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  • यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?

    यश की Toxic में दिखा जबरदस्त स्वैग, लेकिन कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल; 3 घंटे 15 मिनट की फिल्म पर कैसी है राय?


    नई दिल्ली। कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार यश की फिल्म Toxic को लेकर पिछले चार साल से दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई थी। KGF जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद यश की अगली फिल्म से उम्मीदें स्वाभाविक तौर पर बहुत ज्यादा थीं। लंबे इंतजार के बाद जब Toxic सिनेमाघरों में पहुंची तो दर्शक यश के नए अंदाज और एक बड़े सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे। हालांकि फिल्म देखने के बाद सामने आई राय उम्मीदों से काफी अलग नजर आती है। फिल्म में यश की परफॉर्मेंस दमदार है और तकनीकी स्तर पर भी Toxic कई जगह प्रभावित करती है लेकिन कमजोर राइटिंग और धीमी कहानी फिल्म के सबसे बड़े कमजोर पक्ष बनकर सामने आते हैं।

    करीब 3 घंटे 15 मिनट लंबी Toxic से यह उम्मीद की जा सकती है कि कहानी को स्थापित करने में थोड़ा समय लगेगा। फिल्म की शुरुआत भी इसी अंदाज में होती है और दर्शक धैर्य के साथ कहानी के खुलने का इंतजार करता है। समस्या तब शुरू होती है जब आधी फिल्म गुजरने के बावजूद कहानी ऐसा मजबूत मोड़ नहीं ले पाती जो दर्शकों को पूरी तरह बांध सके। इंटरवल के आसपास एक बड़ा सीन जरूर आता है लेकिन वह भी वैसा असर नहीं छोड़ता जिसकी उम्मीद यश जैसे बड़े स्टार की फिल्म से की जाती है। पूरी फिल्म के दौरान यही उम्मीद बनी रहती है कि अब कहानी रफ्तार पकड़ेगी और कोई बड़ा सरप्राइज मिलेगा लेकिन कई मौकों पर यह इंतजार निराशा में बदल जाता है।

    Toxic की सबसे बड़ी समस्या इसकी राइटिंग बताई जा सकती है। यश को एक बेहद प्रभावशाली और खतरनाक किरदार में पेश करने की कोशिश की गई है लेकिन इस कोशिश में कहानी और स्क्रीनप्ले पीछे छूटते नजर आते हैं। कई डायलॉग जरूरत से ज्यादा नाटकीय महसूस होते हैं और किरदारों के बीच संवाद भी कई जगह स्वाभाविक नहीं लगते। यश को देखकर लगातार Rocky Bhai की याद आती है और फिल्म का नया किरदार अपनी अलग पहचान बनाने के बजाय उसी छवि के आसपास घूमता हुआ दिखाई देता है। यही वजह है कि दर्शक किरदार से भावनात्मक रूप से जुड़ने में परेशानी महसूस कर सकता है।

    हालांकि अभिनय के मोर्चे पर यश बिल्कुल निराश नहीं करते। फिल्म में उनका डबल रोल है और दोनों किरदारों को उन्होंने अलग अंदाज में निभाने की पूरी कोशिश की है। खास तौर पर Raya के किरदार में उनकी एक्टिंग रेंज दिखाई देती है। यश की स्क्रीन प्रेजेंस और स्टारडम अब भी जबरदस्त है लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले उनकी मेहनत पर भारी पड़ता है। नयनतारा भी फिल्म में यश की बहन के किरदार में प्रभावी नजर आती हैं और उन्होंने अपने हिस्से की भूमिका को मजबूती से निभाया है। दोनों के बीच के भावनात्मक दृश्यों में क्षमता नजर आती है लेकिन कहानी उन्हें उस स्तर तक विकसित नहीं कर पाती जहां दर्शक पूरी तरह जुड़ सके।

    तकनीकी और विजुअल स्तर पर Toxic बेहतर अनुभव देती है। बड़े पर्दे पर फिल्म के विजुअल्स और एक्शन सीक्वेंस आकर्षक लग सकते हैं और अच्छे थिएटर में इसका प्रभाव और बढ़ सकता है। लेकिन किसी भी फिल्म की असली ताकत उसकी कहानी होती है और यहीं Toxic कमजोर पड़ती दिखाई देती है। चार साल तक जिस फिल्म का इंतजार किया गया उससे दर्शकों को सिर्फ स्टारडम और शानदार विजुअल्स नहीं बल्कि एक मजबूत कहानी की भी उम्मीद थी।

    इसलिए Toxic को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यश से नहीं बल्कि फिल्म की राइटिंग से है। यश ने अपनी तरफ से शानदार प्रदर्शन किया है लेकिन कहानी उनकी क्षमता के अनुरूप नहीं बन पाई। चार साल के इंतजार के बाद दर्शक जिस दमदार सिनेमाई अनुभव की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंचे थे वह पूरी तरह हासिल होता नजर नहीं आता। अब यश की अगली बड़ी फिल्म Ramayana को लेकर उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं। सवाल यही है कि क्या वहां यश अपनी पिछली फिल्म से मिली निराशा को दूर कर पाएंगे या फिर दर्शकों को एक बार फिर उम्मीदों का इंतजार करना पड़ेगा।

  • यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट

    यश की 'टॉक्सिक' को सेंसर बोर्ड की हरी झंडी, 194 मिनट का रनटाइम और A सर्टिफिकेट


    नई दिल्ली। कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को लेकर दर्शकों का इंतजार अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस एक्शन थ्रिलर फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC से A सर्टिफिकेट मिल गया है। इसके साथ ही फिल्म के रनटाइम की आधिकारिक जानकारी भी सामने आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म करीब 194 मिनट यानी 3 घंटे 14 मिनट लंबी है। फिल्म को 13 अगस्त को CBFC के बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय से प्रमाणित किया गया है।

    ‘A’ सर्टिफिकेट का मतलब है कि फिल्म को केवल वयस्क दर्शक ही सिनेमाघरों में देख सकेंगे। वहीं तीन घंटे से ज्यादा की अवधि ने भी फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हालांकि केवल लंबे रनटाइम या A सर्टिफिकेट के आधार पर फिल्म की सामग्री के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। इतना जरूर है कि फिल्म को लेकर मेकर्स ने शुरुआत से ही इसे आम मसाला फिल्म से अलग और वयस्क दर्शकों के लिए तैयार किए गए डार्क एक्शन ड्रामा के रूप में पेश किया है।

    फिल्म की कहानी आजादी के बाद के गोवा की पृष्ठभूमि में रखी गई है। कहानी ऐसे दौर को दिखाती है जहां हिंसा सत्ता लालच नफरत और अपराध का गहरा असर दिखाई देता है। इसी माहौल में एक गैंगस्टर अपने जीवन के फैसलों और उनके परिणामों से जूझता नजर आता है। कहानी में वफादारी सही और गलत के बीच संघर्ष तथा खुद को बदलने की कोशिश जैसे पहलू अहम बताए गए हैं। यानी ‘टॉक्सिक’ में सिर्फ एक्शन ही नहीं बल्कि किरदारों के भीतर चलने वाली जंग को भी प्रमुखता दी गई है।

    फिल्म के ट्रेलर ने यश के किरदार को लेकर पहले ही जबरदस्त चर्चा पैदा कर दी है। यश फिल्म में राया नाम के किरदार में नजर आ रहे हैं। ट्रेलर में उनका अंदाज बेहद आक्रामक और खतरनाक दिखाई देता है। सत्ता और अपनी ताकत के नशे में डूबा यह किरदार अपने आसपास के लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी करता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है वैसे-वैसे उसके रिश्तों और फैसलों का असर भी सामने आता है।

    ‘टॉक्सिक’ की एक और बड़ी खासियत इसकी स्टारकास्ट है। फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी नयनतारा तारा सुतारिया हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म को कन्नड़ और अंग्रेजी में तैयार किया गया है और इसे हिंदी तमिल तेलुगु तथा मलयालम समेत कई भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचाने की तैयारी है। फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर रवि बसरूर से जुड़ा है जबकि इसके बड़े एक्शन सीक्वेंस पर भी खास काम किया गया है।

    फिल्म की रिलीज डेट भी कई बार बदली जा चुकी है। अलग-अलग कारणों से इसकी रिलीज आगे खिसकती रही और अब मेकर्स ने 26 अगस्त 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज की तारीख तय की है। ऐसे में CBFC से सर्टिफिकेट मिलने के बाद फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ हो गया है। अब नजर इस बात पर है कि यश का यह डार्क और बड़े पैमाने वाला अवतार बॉक्स ऑफिस पर दर्शकों को कितना प्रभावित करता है।

  • संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत

    संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत


    नई दिल्ली:
    फिल्म इंडस्ट्री में सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष से होकर गुजरती हैं और ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कन्नड़ सिनेमा के स्टार ऋषभ शेट्टी की जिन्होंने बेहद साधारण शुरुआत से अपने करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज वह ना सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं बल्कि निर्देशक और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी खास पहचान बना चुके हैं लेकिन उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है।

    बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में पहचान बनाने से पहले ऋषभ शेट्टी ने एक प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था। इतना ही नहीं उन्होंने एक प्रोड्यूसर के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2008 में मुंबई के अंधेरी इलाके में वह वड़ा पाव खाते हुए सपने देखते थे लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन वह इतने बड़े स्टार बन जाएंगे।

    उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने साल 2012 में फिल्म तुगलक से अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया लेकिन इसके बावजूद फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम से दर्शकों का दिल जीतते गए।

    उनके करियर में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने फिल्म लूसिया में काम किया जो उनकी पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके बाद बेल बॉटम जैसी फिल्मों ने उन्हें और मजबूत बनाया। साल 2016 में उन्होंने फिल्म रिक्की के साथ बतौर निर्देशक भी कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की।

    हालांकि जिस फिल्म ने ऋषभ शेट्टी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में पहचान दिलाई वह थी कंतारा। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद उनकी फिल्म कंतारा चैप्टर 1 ने भी शानदार प्रदर्शन किया और इसे दर्शकों से भरपूर प्यार मिला।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड करीब 850 करोड़ रुपये की कमाई की और साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही। खास बात यह रही कि इस फिल्म ने कई बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया जिनमें रजनीकांत की फिल्म कुली और आमिर खान की फिल्म सितारे जमीन पर जैसी बड़ी फिल्में शामिल थीं।

    आज ऋषभ शेट्टी की कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण घबराते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि अगर मेहनत और जुनून हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

  • जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी

    जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी


    नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री में जब भी मेहनत और संघर्ष से सफलता पाने वाले कलाकारों की बात होती है तो अभिनेता यश का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले यश का सफर आसान नहीं रहा। जेब में सिर्फ 300 रुपये और आंखों में बड़े सपने लेकर घर छोड़ने वाला यह युवक आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिना जाता है।

    अभिनेता यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के छोटे से गांव भुवनहल्ली में हुआ था। उनका असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है। उनके पिता बीएमटीसी में बस चालक थे और माता एक गृहिणी थीं। परिवार साधारण था और माता-पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर सुरक्षित सरकारी नौकरी करे। लेकिन यश का मन बचपन से ही अभिनय की दुनिया में बस चुका था।स्कूल के दिनों में यश नाटकों और डांस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। मंच पर तालियों की गूंज उन्हें खास सुकून देती थी और यहीं से उनके भीतर अभिनेता बनने का सपना मजबूत होता गया। जब परिवार ने उनके इस सपने का विरोध किया तो यश ने एक कठिन लेकिन साहसी फैसला लिया। वह सिर्फ 300 रुपये लेकर घर से निकल पड़े और बेंगलुरु का रुख किया। उन्हें डर था कि अगर वापस लौटे तो फिर कभी अपने सपनों के पीछे नहीं भाग पाएंगे।

    बेंगलुरु पहुंचकर यश ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्हें बड़े रोल नहीं मिले। वह बैकस्टेज काम करते रिप्लेसमेंट कलाकार बनते और छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे। कई बार हालात इतने मुश्किल हुए कि गुजारा करना भी चुनौती बन गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यही संघर्ष उनके भविष्य की मजबूत नींव बना।साल 2008 में यश को कन्नड़ फिल्म मोगिना मनासु से सिनेमा में पहला बड़ा मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर भी मिला। इसके बाद राजधानी गजकेसरी मास्टरपीस जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।

    हालांकि यश की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 2018 में आया जब केजीएफ चैप्टर 1 रिलीज हुई। फिल्म में रॉकी भाई का किरदार निभाकर उन्होंने पूरे देश में पहचान बना ली। इसके बाद केजीएफ चैप्टर 2 ने इतिहास रच दिया और 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।निजी जीवन में यश ने अपनी को-स्टार राधिका पंडित से 2016 में शादी की। दोनों ने मिलकर यशो मार्ग फाउंडेशन की शुरुआत की जो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जल संरक्षण के लिए काम करता है। आज यश सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं बल्कि संघर्ष आत्मविश्वास और मेहनत की मिसाल बन चुके हैं।