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  • शारदीय नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, घटस्थापना से कन्या पूजन तक नोट करें पूजा सामग्री की पूरी सूची

    शारदीय नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, घटस्थापना से कन्या पूजन तक नोट करें पूजा सामग्री की पूरी सूची

    नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ पूजा शुरू होती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा की नियमित पूजा, भोग, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पूजा के समय किसी सामग्री की कमी न हो, इसके लिए घटस्थापना से लेकर हवन और कन्या पूजन तक की तैयारियां पहले से करना उपयोगी रहता है।

    नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए जौ उगाने के लिए मिट्टी, जौ के बीज और मिट्टी, पीतल या तांबे का कलश रखा जाता है। कलश के लिए आम के पत्ते, ऊपर रखने के लिए छोटी कटोरी और उसमें रखने के लिए अनाज की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी, मौली या कलावा, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी और अक्षत यानी साबुत चावल की जरूरत होती है। कलश स्थापना के लिए साफ पानी और गंगाजल भी रखा जाता है। पूजा में एक सिक्का और सुपारी का इस्तेमाल भी किया जाता है। श्रद्धालु अपनी पूजा की परंपरा के अनुसार इन वस्तुओं को एक जगह एकत्र कर सकते हैं, ताकि अनुष्ठान के समय सभी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध रहें।

    मां दुर्गा की पूजा के लिए देवी की मूर्ति या तस्वीर और लकड़ी की चौकी की व्यवस्था करनी चाहिए। चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा रखा जाता है। पूजा में रोली, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, ताजे फूल और फूलों की माला का इस्तेमाल होता है। मां दुर्गा को अर्पित करने के लिए फल, मिठाई और नैवेद्य यानी भोग भी तैयार रखा जा सकता है। इसके साथ देवी के लिए सोलह श्रृंगार की सामग्री, कमलगट्टा, पंचमेवा, पान, सुपारी, लौंग और छोटी इलायची की जरूरत पड़ सकती है। बताशे या अन्य प्रसाद, घी या तेल का दीपक, शुद्ध घी, धूप, अगरबत्ती और कपूर भी पूजा सामग्री में शामिल हैं। इसके अलावा नारियल, जायफल, जावित्री और दक्षिणा रखने की भी परंपरा है। इन वस्तुओं को पूजा से पहले व्यवस्थित करने से नियमित आराधना में सुविधा रहती है।

    नवरात्र के दौरान कई घरों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके लिए सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर रखने वाला ज्योति पात्र, रुई की बत्ती या कलावे से बनी बत्ती और घी अथवा तेल की व्यवस्था करनी चाहिए। अखंड ज्योति जलाने वाले श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक उसकी देखभाल की व्यवस्था भी पहले से करें। नवरात्र के समापन से जुड़े अनुष्ठानों में हवन का भी महत्व होता है। हवन के लिए हवन कुंड, हवन सामग्री, कपूर और आम की लकड़ी रखी जाती है। नवग्रह हवन करने वाले श्रद्धालुओं को इसके लिए निर्धारित लकड़ी और अन्य सामग्री भी जुटानी चाहिए। हवन की सामग्री और विधि परिवार की परंपरा तथा पूजा कराने वाले पुरोहित के निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    नवरात्र के दौरान कन्या पूजन भी कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें कन्याओं की पूजा करके उन्हें भोजन और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कन्या पूजन के लिए रोली या कुमकुम, अक्षत, फूल और मौली पहले से रखनी चाहिए। इसके साथ फल, मिठाई, हलवा-पूरी या अन्य प्रसाद और दक्षिणा की व्यवस्था की जाती है। कन्या पूजन की तैयारी करते समय भोजन और प्रसाद की मात्रा का ध्यान रखना उपयोगी रहता है। इस तरह घटस्थापना, देवी पूजन, अखंड ज्योति, हवन और कन्या पूजन की सामग्री एक साथ जुटाकर नवरात्र की तैयारियां व्यवस्थित की जा सकती हैं। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार सामग्री में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के साथ घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, मां दुर्गा की कृपा से दूर होगी आर्थिक तंगी

    चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के साथ घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, मां दुर्गा की कृपा से दूर होगी आर्थिक तंगी


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र महीने का विशेष महत्व माना जाता है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं जिनमें चैत्र नवरात्रि का स्थान सबसे खास है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से होने जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्तगण मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और उपवास रखकर देवी की आराधना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा भूमिलोक पर आती हैं और नौ दिनों तक भक्तों के बीच निवास करती हैं। यही कारण है कि इस अवधि में देवी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा पाठ भजन कीर्तन और मंदिरों में भव्य सजावट की जाती है।

    ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ कुछ शुभ वस्तुएं घर लाना बेहद फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन पवित्र चीजों को घर में लाने और पूजा करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है सोई हुई किस्मत जागती है और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

    सबसे पहले केला का पेड़ लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आपके घर में पहले से केला का पेड़ नहीं है तो नवरात्रि के पहले दिन इसे लगाना अच्छा माना जाता है। हिंदू धर्म में केला का पेड़ पूजनीय माना जाता है और इसकी पूजा करने से घर में समृद्धि सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    इसके साथ ही लाल गुड़हल का फूल भी विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह फूल देवी मां को अत्यंत प्रिय है और इसे चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    नवरात्रि के अवसर पर हरसिंगार का पौधा घर में लगाना भी शुभ माना जाता है। यह पौधा सुख शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसे घर में लगाने से परिवार में समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    इसी प्रकार शंखपुष्पी का फूल भी देवी मां को अर्पित करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन देवी को शंखपुष्पी का फूल चढ़ाने से भक्तों की हर कामना पूर्ण होती है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    इसके अलावा तुलसी का पौधा भी बेहद पवित्र माना जाता है। अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं है तो नवरात्रि के शुभ अवसर पर इसे लगाना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। तुलसी की प्रतिदिन पूजा और जल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और देवी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। इस प्रकार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इन पवित्र चीजों को घर में लाकर विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि शांति और खुशहाली का वास होता है तथा मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।