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  • MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी

    MP: शक्कर की कीमतों पर कैलाश विजयवर्गीय का अजीब तर्क… बोले- खूब महंगी होनी चाहिए चीनी


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक सीनियर मंत्री (Senior Minister) ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता को खारिज करते हुए एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने तर्क दिया कि चीनी ‘बहुत महंगी’ (Sugar ‘Very Expensive’) होनी चाहिए और जोर देकर कहा कि 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को चीनी बिल्कुल नहीं मिलनी चाहिए।

    राज्य के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) ने बुधवार को त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर विपक्षी दलों की आलोचना के जवाब में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं, और उन्होंने खुद भी ऐसी चीज़ें खाना पूरी तरह बंद कर दिया है।

    पत्रकारों से बात करते हुए बीजेपी नेता ने दावा किया कि चीनी की कीमतें लगातार कम हो रही हैं. उन्होंने कहा, “वैसे भी, आजकल 90 प्रतिशत लोग मिठाइयां पसंद नहीं करते हैं. मैं आपको बता दूं, मैं बिल्कुल भी मिठाई नहीं खाता हूं.”

    मंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मेरा कहना है कि (चीनी) बहुत महंगी होनी चाहिए. (चीनी) सिर्फ़ बच्चों के लिए सरकारी उचित मूल्य की दुकानों पर सस्ती दरों पर मिलनी चाहिए… बुजुर्गों को चीनी बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए.”

    उन्होंने कहा कि डॉक्टर, खासकर आयुर्वेदिक डॉक्टर, 40 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों के लिए चीनी का सेवन अच्छा नहीं मानते हैं. उन्होंने कहा, “अगर आप 40 साल से ज़्यादा उम्र के हैं, तो कभी-कभी गुड़ खा सकते हैं, लेकिन चीनी से पूरी तरह परहेज करें।


    ‘बीजेपी नेता गरीबों का मजाक उड़ा रहे हैं’

    राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधने के लिए विजयवर्गीय के बयानों का सहारा लिया. उन्होंने कहा कि महंगाई कम करने के वादे के साथ सत्ता में आए बीजेपी नेता चीनी पर अपने “बेतुके” बयानों से गरीबों और मध्यम वर्ग का अपमान और मज़ाक उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा, “देश बीजेपी नेताओं को देख रहा है. लोग आने वाले चुनावों में उनकी हंसी का मुंहतोड़ जवाब देंगे. तब देखेंगे कि उनकी मुस्कान बनी रहती है या वे आंसू बहाते हैं.”


    पेट्रोल में इथेनॉल और चीनी की कीमतें

    विपक्षी दल पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की मात्रा बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं. उनका आरोप है कि इस नीति से चीनी की कीमतें बढ़ रही हैं और लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है और इसके बजाय कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इंडस्ट्री को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में 1 रुपये प्रति किलोग्राम से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई।

    सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देने के बाद मिल-गेट कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद, चीनी की खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं. उपभोक्ता मामलों के विभाग (मूल्य निगरानी प्रभाग) द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत भाव 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि मंगलवार को यह 63.97 रुपये प्रति किलोग्राम था।

  • भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसे कई रंग देखने को मिले जो आम सियासी गतिविधियों से बिल्कुल अलग रहे। कहीं भगवा गमछा पहने रोबोट ने नेता की तरह एंट्री लेकर लोगों का मनोरंजन किया तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रामायण के जामवंत से कर दी। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक अलग ही रंग भर दिया।

    उज्जैन में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान रोबोट को मुख्य अतिथि की तरह पेश किया गया। रोबोट की एंट्री भी बेहद खास अंदाज में हुई। उसके आसपास हथियार लिए कमांडो नजर आए और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही उसे भगवा दुपट्टा पहनाया गया। तिलक लगाकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद रोबोट को नाश्ता और पानी भी ऑफर किया गया। उद्घाटन के इस पूरे कार्यक्रम में रोबोट आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए सबसे दिलचस्प पल तब आया जब भगवा दुपट्टा पहने रोबोट ने डांस करना शुरू कर दिया। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    रोबोट की इस अंदाज में मेहमाननवाजी को लेकर लोग तरह-तरह के मजाकिया कमेंट भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मशीन बनाने वालों ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका रोबोट एक दिन किसी नेता की तरह VIP स्वागत पाएगा और उद्घाटन के साथ डांस भी करेगा। अब तो मजाक में यह तक कहा जा रहा है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में फीता काटने से लेकर भाषण देने तक की जिम्मेदारी भी रोबोट को मिल सकती है।

    इधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह रामायण में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया था उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी क्षमता और सामर्थ्य का एहसास कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार मजबूत हो रहा है और भारत अपने सामर्थ्य के दम पर हर तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री की इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

    उधर बड़वानी जिले के खेतिया में आयोजित कानबाई उत्सव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर पहुंचकर उन्होंने गाना गाया। उन्होंने हमें तुमसे प्यार कितना गीत की पंक्तियां गाकर अपनी आवाज का हुनर दिखाया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपने साथ गाने की अपील की। अनुराधा पौडवाल के सामने उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें बताना है कि वे भी सुरीले हैं। मंत्री का यह अंदाज देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।

    इन घटनाओं के बीच एक और मामला चर्चा में है जिसमें एक फूड प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के बाद कंपनी के उत्पाद सही पाए गए और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि अब वह अपनी बात से पीछे हटता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में कंपनी के भोपाल स्थित मुख्यालय के बाहर लगी नेमप्लेट हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    कुल मिलाकर मंगलवार को मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाजी के साथ मनोरंजन और दिलचस्प घटनाओं का भी तड़का देखने को मिला। भगवा रोबोट की नेता जैसी एंट्री से लेकर मंत्री की गायकी और मुख्यमंत्री की जामवंत वाली तुलना तक कई घटनाएं दिनभर चर्चा में बनी रहीं।

  • दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन

    दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन


    इंदौर  मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उपचुनाव का महत्व भले ही आम चुनाव जितना न हो, लेकिन हार को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनावी हार हमेशा सीख देने वाली होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन हर चुनाव के बाद उसकी समीक्षा करता है और दतिया उपचुनाव के परिणामों का भी गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन इस हार पर गंभीरता से विचार करेगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है। जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, जबकि हार संगठन को आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए पार्टी इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं करेगी, बल्कि सभी पहलुओं पर विचार करते हुए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर सुधार की दिशा में काम करेगी।

    मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में आए चुनाव परिणाम को लेकर सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा कि वे स्वयं चुनाव प्रचार के लिए वहां गए थे। उन्होंने माना कि यह काफी हद तक व्यक्ति आधारित सीट थी और जिस नेता का उस क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव था, उनके चुनाव नहीं लड़ने का असर भी परिणामों पर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य चुनावों से अलग होती हैं।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनसंपर्क अभियान, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों और संगठन पहले से अधिक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरे।

    दतिया उपचुनाव के परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस इस जीत को जनता का भाजपा सरकार के खिलाफ संदेश बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार आधारित चुनाव मानते हुए आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि एक उपचुनाव का परिणाम उसके व्यापक जनाधार को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे मिलने वाले संकेतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अब जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस हार को केवल औपचारिक घटना मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसके कारणों की विस्तृत समीक्षा कर संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

  • मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वाले दंपती जेल भेजे गए, सोशल मीडिया पोस्ट से पुलिस तक पहुंची जानकारी


    इंदौर। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर बिना अनुमति प्रदर्शन करने पहुंचे दंपती के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। साथ ही टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान भी प्रदर्शनकारियों से मंत्री के घर तक चलने का आग्रह किया था।

    जानकारी के मुताबिक, बुधवार दोपहर प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी संगीता हाथ में संविधान की प्रति लेकर मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे थे। इससे पहले ही पुलिस को सोशल मीडिया के माध्यम से संभावित प्रदर्शन की सूचना मिल गई थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मंत्री के आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी।

    पुलिस पूछताछ में सामने आया कि दंपती ने कई लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने का आग्रह किया था, लेकिन निर्धारित समय पर कोई भी उनके समर्थन में नहीं पहुंचा। जांच में यह भी पता चला कि उन्होंने टंट्या भील चौराहे पर चल रहे छात्र धरना-प्रदर्शन में मौजूद लोगों से भी मंत्री के आवास तक चलने की अपील की थी, लेकिन वहां से भी किसी ने उनका साथ नहीं दिया।

    जब दंपती मंत्री के आवास के बाहर पहुंचे तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया और बिना अनुमति प्रदर्शन न करने की सलाह दी। इसके बावजूद वे सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय को उठाकर वाहन में बैठाया और उनकी पत्नी को भी हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया, जहां दोनों से पूछताछ की गई।

    परदेशीपुरा थाना प्रभारी आर.डी. कानवा ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने लोगों को प्रदर्शन के लिए बुलाया था। उन्होंने यह भी माना कि बिना अनुमति प्रदर्शन करना उनकी गलती थी। इसके बाद पुलिस ने शांति भंग की आशंका और बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 151 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

    इससे पहले भी दंपती ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हालिया बयानों से आहत होने की बात कहते हुए उनके आवास के बाहर प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। उस दौरान भी पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन वे प्रदर्शन पर अड़े रहे थे।

  • मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल

    मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं और हल्के फुल्के राजनीतिक प्रसंगों के कारण चर्चा में रहा। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर तक पहुंचने के लिए मंत्री दौड़ लगाते नजर आए तो कहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी को मुस्कुराते हुए हाईकमान बताया। वहीं एक महिला मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए मंच पर अनोखा प्रयोग कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    टीकमगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हेलिकॉप्टर से खजुराहो रवाना होना था। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे और उड़ान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार तेज कदमों से दौड़ते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और समय रहते उसमें सवार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे अपने अपने अंदाज में साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उनकी नजर चूड़ियों के स्टॉल पर पड़ी। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां खरीदीं और मुस्कुराते हुए कहा कि यह मेरी हाईकमान के लिए हैं। उनकी इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि वह सत्तर वर्ष के हो चुके हैं और अब सठिया गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जो भी कहते हैं सामने कहते हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने में विश्वास रखते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसके अलग अलग अर्थ निकाले जाने लगे।

    उधर मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद पर सफाई देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मंच पर तीन अलग अलग पेय पदार्थ रखे और उन्हें अलग प्रकार के ग्लासों में डालकर यह समझाने का प्रयास किया कि पात्र बदल जाने से किसी वस्तु की वास्तविक पहचान नहीं बदलती। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगा देने भर से उसकी वास्तविक पहचान या कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। उनका यह प्रयोग भी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति केवल गंभीर फैसलों और बहसों तक सीमित नहीं रहती बल्कि नेताओं के व्यवहार उनके अंदाज और छोटे छोटे प्रसंग भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दृश्य तेजी से वायरल होते हैं और आम लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे देते हैं।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।

  • इंदौर में हरियाली का महाअभियान इस बार लगेंगे 21 लाख पौधे मंत्री विजयवर्गीय बोले पेड़ बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी

    इंदौर में हरियाली का महाअभियान इस बार लगेंगे 21 लाख पौधे मंत्री विजयवर्गीय बोले पेड़ बचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी


    इंदौर । इंदौर में इस वर्ष बड़े स्तर पर हरियाली बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर में 21 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के साथ व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान में नगर निगम विभिन्न सरकारी विभाग सामाजिक संगठनों औद्योगिक संस्थानों और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही नहीं बल्कि उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी ताकि आने वाले वर्षों में इंदौर को देश का सबसे हराभरा शहर बनाया जा सके।

    बुधवार को एआईसीटीएसएल कार्यालय में आयोजित बैठक में अभियान की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों नगर निगम अधिकारियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इस बार ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें लगाए गए प्रत्येक पौधे की देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि नगर निगम के साथ सभी सरकारी विभागों और स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लिया जाएगा ताकि अभियान जन आंदोलन का रूप ले सके।

    उन्होंने जानकारी दी कि देवगुराड़िया क्षेत्र के पास स्थित एक टेकरी को हराभरा बनाने की विशेष योजना तैयार की गई है। यहां एक से दो लाख पौधे लगाए जाएंगे। कोशिश होगी कि पांच फीट या उससे अधिक ऊंचाई वाले पौधे लगाए जाएं ताकि उनके जीवित रहने की संभावना अधिक रहे और कम समय में हरियाली विकसित हो सके।

    मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और वृक्षारोपण एक दूसरे से जुड़े हुए विषय हैं। उन्होंने चिंता जताई कि पहले जहां एक सौ से डेढ़ सौ फीट की गहराई पर पानी मिल जाता था वहीं अब कई स्थानों पर सात सौ फीट तक बोरिंग करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार इसका प्रमुख कारण वर्षा जल का संरक्षण नहीं होना और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति लापरवाही है। उन्होंने कहा कि अब कृत्रिम जल पुनर्भरण की दिशा में गंभीर प्रयास करना समय की आवश्यकता है।

    उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि जिनके मकानों की छत लगभग पंद्रह सौ वर्गफीट है वे वर्षा जल को सीधे जमीन में पहुंचाने की व्यवस्था करें। उनके अनुसार पांच से सात हजार रुपये के खर्च से यह व्यवस्था आसानी से की जा सकती है जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ऐसी व्यवस्था करने वाले लोगों को नगर निगम की ओर से संपत्ति कर में रियायत देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। उनका कहना था कि यदि आने वाली पीढ़ियों के लिए इंदौर को सुरक्षित और रहने योग्य बनाना है तो जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना होगा।

    विजयवर्गीय ने बताया कि इस अभियान में औद्योगिक संस्थानों और स्वयंसेवी संगठनों से उनके सामाजिक दायित्व के तहत सहयोग मांगा गया है। उनसे बड़े आकार के पौधे उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है ताकि पौधारोपण के बेहतर परिणाम मिल सकें। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार वन विभाग ने अभियान में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है जबकि पिछले अभियान के दौरान अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया था।

    मुख्यमंत्री को लिखे गए कथित पत्र के संबंध में पूछे गए सवाल पर मंत्री ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा कि वह मामला अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है और उस अध्याय को बंद समझा जाए। फिलहाल उनका पूरा ध्यान इंदौर को अधिक हराभरा बनाने और जल संरक्षण के व्यापक अभियान पर केंद्रित है।

  • एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में

    एमपी की राजनीति में बयानों का बवाल सीएम की अतिशयोक्ति भरी तारीफ दिग्विजय को भाजपा का ऑफर और विजयवर्गीय का मासूम जवाब चर्चा में


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानों और राजनीतिक संकेतों का दौर लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मंच से हुई लंबी प्रशंसा दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला न्योता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की कथित चिट्ठी पर दिया गया जवाब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इन घटनाओं ने सत्ता और विपक्ष दोनों के बीच सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।

    राजगढ़ जिले के सारंगपुर में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन कार्यक्रम के दौरान उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई जब मंत्री गौतम टेटवाल ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की लगातार प्रशंसा शुरू कर दी। उन्होंने मुख्यमंत्री को जनप्रिय लोकप्रिय बहुमुखी प्रतिभा के धनी इतिहासकार ज्योतिषाचार्य लेखक साहित्यकार खगोल और भूगोल का जानकार पहलवानों का पहलवान और बाबा महाकाल का लाल जैसी कई उपमाओं से संबोधित किया। इतना ही नहीं उन्होंने प्रदेश में जल संरक्षण और सिंचाई के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री को भागीरथ तक बता दिया। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री मुस्कुराते रहे लेकिन जब तारीफ का सिलसिला लंबा होता गया तो उन्होंने मंत्री को बीच में ही रोकते हुए आगे बढ़ने का संकेत दिया। कार्यक्रम के बाद यह प्रसंग राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।

    उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को लेकर भी एक नया राजनीतिक बयान सामने आया। भाजपा विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने मीडिया से बातचीत में दिग्विजय सिंह को भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण दे दिया। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह धीरे से भाजपा में आ जाएं और जोर का झटका धीरे से दें। विधायक ने यह भी कहा कि जब महाराज भाजपा में आ चुके हैं तो अब राजा भी आ जाएं जिससे दोनों की जोड़ी बन जाएगी। उन्होंने दिग्विजय सिंह को अनुभवी नेता बताते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को उनसे सीख लेने की सलाह भी दी। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    इधर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी एक अलग वजह से सुर्खियों में बने हुए हैं। मुख्यमंत्री को लिखी गई कथित चिट्ठी को लेकर जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें पता ही नहीं कि ऐसी सूचना कहां से आई। इससे पहले चर्चा थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पिछले कुछ समय से उपेक्षा और सहयोग नहीं मिलने जैसी बातें उठाई थीं। हालांकि उनके ताजा बयान के बाद इस पूरे मामले पर और अटकलें लगने लगी हैं।

    इसी बीच मंत्रालय के भीतर एक वरिष्ठ महिला अधिकारी को लेकर भी प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं जारी हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सख्त कार्यशैली के कारण कुछ वरिष्ठ अधिकारी उन्हें हटाने की कोशिश करते रहे लेकिन अब तक सफल नहीं हो पाए। चर्चा यह भी है कि विभाग के शीर्ष अधिकारी का उन पर पूरा भरोसा बना हुआ है जिसके कारण वे अपने पद पर मजबूती से काम कर रही हैं।

    प्रदेश की राजनीति में बयानों और घटनाओं का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री की मंच पर हुई प्रशंसा भाजपा का राजनीतिक न्योता और कथित चिट्ठी पर उठे सवाल सियासी गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं।

  • इंदौर में विजयवर्गीय का मुस्लिम समुदाय पर तंज: विकास चाहिए तो भेदभाव की राजनीति छोड़नी होगी

    इंदौर में विजयवर्गीय का मुस्लिम समुदाय पर तंज: विकास चाहिए तो भेदभाव की राजनीति छोड़नी होगी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में आयोजित एक विकास कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय ने विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान कहा कि कुछ मुस्लिम भाई उन्हें और उनकी विचारधारा से जुड़े लोगों को काफिर कहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे काफिर हैं तो उनकी बनाई सड़कों पर नहीं चलना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए।

    विजयवर्गीय ने कहा कि जिस क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं वहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। उन्होंने मंच से कहा कि कई मुस्लिम भाई हमें काफिर कहते हैं। यदि हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो। यदि आपके घर में लाड़ली बहना या लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा पहुंच रहा है तो उसे भी मत लो। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार और पार्टी की नीति किसी प्रकार के भेदभाव की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत पर काम किया है। सरकार ने कभी यह नहीं देखा कि कौन किस धर्म या समुदाय से जुड़ा है। विकास कार्यों का लाभ सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

    मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की सेवा करना उनका दायित्व है। जनता उन्हें वोट दे या न दे लेकिन विकास कार्य रुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि यदि जनता राजनीतिक समर्थन देती है तो और अधिक उत्साह के साथ काम किया जाएगा लेकिन समर्थन न मिलने की स्थिति में भी विकास की गति जारी रहेगी। उनका कहना था कि जनता की सेवा करना राजनीति से ऊपर की जिम्मेदारी है।

    यह बयान उस समय आया जब विजयवर्गीय दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन क्षेत्रीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने वार्ड क्रमांक-1 और वार्ड क्रमांक-5 में लगभग 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत से होने वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

    अपने संबोधन में विजयवर्गीय ने भाजपा कार्यकर्ता होने को अपना पहला सौभाग्य और जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने को दूसरा सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए।

    विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक दलों के बीच सामाजिक समरसता और विकास के मुद्दों पर लगातार बहस जारी है। उनके बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने अपने पूरे भाषण में विकास कार्यों और जनता की सेवा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई तथा यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार की योजनाएं सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।

  • छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते

    छावनी सड़क चौड़ीकरण विवाद में नया मोड़: विरोधी पोस्टरों के बाद अब आभार संदेशों से सजे इलाके के रास्ते


    मध्‍य प्रदेश । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी विवाद के बीच अब एक नया घटनाक्रम सामने आया है। कुछ दिन पहले तक जहां क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में लगाए गए पोस्टर चर्चा का केंद्र बने हुए थे, वहीं अब उन्हीं इलाकों में मुख्यमंत्री, मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इस बदलाव ने क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय जनभावनाओं को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    नगर निगम द्वारा मास्टर प्लान के तहत छावनी और जिंसी क्षेत्र की सड़कों को 60 फीट चौड़ा करने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इस दौरान कई मकानों और दुकानों के हिस्सों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित रहवासियों और व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए आरोप लगाए थे कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया तथा कुछ स्थानों पर निर्धारित सीमा से अधिक हिस्से तोड़े गए। इन आरोपों के चलते क्षेत्र में विरोध का माहौल बन गया था।

    कार्रवाई के बाद कई मकानों और दुकानों के बाहर विरोध स्वरूप पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में प्रशासनिक कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए संदेश लिखे गए थे। कुछ पोस्टरों में भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई अन्य क्षेत्रों में होने की आशंका जताते हुए चेतावनी जैसे संदेश भी दिए गए थे। इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा में रही थीं।

    अब उसी क्षेत्र में नए पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक गोलू शुक्ला और भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के प्रति आभार व्यक्त किया गया है। पोस्टरों में मधुमिलन चौराहे से छावनी तक सड़क को 60 फीट चौड़ा किए जाने को व्यापारियों और रहवासियों के हित में बताया गया है। जानकारी के अनुसार ये पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता पलक जैन की ओर से लगाए गए हैं।

    सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई के दौरान एक हादसा भी चर्चा में रहा था। 22 मई को निगम की कार्रवाई के बीच बिजली का एक पोल गिर गया था, जिससे एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार घायल डॉक्टर की सर्जरी भी करनी पड़ी थी। इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को लेकर भी सवाल उठे थे।

    इसके अलावा कुछ रहवासियों ने आरोप लगाया था कि कार्रवाई से पहले मकानों पर लगाए गए निशानों में बदलाव किया गया, जिसके कारण कुछ भवनों को अपेक्षा से अधिक नुकसान पहुंचा। वहीं निगम कर्मचारियों पर बदसलूकी और दबाव बनाने जैसे आरोप भी लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अलग-अलग स्तर पर स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई थी।

    सड़क चौड़ीकरण के विरोध में जनहित पार्टी ने क्षेत्र में ‘न्याय रैली’ भी निकाली थी। पार्टी ने आरोप लगाया था कि प्रभावित लोगों को पर्याप्त समय और उचित राहत नहीं दी गई। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए थे तथा राहत और मुआवजे की मांग की थी।

    फिलहाल छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। नए पोस्टरों के सामने आने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है और स्थानीय स्तर पर इसकी राजनीतिक एवं सामाजिक गूंज लगातार बनी हुई है।