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  • गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी

    गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है आर्थिक परेशानी; निवेश में सावधानी जरूरी


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, सुख, समृद्धि और भाग्य का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, 19 अगस्त 2026 को बृहस्पति पुष्य नक्षत्र से निकलकर बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। अश्लेषा को संवेदनशील और बदलाव वाला नक्षत्र माना जाता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर सभी राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा, लेकिन मिथुन, धनु और मीन राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मिथुन राशि: लेन-देन में सतर्क रहें
    मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और गुरु अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह गोचर धन और वाणी से जुड़े मामलों को प्रभावित कर सकता है। इस दौरान बातचीत में सावधानी बरतें, क्योंकि आपकी बात का गलत अर्थ निकाला जा सकता है।

    लेन-देन के मामलों में किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें। बजट बिगड़ने और अचानक खर्च बढ़ने की स्थिति बन सकती है।

    धनु राशि: जोखिम भरे निवेश से बचें
    धनु राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश इस राशि के लिए अचानक बदलाव और बाधाओं की स्थिति बना सकता है। बनते हुए कामों में रुकावट आ सकती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शेयर बाजार या अन्य जोखिम वाले निवेश में पैसा लगाने से बचना बेहतर रहेगा। खान-पान और पेट से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी लापरवाही न बरतें।

    मीन राशि: खर्च बढ़ने से बिगड़ सकता है बजट
    मीन राशि के स्वामी भी बृहस्पति हैं। अश्लेषा नक्षत्र में गुरु का प्रवेश आपकी बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। विद्यार्थियों और कारोबारियों को एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है।

    बड़े फैसले भावनाओं में बहकर लेने से बचें। संतान से जुड़ी चिंता या अचानक होने वाले खर्च के कारण परिवार का बजट प्रभावित हो सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ये उपाय कर सकते हैं-
    – गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – जरूरतमंदों या मंदिर में चने की दाल, हल्दी या पीले वस्त्रों का दान करें।
    – गुरुवार को गाय को चने की दाल और गुड़ मिलाकर रोटी खिलाएं।

  • उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ

    उच्च राशि में गुरु की ‘अमृत दृष्टि’, इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर-कारोबार में मिल सकता है बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धन-संपत्ति, संतान, धर्म और भाग्य का कारक ग्रह माना जाता है। जब बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में स्थित होते हैं, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उनके शुभ प्रभाव और भी प्रबल हो जाते हैं। गुरु की पांचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि को विशेष फलदायी माना गया है।

    मान्यता है कि गुरु जिस भाव में विराजमान होते हैं, उससे भी अधिक शुभ प्रभाव उनकी दृष्टि से मिलने वाले भावों पर पड़ सकता है। इस समय उच्च राशि में स्थित गुरु की तीन दिव्य दृष्टियां तीन राशियों के लिए विशेष लाभकारी मानी जा रही हैं। इससे करियर, कारोबार और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं।

    वृश्चिक राशि
    गुरु कर्क राशि में रहते हुए वृश्चिक राशि के पंचम भाव पर अपनी पांचवीं दृष्टि डाल रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह समय विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अनुकूल हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी और सही रणनीति से आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं। शेयर बाजार या रचनात्मक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी फायदा मिलने के योग हैं। संतान पक्ष से कोई अच्छी खबर मिल सकती है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल बनेगा।

    मकर राशि
    मकर राशि के सप्तम भाव पर गुरु की सातवीं समसप्तक दृष्टि पड़ रही है। सप्तम भाव को व्यापार और साझेदारी से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नए कारोबारी सौदे तय होने और साझेदारी में काम करने वालों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। कार्यस्थल पर आपकी स्थिति मजबूत हो सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से प्रमोशन के रास्ते खुल सकते हैं। निजी जीवन की बात करें तो वैवाहिक रिश्तों में चल रहा तनाव कम हो सकता है और आपसी तालमेल बेहतर होने की उम्मीद है।

    मीन राशि
    मीन राशि के स्वामी स्वयं बृहस्पति हैं। इस राशि के नवम भाव पर गुरु की नौवीं दृष्टि पड़ रही है। नवम भाव को भाग्य, धर्म और लंबी यात्राओं से संबंधित माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु की यह दृष्टि लंबे समय से अटके कामों में गति ला सकती है। सरकारी और कानूनी मामलों में सफलता के रास्ते खुल सकते हैं। मनचाही जगह नौकरी ट्रांसफर या विदेश से संबंधित कोई अवसर भी मिल सकता है। कारोबारी नए प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। धार्मिक यात्राओं के योग बनने के साथ किसी बड़े गुरु या अनुभवी व्यक्ति का मार्गदर्शन भी मिल सकता है।

  • 19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश

    19 अगस्त से बदलेगी इन 4 राशियों की किस्मत! बुध के नक्षत्र में होगा गुरु का प्रवेश


    नई दिल्ली। अगस्त का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रहों की चाल बदलने वाली है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को देवगुरु बृहस्पति (गुरु) बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह परिवर्तन कुछ राशियों के लिए करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है।

    क्यों खास है गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश?
    ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, संवाद, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है, जबकि गुरु ज्ञान, भाग्य, समृद्धि और विस्तार के प्रतीक हैं। गुरु के बुध के नक्षत्र में प्रवेश से निर्णय क्षमता मजबूत होने, नए अवसर मिलने, व्यापार में वृद्धि और रिश्तों में बेहतर तालमेल बनने की संभावना मानी जाती है।

    मिथुन राशि
    19 अगस्त के बाद मिथुन राशि के जातकों के रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिलने और व्यापार में नई डील मिलने के योग बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर भी मिल सकता है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लोगों के लिए यह गोचर लाभकारी माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। नई नौकरी के अवसर बनने, व्यापार के विस्तार और नए संबंध स्थापित होने के संकेत हैं, जिससे पारिवारिक माहौल भी सकारात्मक रह सकता है।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों के लिए यह समय राहत देने वाला माना गया है। आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं। नया काम शुरू करने के लिए अनुकूल समय रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा और आत्मविश्वास के साथ मानसिक शांति में भी वृद्धि हो सकती है।

    मकर राशि
    मकर राशि के लिए गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन शुभ फलदायी माना जा रहा है। नौकरी में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। व्यापार में लाभ, रुका हुआ धन वापस मिलने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता में सुधार के संकेत मिल सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर भी प्राप्त हो सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार करें ये उपाय
    – भगवान विष्णु की पूजा करें।
    – पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
    – पीली दाल, हल्दी और केले का दान करें।
    – ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः’ मंत्र का नियमित जाप करें।
    – गाय को हरा चारा खिलाएं।
    – वाणी में मधुरता रखें और किसी की भावनाओं को आहत करने से बचें।

  • गुरु ने बदला नक्षत्र, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, खुलेंगे तरक्की-धन लाभ के नए रास्ते

    गुरु ने बदला नक्षत्र, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत, खुलेंगे तरक्की-धन लाभ के नए रास्ते


    नई दिल्ली। आज 19 जुलाई 2026 की भोर से देवगुरु बृहस्पति ने अपना नक्षत्र परिवर्तन कर लिया है। ज्योतिष शास्त्र में गुरु का नक्षत्र गोचर बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका प्रभाव व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, करियर, शिक्षा, आत्मविश्वास और भाग्य पर पड़ता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह गोचर कई लोगों के लिए नई शुरुआत और रुके हुए कार्यों में गति का संकेत माना जा रहा है।

    क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है यह गोचर?
    ज्योतिष के अनुसार, बृहस्पति केवल शुभ फल देने वाले ग्रह ही नहीं, बल्कि ज्ञान, समृद्धि और जीवन की दिशा के कारक भी माने जाते हैं। जब गुरु नक्षत्र परिवर्तन करते हैं तो उनके प्रभाव में बदलाव आता है, जिसका असर विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है। माना जा रहा है कि यह गोचर उन लोगों के लिए विशेष हो सकता है जो लंबे समय से करियर, व्यवसाय या आर्थिक मामलों में ठहराव महसूस कर रहे थे।

    इन 4 राशियों पर रह सकती है गुरु की विशेष कृपा

    मेष राशि
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, मेष राशि के जातक पुराने अनुभवों से सीख लेकर नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक मामलों में कोई सुखद समाचार या लाभ मिलने की संभावना बन सकती है।

    कर्क राशि
    इस गोचर के प्रभाव से कर्क राशि के लोग भावनाओं की बजाय व्यावहारिक सोच के साथ आगे बढ़ सकते हैं। सामाजिक दायरा बढ़ने के साथ करियर में नए अवसर मिलने की संभावना भी बन रही है।

    कन्या राशि
    कन्या राशि के लिए यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान शुरू किए गए कार्य भविष्य में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। धन लाभ के साथ मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि के संकेत हैं।

    मकर राशि
    मकर राशि के जातकों को पुराने आर्थिक दबाव और चिंताओं से राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। करियर में पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं। सफलता के लिए लक्ष्य पर फोकस बनाए रखना जरूरी होगा।

    गुरु को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु गोचर के दौरान केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अच्छे आचरण का भी विशेष महत्व होता है।

    – नई विद्या या किसी नई स्किल को सीखने की शुरुआत करें।
    – घर के बुजुर्गों और शिक्षकों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद लें।
    – अगले कुछ दिनों तक सात्विक भोजन और संयमित दिनचर्या अपनाने का प्रयास करें, जिसे सकारात्मक ऊर्जा के लिए शुभ माना जाता है।

    नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी देना है।

  • सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?

    सावन में बदलेगा गुरु बृहस्पति का नक्षत्र, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जाने क्‍या होगा बदलाव?


    नई दिल्ली। सावन माह के दौरान ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति एक महत्वपूर्ण नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह बदलाव कई राशियों के लिए शुभ परिणाम लेकर आ सकता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, देवगुरु बृहस्पति 18 जून को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और 18 अगस्त तक वहीं रहेंगे। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को वे बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में गोचर करेंगे।

    ज्योतिष शास्त्र में गुरु का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। माना जा रहा है कि गुरु के इस गोचर से कुछ राशियों के जातकों को करियर, आर्थिक स्थिति, वैवाहिक जीवन और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    कर्क राशि: सुख-शांति और विवाह के प्रबल योग
    कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय शुभ रहने की संभावना है। मानसिक तनाव और पारिवारिक विवादों में कमी आ सकती है। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और जिन लोगों के विवाह में बाधाएं आ रही थीं, उनके लिए विवाह के अच्छे अवसर बन सकते हैं।

    धनु राशि: आर्थिक लाभ के संकेत
    धनु राशि के लोगों को इस अवधि में धन संबंधी मामलों में राहत मिलने के योग हैं। रुका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। नौकरी और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। भूमि, भवन या अन्य संपत्ति में निवेश के लिए भी समय अनुकूल माना जा रहा है।

    कन्या राशि: करियर में मिलेगी नई ऊंचाई
    कन्या राशि के जातकों के लिए आमदनी के नए स्रोत खुल सकते हैं। लंबे समय से अधूरे पड़े कार्य पूरे होने की संभावना है। कार्यस्थल पर प्रदर्शन बेहतर रहेगा, जिससे पदोन्नति और वेतन वृद्धि के अवसर बन सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग भी मिल सकता है।

    वृश्चिक राशि: भाग्य देगा साथ
    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय रुके हुए कार्यों को गति देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। धार्मिक या मांगलिक यात्रा के योग बन सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी सफलता मिलने के संकेत हैं।

    मकर राशि: व्यापार में बढ़ेगा लाभ
    मकर राशि के व्यापारियों को साझेदारी वाले कार्यों में अच्छा लाभ मिलने की संभावना है। नए व्यावसायिक संबंध बन सकते हैं और कारोबार में तेजी आ सकती है। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी तथा जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। इससे सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    गुरु की कृपा पाने के लिए बताए गए उपाय
    केसर या हल्दी का तिलक: प्रतिदिन स्नान के बाद माथे और नाभि पर केसर या हल्दी का तिलक लगाने से ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु ग्रह मजबूत होते हैं और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

    विष्णु सहस्रनाम का पाठ: गुरुवार के दिन या नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ अथवा श्रवण करना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और समृद्धि के मार्ग खुलते हैं।

    पीली वस्तुओं का दान: गुरुवार को चने की दाल, केले, पीले वस्त्र या साबुत हल्दी का दान करने से गुरु ग्रह की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

  • हिंदू नववर्ष पर नीम-मिश्री खाने की परंपरा क्यों? जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व

    हिंदू नववर्ष पर नीम-मिश्री खाने की परंपरा क्यों? जानिए वैज्ञानिक और ज्योतिषीय महत्व


    नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में गुड़ी पड़वा और उगादी के साथ हिंदू नववर्ष की शुरुआत बेहद खास मानी जाती है। इस बार 19 मार्च से नवसंवत्सर की शुरुआत हो रही है। इस दिन सुबह पूजा के बाद नीम की पत्तियां और मिश्री या गुड़ खाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसका गहरा धार्मिक दार्शनिक और वैज्ञानिक महत्व है।

    नीम और मिश्री जीवन का संतुलन

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष के पहले दिन नीम और मिश्री का सेवन जीवन के कड़वे और मीठे अनुभवों का प्रतीक है। नीम का कड़वा स्वाद जीवन की चुनौतियों संघर्ष और कठिनाइयों को दर्शाता है वहीं मिश्री की मिठास सुख सफलता और खुशियों का संकेत देती है। यह परंपरा सिखाती है कि जीवन में सुख दुख दोनों का संतुलन जरूरी है और हर परिस्थिति को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

    पौराणिक महत्व

    शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा ने चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को सृष्टि की रचना की थी। इसी कारण इस दिन को नववर्ष और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान की पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना की जाती है।

    आयुर्वेदिक दृष्टि से भी लाभकारी

    आयुर्वेद के अनुसार मौसम बदलने के समय यानी बसंत से गर्मी में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। वहीं मिश्री शरीर को ऊर्जा देती है और नीम की कड़वाहट को संतुलित करती है।

    कैसे किया जाता है सेवन

    कई जगहों पर नीम की कोमल पत्तियों को मिश्री गुड़ इमली या कच्चे आम के साथ मिलाकर खाया जाता है। इसे नववर्ष की शुभ शुरुआत और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

    इस वर्ष कौन होगा राजा और मंत्री?

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जिस दिन नववर्ष शुरू होता है उसी दिन का ग्रह उस वर्ष का राजा माना जाता है। इस बार नववर्ष गुरुवार को पड़ रहा है इसलिए गुरु ग्रह वर्ष के राजा होंगे जबकि मंगल ग्रह को मंत्री माना गया है।इसके अलावा इस वर्ष चंद्र देव सेनापति मेघाधिपति और फलधिपति रहेंगे। गुरु ग्रह नीरसाधिपति धनाधिपति और सस्याधिपति भी होंगे जबकि बुध धान्याधिपति और शनि रसाधिपति माने गए हैं। कुल मिलाकर हिंदू नववर्ष पर नीम मिश्री खाने की परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि जीवन दर्शन और स्वास्थ्य से जुड़ा एक गहरा संदेश भी देती है।

  • सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए

    सोने की अंगूठी पहनने का सही तरीका: राशि, उंगली और शुभ दिन जानिए


    नई दिल्ली ।भारतीय ज्योतिष में सोने को सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने वाली धातु माना जाता है। मान्यता है कि जब सोने की अंगूठी सही उंगली, उचित दिन और विधि से पहनी जाती है, तो यह जीवन में धन, सम्मान और मानसिक स्थिरता बढ़ाने में सहायक होती है। वहीं, गलत नियमों के साथ सोना पहनना विपरीत प्रभाव भी ला सकता है।

    कौन सी उंगली में सोना पहनना शुभ है?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अनामिका उंगली सूर्य तत्व का प्रतिनिधित्व करती है। इस उंगली में सोने की अंगूठी पहनने से प्रतिष्ठा आत्मविश्वास और कार्यक्षमता बढ़ती है। कुछ परंपराओं में कनिष्ठा छोटी उंगली में भी सोना पहनने की सलाह दी गई है।वही मध्यमा उंगली शनि से जुड़ी होने के कारण इसमें सोना पहनना तनाव और आर्थिक रुकावट ला सकता है। अंगूठे में सोना पहनना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह चंद्रमा का संकेतक है।

    सोना पहनने के शुभ दिन

    धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सोना पहनने के लिए गुरुवार सबसे उत्तम माना जाता है, क्योंकि यह बृहस्पति का दिन है। रविवार भी सूर्य से जुड़ा होने के कारण मान-सम्मान बढ़ाने वाला है। इसके अलावा, बुधवार और शुक्रवार सामान्यतः अनुकूल माने जाते हैं।

    सोने की अंगूठी पहनने की पारंपरिक विधि
    सोना पहनने से पहले उसका शुद्धिकरण आवश्यक माना गया है। अंगूठी को पहले गंगाजल या स्वच्छ जल में रखें फिर दूध और शहद से शुद्ध करें। इसके बाद अंगूठी को भगवान विष्णु या सूर्यदेव के सामने रखकर प्रार्थना करें और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 11 बार जाप करें। शुद्धिकरण के बाद इसे अनामिका उंगली में पहनें।
    राशियों के अनुसार अनुकूलता
    ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह, कर्क, धनु और मीन राशि वाले सोना पहनने से शुभ फल प्राप्त करते हैं। जबकि वृषभ, मिथुन, मकर और कुंभ राशि वालों को बिना व्यक्तिगत कुंडली देखे सोना नहीं पहनना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निर्णय हमेशा व्यक्तिगत कुंडली देखकर ही लेना चाहिए।

    सोना और ग्रहों का संबंध

    सोना मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है, जो ज्ञान, धर्म, संतान और धन का कारक माना जाता है। कुछ मान्यताओं में यह सूर्य को भी बल देता है, जिससे आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है।

    धार्मिक दृष्टि से महत्व

    धार्मिक परंपराओं में सोना महालक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। यह माना जाता है कि सोना धारण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति बनी रहती है। हालांकि किसी भी धातु या रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना अत्यंत लाभकारी होता है।