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  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की रिपोर्टिंग में पत्रकारों की हिरासत पर CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने अमित शाह को लिखा पत्र

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की रिपोर्टिंग में पत्रकारों की हिरासत पर CPI सांसद पी. संदोष कुमार ने अमित शाह को लिखा पत्र

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को हिरासत में लेने, नजरबंद करने और उनके काम में बाधा डालने का मामला सामने आया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने इस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने मांग की है कि पत्रकारों को परेशान करने और मनमाने तरीके से हिरासत में लेने की घटनाओं पर रोक लगाई जाए। साथ ही, उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से जुड़े मामलों की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने का आग्रह किया है।

    सांसद ने अपने पत्र में कहा कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से मिल रही जानकारी के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों को कवर करने पहुंचे पत्रकारों को उनके पेशेवर दायित्व निभाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कई समाचार संस्थानों के पत्रकारों के साथ हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत और प्रतिबंधों का सामना करना प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर विषय है।

    पत्र में दावा किया गया है कि एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र के संवाददाता को पिछली शाम नजरबंद कर दिया गया, जबकि एक अन्य राष्ट्रीय दैनिक के संवाददाताओं को रिपोर्टिंग करने से रोका गया। इसके अलावा, एक समाचार एजेंसी के संवाददाता को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। सांसद के अनुसार, मलयालम भाषा के विभिन्न समाचार माध्यमों के पत्रकारों और कैमरा कर्मियों को भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इन पत्रकारों ने पुलिस के सामने अपनी शिकायतें रखीं, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिपोर्टिंग में बाधाएं बनी रहीं।

    पत्र में हिंदी पत्रकार अजीत अंजुम और श्याम मीरा सिंह का भी जिक्र किया गया है। सांसद के मुताबिक, श्याम मीरा सिंह को पिछली शाम हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, एक डिजिटल समाचार मंच की महिला संवाददाता को कथित तौर पर घसीटकर हिरासत में लेने की घटना पर भी आपत्ति जताई गई है। उन्होंने कहा कि हिरासत में लिए गए कुछ पत्रकारों के वीडियो में उन्हें पुलिस की बस के भीतर अपने पहचान पत्र दिखाते हुए देखा जा सकता है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं पत्रकारों के कामकाज और जनता तक सूचना पहुंचाने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।

    पी. संदोष कुमार ने पत्र में पत्रकारों से प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की मान्यता दिखाने की मांग पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के लिए PIB मान्यता को अनिवार्य शर्त बनाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मान्यता संबंधी दिशानिर्देश बदलते मीडिया परिदृश्य के अनुरूप नहीं हैं। पत्र में डिजिटल समाचार मंचों और स्वतंत्र पत्रकारों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कई विश्वसनीय डिजिटल संस्थान पत्रकारिता कर रहे हैं, जबकि उनके पत्रकारों के पास जरूरी नहीं कि PIB मान्यता हो।

    सांसद ने यह भी कहा कि स्वतंत्र पत्रकार, डिजिटल मीडिया मंच और यूट्यूब, फेसबुक तथा इंस्टाग्राम के माध्यम से समाचार प्रस्तुत करने वाले लोग भी पत्रकारिता के काम में लगे हैं। इसके अलावा, नागरिक मोबाइल फोन से घटनाओं को रिकॉर्ड करके साझा करते हैं। उनके अनुसार, केवल PIB मान्यता के आधार पर किसी पत्रकार को सार्वजनिक स्थान पर रिपोर्टिंग से रोकना प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना पाने के अधिकार को प्रभावित कर सकता है।

    पत्र में सांसद ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र में व्यक्त चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने गृह मंत्री से दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश देने की मांग की कि पत्रकारों को उनके कानूनी दायरे में काम करने से न रोका जाए और केवल मान्यता नहीं होने के आधार पर उनके साथ भेदभाव न किया जाए। उन्होंने कथित अवैध हिरासत, डराने-धमकाने और मारपीट की घटनाओं की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वालों की जवाबदेही तय करने का आग्रह किया। सांसद ने कहा कि सरकार को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि पत्रकार स्वतंत्र रूप से अपना काम कर सकें और जनता तक जानकारी पहुंचाने में बाधा न आए।

  • जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब संबंधित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। आरोप उस समय से जुड़ा है, जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही थी। महिला पत्रकारों में से एक ने दावा किया है कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

    एक महिला पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पकड़ा जा रहा था। इसी दौरान उसने ACP विवेक भगत पर उसके सीने पर हाथ मारने और धक्का देकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया। महिला पत्रकार का दावा है कि घटना के समय वहां महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। आरोप सामने आने के बाद मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो अब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

    मामले को लेकर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जंतर-मंतर पर लगातार दो दिनों तक हुए प्रदर्शनों से जुड़ी है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें AISA समेत छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR भी दर्ज की थीं।

    इन प्रदर्शनों के पीछे चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद भी बताया गया है। SIR को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेशों को कानूनी आधार हासिल है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

  • ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत

    ट्रंप प्रशासन के वीजा नियम पर कोर्ट की रोक, विदेशी छात्रों और पत्रकारों को मिली राहत


    वॉशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन को संघीय अदालत से झटका लगा है। बोस्टन के एक फेडरल जज ने विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के अमेरिका में रहने की अवधि सीमित करने वाले नए नियम पर रोक लगा दी है। अमेरिकी जिला जज एफ. डेनिस सेलॉर ने यूनियनों और उच्च शिक्षा की वकालत करने वाले संगठनों के गठबंधन के पक्ष में फैसला सुनाया। यह आदेश नए नियम के लागू होने से ठीक एक दिन पहले आया।

    जज बोले- पांच दशक पुरानी व्यवस्था बदलने का तर्क कमजोर
    जज सेलॉर ने कहा कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने नियम में बदलाव के लिए पर्याप्त मजबूत तर्क नहीं दिए। विभाग ने वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया था, लेकिन अदालत के मुताबिक DHS ने नियम बदलने से जुड़ी समस्याओं का पर्याप्त अध्ययन नहीं किया और आसान विकल्पों पर भी विचार नहीं किया।

    पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश द्वारा नियुक्त जज ने कहा कि प्रस्तावित नियम अमेरिका में करीब पांच दशक से चली आ रही व्यवस्था को बदल देता। मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी छात्र अपने कोर्स की अवधि पूरी होने तक अमेरिका में रह और काम कर सकते हैं। अदालत ने इस व्यवस्था के योगदान को भी रेखांकित किया। जज के मुताबिक, इससे करोड़ों छात्रों और शोधकर्ताओं को विज्ञान, मेडिकल और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भी बड़ा फायदा हुआ।

    क्या बदलाव करना चाहता था ट्रंप प्रशासन?
    DHS ने जुलाई में नया नियम प्रस्तावित किया था, जिसमें अमेरिका में विदेशी नागरिकों के रहने की अवधि के लिए निश्चित समयसीमा तय करने का प्रावधान था। इसके तहत विदेशी छात्रों के F वीजा और सांस्कृतिक एक्सचेंज विजिटर्स के J वीजा की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जानी थी। इसके अलावा विदेशी पत्रकारों को दिए जाने वाले I वीजा, जो कई वर्षों तक वैध रहते हैं, उनकी अवधि घटाकर केवल 240 दिन करने का प्रस्ताव था। नियम का मकसद वीजा व्यवस्था में धोखाधड़ी रोकना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना बताया गया था।

    21 लाख से ज्यादा वीजा धारकों पर पड़ सकता था असर
    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अमेरिका में फिलहाल करीब 16 लाख F वीजा और 5 लाख J वीजा धारक हैं। ऐसे में प्रस्तावित बदलाव का असर बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों और एक्सचेंज विजिटर्स पर पड़ सकता था। जज सेलॉर ने उच्च शिक्षा संस्थानों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, नई नीति लागू होने पर बड़े विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के दाखिले कम हो सकते हैं और संस्थानों को करोड़ों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    MIT-हार्वर्ड जैसे विश्वविद्यालयों पर असर की आशंका
    फैसले में अमेरिका के प्रमुख रिसर्च विश्वविद्यालयों का भी उल्लेख किया गया। जज ने कहा कि MIT और हार्वर्ड जैसे संस्थानों में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में विदेशी छात्र अध्ययन करते हैं। अदालत के मुताबिक, विदेशी छात्रों की संख्या में बड़ी गिरावट का असर सिर्फ विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी उच्च शिक्षा व्यवस्था और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान हो सकता है। जज ने इसे संभावित रूप से विनाशकारी बताया।

    इस तरह अदालत की रोक ने फिलहाल विदेशी छात्रों, एक्सचेंज विजिटर्स और पत्रकारों के लिए प्रस्तावित नई समयसीमा को लागू होने से रोक दिया है। मामले में अदालत की आगे की कार्रवाई और प्रशासन की अगली रणनीति पर अब नजर रहेगी।

  • गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    गरौठा में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक संपन्न, मुन्ना यादव बने नगर अध्यक्ष; पत्रकारों की एकजुटता पर दिया जोर

    झांसी। गरौठा स्थित बजरंग धर्मशाला में नेशनल पत्रकार एसोसिएशन की बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें संगठनात्मक विस्तार और पत्रकारों की एकजुटता पर विशेष चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने की।

    बैठक के दौरान धर्मजीत मुन्ना यादव को सर्वसम्मति से नेशनल पत्रकार एसोसिएशन का गरौठा नगर अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वहीं श्रीमती भारती अग्रवाल को संगठन की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर संरक्षक रामपाल सिंह यदुवंशी, राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी, मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार और जिला महासचिव विमल कुमार तिवारी सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामपाल सिंह यदुवंशी ने सभी पत्रकारों से एकजुट रहने और आपसी सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की। राष्ट्रीय महामंत्री शशिकांत तिवारी ने कहा कि पत्रकारों को अपनी पहचान मजबूत करने के लिए नियमित रूप से खबरों का प्रकाशन करते रहना चाहिए।

    मंडल उपाध्यक्ष राजेश सिंह परिहार ने कहा कि कोई भी पत्रकार कवरेज पर जाने से पहले संगठन को सूचित करे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मदद उपलब्ध कराई जा सके। अन्य पदाधिकारियों ने भी संगठन की मजबूती और अनुशासन पर अपने विचार रखे।

    बैठक का संचालन जिला महामंत्री मिलन सिंह परिहार ने किया। अंत में नवनियुक्त नगर अध्यक्ष धर्मजीत मुन्ना यादव ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में पत्रकार बंधु उपस्थित रहे।