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  • अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गए हैं। अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या भाजपा उन्हें फिर सक्रिय भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल परिवार के जरिए ही आगे बढ़ेगी।

    टिकट कटा, लेकिन क्षेत्र में बनी रही सक्रियता
    महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के इस फैसले को कानूनी विवाद से दूरी बनाने की रणनीति माना गया। हालांकि, करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में बृजभूषण का जनाधार और संगठनात्मक प्रभाव कायम है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग नहीं किया। देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में उनके लगातार कार्यक्रम होते रहे और समर्थकों से संपर्क बना रहा। अदालत से राहत मिलने के बाद उनके आवास पर जुटी समर्थकों की भीड़ को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    समर्थकों ने फैसले को बताया न्याय की जीत
    कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल उनके पिता की नहीं, बल्कि न्याय की जीत है। उन्होंने आरोप लगाने वालों और विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अदालत का फैसला सच्चाई की पुष्टि करता है।

    ‘एक बार फिर संसद जाऊंगा’ बयान फिर चर्चा में

    बृजभूषण शरण सिंह पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि वे एक बार फिर संसद पहुंचेंगे। अदालत से बरी होने के बाद उनके इस बयान को नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधाएं समाप्त होने के बाद उनके लिए सक्रिय राजनीति के रास्ते फिर खुल सकते हैं।

    भाजपा के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती
    हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अदालत से राहत मिलने के बावजूद भाजपा का फैसला केवल कानूनी आधार पर नहीं होगा। पार्टी संगठन, सामाजिक संदेश, राष्ट्रीय छवि और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही आगे की रणनीति तय करेगी।

    फिलहाल दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है
    2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
    यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी भी संभव मानी जा रही है।
    हालांकि इन संभावनाओं पर भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

    मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क बना बड़ी ताकत
    गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में बृजभूषण शरण सिंह का मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी बरकरार है। उनके बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि प्रतीक भूषण सिंह गोंडा जिले से विधायक हैं। ऐसे में अदालत के फैसले के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि
    जनवरी 2023 में महिला पहलवानों की शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया था। लगभग तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 2 जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है।