Tag: Kangana

  • कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन पर टिप्पणी करते हुए उसमें दिखाई गई ड्रेसिंग को लेकर सवाल उठाया है। कृति सेनन का यह विज्ञापन एक ज्वैलरी ब्रांड से जुड़ा है और इसमें रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हुए उन्हें दिखाया गया है।

    विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन की ड्रेस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने इसे विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा माना। इसी बीच कंगना रनौत ने भी इस विवाद पर अपनी राय सार्वजनिक की।

    कृति सेनन विज्ञापन में इंडो-वेस्टर्न अंदाज के परिधान में नजर आती हैं। विज्ञापन की थीम रक्षाबंधन से जुड़ी है और इसमें भाई-बहन के रिश्ते को त्योहार के संदर्भ में दिखाया गया है। हालांकि, कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और विज्ञापन का यह हिस्सा लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं वैश्विक फैशन को अपनाती हैं और उनके पास पारंपरिक भारतीय परिधानों से लेकर आधुनिक कपड़ों तक कई विकल्प मौजूद हैं।

    इसी संदर्भ में कंगना ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे पहनावे का इस्तेमाल क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल करते हुए पूछा कि जब महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो इस तरह के परिधान को ही क्यों चुना गया।

    कंगना ने अपनी टिप्पणी में यह भी संकेत दिया कि विज्ञापन को जानबूझकर असामान्य तरीके से तैयार किया गया हो सकता है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद कृति सेनन का विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कृति सेनन की ओर से कंगना की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

    रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा तथा सम्मान का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। त्योहार के इसी भाव को ध्यान में रखते हुए कंपनियां हर साल आभूषण, कपड़े, मिठाई और अन्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापन तैयार करती हैं।

    सेलिब्रिटी विज्ञापनों में पहनावे और प्रस्तुति को लेकर विवाद नया नहीं है। कई बार किसी विज्ञापन की थीम, ड्रेसिंग या विजुअल प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं और कुछ ही समय में विज्ञापन व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।

    कृति सेनन के मामले में भी यही देखने को मिला। एक तरफ विज्ञापन की रचनात्मकता और फैशन प्रस्तुति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। कंगना की टिप्पणी ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

    कंगना रनौत पहले भी फिल्म, फैशन, सामाजिक विषयों और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उनके बयानों पर अक्सर समर्थन और आलोचना दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस बार भी उनकी टिप्पणी के बाद कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र विज्ञापन में कृति सेनन की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना के बीच तालमेल का सवाल है। कृति की ओर से इस टिप्पणी पर कोई स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    नई दिल्ली । योगगुरु रामदेव और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही जुबानी जंग रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गई। कंगना की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से इनकार किया, लेकिन उनके बयान में कंगना पर तीखा तंज भी नजर आया। हरिद्वार में जब उनसे कंगना की टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते जिन्हें वह ओछा मानते हैं।

    दोनों के बीच विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के Gen-Z को लेकर दिए गए बयान से हुई थी। कंगना ने नई पीढ़ी के लिए ‘गटर जनरेशन’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान पर रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है और ऐसी सोच युवाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

    रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने भी पलटवार किया था। उन्होंने रामदेव पर तंज कसते हुए अपनी प्रतिक्रिया में निजी और तीखे अंदाज का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    रविवार को जब रामदेव से कंगना की ताजा टिप्पणी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम लेने से बचते हुए कहा कि वह विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कंगना के लिए ओछे लोगों वाला बयान दिया। रामदेव ने अपने सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनके काम और योगदान से परिचित है।

    इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की टिप्पणियां सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मामला किसी औपचारिक राजनीतिक टकराव के बजाय व्यक्तिगत बयानबाजी से जुड़ा दिखाई दे रहा है, लेकिन कंगना बीजेपी की सांसद होने के कारण उनके बयानों और उनसे जुड़े विवादों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।

    रामदेव ने इसी दौरान एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को संतों का समर्थन मिला है और इससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर होने वाली बार-बार की गतिविधियों को कम करने में मदद मिल सकती है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं और एक साथ चुनाव कराने से व्यवस्था में स्थिरता आ सकती है।

    योगगुरु ने शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया और कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। उनके अनुसार, चुनाव सुधारों के जरिए देश में विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के अपमान को संविधान के खिलाफ माना जाता है, उसी तरह ब्राह्मणों के अपमान को लेकर भी समान दृष्टिकोण होना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत विभिन्न वर्गों के साथ होने वाले अन्याय का उल्लेख करते हुए समान सम्मान और अधिकार की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय या वर्ग के अपमान को लेकर समान संवेदनशीलता जरूरी है।

    फिलहाल कंगना और रामदेव के बीच विवाद का केंद्र Gen-Z को लेकर हुई बयानबाजी है। रामदेव ने इसे आगे बढ़ाने से बचने की बात कही है, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी के बाद दोनों के बीच चल रहा यह विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

  • 'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अक्सर अभिनेत्रियों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी बेबाक राय के कारण आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। हाल ही में अभिनेत्री ईशा कोपिकर को इंटरनेट पर ‘अंधभक्त’ कहकर निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी ईशा कोपिकर के समर्थन में आगे आई हैं और उन्होंने इस विषय पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

    यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ईशा कोपिकर ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले लोगों का विरोध किया था। उन्होंने ऐसे कृत्य को देशहित के खिलाफ बताते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। इसके जवाब में ईशा ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि यदि देश की भलाई सोचना और उसके प्रति निष्ठा रखना भक्ति है, तो वे इस शब्द को स्वीकार करने में संकोच नहीं करेंगी।

    ईशा कोपिकर के इस रुख की सराहना करते हुए कंगना रनौत ने उनके वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। कंगना ने लिखा कि ईशा ने इस मुद्दे को बहुत ही स्पष्ट और तार्किक तरीके से जनता के सामने रखा है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का संदर्भ देते हुए कहा कि अपने अधिकारों, न्याय और राष्ट्र के प्रति आवाज उठाना हमेशा से उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उन्होंने छात्र जीवन से लेकर अपने पेशेवर करियर तक में अनुचित बातों के खिलाफ हमेशा स्टैंड लिया है।

    कंगना रनौत ने आगे कहा कि अपने परिवार, समाज और देश के प्रति सम्मान और प्रेम रखना किसी भी नागरिक का स्वाभाविक गुण होना चाहिए। वे जिन भी लोगों और विचारों से प्रभावित होती हैं, उनके प्रति आदर भाव रखती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और देशवासियों के प्रति निष्ठा को किसी नकारात्मक टैग से जोड़कर देखना अनुचित है। जब भी समाज में कुछ गलत होगा, तो उसके खिलाफ बोलना और जब कुछ अच्छा होगा, तो उसकी सराहना करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।

    ईशा कोपिकर ने भी अपने संदेश में यह साफ कर दिया था कि वे किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में अपनी राय रखती हैं। वे गलत नीतियों का विरोध और सही कार्यों की प्रशंसा बिना किसी हिचकिचाहट के करती रहेंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देशहित में सोचने वालों के प्रति अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा दें।

    इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और राजनीतिक क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की आजादी और ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि राष्ट्रप्रेम और व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय एक स्वतंत्र सोच के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच और तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वंदे मातरम् को भारत की चेतना से जुड़ा बताया और कांग्रेस नेताओं के रुख पर सवाल खड़े किए।

    कंगना रनौत ने कहा कि वंदे मातरम् देश की भावनाओं और चेतना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक कलाकार होने के नाते वह इस बात को समझती हैं कि किसी कविता या रचना का समाज और देश पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि वंदे मातरम् को लेकर इतनी नाराजगी या विरोध की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

    बीजेपी सांसद ने कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान कैमरे के सामने असहजता दिखाई गई और कैमरा बंद कराने की कोशिश की गई। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा कि उनके अनुसार पड़ोसी देश के लोग भी वंदे मातरम् को लेकर उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं देते, जितनी कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से देखने को मिल रही है।

    कंगना ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के नेता इस पूरे विवाद के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पहले बीजेपी का विरोध करती थी, लेकिन अब उसकी राजनीति ऐसी दिशा में पहुंच गई है जिसे वह देश विरोधी मानती हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आने पर ही राजनीतिक विवाद का अगला पक्ष स्पष्ट होगा।

    कंगना रनौत ने यह बयान मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने के बाद दिया। 18 अगस्त की सुबह मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर में पूजा की और कहा कि सिद्धिविनायक पूरे मुंबई के रक्षक माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह मंदिर में दर्शन करने आती हैं।

    इसी दौरान कंगना ने बीजेपी के सामने सोशल मीडिया से जुड़ी एक नई चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे दिमागी नक्सलवाद की चुनौती बताया और कहा कि गलत सूचनाओं के प्रसार से निपटना जरूरी है। उनके मुताबिक सोशल मीडिया और रील कल्चर के कारण युवाओं और महिलाओं तक कई बार ऐसी जानकारियां पहुंच रही हैं जो उन्हें भ्रमित कर सकती हैं।

    कंगना ने कहा कि पहले लोगों के विचारों और जानकारी के निर्माण में समाचार पत्रों, किताबों और माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया लोगों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए जागरूकता और तैयारी जरूरी है।

    वंदे मातरम् को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों, देशभक्ति और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कंगना के बयान के बाद यह विवाद राजनीतिक स्तर पर और तीखा होने की संभावना है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से जारी वैचारिक टकराव के बीच वंदे मातरम् का मुद्दा भी अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

  • कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    कंगना रनौत की टिप्पणी के बाद बढ़ी बहस, आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में संयमित भाषा पर दिया जोर

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की जेन-जी को लेकर की गई टिप्पणी के बाद शुरू हुई बहस लगातार तेज होती जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच अभिनेता आशुतोष राणा ने भाषा की गरिमा, संवाद की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार अभिव्यक्ति को लेकर अपनी राय साझा की है। उनके बयान को विवाद से इतर संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी करने के बजाय भाषा के महत्व पर जोर दिया।

    हाल के दिनों में छात्र विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में कंगना रनौत की जेन-जी से जुड़ी टिप्पणी चर्चा का विषय बनी हुई है। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर व्यापक बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया। देखते ही देखते यह मुद्दा मनोरंजन जगत से निकलकर सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया।

    इसी क्रम में पटना प्रवास के दौरान मीडिया से बातचीत में आशुतोष राणा ने सार्वजनिक जीवन में शब्दों की भूमिका पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति का व्यक्तित्व केवल उसके कार्यों से नहीं, बल्कि उसकी भाषा और व्यवहार से भी पहचाना जाता है। उनके अनुसार शब्द व्यक्ति के संस्कार, सोच और दृष्टिकोण का परिचय देते हैं, इसलिए बोलते समय संयम और संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

    आशुतोष राणा ने कहा कि भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह समाज में सम्मान और विश्वास का आधार भी बनती है। उन्होंने कहा कि एक ही शब्द किसी संबंध को मजबूत भी कर सकता है और अनावश्यक विवाद का कारण भी बन सकता है। इसलिए सार्वजनिक मंचों पर बोलने वाले लोगों को अपने शब्दों के प्रभाव और सामाजिक जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    इस विवाद पर मनोरंजन जगत के अन्य कलाकारों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। अभिनेता सोनू सूद ने भी हाल ही में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को सोच-समझकर अपनी बात रखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के बयान समाज के बड़े वर्ग को प्रभावित करते हैं, इसलिए संवाद में संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखना जरूरी है।

    दूसरी ओर कंगना रनौत ने अपने बयान का बचाव करते हुए सोशल मीडिया पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने छात्र आंदोलन और वायरल वीडियो से जुड़े संदर्भों का उल्लेख करते हुए अपने विचार दोहराए। साथ ही उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर भी अपनी राय रखी, जिसके बाद यह बहस और अधिक व्यापक हो गई। उनके समर्थक और आलोचक लगातार अपने-अपने पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं।

    पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक जिम्मेदारी और भाषा की मर्यादा जैसे विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति व्यक्त करते समय संवाद की गरिमा बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया, राजनीतिक विमर्श और मनोरंजन जगत में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है तथा आने वाले दिनों में भी इस पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

  • कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    कंगना रनौत ने बयान पर दी सफाई, बोलीं- अशोभनीय हरकतों का किया था विरोध, मीडिया पर लगाया बयान तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप

    नई दिल्ली । अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत के छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर दिए गए हालिया बयान पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ते विवाद के बीच कंगना ने एक नया वीडियो जारी कर अपने बयान पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उनके पूरे बयान को दिखाने के बजाय केवल चुनिंदा हिस्सों को प्रचारित किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने किसी वर्ग विशेष को निशाना नहीं बनाया, बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय व्यवहार का विरोध किया था।

    कंगना ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उन्होंने सड़क पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की मौजूदगी में होने वाली अभद्र भाषा और अश्लील हरकतों को सामान्य मानने से इनकार किया था। उनके अनुसार ऐसे व्यवहार को सामाजिक स्वीकृति नहीं दी जा सकती और समाज को इस तरह की प्रवृत्तियों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ सामाजिक वातावरण बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उनके बयान के बाद मीडिया के एक वर्ग ने उन्हें लगातार निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि उनके सकारात्मक विचारों और अन्य मुद्दों पर दिए गए बयानों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि विवादित हिस्से को बार-बार प्रसारित किया जा रहा है। उनके मुताबिक टीआरपी, लाइक्स और व्यूज की होड़ में उनके पूरे संदेश को सामने नहीं रखा गया, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी।

    कंगना ने यह भी कहा कि उन्होंने हाल के दिनों में देश की वैज्ञानिक उपलब्धियों की सराहना की है और युवाओं, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तथा देश को आगे बढ़ाने वाली नई पीढ़ी की प्रशंसा भी की है। उनका दावा है कि इन सकारात्मक बयानों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया और केवल विवाद से जुड़े अंशों को प्रमुखता मिली।

    वीडियो में उन्होंने अपने आलोचकों की प्रतिक्रियाओं पर भी टिप्पणी की। कंगना ने कहा कि कुछ लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गलत व्याख्या कर रहे हैं। उनके अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि सार्वजनिक स्थानों पर ऐसा व्यवहार किया जाए जिससे दूसरे लोगों की भावनाएं, आस्था या सम्मान प्रभावित हों। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं और सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।

    उन्होंने आगे कहा कि समाज में अनुशासन और शालीनता का पालन प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक यदि कोई व्यक्ति सामाजिक या पेशेवर जीवन में मर्यादाओं का पालन नहीं करता तो उसे इसके परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन का उद्देश्य स्वयं को बेहतर बनाना और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ना होना चाहिए, न कि ऐसे आचरण को बढ़ावा देना जिससे सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो।

    वीडियो के अंत में कंगना रनौत ने सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लोगों से अपने गुरुओं के बताए मार्ग पर चलने, जीवन में अनुशासन अपनाने और निरंतर बेहतर इंसान बनने का संदेश दिया। उनके इस नए वीडियो के सामने आने के बाद भी उनके बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है, जबकि समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने पक्ष पर कायम दिखाई दे रहे हैं।

  • कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…

    कंगना ने राहुल गांधी पर किया तीखा हमला, कहा -‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा काम…


    नई दिल्ली।
    बीजेपी सांसद कंगना रनौत (BJP MP Kangana Ranaut) सोमवार को मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में शामिल होने के लिए लोकसभा (Lok Sabha) पहुंचीं। इस दौरान कंगना ने यूपीए सरकार के दौरान एजुकेशन पर किए गए खर्च और पेपर लीक से जुड़ा परीक्षा संशोधन बिल पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है।

    कंगना ने कहा ‘हमारे प्रधानमंत्री जी ने ये पूरी दुनिया के लिए बहुत बड़ा उदाहरण पेश किया है। ऐसे नेता जो इतने समर्पित हैं हर छोटे से लेकर बड़े मुद्दे के लिए वे जिस तरह से देशवासियों के लिए समर्पित हैं ये पूरे विश्व के लिए प्रेरणा है। आपने देखा उन्होंने जिस तरह से कमेटी गठित की है और हाई पावर पैक्ट बनाया है जो कि परीक्षाओं के लिए काम करेगा और इसको भ्रष्टाचार मुक्त बनाएगा। चाहे परीक्षा का यह संशोधन बिल अचानक आया हो लेकिन ये प्रधानंत्री की प्रतिबद्धता है।’

    उन्होंने आगे कहा ‘राहुल गांधी जी देख रहे हैं कि यूपीए के समय में क्या होता था शिक्षा का एकदम नाम मात्र बजट होता था। तो यह कहते हैं न खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे तो ये खंभा नोचने जैसा काम है।’


    परीक्षा से जुड़ा कड़े कानून वाला विधेयक पेश

    आपको बता दें कि पेपर लीक पर कड़े प्रावधान वाला परीक्षा संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। संशोधित विधेयक का नाम ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे पेश किया है। विधेयक में दोषियों के लिए 10 साल तक के जेल, 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने, संपत्ति जब्ती जैसे कड़े प्रावधान हैं।


    टास्क फोर्स का भी गठन

    प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए दिग्गज टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स के गठन का एलान किया है। पीएम ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो में कहा ‘विद्यार्थियों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई कदम उठा रही है. जिन लोगों ने विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वो जेलों में सड़ रहे हैं। हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं। हम नया कानून बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।’


    पीएम ने खुद दी जानकारी

    पीएम ने आगे कहा ‘हमारी परीक्षा पद्धति भरोसेमंद, पारदर्शी हो और सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का इ्स्तेमाल हो, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने विश्व प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक हाई-पावर टास्क फोर्स गठित करने का फैसला लिया है। ये टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर ध्यान देगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता जल्द से जल्द तय की जाएगी।’