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  • संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत

    संघर्ष से सफलता तक ऋषभ शेट्टी का सफर एक फिल्म ने बदली किस्मत


    नई दिल्ली:
    फिल्म इंडस्ट्री में सफलता की कहानियां अक्सर संघर्ष से होकर गुजरती हैं और ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है कन्नड़ सिनेमा के स्टार ऋषभ शेट्टी की जिन्होंने बेहद साधारण शुरुआत से अपने करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाया। आज वह ना सिर्फ एक सफल अभिनेता हैं बल्कि निर्देशक और प्रोड्यूसर के तौर पर भी अपनी खास पहचान बना चुके हैं लेकिन उनका शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है।

    बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में पहचान बनाने से पहले ऋषभ शेट्टी ने एक प्रोडक्शन हाउस में ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था। इतना ही नहीं उन्होंने एक प्रोड्यूसर के ड्राइवर के तौर पर भी काम किया। उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि साल 2008 में मुंबई के अंधेरी इलाके में वह वड़ा पाव खाते हुए सपने देखते थे लेकिन कभी कल्पना नहीं की थी कि एक दिन वह इतने बड़े स्टार बन जाएंगे।

    उनकी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने साल 2012 में फिल्म तुगलक से अपने करियर की शुरुआत की। इस फिल्म में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया लेकिन इसके बावजूद फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार अपने काम से दर्शकों का दिल जीतते गए।

    उनके करियर में असली मोड़ तब आया जब उन्होंने फिल्म लूसिया में काम किया जो उनकी पहली बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई। इसके बाद बेल बॉटम जैसी फिल्मों ने उन्हें और मजबूत बनाया। साल 2016 में उन्होंने फिल्म रिक्की के साथ बतौर निर्देशक भी कदम रखा और यहां भी सफलता हासिल की।

    हालांकि जिस फिल्म ने ऋषभ शेट्टी को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में पहचान दिलाई वह थी कंतारा। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की और उनके करियर को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इसके बाद उनकी फिल्म कंतारा चैप्टर 1 ने भी शानदार प्रदर्शन किया और इसे दर्शकों से भरपूर प्यार मिला।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड करीब 850 करोड़ रुपये की कमाई की और साल 2025 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही। खास बात यह रही कि इस फिल्म ने कई बड़े सितारों की फिल्मों को पीछे छोड़ दिया जिनमें रजनीकांत की फिल्म कुली और आमिर खान की फिल्म सितारे जमीन पर जैसी बड़ी फिल्में शामिल थीं।

    आज ऋषभ शेट्टी की कहानी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो बड़े सपने देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण घबराते हैं। उनका सफर यह साबित करता है कि अगर मेहनत और जुनून हो तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।

  • जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी

    जेब में सिर्फ 300 रुपये, दिल में बड़े सपने: यश के संघर्ष से सुपरस्टार बनने तक की कहानी


    नई दिल्ली । साउथ फिल्म इंडस्ट्री में जब भी मेहनत और संघर्ष से सफलता पाने वाले कलाकारों की बात होती है तो अभिनेता यश का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है। आज करोड़ों दिलों पर राज करने वाले यश का सफर आसान नहीं रहा। जेब में सिर्फ 300 रुपये और आंखों में बड़े सपने लेकर घर छोड़ने वाला यह युवक आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिना जाता है।

    अभिनेता यश का जन्म 8 जनवरी 1986 को कर्नाटक के हासन जिले के छोटे से गांव भुवनहल्ली में हुआ था। उनका असली नाम नवीन कुमार गौड़ा है। उनके पिता बीएमटीसी में बस चालक थे और माता एक गृहिणी थीं। परिवार साधारण था और माता-पिता चाहते थे कि बेटा पढ़-लिखकर सुरक्षित सरकारी नौकरी करे। लेकिन यश का मन बचपन से ही अभिनय की दुनिया में बस चुका था।स्कूल के दिनों में यश नाटकों और डांस प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। मंच पर तालियों की गूंज उन्हें खास सुकून देती थी और यहीं से उनके भीतर अभिनेता बनने का सपना मजबूत होता गया। जब परिवार ने उनके इस सपने का विरोध किया तो यश ने एक कठिन लेकिन साहसी फैसला लिया। वह सिर्फ 300 रुपये लेकर घर से निकल पड़े और बेंगलुरु का रुख किया। उन्हें डर था कि अगर वापस लौटे तो फिर कभी अपने सपनों के पीछे नहीं भाग पाएंगे।

    बेंगलुरु पहुंचकर यश ने थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआती दिनों में उन्हें बड़े रोल नहीं मिले। वह बैकस्टेज काम करते रिप्लेसमेंट कलाकार बनते और छोटे-छोटे किरदार निभाते रहे। कई बार हालात इतने मुश्किल हुए कि गुजारा करना भी चुनौती बन गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यही संघर्ष उनके भविष्य की मजबूत नींव बना।साल 2008 में यश को कन्नड़ फिल्म मोगिना मनासु से सिनेमा में पहला बड़ा मौका मिला। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड फॉर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर भी मिला। इसके बाद राजधानी गजकेसरी मास्टरपीस जैसी फिल्मों ने उन्हें कन्नड़ सिनेमा का जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।

    हालांकि यश की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ 2018 में आया जब केजीएफ चैप्टर 1 रिलीज हुई। फिल्म में रॉकी भाई का किरदार निभाकर उन्होंने पूरे देश में पहचान बना ली। इसके बाद केजीएफ चैप्टर 2 ने इतिहास रच दिया और 1100 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर कन्नड़ सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाई।निजी जीवन में यश ने अपनी को-स्टार राधिका पंडित से 2016 में शादी की। दोनों ने मिलकर यशो मार्ग फाउंडेशन की शुरुआत की जो ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जल संरक्षण के लिए काम करता है। आज यश सिर्फ एक सुपरस्टार नहीं बल्कि संघर्ष आत्मविश्वास और मेहनत की मिसाल बन चुके हैं।