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  • राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति

    राजस्थान: ओपन जेल में रचेगी शादी, उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदियों को हाई कोर्ट से मिली अनुमति


    जोधपुर। राजस्थान की जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल जल्द एक अनोखे विवाह की साक्षी बनेगी। हत्या के अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे दो बंदी आपसी सहमति से विवाह बंधन में बंधेंगे। राजस्थान हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    जानकारी के अनुसार, नागौर निवासी मूलाराम पड़ोसी की हत्या के मामले में दोषी है और 16 जनवरी 2017 से उम्रकैद की सजा काट रहा है। वर्तमान में वह मंडोर ओपन जेल में बंद है। वहीं सीमा अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी है और फिलहाल 40 दिन की पैरोल पर जेल से बाहर है।

    पुनर्वास के आधार पर मांगी गई थी अनुमति
    मूलाराम की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट में अस्थायी सजा निलंबन की याचिका दायर की गई थी। न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत को बताया गया कि मूलाराम और सीमा दोनों अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं।

    मूलाराम के अधिवक्ता कालूराम भाटी ने दलील दी कि विवाह से दोनों के पुनर्वास और सामाजिक सुधार की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में वे सामान्य पारिवारिक जीवन जी सकेंगे। उन्होंने बंदियों के वैवाहिक और संतानोत्पत्ति संबंधी अधिकारों से जुड़े हाई कोर्ट के एक पूर्व फैसले का भी हवाला दिया।

    सरकार ने भी नहीं जताई आपत्ति
    राज्य सरकार की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में स्वीकार किया गया कि दोनों विवाह करना चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि दोनों पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। सुनवाई के दौरान लोक अभियोजकों ने कहा कि ओपन जेल के नियमों के तहत यदि दोनों विवाह करना चाहते हैं तो सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है।

    कोर्ट ने दिए विवाह संबंधी निर्देश
    खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और केवल दोषसिद्धि के आधार पर किसी बंदी को उसकी सहमति से विवाह करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

    अदालत ने निर्देश दिया कि विवाह समारोह मंडोर ओपन जेल परिसर में ही आयोजित किया जाएगा। समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 लोगों को शामिल होने की अनुमति होगी। विवाह संपन्न कराने के लिए एक पंडित भी मौजूद रहेगा। आवश्यकता पड़ने पर मेहमानों की संख्या बढ़ाने का निर्णय जेल प्रशासन ले सकेगा।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह की तिथि की सूचना पहले से जेल प्रशासन को देना अनिवार्य होगा, जबकि पूरे समारोह का खर्च मूलाराम वहन करेगा। अधिवक्ता कालूराम भाटी के अनुसार, यह विवाह 22 जुलाई को आयोजित किया जा सकता है।

  • सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी

    सोनम वांगचुक पर NSA हटाया गया, 170 दिन बाद जोधपुर जेल से रिहाई; लेह हिंसा के बाद हुई थी गिरफ्तारी



    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगी नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक ने हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा किया है। अब वे जोधपुर जेल से रिहा होंगे।

    लद्दाख प्रशासन ने 24 सितंबर 2025 को हुए लेह हिंसा के बाद वांगचुक को 26 सितंबर को NSA के तहत हिरासत में लिया था। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई और 150 से अधिक घायल हुए थे। सरकार का आरोप था कि वांगचुक ने इन प्रदर्शनों को भड़काया। NSA के तहत ऐसे व्यक्तियों को हिरासत में रखा जा सकता है, जो देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा माने जाएँ। अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने तक होती है।

    सोनम वांगचुक उस समय लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे और इस मुद्दे पर आंदोलन कर रहे थे। उनके नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दो दिन बाद ही उन्हें हिरासत में लिया गया था।

    जोधपुर जेल में 170 दिन तक बंद रहने के बाद अब वांगचुक की रिहाई से उनके समर्थकों में राहत का माहौल है। अधिकारियों ने बताया कि रिहाई के बाद उनके लद्दाख लौटने और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि NSA हटाए जाने से वांगचुक के राजनीतिक और सामाजिक कार्यों पर कानूनी प्रतिबंध कम होंगे, और यह लद्दाख में केंद्र और स्थानीय प्रशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।