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  • काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    काबुल की सड़कों पर दिखे भारतीय पीले-काले ऑटो रिक्शा, वायरल वीडियो ने हजारों किलोमीटर दूर देसी गाड़ी की झलक दिखाई

    नई दिल्ली ।अफगानिस्तान की राजधानी काबुल की सड़कों पर भारतीय ऑटो रिक्शा दिखाई देने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। वीडियो में सड़क पर कई पीले-काले रंग के ऑटो रिक्शा एक के बाद एक गुजरते नजर आते हैं। भारत में रोजमर्रा के परिवहन का हिस्सा माने जाने वाले इन वाहनों को विदेश की सड़क पर देखकर वीडियो बनाने वाला भारतीय शख्स भी हैरान रह गया।

    वीडियो में दिखाई दे रहे ऑटो का रंग और डिजाइन भारतीय शहरों में आम तौर पर नजर आने वाले वाहनों जैसा है। खास बात यह है कि इनकी मौजूदगी काबुल की सड़क पर एक साथ दिखाई देती है। यही वजह है कि सामान्य परिवहन का यह दृश्य भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स के लिए खास बन गया और वीडियो पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।

    वीडियो में भारतीय व्यक्ति एक ऑटो चालक से बातचीत करता हुआ नजर आता है। वह चालक से पूछता है कि क्या यह ऑटो भारत में बना हुआ है। इसके जवाब में अफगान चालक हामी भरता है। बातचीत के दौरान भारतीय शख्स अपनी खुशी जाहिर करते हुए भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर प्रतिक्रिया देता है। यह छोटा संवाद वीडियो को और दिलचस्प बना देता है।

    भारत में ऑटो रिक्शा केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का हिस्सा है। महानगरों से लेकर छोटे शहरों और कस्बों तक कम दूरी की यात्राओं के लिए इनका इस्तेमाल व्यापक रूप से किया जाता है। बाजार, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और स्थानीय इलाकों के बीच आवागमन में ऑटो रिक्शा आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

    इन वाहनों की उपयोगिता का एक बड़ा कारण उनका छोटा आकार और अपेक्षाकृत कम लागत वाला परिवहन है। संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी ऑटो रिक्शा आसानी से चल सकते हैं। इसी वजह से तीन पहिया वाहन भारत के अलावा कई अन्य देशों में भी स्थानीय परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बने हैं।

    काबुल से सामने आए इस वीडियो ने लोगों की दिलचस्पी इस बात में बढ़ा दी कि भारतीय ऑटो वहां तक कैसे पहुंचे। हालांकि वीडियो में इन वाहनों के आयात, निर्माता, मॉडल, संख्या या अफगानिस्तान में इनके इस्तेमाल से जुड़ी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए केवल वायरल वीडियो के आधार पर इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    सोशल मीडिया पर वीडियो देखने वाले कई लोगों ने भारतीय ऑटो की विदेश में मौजूदगी को लेकर उत्साह जताया। कुछ यूजर्स ने इसे भारत की रोजमर्रा की चीजों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच से जोड़ा, जबकि कई लोगों ने पीले-काले ऑटो को देखकर अपनी परिचित सड़कों की याद साझा की।

    विदेश में किसी भारतीय वाहन को चलते देखना भारतीय दर्शकों के लिए इसलिए भी आकर्षक होता है क्योंकि ऑटो रिक्शा देश के सार्वजनिक परिवहन की एक पहचान बन चुका है। भारत में लाखों यात्रियों के लिए यह कम दूरी का सुविधाजनक और अपेक्षाकृत किफायती साधन है।

    काबुल की सड़क पर दिखाई दे रहे ऑटो रिक्शा का वीडियो किसी बड़े घटनाक्रम की तस्वीर नहीं दिखाता, लेकिन भारत से दूर परिचित वाहनों की मौजूदगी इसे सोशल मीडिया के लिए रोचक जरूर बना रही है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिखाई देने वाला यही दृश्य लोगों के बीच चर्चा और उत्सुकता का कारण बना हुआ है।

  • काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग

    काबुल में भीषण हमला, 500 से अधिक मौतें… पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक का आरोप, UN ने की जांच की मांग


    काबुल/इस्लामाबाद/जेनेवा।
    अफगानिस्तान और पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच काबुल में एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुए भीषण हमले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। अफगान अधिकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमले में 500 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 250 लोग घायल हुए हैं। यह हमला हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में हुआ सबसे घातक हवाई हमला माना जा रहा है। इस घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से तत्काल संघर्ष रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हमले पर गहरी चिंता जताते हुए इसकी स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और हिंसा को तुरंत रोका जाना चाहिए।


    2000 बेड वाले अस्पताल पर हमला

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2000 बेड वाले ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर सोमवार रात यह हमला हुआ। यह अफगानिस्तान के सबसे बड़े नशा मुक्ति केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भर्ती थे। हमले में अस्पताल की इमारत का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। बचाव दल लगातार शव और घायलों को निकाल रहे हैं।

    अफगान अधिकारियों का कहना है कि हमले के बाद अस्पताल की कई इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं और परिसर में भारी तबाही का मंजर देखने को मिला। राहत और बचाव दल लगातार मलबा हटाकर शव और घायलों को निकाल रहे हैं, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। तालिबान प्रशासन ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए कड़ी निंदा की है।


    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया भयावह मंजर

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई इमारतें ध्वस्त हो गईं और चारों ओर मलबा फैल गया। सैकड़ों लोग अपने लापता परिजनों की तलाश में अस्पताल के मलबे के बीच भटकते नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि धमाका इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाके में भी कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और देर रात तक बचाव अभियान जारी रहा।


    संयुक्त राष्ट्र की सख्त टिप्पणी

    संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र में हुआ यह विस्फोट बेहद दुखद है और इसकी तुरंत, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और जांच के नतीजे सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

    संयुक्त राष्ट्र ने यह भी याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत नागरिकों और नागरिक प्रतिष्ठानों को विशेष सुरक्षा प्राप्त होती है। युद्ध के नियमों के अनुसार किसी भी हमले में अंतर, अनुपात और सावधानी के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है, जबकि चिकित्सा संस्थानों को अतिरिक्त सुरक्षा दी जाती है।


    अफगानिस्तान का कड़ा रुख

    इस बीच अफगानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतिन काने ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि काबुल पर किए गए हमले का “मुंहतोड़ जवाब” दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

    अफगान सरकार ने इस घटना को अपनी संप्रभुता का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा है कि ऐसे हमले बिना जवाब के नहीं छोड़े जाएंगे। पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव और सीमा पार झड़पों के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोगों के विस्थापित होने की खबरें भी सामने आई हैं।


    पाकिस्तान ने आरोपों को बताया निराधार

    दूसरी ओर पाकिस्तान ने अस्पताल को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज कर दिया है। इस्लामाबाद का कहना है कि उसकी वायुसेना ने काबुल और नंगरहार में “आतंकी ढांचे और हथियार भंडार” को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की। पाकिस्तान के अधिकारियों के मुताबिक हमले में गोला-बारूद के डिपो और आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया गया और किसी अस्पताल या नागरिक केंद्र को लक्ष्य नहीं बनाया गया।


    बढ़ते संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय चिंता

    यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। हालिया झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच हालात “खुले संघर्ष” की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।

    ऐसी स्थिति में भारत समेत कई देशों ने भी इस हमले की निंदा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तनाव कम करने की अपील की है। साथ ही वर्तमान में बने ऐसे हालात पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों देशों के बीच यह टकराव जारी रहा तो पूरे दक्षिण और मध्य एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।