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  • जज बनने का सपना पूरा किया, फिर चुना संन्यास का रास्ता, विंटेज कारों और शाही बग्घियों से प्रखरश्री दीदी को विदाई

    जज बनने का सपना पूरा किया, फिर चुना संन्यास का रास्ता, विंटेज कारों और शाही बग्घियों से प्रखरश्री दीदी को विदाई


    बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल में जैन समाज की ओर से आयोजित एक अनूठी बिनौली में परंपरा और भव्यता का संगम देखने को मिला। जज की परीक्षा पास करने के बाद नौकरी जॉइन करने से पहले ही प्रखरश्री दीदी ने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन दीक्षा लेने का निर्णय किया है। उनके साथ चार अन्य दीक्षार्थी बहनों की भी भव्य बिनौली निकाली गई। इस आयोजन में विंटेज कारों का काफिला, शाही बग्घियां और उदयपुर से आया बैंड आकर्षण का केंद्र रहे।

    शहर के विभिन्न मार्गों से निकले चल समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और श्रद्धालु शामिल हुए। रास्ते में जगह-जगह पांचों दीक्षार्थी बहनों का फूल-मालाओं और जयकारों के साथ स्वागत किया गया। परिवार और समाज के लोगों ने भावुक माहौल में उन्हें विदाई दी।

    माता-पिता का सपना पूरा किया, फिर वैराग्य का रास्ता चुना

    प्रखरश्री दीदी ने बताया कि उनके माता-पिता की इच्छा थी कि वह जज की परीक्षा पास करें। उन्होंने परीक्षा पास कर उनका सपना पूरा किया, लेकिन बचपन से ही उनके मन में वैराग्य का भाव था।

    उनके मुताबिक, जज या वकील बनकर वह समाज की उतनी सेवा नहीं कर पातीं, जितनी भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर कर सकती हैं। इसी भावना के चलते उन्होंने सांसारिक जीवन छोड़कर जैन दीक्षा लेने का निर्णय लिया।

    विंटेज कारें, शाही बग्घियां और उदयपुर का बैंड रहे आकर्षण

    बैतूल सकल जैन समाज के सहयोग से आयोजित बिनौली में विंटेज कारों का काफिला और आकर्षक शाही बग्घियां शामिल की गईं। राजस्थान के उदयपुर से आया बैंड भी समारोह का हिस्सा बना। भक्ति और उत्साह के माहौल में समाज के लोगों ने पांचों दीक्षार्थी बहनों का अभिनंदन किया।

    चल समारोह शहर के अलग-अलग मार्गों से होते हुए जैन दादावाड़ी पहुंचा। यहां पांचों दीक्षार्थी बहनों की गोदभराई की पारंपरिक रस्म निभाई गई।

    दीक्षा के बाद रंगीन नहीं, सफेद वस्त्र धारण करेंगी

    दीक्षार्थी रंगोली दीदी ने बताया कि यह उनके सांसारिक जीवन की अंतिम विदाई का अवसर है। फिलहाल उन्होंने रंगीन वस्त्र पहने हैं, लेकिन जैन दीक्षा लेने के बाद वे सफेद वस्त्र धारण करेंगी।

    जानकारी के मुताबिक, प्रखरश्री दीदी सहित पांचों बहनें 22 नवंबर को जैन दीक्षा लेंगी। इससे पहले परिवार और बैतूल के जैन समाज की ओर से उनके सम्मान में यह भव्य बिनौली आयोजित की गई।

  • व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- संस्थानों को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला

    व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- संस्थानों को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बैन किए जाने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिमोथी केली ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मीडिया संस्थानों को बैन से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    जज केली ने फिलहाल इस मामले में कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह जल्द फैसला सुनाएंगे। तीनों मीडिया संस्थानों ने अदालत से मांग की है कि उनकी व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस अंतिम कानूनी निर्णय आने तक तुरंत बहाल की जाए।

    जज ने पुराने अदालती फैसलों का किया उल्लेख

    सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के दो पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    केली ने यह भी कहा कि भले ही सरकार इन पुराने अदालती फैसलों को गलत मानती हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज के तौर पर उन्हें फिलहाल इन्हीं कानूनी मिसालों का पालन करना होगा।

    उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि मीडिया बैन पहले ही लागू कर दिया गया था, तो उसके बाद भेजे गए पत्र किस तरह संबंधित संस्थानों को पहले से नोटिस देने और अपना जवाब रखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा को बनाया आधार

    ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि व्हाइट हाउस में मीडिया की पहुंच कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति को सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से मीडिया संस्थानों की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।

    सरकारी वकील ने यह भी दावा किया कि तीनों मीडिया संस्थानों की कुछ रिपोर्टों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हुए थे। प्रशासन ने अपनी दलील के समर्थन में मिसाइल भंडार, व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम और रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म कन्वेंशन से जुड़ी रिपोर्टों का हवाला दिया।

    मीडिया संस्थानों ने फर्स्ट अमेंडमेंट का दिया हवाला

    CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। तीनों संस्थानों का कहना है कि व्हाइट हाउस का बैन अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दिए गए प्रेस और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के साथ-साथ उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन करता है।

    मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन रिपोर्टों के चलते कार्रवाई की, जो राष्ट्रपति को पसंद नहीं थीं।

    यह विवाद ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव के बीच सामने आया है। बैन के बाद कई बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्क ने इसके विरोध में व्हाइट हाउस की साझा वीडियो कवरेज रोकने का कदम भी उठाया था।

    2018 के जिम एकोस्टा मामले की भी चर्चा

    मौजूदा विवाद की तुलना 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा से जुड़े मामले से भी की जा रही है। उस समय भी जज टिमोथी केली ने व्हाइट हाउस को एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने उस मामले में माना था कि प्रेस पास वापस लेने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

    अब एक बार फिर व्हाइट हाउस और मीडिया से जुड़े मामले की सुनवाई जज केली के सामने है। फिलहाल अदालत ने CNN, MS NOW और Politico पर लगाया गया बैन हटाने का आदेश नहीं दिया है। मामले में जज केली के अगले फैसले का इंतजार है।

  • पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    पाकिस्तान में न्यायपालिका पर सवाल: फर्जी डिग्री के आधार पर फैसले सुनाते रहे जज, पद से हटाए गए

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने नियुक्तियों की पारदर्शिता और डिग्री सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तारिक महमूद जहांगीरी नामक जज को कथित तौर पर फर्जी कानून की डिग्री के आधार पर वर्षों तक पद पर बने रहने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है।

    यह कार्रवाई इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 116 पन्नों के विस्तृत फैसले के बाद की गई, जिसमें अदालत ने मामले को “गंभीर संस्थागत धोखाधड़ी” बताया।

    डिग्री शुरू से ही अवैध पाई गई

    अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि जहांगीरी की लॉ डिग्री वैध नहीं थी, इसलिए उनकी न्यायिक नियुक्ति भी कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं मानी जा सकती। कोर्ट के अनुसार, किसी भी न्यायिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यता की प्रामाणिकता अनिवार्य है, और इस मामले में वही मूल आधार ही संदिग्ध पाया गया।

    विश्वविद्यालय रिकॉर्ड से हुआ खुलासा

    मीडिया रिपोर्ट, विशेषकर डॉन में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, अदालत को कराची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त हुए। इन दस्तावेजों ने प्रस्तुत किए गए प्रमाणपत्रों को पूरी तरह फर्जी साबित कर दिया।

    जांच में यह भी सामने आया कि:

    • 1988 में जहांगीरी ने कथित तौर पर फर्जी नामांकन संख्या के साथ परीक्षा दी।

    • परीक्षा के दौरान नकल करते पकड़े गए और उन पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया।

    • बाद में उन्होंने दंड स्वीकार नहीं किया और किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल कर दोबारा परीक्षा देने का प्रयास किया।

    कॉलेज में प्रवेश का कोई रिकॉर्ड नहीं

    सुनवाई के दौरान संबंधित लॉ कॉलेज प्रशासन ने अदालत को बताया कि जहांगीरी ने संस्थान में कभी औपचारिक प्रवेश ही नहीं लिया था। अदालत ने उन्हें मूल दस्तावेज पेश करने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया, लेकिन वे ऐसा करने में असफल रहे।

    सुनवाई टालने की कोशिशें भी खारिज

    जहांगीरी ने फुल बेंच से सुनवाई की मांग, चीफ जस्टिस को मामले से अलग करने की अपील और कार्यवाही स्थगित कराने जैसे कई प्रयास किए। अदालत ने इन कदमों को “मामले को लंबा खींचने की रणनीति” बताते हुए खारिज कर दिया।

    अदालत की सख्त टिप्पणी

    कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत कर चुका था, तब संबंधित जज की जिम्मेदारी थी कि वह अपनी डिग्री की वैधता सिद्ध करें। ऐसा न कर पाने पर उन्हें पद से हटाना आवश्यक हो गया।

    पाकिस्तान में छिड़ी नई बहस

    यह मामला अब पाकिस्तान में न्यायिक नियुक्तियों की पारदर्शिता, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन और संस्थागत जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का कारण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद नियुक्ति प्रक्रिया की जांच और कड़े सत्यापन तंत्र की मांग तेज हो सकती है।

  • MP: देवास में जज का रास्ता रोकना BJP नेता को पड़ा महंगा, घर-पोल्ट्री फार्म पर चला बुलडोजर… केस भी दर्ज

    MP: देवास में जज का रास्ता रोकना BJP नेता को पड़ा महंगा, घर-पोल्ट्री फार्म पर चला बुलडोजर… केस भी दर्ज


    देवास।
    एमपी (MP) के देवास (Dewas) में एक कथित भाजपा नेता (BJP Leader) को न्यायाधीश (Judge) का रास्ता रोकना काफी महंगा पड़ा। प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को हिरासत में ले लिया है। तीन लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम ने मिलकर कार्रवाई करते हुए आरोपी के मकान के अवैध हिस्सों और पोल्ट्री फार्म पर बुलडोजर (Bulldozer) चला दिया। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर की गई है।


    बुलडोजर ऐक्शन भी हुआ

    देवास में जज प्रसन्न सिंह बेहरावत और भाजपा नेता पंकज धारू के बीच हुए विवाद के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की है। नगर निगम, तहसीलदार और पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्यवाही करते हुए पंकज घारू के उज्जैन रोड बायपास स्थित पोल्ट्री फार्म पर किए गए अवैध निर्माण को हटा दिया। भोपाल रोड स्थित उसके अवैध मकान को भी जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया। इस दौरान मक्सी रोड क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।


    अभद्र भाषा में बातचीत के आरोप

    घटना मंगलवार को देवास के जयश्री नगर क्षेत्र में हुई थी। न्यायाधीश कार से न्यायालय की ओर जा रहे थे। इस दौरान पंकज घारू और उसके 2 से 3 साथियों ने स्कॉर्पियो वाहन सड़क के बीच खड़ा कर रास्ता रोक दिया। न्यायाधीश ने ड्यूटी पर जाने की बात ही और वाहन हटाने का आग्रह किया। इस पर आरोपितों ने अभद्र भाषा में बातचीत की। इस दौरान न्यायाधीश ने मोबाइल से वाहन का फोटो लेने का प्रयास किया तो उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया।


    वायरल हुआ था वीडियो

    इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक युवक न्यायाधीश को कार में बैठने से रोकता हुआ दिखाई दे रहा है। आरोपी जज पर ही FIR की धमकी देता सुनाई दे रहा है। स्थिति बिगड़ती देख न्यायाधीश ने किसी तरह वहां से निकलने की कोशिश की। इसके बाद जब वे वापस अपनी कार में बैठकर आगे बढ़ने लगे तो आरोपितों ने उनका घेराव कर दरवाजा खोलने से रोका और धमकी दी।


    आरोप भी लगाए

    बाद में जज साहब ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को वारदात की जानकारी दी। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। आरोपी पंकज धारू ने कहा कि एक दिन पहले मजिस्ट्रेट की गाड़ी से एक बच्चे को टक्कर लगी थी, जिसमें वह घायल हुआ। बच्चे के इलाज को लेकर चर्चा के दौरान विवाद हुआ। पंकज ने दावा किया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।


    पहले ही दिए थे नोटिस

    आरोपी पंकज ने यह भी दावा है कि बाद में समझौते के लिए फोन आया, लेकिन उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया। तहसीलदार सपना शर्मा ने बताया कि सरकारी जमीन पर लंबे समय से किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। लेकिन पालन नहीं होने पर यह कदम उठाया गया है। बुलडोजर चलाने की कार्रवाई विधिवत की गई है। बाइपास पर पोल्ट्री फार्म करीब सवा से डेढ़ बीघा जमीन पर बनाया गया था।


    कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

    पोल्ट्री फार्म की जमीन की कीमत दो करोड रुपए से अधिक बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल, नगर निगम और राजस्व अमला मौजूद रहा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


    जज साहब ने दर्ज कराई थी शिकायत

    थाना प्रभारी अमित सोलंकी ने बताया कि देवास ग्रीन कॉलोनी क्षेत्र में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रसन्न बहरावत ने शिकायत दर्ज कराई थी कि गाड़ी निकालने को लेकर भाजपा नेता पंकज धारू और उनके साथियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस शिकायत के आधार पर नाहर दरवाजा थाना पुलिस ने आरोपी पंकज धारू, भीम धारू एवं अन्य के खिलाफ सात से अधिक गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।