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  • इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार

    इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल की IIT कानपुर को 300 करोड़ की मदद, मेडिकल स्कूल और अस्पताल को मिलेगा विस्तार


    नई दिल्ली ।आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और इंडिगो के सह-संस्थापक राकेश गंगवाल ने अपने संस्थान को 300 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। यह राशि आईआईटी कानपुर में विकसित किए जा रहे गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के विस्तार और विकास में इस्तेमाल की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2022 में गंगवाल ने इसी संस्थान के लिए 100 करोड़ रुपये का योगदान दिया था। इस तरह मेडिकल स्कूल के लिए उनका कुल योगदान 400 करोड़ रुपये हो जाएगा।

    राकेश गंगवाल का आईआईटी कानपुर से पुराना और मजबूत संबंध रहा है। उन्होंने वर्ष 1975 में संस्थान से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अमेरिका के यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया स्थित व्हार्टन स्कूल से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने विमानन क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और कई बड़ी एयरलाइनों के साथ काम किया।

    गंगवाल ने US एयरवेज, एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बाद में वर्ष 2006 में उन्होंने राहुल भाटिया के साथ मिलकर इंटरग्लोब एविएशन की शुरुआत की। इसी कंपनी के जरिए इंडिगो एयरलाइन का संचालन हुआ और भारतीय विमानन क्षेत्र में कंपनी ने तेजी से अपनी पहचान बनाई।

    आईआईटी कानपुर में मेडिकल शिक्षा और तकनीक को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है। संस्थान ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के साथ चिकित्सा क्षेत्र में शोध, नवाचार और क्लिनिकल सुविधाओं को जोड़ने की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण कदम के तौर पर विकसित किया है।

    गंगवाल स्कूल की विकास योजना में आईआईटी कानपुर परिसर में 500 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना शामिल है। इसके अलावा 200 बेड वाले कैंसर केयर एवं रिसर्च सेंटर का भी प्रस्ताव है। इन सुविधाओं के जरिए मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा अनुसंधान और मरीजों के लिए उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं को एक साथ आगे बढ़ाने की योजना है।

    राकेश गंगवाल की ओर से दी जा रही 300 करोड़ रुपये की नई राशि मैचिंग ग्रांट के तौर पर दी गई है। इसका मतलब है कि संस्थान के विकास के लिए अन्य सहयोगियों की ओर से जुटाए गए योगदान के बराबर गंगवाल ने भी सहयोग दिया है। इससे मेडिकल स्कूल की विकास योजनाओं को वित्तीय मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    आईआईटी कानपुर ने वर्ष 2021 में मेडिकल स्कूल स्थापित करने का फैसला लिया था। इसका उद्देश्य इंजीनियरिंग, तकनीक और चिकित्सा के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना तथा स्वास्थ्य सेवाओं और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में नई संभावनाएं तैयार करना था। वर्ष 2022 में गंगवाल के 100 करोड़ रुपये के योगदान के बाद इस योजना को महत्वपूर्ण आर्थिक आधार मिला।

    गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अनिल के लालवानी हैं। संस्थान का मानना है कि गंगवाल का योगदान मेडिकल शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दीर्घकालिक प्रभाव पैदा कर सकता है। उत्तर प्रदेश में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    राकेश गंगवाल का योगदान यह भी दर्शाता है कि किसी प्रतिष्ठित संस्थान के पूर्व छात्र उसके भविष्य के विकास में किस तरह बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। पांच दशक से अधिक समय पहले आईआईटी कानपुर से बीटेक करने वाले गंगवाल अब उसी संस्थान में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए बड़ी आर्थिक भागीदारी कर रहे हैं।

  • कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    कानपुर देहात की 360 महिलाएं बना रहीं करीब तीन लाख तिरंगे, ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से बढ़ा रोजगार और आत्मनिर्भरता

    नई दिल्ली । कानपुर देहात में इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को सफल बनाने में ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 96 स्वयं सहायता समूहों की करीब 360 महिलाएं दिन-रात मेहनत कर लगभग तीन लाख तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं। इन महिलाओं के लिए तिरंगा बनाना केवल देशभक्ति से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि रोजगार, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का भी माध्यम बन गया है। खास तौर पर गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को इससे सम्मान के साथ काम करने का अवसर मिला है।

    कानपुर देहात में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर तैयारियां तेज हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों को जिले में करीब तीन लाख तिरंगे तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। महिलाएं निर्धारित समय के भीतर इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। तैयार किए जा रहे प्रत्येक तिरंगे की लंबाई 30 इंच और चौड़ाई 20 इंच रखी गई है। इसकी निर्धारित कीमत 20 रुपये तय की गई है। तैयार होने के बाद इन तिरंगों का इस्तेमाल जिले के स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और अन्य सरकारी भवनों पर किया जाएगा।

    महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी ने इस अभियान को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जोड़ दिया है। उमंग स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष प्रतिमा सिंह के अनुसार, ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना इस पहल का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उनका कहना है कि आत्मनिर्भर भारत के साथ आत्मनिर्भर महिलाओं का निर्माण भी जरूरी है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर का इस्तेमाल कर आय अर्जित कर रही हैं और साथ ही परिवार की जिम्मेदारियों में भी योगदान दे रही हैं।

    इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव उन महिलाओं पर दिखाई दे रहा है, जिनके लिए गांव में रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं। गरीब, विधवा, दिव्यांग और कम शिक्षित महिलाओं को घर के आसपास काम मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें काम के जरिए सम्मान और अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने का अवसर मिल रहा है।

    कानपुर देहात की महिला स्वयं सहायता समूहों ने इससे पहले भी अपनी क्षमता दिखाई थी। पिछले वर्ष समूहों से जुड़ी महिलाओं ने करीब 200 मीटर लंबा तिरंगा तैयार किया था। उस दौरान तैयार किए गए झंडों पर महिलाओं को लागत निकालने के बाद करीब छह रुपये तक का मुनाफा मिला था। इस बार भी तिरंगे तैयार करने में आने वाली लागत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं वहन करेंगी और बिक्री से होने वाला मुनाफा सीधे समूह की महिलाओं को मिलेगा।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के उपायुक्त अशोक कुमार ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से कानपुर देहात की महिलाएं सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज तैयार नहीं कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और महिला सशक्तीकरण की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। तीन लाख तिरंगे तैयार करने का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान देने के साथ उनके लिए स्थायी आर्थिक अवसरों की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे 18 दिन में 84 जगह धंसा, मरम्मत शुरू; गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर उठे सवाल

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की घटनाएं सामने आने के बाद मरम्मत कार्य लगातार जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शुरुआती 18 दिनों के भीतर कुल 84 स्थानों पर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की सतह बैठने, दरारें आने और पैचवर्क की आवश्यकता पड़ने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। कई स्थानों पर मरम्मत के बाद भी सड़क दोबारा प्रभावित होने की जानकारी मिली है। कुछ हिस्सों में जलभराव और सड़क किनारे बने शोल्डर के धंसने की भी शिकायतें सामने आई हैं। इसके चलते संबंधित एजेंसियां लगातार निगरानी और सुधार कार्य में लगी हुई हैं।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने कंपनी को गैर-प्रदर्शन श्रेणी में रखते हुए उसके कुछ अधिकारियों को परियोजना से हटाने का निर्णय लिया है। साथ ही परियोजना की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने का फैसला भी लिया गया है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम निर्माण कार्य, उपयोग की गई सामग्री और तकनीकी मानकों का परीक्षण करेगी।

    सड़क निर्माण क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एक्सप्रेसवे पर इतने कम समय में बार-बार सड़क धंसने जैसी स्थिति सामने आती है तो निर्माण प्रक्रिया, मिट्टी की तैयारी, जल निकासी व्यवस्था और आधार परत की गुणवत्ता की गहन जांच आवश्यक हो जाती है। उनका कहना है कि यदि मूल संरचना में किसी प्रकार की कमी पाई जाती है तो केवल ऊपरी सतह की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी और प्रभावित हिस्सों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।

    यह एक्सप्रेसवे राज्य की प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। इसकी कुल लागत लगभग 4,700 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह प्रदेश की सबसे महंगी एक्सप्रेसवे परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इस मार्ग के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय कम करने तथा यातायात को सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि शुरुआती दिनों में सामने आई तकनीकी समस्याओं ने परियोजना की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    परियोजना का निर्माण एक निजी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कंपनी को लेकर पहले भी विभिन्न मामलों में चर्चा होती रही है। हालांकि मौजूदा मामले में जांच का मुख्य केंद्र सड़क निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पालन है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सड़क धंसने के पीछे निर्माण संबंधी कमी, मौसम, जल निकासी व्यवस्था या अन्य कोई तकनीकी कारण जिम्मेदार है।

    फिलहाल एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में मरम्मत कार्य जारी है और कुछ स्थानों पर यातायात को डायवर्जन के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक तकनीकी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो और यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिल सके।

  • बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    बर्फीले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी विकसित करने की दिशा में रक्षा अनुसंधान संस्थान का बड़ा कदम

    नई दिल्ली । अत्यधिक ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान वाले सीमावर्ती बर्फीले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सैनिकों की सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक विशेष तकनीक पर काम शुरू किया गया है। हिमस्खलन और बर्फीले तूफानों जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जवानों की स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए अत्याधुनिक स्मार्ट वर्दी का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रक्षा अनुसंधान से जुड़ी कानपुर स्थित प्रयोगशाला और उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी संस्थान ने संयुक्त रूप से शोध और अनुसंधान की प्रक्रिया शुरू की है। यह नई व्यवस्था विषम परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों को अत्यधिक तीव्र और सटीक बनाने में मददगार साबित होगी।

    सुरक्षा और ट्रैकिंग प्रणाली को मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही इस वर्दी में विशेष कंडक्टिव इंक की मदद से इलेक्ट्रॉनिक सर्किट प्रिंट किए जा रहे हैं। इन परिपथों को माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक चिप, जीपीएस मॉड्यूल और विभिन्न प्रकार के संवेदनशील सेंसरों से जोड़ा जा रहा है। पूरी तकनीकी व्यवस्था को कपड़े की परतों के भीतर ही इस तरह समाहित किया जाएगा कि सैनिक को अतिरिक्त वजन का अहसास न हो। इस पहनावे को मोड़ने, धुलाई करने या दैनिक उपयोग में लाने पर भी इसकी कार्यक्षमता और सर्किट की गुणवत्ता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिससे सैनिक हर स्थिति में जुड़े रहेंगे।

    आपात स्थिति में यदि कोई जवान ग्लेशियर या भारी बर्फ की परतों के नीचे दब जाता है, तो वर्दी में मौजूद प्रणाली सक्रिय होकर बचाव दल को लगातार लोकेशन सिग्नल भेजती रहेगी। इससे रेस्क्यू टीम को विस्तृत और अनिश्चित इलाके में समय गंवाने के बजाय सीधे लक्षित स्थान तक पहुंचने में सफलता मिलेगी। पूर्व की घटनाओं में बर्फ में फंसे जवानों तक पहुंचने में कई बार काफी समय लग जाता था, लेकिन इस नई व्यवस्था से खोज अभियान की गति कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सकेगा।

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार प्रारंभिक चरण में प्राथमिक ध्यान सटीक लोकेशन ट्रैकिंग पर केंद्रित किया गया है। हालांकि भविष्य के अनुसंधान चरण में इसमें शरीर का तापमान, हृदय गति और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य संकेतकों को मापने की सुविधाएं जोड़ने की योजना भी शामिल है। सियाचिन, लद्दाख और पूर्वोत्तर के अति-ऊंचे क्षेत्रों में तैनात सैन्य बलों के लिए यह तकनीकी विकास एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। दोनों संस्थानों द्वारा इस तकनीक का प्रोटोटाइप परीक्षण सफल रहने के बाद इसे व्यापक स्तर पर अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।

  • दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब

    दीक्षांत समारोह में गूंजी छात्रों की आवाज: राज्यपाल ने हॉस्टल की बिजली और सुविधाओं पर मांगा जवाब


    कानपुर कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (HBTU) के आठवें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को शिक्षा और उपलब्धियों के साथ-साथ छात्रों की मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। समारोह की अध्यक्षता करने पहुंचीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन से हॉस्टलों की व्यवस्थाओं को लेकर तीखे सवाल पूछे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक साल पहले जिन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

    अध्यक्षीय संबोधन के दौरान राज्यपाल ने फाइनेंस कंट्रोलर और कुलसचिव से पूछा कि आखिर हॉस्टलों में बिजली की समस्या अब तक क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय के पास बजट की कमी है और यदि नहीं तो फिर इन सुविधाओं को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया। राज्यपाल की इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया।

    दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने एक क्लिक के जरिए सभी 996 विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिलॉकर पर जारी कीं। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि छात्र डिजिलॉकर का अपेक्षित उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार बेहतर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो उनका अधिक से अधिक इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को कम डाउनलोड के कारणों की जानकारी लेकर राजभवन में प्रस्तुत होने के निर्देश भी दिए।

    समारोह में कुल 996 छात्र-छात्राओं को 1071 डिग्रियां प्रदान की गईं। कुछ विद्यार्थियों को मेजर और माइनर पाठ्यक्रम पूरा करने के कारण दो-दो डिग्रियां भी मिलीं। विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रज्ञान वर्मा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक और एक प्रायोजित स्वर्ण पदक सहित तीन सम्मान प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें 40 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। कुल 47 मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदकों और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

    राज्यपाल ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उन्नाव की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट और शैक्षणिक सामग्री वितरित करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। समारोह में प्रस्तुति देने वाले स्कूली बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट देकर उनका उत्साह भी बढ़ाया।

    दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और एफडीडीआई के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने स्वयं को HBTU का पूर्व छात्र बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आज यहां से निकलने वाले विद्यार्थी भी देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे।

    शिक्षा, उपलब्धियों और सम्मान के इस समारोह में राज्यपाल का प्रशासन को दिया गया स्पष्ट संदेश सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी संस्थानों में केवल उत्कृष्ट परिणाम ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।

  • युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    नई दिल्ली । लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद का एक प्रेरक उदाहरण उस समय सामने आया जब कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आशुतोष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और राष्ट्रहित से जुड़े उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें देश के जागरूक युवाओं का प्रतिनिधि बताया। पत्र मिलने के बाद आशुतोष ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों से मिलने वाले आत्मीय और सकारात्मक विचार उन्हें राष्ट्रहित में लगातार कार्य करने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा व्यक्त भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के विषय को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

    पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और ऊर्जा बचत को जनभागीदारी से जुड़े अभियान का रूप देने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा आवश्यक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के संकल्प को सराहनीय बताया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच और समस्याओं के समाधान के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यही वर्ग भविष्य की दिशा तय करेगा।

    प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद आशुतोष यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक क्षण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है और उसे गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके पत्र का उत्तर मिलना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है।

    आशुतोष ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंता और सुझाव साझा किए थे। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके विचारों को महत्व दिया जाना युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

    आशुतोष ने पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उनके अनुसार तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति प्रदान की है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान या सरकारी योजना की सफलता में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब नागरिक स्वयं किसी उद्देश्य से जुड़ते हैं, तब उसके परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। आशुतोष का मानना है कि युवाओं में नई सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है, जो देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं पर व्यक्त किया गया विश्वास देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप

    कानपुर में सनसनी: मां का कटा हाथ लेकर कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप



    कानपुर। कानपुर में एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ITBP जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। यह मामला कथित तौर पर निजी अस्पताल की लापरवाही और पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने से जुड़ा बताया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, विकास सिंह की मां को 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर कानपुर के जीटी रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाए जाने से उनके दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया, जिसके बाद हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

    परिजनों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ने पर महिला को दूसरे अस्पताल पारस हॉस्पिटल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण को रोकने के लिए हाथ काटने की सलाह दी। इसके बाद 17 मई को महिला का दाहिना हाथ ऑपरेशन के जरिए काटना पड़ा।

    इसी घटना से आहत ITBP जवान विकास सिंह का आरोप है कि यह स्थिति कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण बनी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह कई बार थाना रेल बाजार में शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

    इसी से नाराज होकर वह कथित सबूत के तौर पर अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। इस घटना के बाद वहां हड़कंप मच गया और मामला तुरंत उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ गया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के निर्देश दिए हैं। अब पूरे प्रकरण की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित किया जाएगा, जो यह तय करेगा कि इलाज में लापरवाही हुई थी या नहीं।

    जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीज सुरक्षा और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

  • कानपुर में दरोगा पर युवक को थर्ड डिग्री देने का आरोप, 40 सेकेंड में 15 थप्पड़ जड़ने का दावा

    कानपुर में दरोगा पर युवक को थर्ड डिग्री देने का आरोप, 40 सेकेंड में 15 थप्पड़ जड़ने का दावा


    कानपुर। कानपुर में एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक दरोगा पर युवक को थर्ड डिग्री देने और बेरहमी से मारपीट करने के आरोप लगे हैं। पीड़ित युवक कमल कश्यप, जो राम नारायण बाजार स्थित एक इलेक्ट्रिक दुकान में काम करता है, ने आरोप लगाया है कि उसे चोरी के शक में बहाने से चौकी बुलाकर बुरी तरह पीटा गया।

    जानकारी के अनुसार, युवक को एक मुखबिर और उसके साथी के जरिए पटकापुर चौकी ले जाया गया, जहां चौकी इंचार्ज प्रशांत सिंह सोमवंशी पर आरोप है कि उन्होंने पूछताछ के दौरान महज 30 से 40 सेकेंड में युवक के गालों पर लगभग 15 थप्पड़ मारे। इसके बाद आरोप है कि उसकी उंगलियों में सूजा फंसाकर उसे जमीन पर दबाया गया और जूतों से प्रताड़ित किया गया। इस दौरान मौजूद मुखबिर और उसका साथी कथित तौर पर पूरे घटनाक्रम पर हंसते रहे और दरोगा को उकसाते रहे।

    पीड़ित का यह भी आरोप है कि जब उसने खुद को बेकसूर बताया तो मारपीट और तेज कर दी गई। बाद में करीब तीन घंटे तक चौकी में रखने के बाद उसे छोड़ा गया। इस घटना की जानकारी जब इलाके के व्यापारियों को मिली तो वे चौकी पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज की मांग की, लेकिन उन्हें वहां से वापस लौटा दिया गया।

    इसके बाद शुक्रवार को राम नारायण बाजार के व्यापारियों ने घटना के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और जांच का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया।

    पीड़ित के अनुसार, घटना के दौरान चौकी में मौजूद मुखबिर ने यहां तक कहा कि “आंख में मिर्च डालो तो सच बताएगा”, जिससे पूरे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। वहीं आरोप यह भी है कि दरोगा पहले भी सोशल मीडिया पर वर्दी में रील बनाने को लेकर चर्चा में रह चुके हैं।

    फिलहाल मामले में एसीपी कोतवाली का कहना है कि लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश बना हुआ है।

  • कानपुर में अमानवीयता की हद! चाची ने मासूम बच्चों को हीटर से जलाया, पुलिस भी देख कांप उठी

    कानपुर में अमानवीयता की हद! चाची ने मासूम बच्चों को हीटर से जलाया, पुलिस भी देख कांप उठी



    नई दिल्ली। कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक महिला पर अपने ही चार मासूम भतीजे-भतीजियों को हीटर से जलाने और बेरहमी से पिटाई करने का गंभीर आरोप लगा है। बच्चों के शरीर पर जले और चोटों के निशान देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।

    घटना उस वक्त सामने आई जब गुरुवार शाम करीब 5:25 बजे यूपी-112 पर एक 14 वर्षीय बच्चे ने रोते हुए कॉल कर मदद मांगी। उसने बताया कि उसकी छोटी बहन को चाची हीटर से जला रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत गांव पहुंची, जहां 14, 11, 9 और 4 साल के चार बच्चे मौजूद मिले।

    पुलिस के पहुंचते ही बच्चों ने अपने शरीर पर पड़े घाव दिखाए और आरोप लगाया कि उनके माता-पिता की मौत के बाद वे चाचा-चाची के साथ रह रहे हैं, लेकिन यहां उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जाता है। बच्चों ने कहा कि खाना मांगने पर बेल्ट से पिटाई की जाती है और कई बार हीटर से जलाया जाता है। पीठ, हाथ, हथेली, जांघ और सिर पर चोटों के निशान देख पुलिस भी स्तब्ध रह गई।

    स्थानीय ग्रामीणों ने भी बच्चों के आरोपों की पुष्टि की। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे अक्सर प्रताड़ना की शिकायत करते थे, लेकिन डर के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आता था।

    वहीं, पूछताछ में चाची ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि बच्चे स्कूल नहीं जाते और उन्होंने चोरी की थी, जिसके कारण उन्हें डांटा-पीटा गया। हालांकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है।

    मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने बच्चों की स्थिति देखते हुए उन्हें भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराया। अधिकारियों ने चाची को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों के साथ किसी भी तरह की अमानवीयता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    डीसीपी पूर्वी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और दोबारा शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चों को सुरक्षा में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

  • कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप

    कानपुर : पत्नी मायके गई तो पति ने रचाई दूसरी शादी, स्नैपचैट से खुला राज; दहेज, अबॉर्शन और उत्पीड़न के गंभीर आरोप




    नई दिल्ली। कानपुर के चकेरी इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पत्नी के मायके जाने के दौरान पति ने चुपके से दूसरी शादी कर ली। इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा स्नैपचैट पर आई तस्वीरों से हुआ, जिसमें पति दूसरी महिला के साथ “पत्नी” लिखकर नजर आया। मामला सामने आने के बाद पीड़िता ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट और गंभीर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद उसे लगातार प्रताड़ित किया गया और दो बार जबरन गर्भपात कराया गया। महिला का कहना है कि ससुराल वालों ने खाने में दवा मिलाकर उसे नुकसान पहुंचाया, जिससे उसका गर्भ गिर गया। इसके अलावा, ननदोई पर भी कमरे में घुसकर गलत हरकत और शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया गया है।

    शादी 2022 में एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए तय हुई थी। पीड़िता का आरोप है कि शादी से पहले ही ससुराल पक्ष ने भारी दहेज की मांग की थी, जिसमें 50 लाख रुपये नकद, सोने के गहने और अन्य सामान शामिल थे। शादी के बाद भी लगातार पैसों की मांग और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना जारी रही।

    पीड़िता के अनुसार, मई 2025 में वह गर्भावस्था के दौरान मायके आ गई थी, और इसी दौरान पति ने दूसरी शादी कर ली। जब उसने इस बात की जानकारी परिवार से ली तो उसे टाल दिया गया और बाद में मामले की पुष्टि खुद सोशल मीडिया से हुई।

    पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने पति, सास और ससुर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों को बुलाकर बयान दर्ज किए जा रहे हैं और जांच आगे बढ़ाई जा रही है।