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  • पाकिस्तान-तुर्की डिफेंस डील से बढ़ी हलचल, 65 KAAN फाइटर जेट खरीद की खबर

    पाकिस्तान-तुर्की डिफेंस डील से बढ़ी हलचल, 65 KAAN फाइटर जेट खरीद की खबर


    नई दिल्ली ।  पाकिस्तान और तुर्की के बीच कथित रूप से एक बड़ी रक्षा डील की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान तुर्की के स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट KAAN के करीब 65 विमानों की खरीद कर सकता है। यदि यह सौदा आधिकारिक रूप से तय होता है, तो यह पाकिस्तान की वायुसेना के इतिहास की सबसे बड़ी रक्षा डील्स में से एक मानी जाएगी।

    KAAN, जिसे पहले TF-X कार्यक्रम के नाम से जाना जाता था, तुर्की का अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर जेट है। इसे एयर सुपीरियोरिटी मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है और इसमें आधुनिक स्टेल्थ तकनीक, एडवांस एवियोनिक्स और शक्तिशाली इंजन जैसे फीचर्स शामिल हैं। यह विमान दुश्मन की रडार प्रणाली से बचकर लंबी दूरी तक मिशन को अंजाम देने में सक्षम माना जाता है।

    रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संभावित डील की कुल कीमत करीब 15 अरब डॉलर हो सकती है। हालांकि अभी तक पाकिस्तान या तुर्की की सरकार, रक्षा मंत्रालय या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। Turkish Aerospace Industries (TAI) और ISPR ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है।

    यदि यह सौदा आगे बढ़ता है, तो पाकिस्तान की एयरफोर्स क्षमता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक स्टेल्थ फाइटर जेट्स से पाकिस्तान की रणनीतिक शक्ति और क्षेत्रीय सैन्य संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे उसकी एयर डिफेंस और आक्रामक क्षमताएं दोनों मजबूत हो सकती हैं।

    तुर्की के लिए भी यह डील बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। KAAN प्रोजेक्ट को तुर्की अपने डिफेंस इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानता है, जिसका उद्देश्य विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। अगर पाकिस्तान इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनता है, तो इससे तकनीकी सहयोग और उत्पादन साझेदारी को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    पाकिस्तान पहले से ही तुर्की के साथ JF-17 फाइटर जेट जैसे कई रक्षा प्रोजेक्ट्स में सहयोग कर चुका है। ऐसे में KAAN डील दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकती है।

    हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की बड़ी डील्स आमतौर पर लंबी बातचीत, तकनीकी परीक्षण और वित्तीय मंजूरी के बाद ही अंतिम रूप लेती हैं। इसलिए जब तक आधिकारिक बयान नहीं आता, तब तक इस खबर को “संभावित” समझकर ही देखा जाना चाहिए।

    इस बीच, इस कथित डील ने वैश्विक रक्षा बाजार और खासकर एशिया के रणनीतिक समीकरणों में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण

    Turkey-Indonesia Defense Deal: तुर्की के ड्रोन पावर पर भरोसा, इंडोनेशिया खरीदेगा दुनिया का पहला UCAV; एशिया में बदल सकते हैं सैन्य समीकरण


    नई दिल्ली। इंडोनेशिया और तुर्की  के बीच बड़ा रक्षा समझौता हुआ है, जिसने एशिया की सुरक्षा राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। इस डील के तहत इंडोनेशिया तुर्की से अत्याधुनिक Kizilelma UCAV (मानवरहित लड़ाकू विमान) खरीदेगा। खास बात यह है कि इंडोनेशिया इस ड्रोन फाइटर जेट का पहला विदेशी ग्राहक बन गया है। रक्षा विशेषज्ञ इसे तुर्की की बढ़ती सैन्य ताकत और ASEAN क्षेत्र में उसके प्रभाव विस्तार की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्की की एयरोस्पेस कंपनी Baykar Technologies और इंडोनेशिया की रक्षा कंपनी Republicorp के बीच 12 Kizilelma UCAV की डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इस समझौते में भविष्य में 48 अतिरिक्त विमानों की खरीद का विकल्प भी शामिल है। तुर्की की योजना 2028 से इन विमानों की डिलीवरी शुरू करने की है।

    डील की सबसे अहम बात यह है कि इंडोनेशिया में इन UCAV के उत्पादन और रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इससे इंडोनेशिया की घरेलू रक्षा क्षमता मजबूत होगी, वहीं तुर्की को दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े रक्षा बाजार में गहरी पकड़ बनाने का मौका मिलेगा।

    इंडोनेशिया पहले ही Baykar के TB2 और Akinci ड्रोन खरीद चुका है। इसके अलावा उसने TB3 कैरियर बेस्ड ड्रोन सिस्टम की 60 यूनिट खरीदने की योजना भी बनाई है। माना जा रहा है कि इन्हें इंडोनेशिया अपने विमानवाहक पोत पर तैनात कर सकता है।

    इससे पहले भी इंडोनेशिया तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के KAAN स्टेल्थ फाइटर जेट खरीदने का समझौता कर चुका है। इसके साथ ही फ्रिगेट, मध्यम टैंक, एयर डिफेंस मिसाइल और बैलिस्टिक सिस्टम जैसे कई रक्षा सौदे दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे हैं।

    Kizilelma को तुर्की का पहला स्वदेशी जेट-संचालित मानवरहित लड़ाकू विमान माना जाता है। इस UCAV ने 2022 में पहली उड़ान भरी थी। इसे एयर-टू-एयर कॉम्बैट, एयर-टू-ग्राउंड अटैक, निगरानी, टोही, मिसाइल स्ट्राइक और दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करने जैसे मिशनों के लिए तैयार किया गया है।

    कंपनी का दावा है कि यह AI आधारित सिस्टम से लैस है और इसे विमानवाहक पोत से भी ऑपरेट किया जा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटा है, जबकि यह 1,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि तुर्की और इंडोनेशिया की यह बढ़ती सैन्य साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब तुर्की का झुकाव पाकिस्तान के पक्ष में माना जाता है, भारत भी अपने पड़ोस में हो रहे इन रक्षा समझौतों पर करीबी नजर बनाए हुए है।