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  • बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर

    बाढ़ के बाद नेपाल पर मंडराया नया संकट, काठमांडो में खाने-पीने से ईंधन तक की सप्लाई पर असर


    काठमांडो। नेपाल में बुधवार को भोटेकोशी नदी तंत्र में आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाने के बाद अब राजधानी काठमांडो की आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। देश के प्रमुख सप्लाई रूट पृथ्वी हाईवे के बंद होने से काठमांडो घाटी में खाद्य सामग्री, ईंधन और अन्य जरूरी सामान की आवाजाही प्रभावित हुई है। हाईवे को पूरी तरह कब तक खोला जा सकेगा, इसकी अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजधानी में जरूरी वस्तुओं की नियमित आपूर्ति बनाए रखना है।

    पृथ्वी हाईवे बंद होने से काठमांडो की सप्लाई क्यों प्रभावित?

    काठमांडो के लिए नागढुंगा से भरतपुर तक पृथ्वी हाईवे का करीब 180 किलोमीटर हिस्सा बेहद महत्वपूर्ण है। इसी मार्ग के जरिए राजधानी में बड़ी मात्रा में खाद्य पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं पहुंचती हैं।

    बुधवार की बाढ़ में कम से कम 19 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं त्रिशूली कॉरिडोर और आसपास के राजमार्गों पर करीब 40 किलोमीटर सड़क बह गई। काठमांडो घाटी ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के प्रवक्ता पुलिस अधीक्षक नरेश राज सुबेदी ने बताया कि अधिकारी रास्ता बहाल करने के लिए पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं, लेकिन शुक्रवार तक हाईवे खुलने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा सामान

    सड़क विभाग के इंजीनियर राजीव मानंधर के मुताबिक शुक्रवार शाम तक गल्छी वाले हिस्से में बारी-बारी से एकतरफा यातायात शुरू कर दिया गया था। वहीं गलौंडी-घाटबेसी-जारेखेत हिस्से में दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई थी।

    हालांकि बारिश होने पर इन रास्तों को दोबारा बंद करना पड़ सकता है। भूस्खलन के बाद सड़कों पर जमा मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है और शाम पांच बजे तक अर्थमूवर मशीनों की मदद ली जा रही है। इसके अलावा कुछ वैकल्पिक मार्गों के जरिए भी काठमांडो में जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है।

    कालिमाटी बाजार में सब्जियों की आवक घटी

    पृथ्वी हाईवे बंद होने का असर काठमांडो के प्रमुख कालिमाटी फल एवं सब्जी बाजार में भी दिखाई दिया है। मंगलवार को यहां 775 टन सब्जियां, फल और मछली पहुंची थी। बुधवार को आवक 771 टन रही, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 477 टन रह गई।

    बाजार विकास बोर्ड के सूचना अधिकारी बिनय श्रेष्ठ के अनुसार पृथ्वी हाईवे से आने वाला सामान रास्ते में फंसा हुआ है। इस मार्ग से सब्जियों की आपूर्ति पूरी तरह रुक गई है, हालांकि अन्य रास्तों से कुछ सामान बाजार तक पहुंच रहा है।

    चार-पांच दिन का ईंधन स्टॉक

    हाईवे बंद होने के कारण पेट्रोल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। हालांकि नेपाल ऑयल कॉरपोरेशन ने फिलहाल लोगों को राहत दी है। निगम के मुताबिक थानकोट डिपो में मौजूद पेट्रोलियम उत्पाद चार से पांच दिन तक चलने के लिए पर्याप्त हैं।

    निगम के उप निदेशक मनोज कुमार ठाकुर ने कहा कि इस अवधि के भीतर पृथ्वी हाईवे के खुलने की उम्मीद है। इसलिए लोगों को ईंधन की उपलब्धता को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार भी जरूरी वस्तुओं और पेट्रोलियम उत्पादों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    कालाबाजारी पर सरकार की नजर

    आपदा के बीच सरकार को इस बात की भी चिंता है कि कहीं कारोबारी कृत्रिम कमी पैदा कर सामान महंगा न कर दें। वाणिज्य, आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने लोगों से बाजार में कालाबाजारी या कृत्रिम कमी से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की अपील की है।

    विभाग और स्थानीय प्रशासन बाजारों की निगरानी कर रहे हैं। वहीं उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम तथा आपदा प्रबंधन की स्थिति पर नजर रखने के लिए एक समन्वय इकाई बनाई है। संबंधित सरकारी एजेंसियों को भी इसी तरह की इकाइयां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    रसुवा से धादिंग तक भारी तबाही

    बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी तंत्र में अचानक आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी नुकसान पहुंचाया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता और प्रभावित लोगों में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।

    बाढ़ से सरकारी और निजी संपत्तियों को भी भारी नुकसान हुआ है। इसे हाल के वर्षों की बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक माना जा रहा है। सड़कों और पुलों के क्षतिग्रस्त होने से राहत अभियान के साथ-साथ राजधानी की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।

    उपभोक्ता संगठनों ने मांगी सख्ती

    उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से वैकल्पिक मार्गों के जरिए जरूरी सामान की आपूर्ति बनाए रखने और संकट का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।

    उपभोक्ता अधिकार संरक्षण-नेपाल मंच के महासचिव विष्णु प्रसाद तिमिल्सिना ने कहा कि कालाबाजारी, कृत्रिम कमी और मनमाने तरीके से कीमत बढ़ाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि संकट के समय लोगों को यह भरोसा मिलना जरूरी है कि सरकार उनके साथ है और जरूरी वस्तुओं की कमी नहीं होने दी जाएगी

  • पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    पेपर लीक के बाद नेपाल में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, सरकार ने जांच तेज कर आरोपी को किया गिरफ्तार

    नई दिल्ली । नेपाल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल त्रिभुवन विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ बिजनेस स्टडीज (एमबीएस) प्रथम सेमेस्टर का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना सामने आने के बाद बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नेपाल पुलिस ने एक शिक्षक को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दी है, जबकि सरकार ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है।

    जानकारी के अनुसार, 24 जुलाई को आयोजित एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। अगले दिन इस घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ऑनलाइन उपलब्ध था तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।

    पुलिस जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र प्रसारित करने के आरोप में संदीप सिंह नामक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह काठमांडू के दो शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम से जाने जाते हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ परीक्षा गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को संबंधित व्हाट्सएप समूह में आगे भेजा था। उसने यह भी कहा कि उसे इस घटना से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और वह केवल पहले से प्रसारित सामग्री को साझा कर रहा था। हालांकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र ने संबंधित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर दिए। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड में परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद प्रश्नपत्र की पीडीएफ साझा किए जाने के साथ-साथ उसके विस्तृत उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी गई।

    नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के बजाय एक शिक्षक से जुड़ी हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के विश्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अब छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।

  • नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नेपाल का बड़ा दांव: भारतीय इन्फ्लुएंसर्स को बुलाकर टूरिज्म बढ़ाने की तैयारी, मोदी की अपील के बाद तेज हुई हलचल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    नेपाल की बालेन शाह सरकार ने देश के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति शुरू की है, जिसमें भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को सीधे नेपाल आने का न्योता दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की थी। इस अपील के बाद क्षेत्रीय पर्यटन और यात्रा उद्योग में हलचल देखी जा रही है।

    नेपाल सरकार की इस नई पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति के तहत भारतीय यूट्यूबर्स, व्लॉगर्स, पॉडकास्ट क्रिएटर्स और डिजिटल कंटेंट निर्माताओं को नेपाल यात्रा के लिए आमंत्रित किया गया है। नेपाली दूतावास (नई दिल्ली) की ओर से 30 मई तक आवेदन मांगे गए हैं और इस पहल को भारतीय क्रिएटर्स से तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है।

    रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब नेपाल सरकार ने इस तरह सीधे भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को पर्यटन प्रचार के लिए शामिल किया है। काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ कुछ ही दिनों में 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि अंतिम तिथि तक यह आंकड़ा 1000 से ज्यादा पहुंच सकता है।

    नेपाल एयरलाइंस और होटल इंडस्ट्री ने भी इस अभियान को समर्थन दिया है। काठमांडू के कई फाइव स्टार होटलों ने चयनित इन्फ्लुएंसर्स के लिए विशेष पैकेज तैयार किए हैं। योजना के तहत चुने गए पांच इन्फ्लुएंसर्स को नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा और चितवन का दौरा कराया जाएगा, जहां वे देश की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करेंगे।

    नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की पर्यटन छवि को मजबूत करना है और भारतीय युवाओं तक सीधा संदेश पहुंचाना है।