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  • रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का बड़ा ऐलान, बेटे के लिए प्रचार से बनाई दूरी, प्रशासन पर लगाए पक्षपात के आरोप

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। एजेयूपी प्रमुख हुमायूं कबीर ने अपने बेटे और पार्टी उम्मीदवार गुलाम नबी आजाद के लिए चुनाव प्रचार नहीं करने का ऐलान किया है। उन्होंने प्रशासन पर पक्षपात और दुश्मनी का आरोप लगाते हुए कहा कि वह अब जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे।

    हुमायूं कबीर का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रेजीनगर उपचुनाव को लेकर पहले ही कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों से वह मिलते हैं या बातचीत करते हैं, उनके खिलाफ गिरफ्तारी या धमकी जैसी कार्रवाई की जा रही है। कबीर के मुताबिक उनकी पार्टी के करीब 25 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

    उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी को पारंपरिक तरीके से प्रचार करने की जरूरत नहीं है। वह सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाएंगे और मतदान के दिन जमीन पर मौजूद रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी का चुनाव चिह्न टेबल है और मतदाता इसे पहचानते हैं।

    हुमायूं कबीर ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का रवैया उनकी पार्टी के प्रति पक्षपातपूर्ण है। उनका कहना था कि सरकारी अधिकारियों को संविधान और कानून के मुताबिक काम करना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष में। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ऐसे किसी दबाव के सामने पीछे नहीं हटेगी।

    इस बीच हुमायूं कबीर के प्रचार से दूरी बनाने के बाद उनके बेटे गुलाम नबी आजाद ने भी प्रचार से दूर रहने का फैसला किया है। इससे रेजीनगर उपचुनाव में एजेयूपी की चुनावी रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी की ओर से अब मतदाताओं तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया और मतदान के दिन की सक्रियता पर जोर दिया जा रहा है।

    रेजीनगर उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी को लेकर भी हाल में बड़ा घटनाक्रम सामने आया था। उन्होंने पहले चुनाव से अपना नाम वापस लेने की घोषणा की थी। कुछ समय बाद उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और चुनाव मैदान में बने रहने का ऐलान किया। इसके बाद उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो गईं।

    रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के लिए भी महत्वपूर्ण रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट से जीत दर्ज की थी। उन्हें करीब 51 प्रतिशत वोट मिले थे और उन्होंने 58,876 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने नौदा विधानसभा सीट से भी चुनाव जीता था। बाद में उन्होंने रेजीनगर सीट छोड़ने का फैसला किया, जिसके कारण यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।

    अब 6 अक्टूबर को होने वाले रेजीनगर उपचुनाव से पहले हुमायूं कबीर का प्रचार से हटना चुनावी समीकरणों में एक नया घटनाक्रम है। उनके आरोपों पर प्रशासन और अन्य राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रियाएं भी आगे महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल एजेयूपी ने जनता के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है और चुनावी प्रक्रिया के अगले चरण पर नजर बनी हुई है।

  • भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    भारत से रिश्ते नए सिरे से मजबूत करना चाहता है बांग्लादेश, विदेश राज्य मंत्री ने द्विपक्षीय बातचीत को बताया जरूरी

    नई दिल्ली । बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि ढाका नई दिल्ली के साथ ऐसा रिश्ता बनाना चाहता है, जो आपसी हितों पर आधारित हो। उन्होंने दोनों देशों के बीच सीधे संवाद को संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी बताया।

    हुमायूं कबीर के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के बीच बातचीत किसी बहुपक्षीय मंच के जरिए नहीं, बल्कि सीधे द्विपक्षीय स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को नए रिश्ते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आपसी हितों को प्राथमिकता देनी होगी।

    कबीर ने शेख हसीना के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भारत और बांग्लादेश के संबंधों को असहज बताया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के साथ संबंधों को लेकर जरूरत से ज्यादा ध्यान देने वाली सोच से बाहर निकलना होगा। उनका कहना था कि नई दिल्ली के साथ रिश्तों को संतुलित तरीके से देखा जाना चाहिए और इसे बांग्लादेश के दूसरे देशों के साथ संबंधों के व्यापक हिस्से के रूप में समझना चाहिए।

    बांग्लादेश का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में BRICS समिट अपने अंतिम दौर में है। बांग्लादेश ने कहा था कि उसके प्रधानमंत्री तारिक रहमान BRICS समिट में शामिल नहीं होंगे, क्योंकि उन्हें बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर निमंत्रण नहीं दिया गया था। ढाका के अनुसार, उन्हें BIMSTEC के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया गया था। BIMSTEC बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है।

    इससे पहले अगस्त में भी प्रधानमंत्री तारिक रहमान का भारत दौरा टल गया था। BRICS समिट से पहले भारत ने दोनों देशों के बीच अलग द्विपक्षीय बैठक के लिए उन्हें 22 अगस्त को भारत आने का निमंत्रण दिया था। हालांकि यात्रा से पहले ही यह कार्यक्रम स्थगित हो गया।

    उस समय बांग्लादेश ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया था। दोनों देशों के बीच इस विषय को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। उस दौरान हुमायूं कबीर ने कहा था कि माहौल अनुकूल होने पर द्विपक्षीय दौरे होंगे और जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ने की एक वजह शेख हसीना की भारत में मौजूदगी और उनके सार्वजनिक राजनीतिक बयानों को भी माना गया। 5 अगस्त को शेख हसीना ने दिल्ली से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। यह कार्यक्रम अवामी लीग सरकार के सत्ता से हटने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था।

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि भारत में रहते हुए हसीना का सार्वजनिक राजनीतिक बयान देना दोनों देशों के संबंध सामान्य करने की कोशिशों को प्रभावित कर सकता है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने दावा किया था कि भारत को पहले इस संबंध में आगाह किया गया था।

    भारत ने हालांकि शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस रोकने से इनकार किया था। भारत का कहना था कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था की ओर से आयोजित किया गया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। अब बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री की ओर से सीधे संवाद और आपसी हितों पर आधारित नए रिश्ते की बात दोनों देशों के संबंधों को लेकर ढाका के रुख को सामने रखती है।