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  • करवा चौथ पर मौसम ने बिगाड़ा सुहागिनों का इंतजार, शिवपुरी में रातभर होती रही बारिश, घने बादलों में छिपा रहा चांद

    करवा चौथ पर मौसम ने बिगाड़ा सुहागिनों का इंतजार, शिवपुरी में रातभर होती रही बारिश, घने बादलों में छिपा रहा चांद


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश में चक्रवाती तूफान अर्नब के असर से मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश के कई जिलों में पिछले दो दिनों से बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। शिवपुरी में भी गुरुवार शाम से मौसम ने अचानक करवट ली और रातभर रुक रुककर बारिश होती रही। आसमान में छाए घने बादलों और ठंडी हवाओं के कारण लोगों को मौसम में ठंडक का अहसास होने लगा है। बारिश के चलते तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने प्रदेश में 2 नवंबर तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं शुक्रवार को अगले 24 घंटे के लिए कई जिलों में मौसम को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को शिवपुरी सहित मध्य प्रदेश के 33 जिलों में तेज हवाएं चलने के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। मौसम में आए इस बदलाव का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई दे रहा है। अक्टूबर के आखिरी दिनों में जहां लोग सर्दी की शुरुआत महसूस करने लगे हैं वहीं अचानक हुई बारिश ने मौसम को और ठंडा कर दिया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रह सकते हैं और प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है।

    शिवपुरी में गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे मौसम अचानक बदलने लगा। दिनभर के सामान्य मौसम के बाद आसमान में काले बादल छाने लगे और हल्की आंधी चलने लगी। कुछ ही देर बाद बूंदाबांदी शुरू हो गई। देर शाम तक बारिश का सिलसिला जारी रहा और रात में भी रुक रुककर पानी गिरता रहा। कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं बारिश की गति तेज हो गई। इसके साथ चलने वाली ठंडी हवाओं ने लोगों को मौसम में बदलाव का एहसास कराया। बारिश के कारण सड़कों और खुले स्थानों पर भी ठंडक बढ़ गई।

    मौसम में आए इस बदलाव का सबसे अधिक भावनात्मक असर करवा चौथ के त्योहार पर देखने को मिला। गुरुवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखा था। परंपरा के अनुसार महिलाएं दिनभर उपवास रखने के बाद रात में चांद के दर्शन कर पूजा करती हैं और फिर व्रत का पारण करती हैं। शिवपुरी में रात करीब साढ़े आठ बजे चांद निकलने का अनुमानित समय था लेकिन आसमान में घने बादल छाए रहने के कारण चांद दिखाई नहीं दिया। ऐसे में चांद के दीदार का इंतजार कर रही महिलाओं को निराशा का सामना करना पड़ा।

    चांद दिखाई नहीं देने के कारण कई महिलाओं ने पूजा पूरी करने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ महिलाओं ने दूसरे जिलों में दिखाई दे रहे चांद का लाइव प्रसारण देखकर पूजा की। वहीं कुछ ने थाली में चांद की आकृति बनाकर परंपरा के अनुसार पूजा अर्चना की। कई महिलाएं देर रात तक आसमान साफ होने और चांद निकलने का इंतजार करती रहीं। बाद में कुछ महिलाओं ने परिवार के बुजुर्गों की सलाह और प्रचलित परंपराओं के अनुसार व्रत का पारण किया। इस तरह मौसम की खराबी ने करवा चौथ के उत्सव को प्रभावित किया।

    मध्य प्रदेश में बारिश और ठंडी हवाओं के चलते मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को आने वाले दिनों में भी मौसम के बदलते मिजाज के लिए तैयार रहना होगा। खासकर उन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है जिन्हें तेज हवाओं और बारिश के दौरान यात्रा करनी पड़ती है। अगले कुछ दिनों में मौसम किस तरह करवट लेता है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • अर्नब’ चक्रवात से MP में बदला मौसम, सतना-कटनी में बारिश से ठंड की दस्तक, करवा चौथ पर चांद दिखने में हो सकती है परेशानी

    अर्नब’ चक्रवात से MP में बदला मौसम, सतना-कटनी में बारिश से ठंड की दस्तक, करवा चौथ पर चांद दिखने में हो सकती है परेशानी


    भोपाल। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब का असर मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने के साथ बारिश और बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को सतना और कटनी में बारिश दर्ज की गई जबकि महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में अगले तीन दिनों तक मौसम बदला रहने के आसार हैं। दूसरी ओर धार और झाबुआ में न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से सुबह के समय ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश आंधी और गरज चमक की संभावना जताई है। ऐसे में अक्टूबर के आखिरी दिनों में लोगों को एक साथ बारिश ठंड और गर्मी के बदलते मिजाज का सामना करना पड़ सकता है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बुधवार को सीधी सिंगरौली अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा भोपाल नर्मदापुरम भिंड दतिया रायसेन सीहोर विदिशा जबलपुर छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा मऊगंज मैहर शहडोल उमरिया सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवा और गरज चमक का दौर देखने को मिल सकता है।

    धार में तापमान में अचानक गिरावट ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। यहां न्यूनतम तापमान मंगलवार को 15.4 डिग्री सेल्सियस था जो बुधवार सुबह घटकर 11.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस तरह केवल एक दिन में पारे में 4.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 32.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। मौसम में बदलाव के चलते दिन के तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। सुबह के समय तेज हवाओं और कम तापमान के कारण लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है।

    विंध्य क्षेत्र में भी आसमान पर बादलों का डेरा है। सतना में बुधवार सुबह से बादल छाए रहे जबकि मैहर में कुछ देर के लिए बूंदाबांदी हुई। यहां करीब पांच से सात मिनट तक बारिश होने से बाजार में मौजूद लोगों को अपना सामान बचाना पड़ा। सब्जी मंडी में दुकानदार सामान को भीगने से बचाते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार 28 से 30 अक्टूबर के बीच विंध्य क्षेत्र में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को सतना में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

    झाबुआ में भी सुबह की ठंड बढ़ गई है। जिले में न्यूनतम तापमान 27 अक्टूबर को 17.6 डिग्री सेल्सियस था जो 28 अक्टूबर को गिरकर 14.4 डिग्री सेल्सियस रह गया। एक दिन में 3.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोपहर में तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने के कारण गर्मी महसूस हो रही है। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को हल्की बारिश गरज चमक बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है।

    मौसम में यह बदलाव करवा चौथ के त्योहार पर भी असर डाल सकता है। 29 अक्टूबर को चक्रवात का प्रभाव बढ़ने की संभावना के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बादल बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने 11 जिलों में अति भारी और नौ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है जबकि अन्य जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। बादल घने रहने पर चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है। 30 और 31 अक्टूबर को भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है। लोगों को मौसम के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखने और बारिश व तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

  • करवा चौथ पर मौसम डाल सकता है खलल, भोपाल में 8:26 और इंदौर में 8:34 बजे चंद्रोदय, जानें अपने शहर का समय

    करवा चौथ पर मौसम डाल सकता है खलल, भोपाल में 8:26 और इंदौर में 8:34 बजे चंद्रोदय, जानें अपने शहर का समय


    भोपाल। मध्य प्रदेश में गुरुवार 29 अक्टूबर को करवा चौथ का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखेंगी। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद शुरू होने वाला यह व्रत रात में चंद्र दर्शन और पूजा के बाद पूरा किया जाता है। हालांकि इस बार मौसम महिलाओं की प्रतीक्षा बढ़ा सकता है। प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में चांद के निर्धारित समय पर निकलने के बावजूद उसका स्पष्ट दर्शन होने में देरी हो सकती है।

    खगोलीय गणनाओं के अनुसार मध्य प्रदेश में सबसे पहले सिंगरौली में रात करीब 8 बजकर 1 मिनट पर चंद्रमा दिखाई देने का अनुमान है। इसके बाद प्रदेश के अन्य जिलों में चंद्रोदय होगा। राजधानी भोपाल में रात 8 बजकर 26 मिनट पर जबकि इंदौर में रात 8 बजकर 34 मिनट पर चांद दिखने का अनुमान है। प्रदेश के पश्चिमी छोर पर स्थित आलीराजपुर में चंद्र दर्शन का समय रात करीब 8 बजकर 41 मिनट बताया गया है। इस तरह राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच चंद्रोदय के समय में लगभग 40 मिनट का अंतर हो सकता है।

    नेशनल अवॉर्डी विज्ञान प्रसारक सारिका घारू के मुताबिक पृथ्वी के भौगोलिक विस्तार और अलग-अलग देशांतर स्थितियों के कारण हर जिले में चांद निकलने का समय एक जैसा नहीं होता। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित जिलों में चंद्रमा पहले दिखाई देता है जबकि पश्चिमी जिलों में इसके दर्शन कुछ देर बाद होते हैं। इसी वजह से सिंगरौली से आलीराजपुर तक चंद्र दर्शन के समय में अंतर देखने को मिलता है।

    बारिश और बादलों से बढ़ सकता है इंतजार

    करवा चौथ के दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर सागर रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल इंदौर नर्मदापुरम उज्जैन ग्वालियर और चंबल संभाग में बादल छाए रह सकते हैं। मौसम की ऐसी स्थिति में चंद्रमा के क्षितिज पर आने के बाद भी उसका दीदार तुरंत नहीं हो पाएगा। ऊंची इमारतों पहाड़ियों और स्थानीय मौसम की वजह से भी चांद दिखाई देने में 10 से 15 मिनट की देरी हो सकती है। इसलिए महिलाओं को अपने जिले में बताए गए चंद्रोदय के समय के साथ आसमान की स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।

    सरगी से होती है व्रत की शुरुआत

    करवा चौथ पर व्रत शुरू करने से पहले सुबह सरगी ग्रहण करने की परंपरा है। आमतौर पर सास अपनी बहू को सरगी देती हैं। इसमें फल मिठाई मेवे और फेनी जैसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। दिनभर बिना भोजन और पानी के रहने से पहले पौष्टिक आहार लेना उपयोगी हो सकता है। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए पर्याप्त पौष्टिक भोजन करना चाहिए। यदि किसी को मधुमेह या कोई दूसरी स्वास्थ्य समस्या है तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

    चंद्र दर्शन के बाद खोला जाता है व्रत

    करवा चौथ पर महिलाएं भगवान गणेश चौथ माता और चंद्र देव की पूजा करती हैं। परंपरा के अनुसार रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। इसके बाद व्रत खोलने की मान्यता है। कई परिवारों में करवा चौथ की कथा सुनने और पूजा की विधि पूरी करने का विशेष महत्व होता है।

    इस बार प्रदेश के अलग-अलग शहरों में चंद्र दर्शन का समय अलग रहेगा और मौसम भी भूमिका निभा सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपने जिले के अनुमानित चंद्रोदय समय की जानकारी पहले से रखनी चाहिए। बादलों की वजह से चांद दिखाई देने में देरी हो तो धैर्य रखें और पूजा से जुड़ी परंपराओं का पालन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार करें।

  • करवा चौथ पर इस बार ग्रहों का खास संयोग, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जानें व्रत का सही समय

    करवा चौथ पर इस बार ग्रहों का खास संयोग, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए जानें व्रत का सही समय


    नई दिल्ली। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए आस्था प्रेम और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। इस वर्ष करवा चौथ 29 अक्टूबर गुरुवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस बार पर्व पर कई शुभ ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं जिन्हें दांपत्य जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग इस पर्व को विशेष बना रहा है। व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह से चंद्रमा के दर्शन तक उपवास करेंगी और शाम को विधि विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।

    ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के अनुसार करवा चौथ की चतुर्थी तिथि 28 और 29 अक्टूबर की मध्यरात्रि 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 29 अक्टूबर की रात 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का संबंध चंद्रमा से माना जाता है जबकि मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं। चंद्रमा को शीतलता सुंदरता और मन का कारक माना जाता है जबकि मंगल ऊर्जा और कल्याण से जुड़ा ग्रह है। इसी कारण इन नक्षत्रों का संयोग करवा चौथ के धार्मिक महत्व को बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    इस बार ग्रहों की स्थिति को लेकर भी विशेष चर्चा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार तुला राशि में सूर्य बुध और शुक्र की उपस्थिति से त्रिग्रही योग बनने की बात कही गई है। इसके साथ बुधादित्य और लक्ष्मी नारायण योग का भी उल्लेख किया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे शुभ योग सुख समृद्धि और वैवाहिक जीवन में सामंजस्य के प्रतीक माने जाते हैं। हालांकि इन योगों का व्यक्तिगत जीवन पर प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और अन्य ज्योतिषीय परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकता है।

    करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त

    करवा चौथ के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। बरेली में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 56 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान महिलाएं करवा माता और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। पूजा में करवा चौथ की कथा सुनने और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करने की परंपरा है। महिलाएं सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी करती हैं और करवा में जल भरकर विधि विधान से पूजन करती हैं। शुभ मुहूर्त में पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन का इंतजार किया जाता है।

    चंद्रोदय के बाद पूरा होगा व्रत

    बरेली में इस बार चंद्रोदय रात 8 बजकर 2 मिनट पर होने का अनुमान बताया गया है। व्रत का समय सुबह 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और फिर अपने पति का चेहरा देखकर अर्घ्य देती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है। चंद्रोदय का वास्तविक समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण कुछ अलग दिखाई दे सकता है इसलिए अपने शहर के समय की जानकारी अवश्य लें।

    करवा चौथ केवल उपवास का पर्व नहीं बल्कि पति पत्नी के बीच प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन परिवार एक साथ पूजा की तैयारी करता है और त्योहार की खुशियां साझा करता है। शुभ संयोगों के बीच महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन में सुख शांति और खुशहाली की कामना करेंगी। व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए और व्रत खोलते समय हल्का भोजन तथा पर्याप्त पानी लेना चाहिए।

  • करवा चौथ के खास मौके पर बनाएं गाढ़ी और स्वादिष्ट रबड़ी वाली खीर, एक बार चखेंगे तो बार बार खाने का करेगा मन

    करवा चौथ के खास मौके पर बनाएं गाढ़ी और स्वादिष्ट रबड़ी वाली खीर, एक बार चखेंगे तो बार बार खाने का करेगा मन

    नई दिल्ली। करवा चौथ 2026 का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह से शुरू होने वाला यह व्रत शाम को पूजा और चंद्रमा के दर्शन के बाद पूरा किया जाता है। इस खास अवसर पर घरों में तरह तरह के पकवान और मिठाइयां बनाने की परंपरा भी है। अगर आप भी करवा चौथ पर व्रत खोलने के बाद परिवार को कुछ खास मीठा खिलाना चाहती हैं तो रबड़ी जैसी गाढ़ी और मलाईदार चावल की खीर एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। दूध चावल चीनी और सूखे मेवों से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद में लाजवाब होती है। इसकी खासियत है कि इसे बनाने के लिए किसी महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती और घर पर ही हलवाई जैसी खीर तैयार की जा सकती है।

    रबड़ी जैसी खीर बनाने के लिए जरूरी सामग्री

    इस स्वादिष्ट खीर को बनाने के लिए एक लीटर फुल क्रीम दूध एक चौथाई कप छोटे दाने वाले चावल आधा कप चीनी कुछ कटे हुए काजू बादाम और पिस्ता आधा चम्मच इलायची पाउडर और थोड़े से केसर के धागों की जरूरत होगी। केसर को दो से तीन चम्मच गर्म दूध में भिगोकर रख लें ताकि उसका रंग और खुशबू अच्छी तरह निकल आए। आप अपनी पसंद के अनुसार सूखे मेवों की मात्रा कम या ज्यादा भी कर सकती हैं। खीर को ज्यादा मलाईदार बनाने के लिए फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल करना बेहतर रहेगा।

    इस तरह तैयार करें गाढ़ी और मलाईदार खीर

    सबसे पहले चावलों को साफ पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें। इसके बाद उन्हें करीब 20 से 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रख दें। अब एक भारी तले वाला बर्तन लें और उसमें दूध डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। दूध में उबाल आने लगे तो गैस की आंच धीमी कर दें। भीगे हुए चावलों का पानी निकालकर उन्हें दूध में डाल दें। अब चावल और दूध को धीमी आंच पर पकने दें। इस दौरान खीर को समय समय पर चलाते रहें ताकि दूध बर्तन की तली में चिपके नहीं और चावल अच्छी तरह पक जाएं।

    खीर को रबड़ी जैसा स्वाद और गाढ़ापन देने के लिए दूध के बर्तन के किनारों पर जमने वाली मलाई को करछी से खुरचकर वापस खीर में मिलाते रहें। धीमी आंच पर दूध पकने से उसका गाढ़ापन बढ़ेगा और चावल भी अच्छी तरह गल जाएंगे। ध्यान रखें कि खीर को जल्दबाजी में तेज आंच पर न पकाएं क्योंकि इससे दूध जल सकता है और स्वाद भी खराब हो सकता है।

    जब चावल पूरी तरह पक जाएं और दूध गाढ़ा दिखाई देने लगे तो इसमें केसर वाला दूध और बारीक कटे हुए काजू बादाम तथा पिस्ता डाल दें। इसके बाद खीर को करीब पांच मिनट तक और पकाएं। अब इसमें चीनी और इलायची पाउडर मिलाकर दो से तीन मिनट तक पकने दें। चीनी डालने के बाद खीर को लगातार चलाते रहें ताकि वह बर्तन के नीचे न लगे। जब खीर मलाईदार और गाढ़ी हो जाए तो गैस बंद कर दें। ध्यान रखें कि ठंडा होने के बाद खीर और ज्यादा गाढ़ी हो जाती है इसलिए इसे पकाते समय थोड़ा तरल बनाए रखना अच्छा रहेगा।

    करवा चौथ पर मीठे में परोसें शाही खीर

    तैयार खीर को कुछ देर ठंडा होने दें और फिर कटे हुए मेवों से सजाकर परोसें। अगर आपको ठंडी खीर पसंद है तो इसे कुछ समय के लिए फ्रिज में भी रख सकती हैं। वहीं गर्म खीर खाने के शौकीन लोग इसे हल्का ठंडा होने के बाद भी परोस सकते हैं। करवा चौथ पर पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलते समय यह मिठाई परिवार के साथ खुशियों के पल बिताने का अच्छा माध्यम बन सकती है। घर पर बनी इस खीर में दूध की मलाई के साथ केसर और इलायची की खुशबू इसे खास बनाती है। इस बार करवा चौथ पर बाजार की मिठाई लाने के बजाय घर पर रबड़ी जैसी मलाईदार खीर बनाकर परिवार को स्वादिष्ट सरप्राइज दे सकती हैं।

  • महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी

    महिलाओं के लिए खास है आने वाला समय करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा की जानिए पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। त्योहारों का मौसम शुरू होते ही हिंदू पंचांग में व्रत और त्योहारों की लंबी श्रृंखला भी शुरू हो जाती है। खासकर महिलाओं के लिए आने वाले दिन काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत और उपवास पड़ते हैं। करवा चौथ से लेकर अहोई अष्टमी और जितिया के बाद छठ पूजा तक कई ऐसे अवसर आने वाले हैं जिनका धार्मिक और महत्व माना जाता है। दशहरा दिवाली धनतेरस और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी इसी दौरान पड़ेंगे।

    सबसे पहले करवा चौथ का व्रत आएगा। विवाहित महिलाएं इस दिन पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार कई महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास करती हैं। शाम के समय करवा चौथ की पूजा की जाती है और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। करवा चौथ को लेकर देश के अलग अलग हिस्सों में स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर भी देखने को मिलता है।

    इसके बाद अहोई अष्टमी का व्रत आता है। यह व्रत खास तौर पर संतान की सुख समृद्धि और लंबी आयु की कामना से जुड़ा माना जाता है। माताएं इस दिन उपवास रखकर अहोई माता की पूजा करती हैं। कई स्थानों पर तारों को देखकर व्रत खोलने की परंपरा है। अहोई अष्टमी के दिन महिलाएं परिवार की सुख शांति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।

    महिलाओं के प्रमुख व्रतों में जीवित्पुत्रिका यानी जितिया व्रत का भी विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी आयु और उनकी सुरक्षा की कामना के लिए रखा जाता है। कई क्षेत्रों में महिलाएं इस दिन कठिन उपवास करती हैं। खासकर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में जितिया व्रत को लेकर विशेष धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं।

    इसके बाद छठ पूजा का पर्व आता है जो केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है लेकिन इसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। छठ व्रत में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। व्रती महिलाएं और पुरुष दोनों ही कठोर नियमों का पालन करते हैं। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। छठ पूजा खास तौर पर बिहार झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और देश के कई अन्य हिस्सों में बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

    इन व्रतों के बीच दशहरा धनतेरस दिवाली और भाई दूज जैसे प्रमुख त्योहार भी आएंगे। ऐसे में आने वाले सप्ताह धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बाजारों में भी त्योहारों की तैयारियां शुरू हो जाती हैं और घरों में पूजा पाठ के साथ खरीदारी का सिलसिला बढ़ जाता है।

    करवा चौथ अहोई अष्टमी जितिया और छठ पूजा जैसे व्रत भारतीय परंपराओं में परिवार संतान और सुख समृद्धि से जुड़ी मान्यताओं को दर्शाते हैं। अलग अलग क्षेत्रों में इनके नियम और पूजा विधियां अलग हो सकती हैं इसलिए व्रत रखने से पहले स्थानीय पंचांग या परंपरा के अनुसार तिथि और पूजा समय की जानकारी देखना उचित रहता है।