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  • उच्च ग्रह बनाएंगे राजा या नीच ग्रह करेंगे परेशान जानिए कुंडली का असली गणित और ज्योतिष का बड़ा सच

    उच्च ग्रह बनाएंगे राजा या नीच ग्रह करेंगे परेशान जानिए कुंडली का असली गणित और ज्योतिष का बड़ा सच


    नई दिल्ली । जन्मकुंडली में किसी ग्रह का उच्च या नीच होना हमेशा से लोगों के लिए आकर्षण और जिज्ञासा का विषय रहा है। अक्सर यह धारणा बना ली जाती है कि यदि कुंडली में कई उच्च ग्रह मौजूद हैं तो व्यक्ति निश्चित रूप से अत्यंत सफल और भाग्यशाली होगा जबकि नीच ग्रह जीवन में केवल कठिनाइयां और असफलताएं ही लेकर आते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र इस धारणा को पूरी तरह सही नहीं मानता। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी ग्रह का प्रभाव केवल उसकी राशि से नहीं बल्कि उसकी संपूर्ण स्थिति और कुंडली में उसके योगदान से तय होता है।

    ज्योतिषविदों का कहना है कि किसी ग्रह का शुभ या अशुभ परिणाम उसके उच्च या नीच होने से कहीं अधिक इस बात पर निर्भर करता है कि वह कुंडली में किस भाव का स्वामी है और किस भाव में स्थित है। यदि कोई उच्च ग्रह ऐसे भाव का स्वामी है जो रोग ऋण शत्रु बाधा या संघर्ष से जुड़ा हुआ है तो वह अपनी शक्ति के साथ उन भावों के प्रभाव को भी बढ़ा सकता है। ऐसे में ग्रह शक्तिशाली होने के बावजूद व्यक्ति को अपेक्षित शुभ परिणाम नहीं मिलते।

    दूसरी ओर यदि कोई ग्रह नीच राशि में स्थित है तो इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं कि वह हमेशा नकारात्मक परिणाम ही देगा। यदि वह ग्रह शुभ भाव का स्वामी हो शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त कर रहा हो मजबूत नवांश में स्थित हो या नीचभंग राजयोग जैसी स्थिति बना रहा हो तो वही ग्रह व्यक्ति को सम्मान धन सफलता और प्रतिष्ठा भी दिला सकता है। यही कारण है कि केवल ग्रह की राशि देखकर भविष्य का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।

    ज्योतिष शास्त्र में ग्रह जिस भाव में स्थित होता है उसका महत्व भी अत्यंत अधिक होता है। यदि उच्च ग्रह अशुभ भाव में बैठा हो या राहु केतु अथवा शनि जैसे ग्रहों से पीड़ित हो तो उसकी सकारात्मक शक्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं नीच ग्रह यदि केंद्र या त्रिकोण में शुभ योग बना रहा हो और उस पर बृहस्पति चंद्रमा या शुक्र जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो वह आश्चर्यजनक रूप से लाभकारी परिणाम दे सकता है।

    फलादेश में ग्रहों की युति और दृष्टि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई बार एक ग्रह दूसरे ग्रह के प्रभाव से अपना स्वभाव बदल देता है। यही कारण है कि केवल एक ग्रह को देखकर भविष्यवाणी करना ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता। किसी भी व्यक्ति के जीवन का सही आकलन करने के लिए पूरी कुंडली का संतुलित और गहन अध्ययन आवश्यक होता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कई बार सामान्य दिखाई देने वाला ग्रह अपनी महादशा या अंतरदशा में असाधारण सफलता देता है जबकि अत्यंत मजबूत दिखाई देने वाला ग्रह अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाता। इसलिए किसी की कुंडली में उच्च ग्रह होने पर अत्यधिक उत्साहित होने या नीच ग्रह देखकर भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। सही फलादेश के लिए ग्रह की राशि भाव भावेश युति दृष्टि योग दशा और संपूर्ण कुंडली का समग्र विश्लेषण जरूरी होता है। ज्योतिष का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं बल्कि व्यक्ति को सही दिशा और संतुलित मार्गदर्शन देना है।

  • आज 16 जुलाई को बनेगा सूर्य-चंद्र राशि परिवर्तन योग, मेष, कर्क और तुला राशि के लिए उन्नति, धन लाभ और नए अवसरों के संकेत

    आज 16 जुलाई को बनेगा सूर्य-चंद्र राशि परिवर्तन योग, मेष, कर्क और तुला राशि के लिए उन्नति, धन लाभ और नए अवसरों के संकेत

    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार 16 जुलाई 2026 का दिन ग्रहों की चाल के लिहाज से विशेष महत्व रखने वाला माना जा रहा है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों एक साथ अपनी-अपनी राशियों का परिवर्तन करेंगे, जिससे एक विशेष ज्योतिषीय योग का निर्माण होगा। सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि चंद्रमा कर्क राशि से आगे बढ़कर सिंह राशि में गोचर करेंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह स्थिति ऊर्जा, आत्मविश्वास, मानसिक संतुलन और निर्णय क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। हालांकि इसका प्रभाव प्रत्येक व्यक्ति की जन्म कुंडली और ग्रह दशा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

    इस ग्रह परिवर्तन की सबसे खास बात यह है कि सूर्य चंद्रमा की राशि कर्क में और चंद्रमा सूर्य की राशि सिंह में विराजमान होंगे। वैदिक ज्योतिष में इस प्रकार की स्थिति को शुभ प्रभाव देने वाली मानी जाती है। माना जाता है कि इससे कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। विशेष रूप से मेष, कर्क और तुला राशि के जातकों के लिए यह समय प्रगति, आर्थिक मजबूती और नए अवसरों का संकेत दे सकता है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि यह योग आत्मविश्वास बढ़ाने और लंबे समय से रुके कार्यों को गति देने में सहायक साबित हो सकता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह ग्रह परिवर्तन नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर से जुड़े क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। यदि कोई नया व्यवसाय शुरू करने या किसी महत्वपूर्ण परियोजना पर काम करने की योजना बना रहे हैं तो परिस्थितियां अनुकूल रह सकती हैं। परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा और रचनात्मक कार्यों में भी सफलता मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। आर्थिक मामलों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल सकते हैं।

    कर्क राशि के लिए सूर्य का राशि परिवर्तन आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। वहीं चंद्रमा का दूसरे भाव में गोचर आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक हो सकता है। लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। विद्यार्थियों को शिक्षकों और वरिष्ठों का सहयोग प्राप्त हो सकता है, जिससे शिक्षा और करियर में लाभ मिलने के संकेत हैं। पारिवारिक संबंधों में मधुरता बढ़ सकती है और स्वास्थ्य भी सामान्य से बेहतर रहने की संभावना जताई जा रही है।

    तुला राशि के जातकों के लिए यह ग्रह योग करियर और व्यवसाय के क्षेत्र में नए अवसर लेकर आ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने या पदोन्नति की संभावना बन सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को नए सौदे और लाभ के अवसर प्राप्त हो सकते हैं। कार्यस्थल पर मेहनत की सराहना होने के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत भी मिल रहे हैं। खेल, प्रतियोगिता और प्रदर्शन आधारित क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। पारिवारिक जीवन में खुशहाली बढ़ सकती है और धार्मिक या आध्यात्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सूर्य और चंद्रमा का एक-दूसरे की राशियों में गोचर मानसिक और व्यावहारिक जीवन पर प्रभाव डालता है। फिर भी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के जीवन पर ग्रहों का वास्तविक प्रभाव उसकी जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति और दशा-अंतरदशा पर निर्भर करता है। इसलिए करियर, निवेश, विवाह या अन्य महत्वपूर्ण निर्णय केवल सामान्य राशिफल के आधार पर लेने के बजाय व्यक्तिगत कुंडली का विश्लेषण कराना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

  • सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें इन 5 विशेष वस्तुओं का दान: पुण्य की जगह लग सकता है दोष, घर में आ सकती है दरिद्रता

    सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें इन 5 विशेष वस्तुओं का दान: पुण्य की जगह लग सकता है दोष, घर में आ सकती है दरिद्रता

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या का विशेष योग बना रही है। इस बार की सोमवती अमावस्या ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन कई बड़े और दुर्लभ ग्रहों के संयोग बन रहे हैं। जहां एक ओर सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिससे वृषभ संक्रांति का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ज्येष्ठ अधिक मास का समापन भी इसी दिन हो रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का एक साथ त्रिवेणी संगम हो रहा है। इस दौरान सूर्य देव की कृपा से युक्त वृद्धि योग और शाम तक रहने वाले सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग में किए गए कार्यों को अक्षय फल देने वाला माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस शुभ बेला में किए गए दान से कुंडली के विभिन्न ग्रहों की पीड़ा शांत होती है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि अमावस्या के दिन दान करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना अनिवार्य है, क्योंकि गलत चीजों का दान पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है।

    शास्त्रों के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर वस्त्र दान महादान की श्रेणी में आता है, लेकिन इस दिन किसी को भी फटे, मैले या अत्यंत पुराने वस्त्र देने से बचना चाहिए। ऐसी अनुपयोगी वस्तुओं का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती और मानसिक तनाव बढ़ता है। इसी प्रकार, पितरों की तृप्ति के लिए अन्न दान का विशेष महत्व है, परंतु दान में दिया जाने वाला अनाज पूरी तरह साफ, शुद्ध और खाने योग्य होना चाहिए। कीड़े लगे या पूरी तरह बेकार हो चुके अनाज का दान करने से पूर्वज रुष्ट हो जाते हैं, जिससे परिवार को पितृदोष का सामना करना पड़ सकता है।

    इस पावन तिथि पर नमक के दान को भी पूरी तरह वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन किसी अन्य व्यक्ति को नमक का दान करने से घर की संचित लक्ष्मी चली जाती है और परिवार में दरिद्रता का वास होने लगता है। इसके साथ ही, इस दिन शनि देव से जुड़ी धातु यानी लोहे का दान भी सामान्य लोगों को नहीं करना चाहिए। लोहे के साथ-साथ इस दिन सरसों के तेल का दान करने से भी बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि सरसों के तेल का उपयोग पूजा-पाठ और दीप प्रज्वलन के लिए किया जा सकता है।

    अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने घरों में पड़े फटे-पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद को दे देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवती अमावस्या जैसी पवित्र तिथि पर फटे या अनुपयोगी जूते-चप्पल दान करने से कुंडली में शनि देव का अशुभ प्रभाव तेजी से बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में बड़ी बाधाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इस महासंयोग पर केवल साफ, उपयोगी और सात्विक वस्तुओं का ही दान करना श्रेयस्कर रहता है।