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  • लोकसभा में राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार, गृह मंत्री बोले- इस तरह से नहीं चलेगी संसद

    लोकसभा में राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार, गृह मंत्री बोले- इस तरह से नहीं चलेगी संसद


    नई दिल्ली । लोकसभा(Lok Sabha) में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Home Minister Amit Shah) ने बुधवार को विपक्ष पर देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। इसके साथ ही, उन्होंने नेता विपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi)द्वारा अतीत में हरियाणा विधानसभा चुनाव के संदर्भ में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट चोरी के लगाए गए आरोपों पर भी जवाब दिया। इस पर राहुल गांधी और अमित शाह के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। राहुल गांधी ने सदन में खड़े होकर अमित शाह को प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करने का चैलेंज दे दिया। इसके बाद अमित शाह भी भड़क गए और कहा कि संसद इस तरह से नहीं चलेगी। मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा।

    अमित शाह के भाषण के दौरान राहुल गांधी को जवाब देने का मौका दिया गया। उन्होंने कहा, ”मेरा कल एक सवाल था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को फुल इम्युनिटी दी जाएगी। इसके पीछे की जो सोच थी, वह हमें बताएं। हरियाणा की जो बात थी, इन्होंने एक उदाहरण लिया, वहां पर अनेक उदाहरण हैं। 19 लाख वहां के फेक वोटर्स हैं। एक्चुअली, मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करते हैं। अमित शाह जी, मैं आपको चैलेंज करता हूं कि मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर डिबेट करें।”

    ‘इस तरह से संसद नहीं चलेगी’
    इस पर अमित शाह ने नाराजगी जताते हुए कहा, ”पहली बात मैं साफ करना चाहता हूं कि 30 साल से विधानसभा और संसद में चुनकर आया हूं। मुझे लंबा अनुभव है संसदीय प्रणाली का। विपक्ष के नेता कहते हैं, पहले मेरी बात का जवाब दीजिए, मैं सुनना चाहता हूं।” अमित शाह ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘’मेरे बोलने का क्रम मैं तय करूंगा। इस तरह से संसद नहीं चलेगी। उनकी हर बात का जवाब दूंगा, लेकिन मेरे भाषण का क्रम वो तय नहीं कर सकते, मैं करूंगा, क्योंकि मैं बोल रहा हूं।” इस पर राहुल गांधी ने खड़े होकर कहा कि यह डिफेंसिव जवाब है, यह घबराया हुआ जवाब है और डरा हुआ है। सच्चा जवाब नहीं है।

    ‘मैं उकसावे में नहीं आऊंगा, बल्कि…’
    इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि मैं उनके उकसावे पर नहीं आऊंगा, बल्कि अपने विषय पर बोलूंगा। मैंने इतना ही कहा कि मैं अपने भाषण का क्रम मैं ही तय करूंगा और यह हर वक्ता का अधिकार है। उनका भी है, मेरा भी है। अमित शाह ने चुनाव सुधारों पर चर्चा पर जवाब देते हुए यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 327 निर्वाचन आयोग को मतदाता सूची बनाने का पूर्ण अधिकार देता है। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘मैं सदन और देश की जनता को कहना चाहता हूं कि क्या घुसपैठिए तय करेंगे कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कौन होगा।’’ शाह ने कहा कि यह एसआईआर मतदाता सूची के शुद्धिकरण की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को भारत में मतदान करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, 4 मिमी कम हाइट वाले उम्मीदवार भी बन सकते हैं CAPF कमांडर

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, 4 मिमी कम हाइट वाले उम्मीदवार भी बन सकते हैं CAPF कमांडर


    नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) ने केंद्रीय सशस्त्र(Central Armed Forces) पुलिस बल (सीएपीएफ) भर्ती से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में उम्मीदवार को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि महज 0.4 सेंटीमीटर कम लंबाई होने के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार को चयन प्रक्रिया से बाहर करना अनुचित और अवैध है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि 164.6 सेंटीमीटर लंबाई को 165 सेंटीमीटर माना जाना चाहिए। जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की बेंच ने कहा कि भर्ती नियमों के मुताबिक, 0.5 सेंटीमीटर से कम का अंतर नजरअंदाज किया जाना चाहिए। वहीं, 0.5 सेंटीमीटर या उससे अधिक होने पर लंबाई को एक मान लिया जाता है। इसलिए उम्मीदवार की 164.6 सेंटीमीटर की लंबाई को सीधे 165 सेंटीमीटर माना जाना चाहिए था।

    बेंच ने अपने आदेश में कहा कि सीएपीएफ भर्ती के लिए मेडिकल जांच टेस्ट को लेकर जारी दिशानिर्देश में भी कहा गया है कि 0.5 सेंटीमीटर से कम लंबाई के अंतर को नजरअंदाज किया जाएगा। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि सीएपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट पद के लिए आवेदन के दौरान उसकी लंबाई 164.6 सेंटीमीटर नापी गई, जिसके कारण उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया।

    हाईकोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया गलत मानते हुए उम्मीदवार को आगे की चयन प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती के अन्य चरणों को उम्मीदवार को स्वयं पास करना होगा, तभी अंतिम नियुक्ति पर निर्णय लिया जाएगा।

    हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया
    इस मामले में याचिका को प्रथम दृष्टया उम्मीदवार के पक्ष में पाते हुए हाईकोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। यह आदेश सीएपीएफ भर्ती प्रक्रिया में मेडिकल मानकों के लागू होने के तरीके पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। भविष्य में कई और अभ्यर्थियों को ऐसे मामलों में बड़ी राहत मिल सकती है।