऊंचाई दी है। स्विट्जरलैंड के बाजार में भारत की पहुंच बढ़ाने और निवेश को सुगम बनाने के लिए अहम निर्णय लिए हैं। इससे कृषि, फार्मा, वस्त्र तथा इंजीनियरिंग सामानों का स्विट्जरलैंड को निर्यात बढ़ेगा।


    अनुसंधान पर जोर

    इस दौरान स्वास्थ्य, हरित ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में नए साझा अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई गई। भारत के साइंस स्टार्टअप की क्षमता निर्माण के लिए ज्यूरिख विश्वविद्यालय के साथ समझौता किया गया है।


    वैश्विक शांति के लिए मिलकर काम करेंगे

    संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। वे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। PM मोदी ने अगले वर्ष एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के लिए स्विट्जरलैंड को शुभकामनाएं भी दीं। इस दौरान कहा कि दोनों देश एआई को जिम्मेदार, समावेशी और मानव-केंद्रित बनाने को बढ़ते रहेंगे।


    भारत स्विट्जरलैंड के बीच 5 प्रमुख समझौते

    प्रवासन और आवागमन साझेदारी पर समझौता हुआ। इसमें पांच साल तक के लिए बहु-प्रवेश वीजा का प्रावधान है, जिसमें प्रत्येक यात्रा पर छह महीने तक का प्रवास शामिल है। साथ ही नवीकरणीय एक वर्षीय छात्र परमिट भी शामिल है।

    युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान पर समझौता (वाईपीएस)हुआ। इसका उद्देश्य युवा पेशेवरों के एक से दूसरे देश में अस्थायी रोजगार ग्रहण करने के काम को नियंत्रित करना है। इससे वे अपने क्षेत्र में पेशेवर और भाषायी कौशल को बढ़ा सकते हैं। वाईपीएस में प्रति देश प्रतिवर्ष तीन सौ लोगों का आदान-प्रदान शामिल है, जिसे बढ़ाकर पांच सौ किया जा सकता है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और ज्यूरिख यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज के बीच नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और उद्यमिता में सहयोग के लिए कार्यान्वयन समझौता हुआ। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और नेटवर्किंग के माध्यम से प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप के लिए अकादमिक-उद्योग प्रशिक्षण कार्यक्रम को लागू करना है।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और स्विस राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन (एसएनएसएफ) के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य खोजपूर्ण वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करके, भविष्य में संयुक्त अनुसंधान के लिए साझेदारी का निर्माण करना है।

    संघीय आर्थिक कार्य, शिक्षा और अनुसंधान विभाग (ईएईआर) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच चिह्नित क्षेत्रों में परिवहन प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता प्रणालियों और अवसंरचना के संवर्धन एवं सहयोग पर समझौता हुआ। इसका मकसद सतत अवसंरचना विकास में सहयोग को बढ़ावा देना है। इसमें ई-वाहनों, रोपवे, चक्रीय अर्थव्यवस्था, सुरंगों और अन्य परिवहन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकियों और अवसंरचना को बढ़ाकर परिवहन और गतिशीलता प्रणालियों पर ध्यान दिया गया है।

  • क्या जोखिम भरे काम महिलाओं के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फिर छिड़ी लैंगिक समानता पर बहस

    क्या जोखिम भरे काम महिलाओं के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फिर छिड़ी लैंगिक समानता पर बहस


    नई दिल्ली।
    रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने एक पुरानी लेकिन महत्वपूर्ण बहस को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि क्या किसी काम में जोखिम होने मात्र से महिलाओं को उससे दूर रखा जा सकता है? अदालत के सामने करीब चार दशक पुराना मामला आया, जिसमें एक महिला को केवल इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि काम में गैस सिलेंडर उठाना शामिल था।

    मामला हरियाणा की सुमित्रा का है। उन्होंने 1988 में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के करनाल स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में हेल्पर के पद के लिए आवेदन किया था। वह निर्धारित योग्यता पूरी करती थीं और 49 उम्मीदवारों की सूची में शामिल थीं। इनमें से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली। बाद में सामने आया कि महिला होने के कारण उन्हें सिलेंडर उठाने जैसे काम के लिए अनुपयुक्त माना गया था।

    घर में सिलेंडर उठाने वाली महिला नौकरी के लिए अयोग्य कैसे?

    सुप्रीम कोर्ट ने इसी सोच पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जब घरों में महिलाएं खुद गैस सिलेंडर उठाती और बदलती हैं, तो केवल महिला होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को ऐसे काम के लिए अयोग्य मानना उचित नहीं कहा जा सकता।

    लंबी कानूनी लड़ाई के कारण अब सुमित्रा की नियुक्ति की उम्र निकल चुकी थी। ऐसे में अदालत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को उन्हें 12 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का निर्देश दिया।

    यह फैसला सिर्फ एक महिला को मुआवजा देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उस मानसिकता पर भी सवाल खड़ा हुआ है, जिसमें किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन उसके कौशल, प्रशिक्षण और वास्तविक शारीरिक योग्यता के बजाय उसके महिला या पुरुष होने के आधार पर किया जाता है।

    जोखिम से बचाना और अवसर से वंचित करना अलग बात

    आज महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता साबित कर रही हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों के लिए आरक्षित माना जाता था। वे लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं और सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। ऐसे में किसी महिला को सिर्फ इसलिए किसी काम के लिए अनुपयुक्त मान लेना कि उसमें जोखिम है, पुराने लैंगिक पूर्वाग्रह को मजबूत करता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम वाले कामों में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जाए। किसी भी खतरनाक काम के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य मानकों का पालन कर्मचारी की लैंगिक पहचान से अलग होना चाहिए।

    दरअसल, महिलाओं को जोखिम से बचाने और जोखिम का हवाला देकर महिलाओं को अवसर से वंचित करने में बड़ा अंतर है। सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को किसी पूरे कार्यक्षेत्र से बाहर कर देना समान अवसर की भावना के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।

    योग्यता हो कसौटी, लिंग नहीं

    सही तरीका यह है कि किसी काम की वास्तविक जरूरतों और उससे जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। उसके बाद कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा चयन योग्यता के आधार पर हो।

    इस संदर्भ में रिव्यू ऑफ इकनॉमिक स्टडीज में प्रकाशित डेनमार्क के एक अध्ययन का भी उल्लेख किया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि छोटे व्यवसायों में पुरुष प्रबंधक की पहली संतान बेटी होने के बाद महिलाओं की सापेक्ष रोजगार स्थिति और कमाई में वृद्धि हुई। महिलाओं की सापेक्ष कमाई में 4.4 प्रतिशत और रोजगार में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    हालांकि डेनमार्क के इस अध्ययन के निष्कर्षों को सीधे भारत पर लागू करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों देशों की सामाजिक परिस्थितियां और श्रम बाजार की संरचना अलग हैं। फिर भी यह शोध इस ओर संकेत करता है कि कार्यस्थल पर महिलाओं को लेकर बनी धारणाएं स्थायी नहीं होतीं और व्यक्तिगत व सामाजिक अनुभवों के साथ उनमें बदलाव संभव है।

    सुरक्षा जरूरी, लेकिन अवसर की कीमत पर नहीं

    भारत में चुनौती यह होनी चाहिए कि हर काम के लिए समान अवसर और समान मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए। गर्भावस्था, मातृत्व और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भेदभाव रहित व्यवस्था बनाना जरूरी है। संरक्षण का उद्देश्य महिलाओं से अवसर छीनना नहीं, बल्कि उनके लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार करना होना चाहिए।

    इसलिए महिलाओं को जोखिम वाले काम से दूर रखने का सवाल उठाने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या उस काम को सुरक्षित बनाया जा सकता है और क्या संबंधित महिला उसके लिए आवश्यक योग्यता रखती है। अगर दोनों सवालों का जवाब हां है, तो केवल महिला होने के कारण उसके लिए अवसर का दरवाजा बंद करने का तार्किक आधार नहीं बचता।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश भी यही है कि रोजगार में समानता केवल नियुक्ति पत्र हासिल करने का अधिकार नहीं है। यह उस सोच को बदलने का सवाल भी है, जो पहले ही तय कर लेती है कि कौन व्यक्ति कौन-सा काम कर सकता है और कौन नहीं।

    समाज को महिलाओं के लिए न तो कृत्रिम विशेषाधिकार चाहिए और न ही कृत्रिम सीमाएं। जरूरत समान अवसर, समान कसौटी और सुरक्षित कार्यस्थल की है। आखिर किसी काम की कठिनाई या जोखिम के आधार पर यह तय नहीं होना चाहिए कि उसे महिला कर सकती है या पुरुष। काम की जरूरतें यह तय करें कि कर्मचारी में कौन-सी योग्यता होनी चाहिए और उस कसौटी पर हर व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने विभिन्न विभागों में कुल 206 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत डिजिटल बैंकिंग, सुविधा प्रबंधन, सूचना सुरक्षा, सुरक्षा, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग जैसे प्रमुख विभागों में योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 26 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    भर्ती के तहत सबसे अधिक 88 पद सुविधा प्रबंधन विभाग में भरे जाएंगे। इसके अलावा सुरक्षा विभाग में 54, डिजिटल बैंकिंग विभाग में 19, सूचना सुरक्षा विभाग में 16, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट ऑफिस में 14 तथा कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग विभाग में 15 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, टेक्निकल ऑफिसर, डेटा साइंटिस्ट, डेटा क्वालिटी एनालिस्ट, डिजिटल प्रोडक्ट मैनेजर और टैक्सेशन से जुड़े कई पद शामिल हैं।

    डिजिटल बैंकिंग विभाग में डिजिटल प्रोडक्ट और डिजिटल लेंडिंग से जुड़े पदों पर भर्ती होगी। सुविधा प्रबंधन विभाग में सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से संबंधित तकनीकी अधिकारियों और प्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी। सूचना सुरक्षा विभाग में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अवसर उपलब्ध हैं, जबकि एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट विभाग में डेटा साइंटिस्ट, डेटा प्रोफाइलिंग, बिजनेस इंटेलिजेंस और डैशबोर्ड डेवलपमेंट से जुड़े अनुभवी उम्मीदवारों की भर्ती होगी।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र के अनुसार बीई, बीटेक, बीसीए, एमसीए, बीएससी, एमएससी, डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, आईसीडब्ल्यूए, ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। इसके साथ ही पद के अनुसार दो से दस वर्ष तक का कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। न्यूनतम आयु 23 से 31 वर्ष तथा अधिकतम आयु 35 से 43 वर्ष तक रखी गई है। आयु की गणना 1 अगस्त के आधार पर होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, साइकोमेट्रिक टेस्ट, व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन तथा आवश्यकता अनुसार अन्य मूल्यांकन शामिल किए जाएंगे। अंतिम चयन के बाद उम्मीदवारों को पद के अनुसार 48,480 रुपये से लेकर 1,20,940 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा बैंक की सेवा शर्तों के अनुसार अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 850 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और महिला अभ्यर्थियों के लिए शुल्क 175 रुपये रखा गया है। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को सभी आवश्यक दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अनुभव संबंधी जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी होगी। बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित करियर की तलाश कर रहे योग्य उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

  • US में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी…. पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए देनी पड़ेगी 83 लाख की फीस!

    US में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी…. पढ़ाई के बाद नौकरी के लिए देनी पड़ेगी 83 लाख की फीस!


    वाशिंगटन।
    ट्रंप सरकार (Trump Government) अमेरिका (America) में उच्च शिक्षा लेने वाले विदेशी छात्रों को बड़ा झटका देने की तैयारी में है. इसके तहत अमेरिकी यूनिवर्सिटी (American University) से पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेशी छात्रों को काम करने के लिए 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की फीस देनी पड़ सकती है।

    अमेरिकी सरकार ये फीस ‘ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ (OPT) प्रोग्राम पर लागू करेगी. ये व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपने स्टूडेंट वीजा पर ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद एक से तीन साल तक अमेरिका में काम करने की परमिशन देती है।

    साल 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 4,19,000 विदेशी छात्र इस प्रोग्राम के तहत अमेरिका में काम कर रहे थे. सूत्रों की मानें तो अगर ये नियम लागू होता है, तो अमेरिका जाकर पढ़ाई करने का विदेशी छात्रों का रुझान काफी कम हो सकता है।

    इस कदम को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लीगल इमिग्रेशन को सीमित करने के फैसले के तहत भी देखा जा रहा है. इस फैसले से अमेरिकी विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है, जो विदेशी छात्रों की फीस पर काफी हद तक निर्भर हैं. इसके अलावा सिलिकॉन वैली और वॉल स्ट्रीट की दिग्गज तकनीकी और वित्तीय कंपनियों को भी तकनीकी पदों पर टैलेंट्स हायर करने में भारी मशक्कत करनी पड़ेगी।

    इससे पहले ट्रंप सरकार ने H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की लेवी लगाने की कोशिश की थी. हालांकि, बोस्टन की एक अदालत ने पिछले सप्ताह ही सरकार को H-1B फीस वसूलने से रोक दिया था. अब माना जा रहा है कि OPT पर ये भारी फीस लगाकर सरकार अपने उसी मकसद को हासिल करना चाहती है।

    हालांकि, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) में अभी इस पर चर्चा जारी है. व्हाइट हाउस इसे अंतिम मंजूरी देगा या नहीं, ये फैसला होना अभी बाकी है. साथ ही ये भी तय नहीं हुआ है कि ये फीस छात्र खुद भरेंगे या उन्हें नौकरी देने वाली कंपनियां।

  • व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    व्यापारिक माहौल सुधरने पर बंगाल में औद्योगिक विकास की वापसी की उम्मीद तेज

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल के आर्थिक भविष्य को लेकर एक बार फिर सकारात्मक उम्मीदें सामने आ रही हैं। व्यापार जगत से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि राज्य में निवेश के लिए अनुकूल माहौल और स्थिर नीतिगत ढांचा तैयार किया जाए, तो बंगाल एक बार फिर देश के प्रमुख व्यापार और उद्योग केंद्रों में अपनी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    व्यापारिक समुदाय का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के औद्योगिक ढांचे को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इनमें निवेश में गिरावट, छोटे उद्योगों पर दबाव, और कारोबारियों के पलायन जैसी स्थितियां प्रमुख रही हैं। इसके कारण राज्य के एमएसएमई सेक्टर और पारंपरिक उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है।

    कई व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि एक समय पश्चिम बंगाल देश के औद्योगिक विकास में अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने और नीतिगत स्थिरता की कमी के कारण यह गति धीमी हो गई। परिणामस्वरूप कई छोटे और मध्यम उद्योग या तो बंद हो गए या बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य राज्यों में स्थानांतरित हो गए।

    अब व्यापारिक जगत को उम्मीद है कि यदि राज्य में उद्योगों के लिए सरल नियम, निवेशकों के लिए भरोसेमंद माहौल और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाई जाती है, तो स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। खासकर यह माना जा रहा है कि छोटे और मध्यम उद्योगों को यदि उचित सहयोग दिया जाए तो वे फिर से राज्य की आर्थिक रीढ़ बन सकते हैं।

    पारंपरिक उद्योगों जैसे चाय, जूट, हथकरघा, चमड़ा और मिठाई व्यवसाय को बंगाल की पहचान माना जाता है। लेकिन बढ़ती लागत, जटिल नियमों और सीमित सहायता के कारण इन क्षेत्रों को भी दबाव का सामना करना पड़ा है। व्यापारिक वर्ग का कहना है कि यदि इन उद्योगों के लिए विशेष नीतिगत समर्थन दिया जाए, तो बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर दोबारा पैदा हो सकते हैं।

    इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा रहा है कि राज्य में निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करना बेहद जरूरी है। बेहतर सड़क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती हैं। साथ ही औद्योगिक गलियारों के विस्तार से बड़े स्तर पर निवेश आकर्षित किया जा सकता है।

    व्यापार जगत यह भी मानता है कि यदि राज्य में केंद्र की विभिन्न विकास योजनाओं की भावना के अनुरूप नीतियां लागू की जाएं, तो बंगाल एक बार फिर निवेशकों की पसंदीदा जगह बन सकता है। इससे न केवल उद्योगों का विस्तार होगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सही दिशा में नीतिगत सुधार किए जाएं और निवेश के लिए स्थिर वातावरण बनाया जाए, तो पश्चिम बंगाल में एक नया औद्योगिक दौर शुरू हो सकता है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिल सकती है।

  • AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी

    AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स (Artificial Intelligence (AI) and Robotics) समेत नई तकनीक अपनाने पर जोर के बावजूद दुनियाभर की टेक कंपनियों (Tech Companies) ने 2024 के मुकाबले 2025 में करीब 20 फीसदी कम छंटनी की। इस दौरान अमेरिकी कंपनी इंटेल (American company Intel) ने दो बार में सर्वाधिक 27,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने पहली बार अप्रैल, 2025 में 22,000 और जुलाई, 2025 में 5,000 छंटनी की थी।

    लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल भारत समेत दुनियाभर की 257 टेक कंपनियों ने 1,22,549 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। यह आंकड़ा 2024 में 551 कंपनियों से निकाले गए 1,52,922 कर्मचारियों की तुलना में 19.86 फीसदी कम है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर 1,193 कंपनियों ने 2,64,320 लोगों की छंटनी की थी, जबकि 2022 में 1,064 संस्थाओं ने 1,65,269 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर की टेक कंपनियों में एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर) काफी ज्यादा है। साथ ही, कुशल पेशेवरों की कमी के बावजूद टेक कंपनियों में लगातार छंटनी चिंता की बात है। 


    कंपनियों की खर्च में कटौती का नतीजा

    विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक एट्रिशन रेट और कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रहीं टेक कंपनियों में छंटनी की कई वजहें हैं। वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ वॉर के बीच मंदी की बढ़ती आशंका ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जो कमाई के मोर्चे पर जूझ रही हैं। इसके अलावा, कई देशों में तनाव के बाद आपूर्ति शृंखला से जुड़ीं समस्याओं और महंगाई बढ़ने के कारण लागत वृद्धि से जूझ रहीं कंपनियां खर्च में कटौती कर रही हैं, जिसका असर छंटनी के रूप में दिख रहा है।

    इन कंपनियों में सबसे ज्यादा निकाले
    इंटेल…2025 में दो बार में 22,000 कर्मचारियों को बाहर निकाला।
    माइक्रोसॉफ्ट…कुल 15,000 पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाया।
    अमेजन…वैश्विक स्तर पर 14,000 कर्मचारियों की नौकरी गई।
    एचपी…दो बार में 8,000 लोगों की छंटनी की गई।
    सेल्सफोर्स…4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया।
    मेटा…खर्च में कटौती का हवाला देकर 3,600 पेशेवरों की छंटनी।


    टीसीएस से लेकर जोमैटो ने भी की छंटनी

    भारत में बीते साल टाटा समूह की कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने सबसे ज्यादा 12,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग और स्किल मिसमैच का हवाला देकर इतनी बड़ी संख्या में छंटनी की थी, जिसे लेकर विरोध भी हुआ था।टीसीएस के अलावा 2025 में 29 छोटी-बड़ी कंपनियों ने भी करीब 6,995 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इनमें सबसे ज्यादा 1,000 लोगों की छंटनी ओला इलेक्ट्रिक ने की थी। जोमैटो में भी 600 और कार्स24 में 520 लोगों की नौकरी गई थी।