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  • इमरान खान की बहनों की हिरासत पर बेटे कासिम का गंभीर आरोप, परिवार और वकीलों को नहीं मिल रही जानकारी

    इमरान खान की बहनों की हिरासत पर बेटे कासिम का गंभीर आरोप, परिवार और वकीलों को नहीं मिल रही जानकारी

    नई दिल्ली: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपनी तीन मौसियों की हिरासत को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। कासिम का कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनकी मौसियों अलीमा खान, नोरीन नियाजी और उजमा खान को अगवा कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार और वकीलों को अब तक यह जानकारी नहीं दी गई है कि तीनों महिलाएं किस स्थिति में हैं, उन्हें कहां रखा गया है और उनकी हिरासत की वजह क्या है। कासिम ने अपने बयान में पिता इमरान खान की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि छह महीने से अधिक समय से उनका और उनके भाई का पिता से कोई संपर्क नहीं हुआ है। ऐसे में उन्हें इमरान खान की सेहत के बारे में भी सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।

    कासिम खान के अनुसार, उनकी मौसियों की स्थिति को लेकर परिवार अनिश्चितता का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि न तो रिश्तेदारों को उनकी हालत के बारे में बताया जा रहा है और न ही कानूनी प्रतिनिधियों को उनसे मिलने की जानकारी या अनुमति मिल रही है। कासिम ने अपने बयान में इमरान खान की हिरासत पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि पाकिस्तान में हजारों लोग शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरकर इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पिता को गैरकानूनी और राजनीतिक कारणों से जेल में रखा गया है। कासिम ने कहा कि लोगों की न्याय की मांग और लोकतांत्रिक अधिकारों को किसी भी प्रकार की रुकावट, धमकी या दबाव से नहीं दबाया जा सकता। उनके मुताबिक, जब तक लोगों की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान नहीं होगा और उनका चुना हुआ नेता जेल में रहेगा, तब तक देश में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करना मुश्किल होगा।

    इमरान खान की तीनों बहनों को पिछले महीने 30 दिनों की निवारक हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई पीटीआई की ओर से 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन और इस्लामाबाद तक मार्च की तैयारी के दौरान हुई। पार्टी इस प्रदर्शन के जरिए इमरान खान की सेहत के बारे में जानकारी देने और उन्हें अदियाला जेल से रिहा करने की मांग उठा रही थी। इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं। पीटीआई ने अपने समर्थकों से देशभर में प्रदर्शन करने और संविधान की सर्वोच्चता के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था। पार्टी की मांगों में इमरान खान की रिहाई भी प्रमुख रही है। हिरासत की कार्रवाई के बाद से उनकी बहनों की स्थिति और परिवार से संपर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    इस मामले में परिवार की ओर से लाहौर हाई कोर्ट में पहले से लंबित याचिका के तहत दो अलग-अलग सिविल आवेदन भी दायर किए गए हैं। इन आवेदनों में अलीमा खान के बेटे शाह रेज खान और नोरीन नियाजी की बेटी सकीना नियाजी की ओर से तीनों महिलाओं से मुलाकात पर रोक और दवाइयों तक पहुंच नहीं दिए जाने को चुनौती दी गई है। परिवार का आरोप है कि हिरासत में रखी गई महिलाओं से न रिश्तेदारों को मिलने दिया जा रहा है और न ही उनके वकीलों को संपर्क करने की अनुमति मिल रही है। आवेदनों में कहा गया है कि महिलाओं को दवाइयां केवल एक बार उपलब्ध कराई गईं और इसके बाद किसी को उनसे मिलने नहीं दिया गया। परिवार ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए अदालत से अनुरोध किया है कि वकीलों और परिजनों को मुलाकात करने तथा जरूरी दवाइयां पहुंचाने की अनुमति दी जाए।

    इससे पहले 24 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट ने इमरान खान की बहनों की निवारक हिरासत से संबंधित आदेश को तत्काल निलंबित करने की मांग खारिज कर दी थी। इसके बाद भी परिवार की ओर से मुलाकात और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर कानूनी राहत मांगी गई है। कासिम खान का ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब परिवार इमरान खान से संपर्क नहीं होने और उनकी बहनों की हिरासत को लेकर चिंता जता रहा है। फिलहाल परिवार की प्रमुख मांग तीनों महिलाओं की स्थिति की जानकारी, उनसे मुलाकात की अनुमति और जरूरी दवाइयों तक पहुंच सुनिश्चित कराने की है।

  • ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश

    ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह और समर्थ की न्यायिक हिरासत बढ़ी, 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने का आदेश


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत फिर बढ़ गई है। मंगलवार को विशेष अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले में 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने के आदेश दिए हैं।

    एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत में दोनों आरोपियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। सुनवाई ड्यूटी मजिस्ट्रेट शोभना भलावे की अदालत में हुई। ट्विशा शर्मा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों की पिछली न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने वाली थी। सीबीआई ने इसे बढ़ाने के लिए आवेदन पेश किया और 19 अगस्त तक न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 17 अगस्त तक बढ़ाने का आदेश दिया।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित के अनुसार, सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और एजेंसी 19 अगस्त से पहले चार्जशीट पेश कर देगी। हालांकि अदालत ने सीबीआई को 17 अगस्त तक ही चार्जशीट पेश करने का निर्देश दिया है। यानी अब जांच एजेंसी को इसी तारीख तक चालान पेश करना होगा।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि दोनों आरोपियों के मामले में 90 दिन की वैधानिक अवधि भी नजदीक है। समर्थ सिंह की गिरफ्तारी 21 मई को हुई थी, इसलिए उसकी 90 दिन की अवधि 19 अगस्त को पूरी होगी। वहीं गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी 27 मई को हुई थी, इसलिए उनकी 90 दिन की अवधि 25 अगस्त को पूरी होगी।

    अधिवक्ता दीक्षित ने बताया कि सीबीआई 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश नहीं करती है तो आरोपियों की ओर से डिफॉल्ट बेल का आधार बन सकता है। उनका कहना है कि इसी वजह से संभावना है कि सीबीआई 17 अगस्त को ही चार्जशीट पेश कर दे।

    शुभांग दीक्षित ने बताया कि सीबीआई के अनुसार, उसकी जांच लगभग पूरी हो चुकी है। गिरिबाला सिंह की ओर से उच्च न्यायालय में जमानत आवेदन लंबित है और इस कारण केस डायरी का बड़ा हिस्सा उच्च न्यायालय भेजा गया है। इसी वजह से मंगलवार को चार्जशीट पेश नहीं हो सकी। हालांकि सीबीआई ने 17 अगस्त तक चार्जशीट पेश करने की बात कही है।

    इधर, सुनवाई के दौरान सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह की ओर से लीगल एड के तहत पेश होने वाले अधिवक्ता अदालत में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद समर्थ सिंह की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एनर्स जॉर्ज ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गिरिबाला सिंह से उनकी ओर से पेश होने की अनुमति ली। गिरिबाला सिंह ने सहमति दी, जिसके बाद एनर्स जॉर्ज ने उनकी ओर से वकालतनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी।

    अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पहले से लंबित है। मंगलवार को भी सुनवाई में सीबीआई 11 अगस्त को अपना चालान प्रस्तुत करने वाली थी, लेकिन सीबीआई के अधिकारियों ने कहा कि कुछ मेडिकल व फॉरेंसिक रिपोर्ट का अभी पूरी तरह से अध्ययन व उसके आधार पर विवेचना चल रही है। इस कारण आगामी पेशी पर अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 17 अगस्त मुकर्रर की है, इससे संभव है कि सीबीआई 17 अगस्त को अपनी अंतिम स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी।

    हाईकोर्ट में जमानत पर भी टल गई सुनवाई

    वहीं, इधर गिरिबाला सिंह ने उम्र, स्वास्थ्य कारणों, अभी तक कोई ठोस अपराध सिद्ध नहीं होने और अपनी मां की सेवा जैसे विषयों को लेकर उच्च न्यायालय में जमानत की याचिका दायर की थी। जमानत याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब 12 अगस्त को उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना है। गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका का ट्विशा के परिजनों ने भी आवेदन देकर विरोध किया है। उनके आवेदन पर भी उच्च न्यायालय सुनवाई नहीं हो सकी है। संभवतः 12 अगस्त को दोनों पर सुनवाई हो। इससे पहले 25 जुलाई को भोपाल जिला अदालत ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। इसके बाद गिरिबाला ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

    उल्लेखनीय है कि 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र के बागमुगालिया एक्सटेंशन कॉलोनी स्थित अपनी ससुराल में ट्विशा शर्मा फांसी के फंदे पर लटकी मिली थी। नोएडा निवासी परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया था। उच्च न्यायालय के आदेश पर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टमम किया। परिजनों ने एक सप्ताह तक भोपाल में जमकर हंगामा, प्रदर्शन और आंदोलन किया, इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपी है। अब सीबीआई की दिल्ली इकाई की टीम ही पूरे मामले की जांच कर रही है। दहेज हत्या के आरोप में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह भोपाल केंद्रीय जेल में बंद हैं।

  • ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी

    ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी


    नई दिल्ली। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे। इस संवेदनशील मामले पर अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है।

    सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच की निष्पक्षता और प्रगति के लिए आवश्यक है।

    जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जारी है। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से जांच को नई दिशा मिल सकती है इसलिए सभी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जांच का अहम हिस्सा है लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के अनुसार लैपटॉप में मौजूद संभावित डिजिटल जानकारी और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए पासवर्ड जरूरी है। इसके बिना कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है।

    सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    इससे पहले अदालत ने 16 जून को दोनों आरोपियों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब एजेंसी ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच पूरी की जा सके। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों आरोपी आगे भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे या नहीं।

    गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 11 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी बीच हाल ही में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर चोरी की घटना भी सामने आई थी जिसमें कुछ दस्तावेज और जेवरात चोरी करने का प्रयास किया गया था हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी सामान छोड़कर फरार हो गए थे। अब पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है क्योंकि उसी के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी।

  • हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    हैदराबाद में कार्रवाई तेज: बंडी संजय के बेटे पर POCSO आरोप, पुलिस ने किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । देश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे भगीरथ से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। यह मामला कथित रूप से POCSO कानून से संबंधित आरोपों से जुड़ा हुआ है, जिसमें एक नाबालिग से जुड़े प्रकरण की शिकायत के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई है। पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई कई दिनों से चल रही जांच और तकनीकी व भौतिक साक्ष्यों के आधार पर की गई है, जिसमें आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अलग-अलग टीमों का गठन कर विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। आरोपित की लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही थी और अंततः एक विशेष सूचना के आधार पर उसे हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को प्रारंभिक पूछताछ के लिए संबंधित थाने ले जाया गया, जहां पंच गवाहों की मौजूदगी में बयान दर्ज किए गए। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने कुछ तथ्यों पर अपना पक्ष रखा, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की गई।

    इसके बाद आरोपी को चिकित्सकीय परीक्षण के लिए ले जाया गया और फिर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा रखा गया ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। पुलिस अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को बेहद सावधानी और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाया जा रहा है।

    इस बीच, आरोपी पक्ष की ओर से यह दावा किया गया है कि मामला पूरी तरह से गलत समझ और व्यक्तिगत विवाद का परिणाम है। उनके अनुसार, आरोपों के पीछे कुछ पारिवारिक और वित्तीय विवाद भी हो सकते हैं, जिनकी जांच आवश्यक है। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले में गंभीर आरोप हैं और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

    घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जहां कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि कानून सभी के लिए समान है और जांच प्रक्रिया बिना किसी दबाव के पूरी की जाएगी।

    इस मामले में आगे की सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। पुलिस का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बयान और अन्य पहलुओं की गहन जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामला न्यायालय की निगरानी में आगे बढ़ रहा है।