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  • अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?

    अडानी ग्रुप की अंबुजा सीमेंट ने जेपी सीमेंट के लिए ₹580 करोड़ की बोली लगाई, लेकिन डील क्यों फंसी?




    नई दिल्ली । अडानी ग्रुप की कंपनी अंबुजा सीमेंट ने दिवालिया जेपी सीमेंट कॉर्पोरेशन के लिए 580 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। इस प्रक्रिया में दूसरी बोली लगाने वाली माई होम ग्रुप ने 300 करोड़ रुपये का ऑफर देकर खुद को बाहर कर लिया है।

    क्रेडिटर्स के अनुसार कंपनी का लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये तय किया गया है, जबकि अंबुजा सीमेंट का मौजूदा ऑफर इससे काफी कम है। इसी कारण लेनदार अब अडानी ग्रुप से अधिक राशि की मांग को लेकर बातचीत कर रहे हैं।

    डील अटकने की वजह
    रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ी बाधा लिक्विडेशन वैल्यू और बोली के बीच का अंतर है। लिक्विडेशन वैल्यू 880 करोड़ रुपये है, जबकि अंबुजा का ऑफर 580 करोड़ रुपये है—यानी लगभग 300 करोड़ रुपये कम।

    लिक्विडेशन वैल्यू वह राशि होती है, जो कंपनी की संपत्तियों को अलग-अलग बेचने पर मिल सकती है। आम तौर पर इससे कम बोली मिलने पर लेनदार टुकड़ों में बिक्री को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन इस मामले में वे अभी भी अडानी ग्रुप से बेहतर ऑफर की उम्मीद कर रहे हैं।

    जेपी सीमेंट पर कर्ज
    आधिकारिक जानकारी के अनुसार जेपी सीमेंट पर कुल कर्ज 3,361 करोड़ रुपये है। इसमें 2,892 करोड़ रुपये सुरक्षित लेनदारों का और 469 करोड़ रुपये असुरक्षित लेनदारों का कर्ज शामिल है। कंपनी को जुलाई 2024 में दिवालिया घोषित किया गया था और यह मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की याचिका पर शुरू हुआ था।

    पहले भी कम ऑफर खारिज
    पिछले वर्ष नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (NARCL) ने 227 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था, जिसे क्रेडिटर्स ने बेहद कम बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।

    जेपी सीमेंट की संपत्तियां
    जेपी सीमेंट के पास सालाना 5 मिलियन टन उत्पादन क्षमता है। इसके अलावा कंपनी के पास दो कैप्टिव पावर प्लांट हैं आंध्र प्रदेश में 35 मेगावाट का चालू प्लांट और 25 मेगावाट का निर्माणाधीन प्लांट। कर्नाटक के शाहाबाद में 1.2 मिलियन टन क्षमता का सीमेंट प्लांट फिलहाल बंद है, साथ ही 60 मेगावाट का पावर प्लांट भी मौजूद है।

    अडानी ग्रुप का पिछला रिकॉर्ड
    हाल ही में NCLT ने अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को जेपी एसोसिएट्स के लिए मंजूरी दी थी। उस प्रक्रिया में NARCL के पास 85% वोटिंग शेयर होने के बावजूद उसने अडानी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि वेदांता ने उससे 3,400 करोड़ रुपये अधिक का प्रस्ताव दिया था।
    अब निगाहें इस बात पर हैं कि अंबुजा सीमेंट अपना ऑफर बढ़ाती है या नहीं। यदि बोली लिक्विडेशन वैल्यू के करीब नहीं पहुंचती, तो कंपनी को अलग-अलग हिस्सों में बेचने की संभावना बन सकती है। फिलहाल लेन-देन और बातचीत जारी है।