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  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान

    धरना प्रदर्शन और सियासी तकरार भोपाल में कांग्रेस भाजपा आमने-सामने कई घटनाओं ने खींचा ध्यान


    मध्य प्रदेश। दिल्ली में छात्रों के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं की हिरासत के बाद मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। विधानसभा परिसर से लेकर राजभवन तक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कई घटनाएं चर्चा का केंद्र बनीं, जिनमें एनएसयूआई कार्यकर्ताओं की नारेबाजी में हुई चूक, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का कांग्रेस विधायक के साथ हल्का-फुल्का व्यवहार और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की गिरफ्तारी जैसी तस्वीरें सामने आईं।

    छात्र संगठन एनएसयूआई ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी करते समय कुछ कार्यकर्ताओं के मुंह से गलती से “नरेंद्र मोदी जिंदाबाद” के नारे निकल गए। हालांकि तुरंत गलती का एहसास होने पर नारे बदल दिए गए, लेकिन घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया।

    उधर मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायकों ने दिल्ली की घटना के विरोध में मुख्यमंत्री कक्ष के बाहर धरना दिया। इसी दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय धरना स्थल पर पहुंचे और कांग्रेस विधायकों से बातचीत की। चर्चा के बाद लौटते समय उन्होंने कांग्रेस विधायक विजय चौरे के गाल पर हल्के अंदाज में थपथपाया। इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं और यह दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    राजभवन के सामने भी कांग्रेस ने प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठे। पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया और बाद में उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वाहन में बैठाया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता लगातार केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते रहे।

    धरने से पहले जारी एक वीडियो संदेश में जीतू पटवारी से भी जुबान फिसल गई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में धरने पर बैठे हैं, जबकि प्रदर्शन प्रधानमंत्री आवास के बाहर किया गया था। इस बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर टिप्पणियां देखने को मिलीं।

    विधानसभा के भीतर कांग्रेस ने छात्रों, रोजगार, आरक्षण और किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस विधायकों ने नाटक के माध्यम से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और एबीवीपी पर निशाना साधा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और किसानों के मुद्दों की अनदेखी कर रही है।

    भाजपा ने कांग्रेस के प्रदर्शन को राजनीतिक नौटंकी बताया। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस जनता के मुद्दों के बजाय केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रही है। भाजपा विधायक हरदीप सिंह डंग ने कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को फिल्मों में अभिनय करना चाहिए।

    इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी सामने आया। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पहले दिन सदन में देरी से पहुंचे। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि देर रात तक फुटबॉल विश्व कप फाइनल देखने के कारण सुबह समय पर नहीं उठ सके। यह प्रसंग भी सत्ता और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना रहा।

  • भाजपा में टिकट बदलने की परंपरा नहीं दतिया विवाद पर बोले कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा करेंगे संगठन का सम्मान

    भाजपा में टिकट बदलने की परंपरा नहीं दतिया विवाद पर बोले कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा करेंगे संगठन का सम्मान


    मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को लेकर सामने आए विवाद के बीच प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी में टिकट घोषित होने के बाद उसे बदलने की कोई परंपरा नहीं रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि संगठन सभी कार्यकर्ताओं से संवाद कर मतभेद समाप्त करेगा और भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी भारी मतों से चुनाव जीतेंगे।

    इंदौर में मीडिया से चर्चा करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक संगठन है जहां प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी बात रखने का अधिकार है। किसी भी चुनाव में टिकट वितरण के बाद कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी स्वाभाविक होती है लेकिन संगठन का निर्णय सभी के लिए सर्वोपरि होता है। उन्होंने कहा कि पार्टी हर फैसला लंबी चर्चा विचार विमर्श और तय प्रक्रिया के बाद करती है इसलिए घोषित प्रत्याशी को बदलने का कोई सवाल नहीं उठता।

    पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की नाराजगी पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा भाजपा के वरिष्ठ और समर्पित नेता हैं। उन्होंने हमेशा संगठन की मर्यादा का पालन किया है और इस बार भी पार्टी के निर्णय का सम्मान करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं नरोत्तम मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन बातचीत नहीं हो सकी। इसके बावजूद उन्हें पूरा विश्वास है कि संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद के जरिए सभी मतभेद समाप्त हो जाएंगे।

    उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर हजारों कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं लेकिन टिकट केवल एक व्यक्ति को मिलता है। ऐसे में सभी को अवसर मिलना संभव नहीं होता। संगठन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही उम्मीदवार तय करता है और कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहें। विजयवर्गीय ने कहा कि आशुतोष तिवारी लंबे समय तक संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और वे मजबूत संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले कार्यकर्ता हैं इसलिए उन्हें चुनाव में व्यापक समर्थन मिलेगा।

    इस दौरान विजयवर्गीय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई से जुड़े पुराने ड्रग्स मामले पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने घर की परिस्थितियों पर भी नजर डालनी चाहिए। उनके अनुसार जब स्वयं परिवार के सदस्य अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार कर चुके हैं तब इस विषय पर अधिक टिप्पणी की आवश्यकता नहीं है।

    उन्होंने जीतू पटवारी की प्रस्तावित साइकिल यात्रा को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि केवल यात्राएं निकालने से राजनीतिक माहौल नहीं बदलता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इससे पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं की यात्राओं का भी अपेक्षित राजनीतिक असर दिखाई नहीं दिया था इसलिए केवल यात्रा के भरोसे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा के भीतर उठे असंतोष के बीच कैलाश विजयवर्गीय का यह बयान संगठन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि पार्टी अपने घोषित उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़ी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संगठन नाराज कार्यकर्ताओं को किस तरह साथ लेकर चुनावी मैदान में उतरता है और उपचुनाव का परिणाम किस दिशा में जाता है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश की सियासत में बयान से बवाल, RSS बनाम प्रशासनिक तटस्थता पर गरमाई बहस, कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने

    मध्य प्रदेश: में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। बयान में उन्होंने प्रशासनिक तंत्र में अधिकारियों के स्वयं को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख किया था, जिसके बाद प्रदेश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इस बयान को गंभीर संवैधानिक मुद्दा बताते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता और तटस्थता पर सवाल खड़े किए हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि प्रशासनिक ढांचे में किसी संगठन विशेष से जुड़ाव की प्रवृत्ति बढ़ रही है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने इसे भारतीय प्रशासनिक सेवा की निष्पक्षता से जोड़ते हुए कहा कि संविधान हर अधिकारी से अपेक्षा करता है कि वह किसी वैचारिक या राजनीतिक संगठन के बजाय केवल संवैधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठावान रहे।

    कांग्रेस की ओर से यह भी मांग उठाई गई कि इस बयान को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा जाए और संवैधानिक संस्थाओं को इसकी जांच करनी चाहिए कि प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार का वैचारिक प्रभाव तो नहीं बढ़ रहा है। इस मुद्दे ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है।

    वहीं, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि प्रशासनिक तंत्र में वैचारिक प्रभाव की चर्चा पहले से होती रही है। उन्होंने इसे सरकार और संगठन के लंबे समय से जुड़े रहने का परिणाम बताया और आरोप लगाया कि कई बार अवसरवादी तत्व व्यवस्था में जगह बना लेते हैं, जिससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित होता है।

    बीजेपी की ओर से इस विवाद पर अलग रुख अपनाया गया है। पार्टी नेता डॉ. हितेश बाजपेयी ने कहा कि मंत्री के बयान को सतही तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक एक ही वैचारिक ढांचे के साथ सरकार चलने पर कुछ लोग अवसरवादी तरीके से व्यवस्था में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे संगठनात्मक चुनौतियां उत्पन्न होती हैं। बीजेपी ने स्पष्ट किया कि बयान का आशय किसी संस्था पर सीधा आरोप नहीं था, बल्कि प्रशासनिक और वैचारिक संतुलन की आवश्यकता की ओर संकेत था।

    इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक तरफ प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बयान की व्याख्या को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे संवैधानिक विमर्श के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • सांवेर के पोस्टरों से गायब दिखे कैलाश विजयवर्गीय, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले इंदौर की राजनीति में तेज हुई अटकलें

    सांवेर के पोस्टरों से गायब दिखे कैलाश विजयवर्गीय, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से पहले इंदौर की राजनीति में तेज हुई अटकलें

    मध्य प्रदेश: की राजनीति में पोस्टर और होर्डिंग्स लंबे समय से राजनीतिक संदेशों और शक्ति प्रदर्शन का माध्यम रहे हैं। इंदौर जिले के सांवेर विधानसभा क्षेत्र में एक बड़े सरकारी कार्यक्रम से पहले सामने आए पोस्टरों ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। कार्यक्रम के प्रचार के लिए लगाए गए स्वागत पोस्टरों और होर्डिंग्स में कई प्रमुख नेताओं की तस्वीरें शामिल हैं, लेकिन प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और इंदौर की राजनीति के प्रभावशाली चेहरे कैलाश विजयवर्गीय की तस्वीर दिखाई नहीं देने से विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जाने लगी हैं।

    सांवेर क्षेत्र में आयोजित होने वाले भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के शामिल होने की संभावना ने इसे और अधिक चर्चा में ला दिया है। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में बड़े स्तर पर प्रचार सामग्री लगाई गई है, जिनमें शीर्ष नेतृत्व और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

    राजनीतिक हलकों में चर्चा का मुख्य कारण यह है कि इंदौर और मालवा क्षेत्र की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय का प्रभाव लंबे समय से स्थापित माना जाता है। संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए किसी बड़े आयोजन के पोस्टरों में उनकी अनुपस्थिति को सामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यही कारण है कि स्थानीय राजनीतिक विश्लेषक और कार्यकर्ता इस घटनाक्रम के अलग-अलग अर्थ निकालने में जुटे हुए हैं।

    यह कार्यक्रम कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट के विधानसभा क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। वर्ष 2020 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भाजपा में शामिल हुए तुलसीराम सिलावट ने सांवेर क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ को लगातार मजबूत किया है। क्षेत्र में विकास कार्यों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र में आयोजित इस बड़े कार्यक्रम के पोस्टरों को लेकर उठी चर्चा राजनीतिक महत्व प्राप्त कर चुकी है।

    भाजपा के भीतर चल रहे संभावित समीकरणों और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक पर्यवेक्षक विभिन्न दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कई लोग इसे आयोजन संबंधी तकनीकी या प्रचार सामग्री तैयार करने में हुई सामान्य चूक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देख रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि कार्यक्रम स्थल पर मंच व्यवस्था में कैलाश विजयवर्गीय के नाम की सीट आरक्षित होने की जानकारी सामने आई है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वे कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं। ऐसे में पोस्टरों से तस्वीर का गायब होना और मंच पर उनके लिए स्थान निर्धारित होना, दोनों पहलुओं ने चर्चा को और अधिक रोचक बना दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों में पोस्टर और होर्डिंग्स केवल प्रचार का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे राजनीतिक संदेश और संगठनात्मक प्राथमिकताओं को भी प्रतिबिंबित करते हैं। यही कारण है कि नेताओं की मौजूदगी या अनुपस्थिति को लेकर अक्सर राजनीतिक अर्थ निकाले जाते हैं।

    फिलहाल सांवेर में पोस्टर पॉलिटिक्स को लेकर शुरू हुई यह चर्चा इंदौर की राजनीति में नई बहस का विषय बन गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यक्रम के दौरान नेताओं की मौजूदगी और पार्टी की ओर से आने वाली संभावित प्रतिक्रिया इस पूरे घटनाक्रम को किस दिशा में ले जाती है।