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  • पालक खाने से पथरी और जोड़ों में दर्द? इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी..

    पालक खाने से पथरी और जोड़ों में दर्द? इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी..


    नई दिल्ली ।पालक को अक्सर सुपरफूड कहा जाता है क्योंकि यह रक्त बढ़ाने, हड्डियों को मजबूत करने और पेट की सेहत सुधारने में मदद करता है। लेकिन हर किसी के लिए यह सुरक्षित नहीं है। कुछ लोगों के लिए पालक का सेवन परेशानी का कारण बन सकता है।

    आयुर्वेद में पालक के गुण और शरीर के दोषों वात, पित्त, कफ पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखा जाता है। जहां यह रक्तवर्धक और पोषण से भरपूर है, वहीं इसके अत्यधिक सेवन से पथरी का खतरा बढ़ सकता है। खासकर उन लोगों को, जिन्हें पहले से यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन UTI या किडनी की समस्याएं हैं, पालक से बचना चाहिए। यह मूत्र मार्ग में रुकावट पैदा कर सकता है और आगे जाकर पथरी का कारण बन सकता है।

    यदि आपकी पाचन शक्ति कमजोर है, तो पालक से परहेज करना बेहतर है। पाचन अग्नि मंद होने पर पालक पेट में सही तरीके से पचता नहीं और टॉक्सिन पैदा कर सकता है। इससे पेट भारी, गैस या खराब बैक्टीरिया का विकास हो सकता है।

    इसके अलावा, शरीर में वात और कफ की अधिकता वाले लोग भी पालक का सेवन सीमित करें। पालक की भारी प्रकृति कफ को बढ़ाकर श्वसन समस्याएं और वात को बढ़ाकर जोड़ों में जकड़न या गैस की समस्या पैदा कर सकती है।

    पालक फायदेमंद होने के बावजूद कुछ परिस्थितियों में नुकसानदेह भी हो सकता है। खासकर यूटीआई, पथरी, कमजोर पाचन शक्ति और वात-कफ अधिक होने वाले लोगों को पालक का सेवन सीमित करना चाहिए। संतुलित मात्रा और सही तैयारी के साथ पालक का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन साव

  • आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम

    आज ही बदलें जीवनशैली, स्वास्थ्य और इम्यूनिटी के लिए जरूरी कदम


    नई दिल्ली।सर्दियों में ठंड और आलस के कारण लोग अक्सर लंबे समय तक बिस्तर या कुर्सी पर रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आज की जीवनशैली में मस्तिष्क का इस्तेमाल तो बढ़ गया है लेकिन शारीरिक गतिविधियां कम हो गई हैं। यह असंतुलन धीरे-धीरे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।आयुर्वेद में भी कम शारीरिक गतिविधि को स्वास्थ्य के लिए चेतावनी माना गया है। चरक संहिता में कहा गया है व्यायामात लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। यानी व्यायाम से लंबी उम्र ताकत और खुशहाली मिलती है।

    कम गतिविधि से होने वाले प्रमुख स्वास्थ्य खतरे
    मोटापा और मधुमेहलंबे समय तक बैठे रहने से वसा का जमाव बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है जिससे मोटापा और डायबिटीज़ की संभावना बढ़ जाती है।

    गठिया और जोड़ों में दर्द
    लगातार एक ही पोज़चर में रहने से हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न होती है जो जोड़ों के दर्द का कारण बनती है।

    हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग
    चलने और व्यायाम से रक्त संचार और ऑक्सीजन वितरण बेहतर होता है। कम गतिविधि से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जिससे दिल से जुड़े रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

    मानसिक स्वास्थ्य पर असर
    डिप्रेशन चिंता और पाचन विकार की समस्या बढ़ सकती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज़ाना थोड़ी शारीरिक गतिविधि जैसे सुबह की वॉक हल्का व्यायाम या स्ट्रेचिंग को जीवनशैली में शामिल किया जाए। इससे न केवल बीमारियों का जोखिम कम होता है बल्कि मानसिक और शारीरिक संतुलन भी बना रहता है।