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  • न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से असंतुष्ट कांग्रेस अब पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सामने ला रही है। इसी क्रम में बुधवार को इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे कार्यकर्ताओं के साथ हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के घर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में सामने आई बातों की जानकारी दी। रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

    पीड़ित परिवारों ने कांग्रेस नेताओं के सामने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कई परिवारों ने अपना इकलौता कमाने वाला सदस्य खो दिया है। परिवार के जिस व्यक्ति पर घर की आर्थिक जिम्मेदारी थी उसकी मौत के बाद उनके सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया। परिजनों का कहना था कि हादसे के बाद उन्हें उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे आएंगे लेकिन उनकी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। कई परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें वह राहत नहीं मिल पाई जिसकी उनसे उम्मीद की गई थी।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि हादसे के बाद बीमार हुए लोगों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ परिवारों को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ा। यहां तक कि मृतक का शव अस्पताल से घर तक लाने में भी परिवारों को खर्च उठाना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और ज्यादा परेशानी का कारण बना।

    कांग्रेस नेताओं के सामने परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि महापौर पार्षद विधायक नगर निगम आयुक्त या किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों ने कहा कि हादसे में अपने लोगों को खोने के बाद वे अब न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि केवल जांच रिपोर्ट सामने आने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई भी जरूरी है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी भावनाओं को देखते हुए पार्टी एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित राहत दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

    चौकसे ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए राहत और मुआवजे से जुड़ी जो अनुशंसाएं की हैं उन्हें सरकार को तत्काल लागू करना चाहिए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवार लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहे हैं और अब उन्हें जल्द सहायता मिलना जरूरी है। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान उनकी समस्याओं को सुना और आगे भी उनके साथ खड़े रहने की बात कही।

    भागीरथपुरा हादसे के बाद अब न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को राहत का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस जहां रिपोर्ट को लेकर सवाल उठा रही है वहीं पीड़ित परिवार दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस के आंदोलन के साथ यह मामला एक बार फिर इंदौर की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

  • बरगी क्रूज हादसा जांच अंतिम चरण में, इंजन नष्ट करने से लेकर कलेक्टर की भूमिका तक उठे गंभीर सवाल

    बरगी क्रूज हादसा जांच अंतिम चरण में, इंजन नष्ट करने से लेकर कलेक्टर की भूमिका तक उठे गंभीर सवाल


     मध्य प्रदेश
    ।  के जबलपुर जिले में स्थित Bargi Dam में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इस मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित आयोग, जिसकी अध्यक्षता Justice Sanjay Divedi कर रहे हैं, लगातार विभिन्न पक्षों के बयान दर्ज कर रहा है और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है।
    30 अप्रैल को हुए इस हादसे में तेज हवाओं के बीच पर्यटक क्रूज अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया था, जिसमें चार बच्चों सहित कुल 13 लोगों की मौत हो गई थी। घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने कई अहम मुद्दे आयोग के सामने रखे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों ने आरोप लगाया है कि हादसे के बाद क्रूज और उसके इंजन की स्वतंत्र तकनीकी जांच नहीं कराई गई, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे मामलों में विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाती है। उनका कहना है कि क्रूज के क्षतिग्रस्त हिस्सों को हटाने या नष्ट करने की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है, जिसकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

    शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि क्रूज के मेंटेनेंस और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। उनके अनुसार, फिटनेस सर्टिफिकेट, सर्विस रिकॉर्ड और तकनीकी निरीक्षण रिपोर्टों की गहन समीक्षा होनी चाहिए थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तकनीकी खराबी के कारण हुआ या प्रशासनिक लापरवाही के चलते।

    इसके अलावा, आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि हादसे के समय एंबुलेंस तो पहुंची थी, लेकिन उसमें पर्याप्त मेडिकल स्टाफ या डॉक्टर मौजूद नहीं थे। राहत और बचाव कार्यों में समन्वय की कमी भी सामने आई, जिससे कई लोगों की जान बचाने में देरी हुई।

    एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि तत्कालीन कलेक्टर और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के बयान भी दर्ज किए जाएं, क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत उनकी जिम्मेदारी अहम होती है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा के बिना जिम्मेदारी तय करना संभव नहीं होगा।

    आयोग ने अब तक कई प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं। साथ ही घटनास्थल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी पूरी की जा चुकी है। आयोग ने संकेत दिया है कि शेष औपचारिकताओं के बाद रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और इसमें संभावित लापरवाही और जिम्मेदार पक्षों का उल्लेख किया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राज्य में जल पर्यटन और सुरक्षा मानकों को लेकर एक बड़ा उदाहरण बन सकता है। बरगी बांध क्षेत्र में हुई यह घटना प्रशासनिक व्यवस्थाओं और तकनीकी निगरानी प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करती है, जिन पर भविष्य में सख्त सुधार की आवश्यकता है।