Tag: K. Annamalai

  • अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे

    अन्नामलाई का बड़ा दावा- अमित शाह ने दिल्ली आने को कहा था, मैंने ठुकराया ऑफर; मेकेदातु और भ्रष्टाचार पर भी बरसे


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई के एक बयान ने नई चर्चा छेड़ दी है। अन्नामलाई ने दावा किया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें दिल्ली बुलाकर पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी संभालने और लंबे समय तक राजधानी में रहने को कहा था। हालांकि उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और तमिलनाडु में रहकर लोगों के बीच काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने कहा कि उनके लिए राज्य में रहकर जनता के मुद्दों पर काम करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    अन्नामलाई के मुताबिक अमित शाह ने उनसे दिल्ली आकर जिम्मेदारी संभालने और करीब तीन साल से अधिक समय तक वहां रहने को कहा था। उन्होंने अमित शाह से स्पष्ट तौर पर कहा कि यह उनके लिए सही नहीं रहेगा। इसके बाद उन्होंने तमिलनाडु में ही रहकर सामाजिक और राजनीतिक बदलाव के लिए काम करने का फैसला किया। अन्नामलाई ने यह भी कहा कि वह बीजेपी के भीतर रहें या पार्टी से बाहर हों लेकिन जिन सिद्धांतों पर अमित शाह के साथ काम किया है उन्हें हमेशा अपने काम में आगे बढ़ाते रहेंगे।

    उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु बीजेपी में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। अन्नामलाई अब वी द लीडर आंदोलन से भी जुड़े हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य तमिलनाडु के लोगों के हितों के लिए काम करना और सामाजिक बदलाव की दिशा में अपनी भूमिका निभाना है।

    मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर भी अन्नामलाई ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर उन्होंने हमेशा आवाज उठाई है। उनका दावा है कि जब वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष थे तब भी तमिलनाडु बीजेपी ने मेकेदातु परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु के लोगों को पीने का पानी मिलना चाहिए लेकिन इसके लिए तमिलनाडु के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

    अन्नामलाई ने कहा कि जब किसी परियोजना का असर दो राज्यों पर पड़ता है तो दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह ईमानदार नेता हैं और गलत काम नहीं करते।

    तमिलनाडु सरकार पर निशाना साधते हुए अन्नामलाई ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार को कम से कम एक साल काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए और उसके बाद उसके प्रदर्शन का आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ठीक से काम नहीं करती है तो वह सबसे पहले सवाल उठाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से जल्दबाजी में हंगामा करने के बजाय सरकार को काम करने का मौका देने की अपील की।

    हालांकि अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार रोकने के दावों के बावजूद कुछ जगहों पर रिश्वतखोरी फिर शुरू हो गई है। उन्होंने दावा किया कि कुछ मंत्रियों के खिलाफ उनके पास कथित ऑडियो सबूत भी हैं। अन्नामलाई ने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि वह एक साल बाद मुद्दा उठाने से पहले ही सरकार को आगाह कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में भ्रष्टाचार खत्म करना चाहते हैं तो उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके मंत्री भी उसी नीति पर चलें।

    अन्नामलाई के बयान ने एक तरफ बीजेपी में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ा दी है तो दूसरी तरफ तमिलनाडु की राजनीति में उनके अगले कदम पर भी निगाहें टिक गई हैं। दिल्ली की जिम्मेदारी को ठुकराकर राज्य में सक्रिय रहने का उनका दावा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक रणनीति के लिए कितना अहम साबित होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

  • अन्नामलाई के अगले कदम पर सस्पेंस, जन्मदिन से पहले तमिलनाडु BJP में इस्तीफों का दौर

    अन्नामलाई के अगले कदम पर सस्पेंस, जन्मदिन से पहले तमिलनाडु BJP में इस्तीफों का दौर


    नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष K. Annamalai को लेकर हो रही है। उनके राजनीतिक भविष्य पर उठ रहे सवालों ने न केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अटकलें हैं कि अन्नामलाई जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं, जिसके संकेत उनके हालिया बयानों और समर्थकों की गतिविधियों से मिल रहे हैं।

    चर्चा इस बात की भी है कि अपने 42वें जन्मदिन के अवसर पर अन्नामलाई कोई महत्वपूर्ण घोषणा कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा उनके भविष्य की दिशा तय कर सकती है। हालांकि अभी तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी नए राजनीतिक दल या मंच की घोषणा नहीं की है।

    सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अन्नामलाई ने Amit Shah से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद आधिकारिक रूप से कोई जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे उनके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है। इससे पहले उनके इस्तीफे की खबरों ने भी जोर पकड़ा था।

    अन्नामलाई का राजनीतिक सफर काफी तेज रहा है। पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अन्नामलाई ने 2020 में पुलिस सेवा छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। इसके कुछ ही महीनों बाद उन्हें तमिलनाडु भाजपा की कमान सौंप दी गई। उनके नेतृत्व में पार्टी का जनाधार बढ़ा और राज्य में भाजपा की राजनीतिक सक्रियता को नई पहचान मिली।

    हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर Nainar Nagendran को जिम्मेदारी सौंप दी। इसके साथ ही भाजपा ने AIADMK के साथ अपने पुराने गठबंधन को भी पुनर्जीवित किया। इसके बाद से अन्नामलाई की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

    राजनीतिक सस्पेंस को और बढ़ाने का काम उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने किया है। कोयंबटूर और मदुरै समेत कई शहरों में लगे पोस्टरों में अन्नामलाई को एक स्वतंत्र राजनीतिक चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इनमें भाजपा के शीर्ष नेताओं की तस्वीरों का न होना भी चर्चाओं का विषय बना हुआ है।

    इस बीच पार्टी के अंदर भी बेचैनी दिखाई दे रही है। अन्नामलाई के भविष्य को लेकर फैल रही अटकलों के बाद कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चिंता जाहिर की है। खबरें हैं कि भाजपा के कुछ पदाधिकारियों ने इस्तीफा भी दिया है, जिससे संगठन में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

    फिलहाल सभी की निगाहें अन्नामलाई के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि वह भाजपा में बने रहते हैं तो यह पार्टी के लिए राहत की खबर होगी, लेकिन यदि वे अलग राजनीतिक राह चुनते हैं तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत हो सकती है।

  • परिसीमन पर विदेश में छिड़ी बड़ी बहस: थरूर बोले दक्षिण भारत को नुकसान, अन्नामलाई ने बताया जनसंख्या आधारित सिस्टम जरूरी

    परिसीमन पर विदेश में छिड़ी बड़ी बहस: थरूर बोले दक्षिण भारत को नुकसान, अन्नामलाई ने बताया जनसंख्या आधारित सिस्टम जरूरी



    नई दिल्ली। अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित एक चर्चा के दौरान परिसीमन और संसदीय सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद देखने को मिला। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चेतावनी दी कि अगर लोकसभा सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो दक्षिण भारत के राज्यों को राजनीतिक रूप से नुकसान महसूस हो सकता है और उनके अधिकारों पर असर पड़ सकता है।

    थरूर ने कहा कि उत्तर भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे वहां एक सांसद पर ज्यादा आबादी आ जाती है, जबकि दक्षिण भारत में स्थिति अलग है। उन्होंने आशंका जताई कि अगर इसी आधार पर सीटें बढ़ीं तो उत्तर भारत संसद में बहुमत के जरिए नीतियों को दक्षिण पर थोप सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बड़े राज्यों के पुनर्गठन पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के विभाजन पर।

    वहीं बीजेपी नेता के. अन्नामलाई ने थरूर की बातों का विरोध करते हुए कहा कि संसदीय प्रतिनिधित्व का आधार जनसंख्या ही होना चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में हर नागरिक की बराबर भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होता है, तो तमिलनाडु जैसी राज्यों की सीटें भी बढ़ती हैं, जो प्रक्रिया को संतुलित बनाती है।

    अन्नामलाई ने यह भी कहा कि लगातार यह चिंता करना कि किसी राज्य को फायदा या नुकसान होगा, समाधान नहीं है, बल्कि एक ऐसा मॉडल चाहिए जो सभी राज्यों के लिए संतुलित और व्यावहारिक हो।

    इस चर्चा में शशि थरूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए और इसे परिसीमन प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

    गौरतलब है कि परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण देने की बात शामिल थी, लेकिन इस पर राजनीतिक सहमति नहीं बन सकी। विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन किया, लेकिन परिसीमन के मौजूदा स्वरूप पर आपत्ति जताई।