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  • महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, ‘बेटियों के प्रति सोच’ पर उठाए सवाल

    महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: कंगना रनौत का विपक्ष पर हमला, ‘बेटियों के प्रति सोच’ पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर संसद में बहस के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने विपक्ष पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि उनके रुख से “बेटियों के प्रति उनकी सोच” उजागर हो रही है।

    कंगना रनौत ने कहा कि विपक्ष परिसीमन को लेकर अनावश्यक बहाने बना रहा है, जबकि इस मुद्दे पर स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश देख रहा है कि विपक्ष की मंशा क्या है और वह महिला आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है।

    परिसीमन पर ‘भ्रम फैलाने’ का आरोप

    भाजपा के एक अन्य सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों को अधिक सीटों का लाभ मिल सकता है।
    सूर्या ने याद दिलाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुआ था और तब सभी दल इस बात पर सहमत थे कि इसे जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। उनके मुताबिक अब विपक्ष इस मुद्दे पर यू-टर्न ले रहा है।

    सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

    महिला आरक्षण में संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से जुड़े प्रस्तावों पर एनडीए और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।
    जहां सत्तापक्ष का कहना है कि महिलाओं को आरक्षण के लिए लंबे समय से इंतजार करना पड़ा है, वहीं विपक्ष का आरोप है कि सरकार की कार्यप्रणाली देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकती है।

    संसद में पेश हुए अहम विधेयक

    लोकसभा में चर्चा के लिए

    ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026’
    ‘परिसीमन विधेयक, 2026’
    ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’

    पेश किए गए हैं। प्रस्ताव के मुताबिक, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की योजना है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती है।

    संख्याबल की चुनौती

    वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास 292 सांसद हैं, जबकि विपक्षी दलों के पास 233 सदस्य हैं। संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।

    ऐसे में यह मुद्दा न केवल नीतिगत बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

  • एआर रहमान को 'एंटी-नेशनल' बताने पर भड़के प्रकाश राज, कंगना की 'इमरजेंसी' को बताया प्रोपेगेंडा

    एआर रहमान को 'एंटी-नेशनल' बताने पर भड़के प्रकाश राज, कंगना की 'इमरजेंसी' को बताया प्रोपेगेंडा


    नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के दो दिग्गज कलाकार कंगना रनौत और प्रकाश राज एक बार फिर आमने-सामने हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब दिग्गज संगीतकार एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्म ‘छावा’ और इंडस्ट्री में मिल रहे काम को लेकर कुछ बेबाक टिप्पणियां की थीं। रहमान के इसी बयान पर पलटवार करते हुए कंगना रनौत ने उन्हें ‘एंटी-नेशनल’ करार दिया था जिस पर अब प्रकाश राज ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है।

    प्रकाश राज का कड़ा प्रहार प्रकाश राज ने एआर रहमान का बचाव करते हुए कहा कि रहमान जैसे कलाकार जिन्होंने ‘मां तुझे सलाम’ और ‘जय हो’ जैसे गीतों से देश का मान बढ़ाया और दो ऑस्कर जीते वह काम के लिए भीख नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने जो कहा वह सच है। कंगना पर निशाना साधते हुए प्रकाश राज ने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों का भौंकना शुरू हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक महिला निर्देशक और अभिनेत्री महज इसलिए किसी को ‘एंटी-नेशनल’ कह रही हैं क्योंकि उस संगीतकार ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया। प्रकाश राज यहीं नहीं रुके उन्होंने कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ को एक प्रोपेगेंडा मूवी करार दिया।

    कंगना और रहमान के बीच क्या था विवाद? दरअसल एआर रहमान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें उनके धर्म की वजह से इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। इस पर कंगना ने सोशल मीडिया पर भड़ास निकालते हुए लिखा था कि वह रहमान को अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी सुनाना चाहती थीं लेकिन रहमान उनसे मिले तक नहीं। कंगना ने आरोप लगाया कि रहमान ने उनकी फिल्म को ‘प्रोपेगेंडा’ कहकर ठुकरा दिया था। कंगना ने लिखा कि रहमान जी मैंने आपसे ज्यादा नफरत से भरा इंसान आज तक नहीं देखा।

    सियासी रंग लेता विवाद प्रकाश राज ने कंगना के दावों को खारिज करते हुए कहा कि रहमान का अपना एक कद है और किसी फिल्म का हिस्सा न बनने का मतलब यह नहीं है कि कोई देशद्रोही हो गया। प्रकाश राज के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। एक तरफ कंगना के समर्थक उन्हें राष्ट्रवादी बता रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रकाश राज के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी और कलाकार के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल इस मुद्दे पर न तो एआर रहमान की कोई नई प्रतिक्रिया आई है और न ही कंगना ने प्रकाश राज के ‘भौंकने’ वाले बयान पर कोई जवाब दिया है।

  • कंगना बनाम रहमान: 'इमरजेंसी' और 'छावा' को लेकर बढ़ा विवाद, कंगना बोलीं- रहमान पर तरस आता है, उन्होंने मेरी फिल्म ठुकराई

    कंगना बनाम रहमान: 'इमरजेंसी' और 'छावा' को लेकर बढ़ा विवाद, कंगना बोलीं- रहमान पर तरस आता है, उन्होंने मेरी फिल्म ठुकराई


    नई दिल्ली । ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान और फायरब्रांड अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच एक पुरानी रार अब खुलकर सामने आ गई है। विवाद की शुरुआत रहमान के एक पुराने इंटरव्यू से हुई, जिसमें उन्होंने विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ को लेकर टिप्पणी की थी। अब करीब एक साल बाद कंगना रनौत ने इस पर मोर्चा खोलते हुए रहमान को आड़े हाथों लिया है और उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।छावा को बताया था बांटने वाली फिल्मविवाद की जड़एआर रहमान का वह बयान है जिसमें उन्होंने कथित तौर पर ‘छावा’ छत्रपति संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म को समाज को बांटने वाली फिल्म बताया था। चौंकाने वाली बात यह है कि इस फिल्म का संगीत खुद रहमान ने ही दिया है। इसी इंटरव्यू में रहमान ने यह दर्द भी साझा किया था कि ‘कम्युनल’सांप्रदायिक कारणों से उन्हें इंडस्ट्री में अब उतना काम नहीं मिल रहा है जितना पहले मिलता था।

    कंगना का पलटवार मुझ पर तरस खाइए, आप पर नहीं रहमान के इस विक्टिम कार्ड पर कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर अपनी भड़ास निकाली। कंगना ने खुलासा किया कि उन्होंने अपनी फिल्म इमरजेंसी के लिए एआर रहमान को संगीत देने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन रहमान ने इसे ठुकरा दिया। कंगना ने तंज कसते हुए लिखा, रहमान साहब कहते हैं कि उन्हें काम नहीं मिल रहा, जबकि सच्चाई यह है कि जब मैंने उन्हें ‘इमरजेंसी जैसी बड़ी फिल्म ऑफर की, तो उन्होंने मना कर दिया। मुझे उन पर तरस आता है। वे खुद अपनी विचारधारा के कारण काम चुनते हैं या छोड़ते हैं, और फिर समाज पर दोष मढ़ते हैं।

    राष्ट्रवाद बनाम विचारधारा की जंग कंगना ने अपने पोस्ट में आगे दावा किया कि रहमान जैसे कलाकार राष्ट्रवादी विषयों पर बनने वाली फिल्मों से दूरी बना लेते हैं। अभिनेत्री ने कहा कि ‘छावा’ जैसे वीर नायकों की कहानियों को ‘बांटने वाला’ कहना हमारे इतिहास और संस्कृति का अपमान है। कंगना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया है। जहां एक तरफ लोग कंगना के साहस की सराहना कर रहे हैं, वहीं रहमान के प्रशंसक इसे उनकी व्यक्तिगत पसंद और कलात्मक स्वतंत्रता बता रहे हैं।फिलहाल, एआर रहमान की ओर से कंगना के इन ताजा आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन ‘छावा’ की रिलीज से पहले उठा यह विवाद फिल्म के बिजनेस और संगीत की साख पर क्या असर डालेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

  • एआर रहमान के ‘सांप्रदायिक’ बयान पर भड़की कंगना रनौत, कहा- आप नफरत में इतने अंधे हो चुके हो…

    एआर रहमान के ‘सांप्रदायिक’ बयान पर भड़की कंगना रनौत, कहा- आप नफरत में इतने अंधे हो चुके हो…


    नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर और सिंगर एआर रहमान हाल ही में चर्चा में आए क्योंकि उन्होंने कहा कि उन्हें बॉलीवुड में पिछले 8 साल से काम नहीं मिल रहा। उन्होंने इसका कारण सांप्रदायिक एंगल और बदलते पावर डायनेमिक्स बताया। इस बयान के बाद अब बॉलीवुड की विवादित अभिनेत्री कंगना रनौत ने एआर रहमान पर तीखा हमला बोला है।

    कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एआर रहमान का वही वीडियो शेयर किया, जिसमें वह बॉलीवुड में काम न मिलने की बात कर रहे हैं। इस क्लिप के साथ कंगना ने लिखा कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन फिर भी उन्होंने एआर रहमान से ज्यादा घृणास्पद और पूर्वाग्रही व्यक्ति नहीं देखा।

    कंगना ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ के लिए एआर रहमान को नरेशन के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया और फिल्म को प्रोपगंडा बताया।

    कंगना ने आगे लिखा कि इमरजेंसी को आलोचकों ने मास्टरपीस बताया, विपक्षी नेताओं ने भी तारीफ की, लेकिन एआर रहमान अपनी नफरत में अंधे हो चुके हैं। कंगना ने कहा कि उन्हें एआर रहमान पर दुख होता है क्योंकि वे खुद को ‘नफरत के शिकार’ बताते हैं, लेकिन उनकी नफरत और पूर्वाग्रह किसी से कम नहीं।

    कंगना ने अपने पोस्ट में एक और बात भी लिखी कि कुछ बड़े डिजाइनर्स जिन्होंने पहले उनके साथ दोस्ती का दावा किया, बाद में उन्होंने कंगना से दूरी बना ली और कपड़े-आभूषण देने से मना कर दिया। कंगना ने बताया कि जब वे मसाबा गुप्ता की साड़ी पहनकर राम जन्मभूमि जा रही थीं, तब एक डिजाइनर ने उनकी स्टाइलिस्ट से कहा कि वह राम जन्मभूमि पर उस साड़ी के साथ नहीं जा सकतीं। कंगना ने कहा कि उस अपमान के बाद वे अपनी कार में बैठकर रोई थीं।कंगना ने अपने पोस्ट के अंत में लिखा कि आज एआर रहमान मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की नफरत और पूर्वाग्रह का क्या?
  • Happy Birthday Adhyayan Suman: फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी ने दिलाई सुर्खियां, डिप्रेशन से जंग लड़कर बनाई अलग पहचान

    Happy Birthday Adhyayan Suman: फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी ने दिलाई सुर्खियां, डिप्रेशन से जंग लड़कर बनाई अलग पहचान


    नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अध्ययन सुमन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। दिग्गज अभिनेता और टीवी शो होस्ट शेखर सुमन के बेटे अध्ययन ने इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनका करियर जितना फिल्मों के कारण चर्चा में रहा, उससे कहीं ज्यादा उनकी पर्सनल लाइफ और विवादों ने सुर्खियां बटोरीं।

    अध्ययन सुमन ने साल 2008 में फिल्म हाल-ए-दिल से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान कंगना रनौत के साथ आई फिल्म राज द मिस्ट्री कंटिन्यूज से मिली। यह फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आई और अध्ययन की एक्टिंग को भी सराहा गया। इसी दौरान उनकी फिल्म जश्न भी रिलीज हुई, जिसमें उनके अभिनय को क्रिटिक्स से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

    इसके बाद अध्ययन देहरादून डायरी, हिम्मतवाला, हार्टलेस, लखनवी इश्क और इश्क क्लिक जैसी फिल्मों में नजर आए, लेकिन ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकीं।

    धीरे-धीरे उनका फिल्मी करियर कमजोर पड़ता गया, जबकि उनकी निजी जिंदगी लगातार चर्चा का विषय बनी रही।

    अध्ययन सुमन की पर्सनल लाइफ ने उनके प्रोफेशनल करियर पर भी गहरा असर डाला। खासतौर पर कंगना रनौत के साथ उनके रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अध्ययन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि वह कंगना के साथ रिलेशनशिप में थे और इस रिश्ते के दौरान उन्होंने मानसिक रूप से काफी मुश्किल समय देखा। उन्होंने कंगना पर गंभीर आरोप भी लगाए, जिसके बाद यह मामला लंबे समय तक मीडिया में छाया रहा।

    एक समय ऐसा भी आया जब अध्ययन डिप्रेशन से गुजरने लगे। उनके पिता शेखर सुमन ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि अध्ययन इतने परेशान हो गए थे कि उन्हें सुसाइड तक के ख्याल आने लगे थे।

    इंडस्ट्री में उनके खिलाफ बने माहौल और लगातार मिलती नाकामयाबी ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था। हालांकि, इस मुश्किल दौर के बावजूद अध्ययन ने हार नहीं मानी और खुद को संभालने की कोशिश की।

    कंगना के बाद अध्ययन का नाम एक्ट्रेस मायरा मिश्रा के साथ भी जुड़ा। दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहे, लेकिन कुछ समय बाद उनका ब्रेकअप हो गया। ब्रेकअप के बाद मायरा ने कहा था कि अध्ययन बदल गए थे, जबकि अध्ययन का कहना था कि जिंदगी में बदलाव आते रहते हैं और वह किसी को भी खुद को कमजोर महसूस नहीं करने देंगे।

    आज अध्ययन सुमन सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं, बल्कि एक सिंगर के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। भले ही उनका करियर उतना ऊंचा न पहुंच पाया हो, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी के संघर्षों और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करके कई लोगों को हिम्मत जरूर दी है। जन्मदिन के मौके पर फैंस यही दुआ कर रहे हैं कि आने वाला वक्त उनके लिए नई उम्मीदें और बेहतर मौके लेकर आए।
  • 'EVM नहीं, दिलों को हैक करते हैं PM मोदी'; कंगना रनौत का कांग्रेस पर तंज

    'EVM नहीं, दिलों को हैक करते हैं PM मोदी'; कंगना रनौत का कांग्रेस पर तंज


    नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान बीजेपी सांसद कंगना रनौत संसद कांग्रेस के EVM हैक वाले आरोप को लेकर बड़ा आरोप लगया। कंगना रनौता ने कहा कि कांग्रेस वालों तुम लोग ये समझ नहीं पा रहे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी EVM हैक नहीं करते प्रधानमंत्री, वो तो दिलों को हैक करते है।Modi EVM Hack Row
    दरअसल, फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने लोकसभा में एसआईआर पर चर्चा के दौरान बोल रहीं थी। इस दौरान उन्होंने में एसआईआर पर बात करते हुए कहा कि पीएम मोदी ‘EVM नहीं बल्कि दिल हैक करते हैं। कंगना रनौत का कहना है कि विपक्ष ने सदन को चलने नहीं दिया और हर तरह की चालें चलीं।

    उल्लेखनीय है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान जहां विपक्ष ने एसआईआर, वोट चोरी और वंदे मातरम के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इसी के जवाब के दौरान बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने बीजेपी पर तीखा व्यंग किया।

    इससे पहले हिमाचल प्रदेश के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी के जर्मनी दौरे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘मैं उनके (राहुल गांधी) के दौरों की कोई खबर नहीं रखती हूं, न ही उनके बारे में कोई न्यूज पढ़ती हूं। उनकी खबरें हमेशा बेकार ही होती हैं।’ उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के चरित्र में कोई ताकत नहीं है इसलिए मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।

    राहुल गांधी पर्यटन वाले नेता
    राहुल गांधी के जर्मनी यात्रा को लेकर भाजपा ने निशाना साधते हुए उन्हें पर्यटन वाला नेता कहा है। एक तरफ जहां, सत्ताधारी बीजेपी ने उन पर बार-बार विदेश यात्राओं के लिए अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। तो वहीं, कांग्रेस ने पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं का हवाला दिया है।

  • राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति

    राहुल गांधी ने विदेशियों से मिलने की विपक्ष की परंपरा पर उठाया सवाल, कंगना रनौत ने जताई आपत्ति


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती, जबकि पहले यह परंपरा रही है कि किसी भी विदेशी गणमान्य व्यक्ति को विपक्ष के नेता से मिलने की अनुमति दी जाती थी। राहुल गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय विपक्ष के नेताओं को भी विदेशी मेहमानों से मिलने की इजाजत थी।

    राहुल गांधी ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि विपक्ष के नेता का दृष्टिकोण अलग होता है और विदेशी गणमान्य अतिथि से मिलने का अधिकार उन्हें होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं करते हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि जब वे विदेश यात्रा पर जाते हैं तो उन्हें भी बताया जाता है कि विदेशी नेताओं से नहीं मिलना है, जो नीति के अनुसार होता है।

    रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की भारत यात्रा के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि आम तौर पर यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाले मेहमान विपक्ष के नेता से भी मिलते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और डॉ. मनमोहन सिंह के समय यही नियम रहा, लेकिन अब इस परंपरा का पालन नहीं किया जाता। उनका यह भी कहना था कि एलओपी (नेता विपक्ष) एक अलग दृष्टिकोण पेश करते हैं और वह भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। केवल सरकार ही देश का प्रतिनिधित्व नहीं करती।

    राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद बॉलीवुड और राजनीति जगत की हस्ती कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी की भावनाएं देश के प्रति संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी अटल बिहारी वाजपेयी के समान बनने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्हें भाजपा में शामिल होना चाहिए। कंगना ने ट्वीट या बयान में कहा कि भगवान ने उन्हें जन्म दिया है, जीवन दिया है, वे भी अटल जी बन सकते हैं, इसके लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कर लेना चाहिए।

    कंगना ने कहा, “सरकार के अपने फैसले होते हैं। अटल जी नेशनल असेट थे, पूरे देश को उन पर गर्व था। लेकिन राहुल गांधी की देश के प्रति भावनाएं संदिग्ध हैं। चाहे दंगे फैलाने की योजना हो या देश को टुकड़े करने की साजिश, उनकी नीयत पर संदेह है। अगर वह खुद को अटल जी से तुलना कर रहे हैं तो मैं यही सुझाव दूंगी कि आप भाजपा में शामिल हो जाइए।”

    राहुल गांधी की टिप्पणी पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष का अधिकार है कि वह सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और जनता के सामने अपनी राय रखे। थरूर ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को अपनी भूमिका निभाने का पूरा अधिकार है और विदेशी नेताओं से मिलने का उनका हक संविधान और परंपरा दोनों के तहत सुरक्षित है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि राहुल गांधी का यह आरोप देश की राजनीतिक परंपरा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। विपक्ष का यह अधिकार है कि वह विदेशी प्रतिनिधियों से मिले और अपने दृष्टिकोण को साझा करे। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि विदेश नीति केवल सरकार तक सीमित नहीं हो सकती, विपक्ष का दृष्टिकोण भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    राहुल गांधी के बयान और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का मानना है कि लोकतंत्र में अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले नेताओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए और परंपराओं का पालन होना चाहिए। वहीं, भाजपा समर्थक इसे केवल राजनीति के हिस्से के रूप में देख रहे हैं।

    इस घटना ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संवाद और विपक्ष की भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राहुल गांधी का आरोप और कंगना रनौत की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीतिक बयानबाजी और आलोचना आज भी भारतीय राजनीति में उतनी ही तीव्र है जितनी पहले रही है।

  • कंगना रनौत, महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले का डांस रिहर्सल, नवीन जिंदल की बेटी की शादी में राजनीति और बॉलीवुड का अद्भुत मिलाजुला तड़का

    कंगना रनौत, महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले का डांस रिहर्सल, नवीन जिंदल की बेटी की शादी में राजनीति और बॉलीवुड का अद्भुत मिलाजुला तड़का


    नई दिल्ली । राजनीति और बॉलीवुड के बीच के रिश्ते कभी-कभी रोचक और अनूठे होते हैं और जब दोनों का संगम किसी खास अवसर पर होता है तो वह चर्चा का विषय बन जाता है। ऐसा ही कुछ हाल ही में हुआ, जब अभिनेता से सांसद बनी कंगना रनौत टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने नवीन जिंदल की बेटी की शादी के संगीत समारोह के लिए डांस रिहर्सल की। इस रिहर्सल का एक झलक कंगना ने सोशल मीडिया पर साझा की जिसमें राजनीति और बॉलीवुड का यह अनोखा संगम दिखाई दिया।

    कंगना रनौत जो हिमाचल प्रदेश के मंडी से सांसद हैं, सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती हैं और अपनी लाइफ के अपडेट्स साझा करती रहती हैं। बुधवार को उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की जिसमें वह और उनकी साथी सांसद महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले साथ में डांस रिहर्सल करते हुए दिखाई दे रही थीं। यह तस्वीर देखकर फैंस ने राजनीति और बॉलीवुड का यह संगम देखकर बहुत हैरानी जताई। इसके साथ ही कंगना ने पोस्ट के कैप्शन में लिखा साथी सांसदों के साथ कुछ फिल्मी पल नवीन जिंदल जी की बेटी की शादी के संगीत समारोह की रिहर्सल कर रही हूं।

    राजनीति और बॉलीवुड का यह संगम

    कंगना रनौत का फिल्मी करियर शानदार रहा है और वह अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए भी जानी जाती हैं। इसके अलावा राजनीति में भी कंगना ने अपनी पैठ बनाई है जब से उन्होंने 2021 में हिमाचल प्रदेश के मंडी से लोकसभा चुनाव में अपनी उम्मीदवारी पेश की और जीत हासिल की। वह बीजेपी की समर्थक रही हैं और इस पार्टी के साथ मिलकर कार्य करती हैं।

    महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले दोनों ही अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं, जो अपने तीखे बयानों और मुखर व्यक्तित्व के लिए प्रसिद्ध हैं। महुआ मोइत्रा टीएमसी पार्टी की सक्रिय सदस्य हैं जबकि सुप्रिया सुले एनसीपी से जुड़ी हैं। इन दोनों नेताओं के साथ कंगना का डांस रिहर्सल करना एक अजीब लेकिन दिलचस्प मोड़ है। यह तस्वीर राजनीतिक दलों से अलग-थलग कार्यरत इन नेताओं का एक सकारात्मक और गैर-राजनीतिक रूप प्रस्तुत करती है।

    नवीन जिंदल जो कि जिंदल स्टील एंड पावर के अध्यक्ष हैं, इस विवाह समारोह के आयोजनकर्ता हैं। वह एक ऐसे व्यवसायी हैं जो राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 2004 में कांग्रेस से सांसद के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी। लेकिन 2024 में कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

    फिल्मी और राजनीतिक तालमेल

    कंगना रनौत के बारे में बात करें तो, वह फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी खासा सक्रिय हो चुकी हैं। हाल ही में वह “इमरजेंसी” फिल्म में दिखाई दी थीं, जिसमें उन्होंने भारतीय राजनीति के इतिहास के एक महत्वपूर्ण समय को पर्दे पर उतारा था। फिल्मी करियर में रानी तानाजी मणिकर्णिका जैसी हिट फिल्मों का हिस्सा रही कंगना अब राजनीति में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रही हैं।

    कंगना ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान यह भी कहा था कि वह राजनीति में जनता की सेवा करना चाहती हैं। वह कम फिल्मों में काम कर रही हैं लेकिन उनकी राजनीतिक सक्रियता उन्हें अक्सर खबरों में बनाए रखती है। कंगना की यह भूमिका एक नई दिशा को संकेत देती है जिसमें वह न सिर्फ फिल्मों की दुनिया बल्कि राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी जगह बना रही हैं।

    शादी का आयोजन और उम्मीदें

    नवीन जिंदल की बेटी की शादी को लेकर चर्चा हो रही है कि यह एक भव्य आयोजन हो सकता है जिसमें राजनीति और बॉलीवुड के कई दिग्गज शामिल हो सकते हैं। इस शादी के संगीत समारोह में कंगना रनौत महुआ मोइत्रा और सुप्रिया सुले के अलावा कई अन्य प्रमुख नेता भी हिस्सा ले सकते हैं। इसके अलावा बॉलीवुड के कुछ प्रमुख सितारे भी इस आयोजन का हिस्सा बन सकते हैं जो इसे और भी खास बना देगा।

    इस तरह के आयोजनों में राजनीति और बॉलीवुड के बीच की दीवारें धुंधली हो जाती हैं, और यह साबित होता है कि दोनों ही दुनिया में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना है। कंगना रनौत और अन्य नेताओं का साथ में डांस करना यह दिखाता है कि लोग अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं के बावजूद कुछ अच्छे और सकारात्मक वक्त बिता सकते हैं।

    कुल मिलाकर यह शादी न केवल राजनीतिक और बॉलीवुड के महत्वपूर्ण चेहरों का मिलन होगी बल्कि यह एक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगी कि कैसे विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपने व्यक्तिगत जीवन और पेशेवर जिंदगी में संतुलन बनाए रख सकते हैं।