Tag: Katni news

  • बेरोजगारी से ‘किन्नर गैंग’ तक: ट्रेनों में वसूली का नया नेटवर्क, यूपी–बिहार के युवक निकले मास्टरमाइंड

    बेरोजगारी से ‘किन्नर गैंग’ तक: ट्रेनों में वसूली का नया नेटवर्क, यूपी–बिहार के युवक निकले मास्टरमाइंड


    मध्य प्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों से वसूली के नाम पर चल रहे एक संगठित नेटवर्क का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कई किन्नर के वेश में दिखने वाले लोग असल में युवक हैं, जो बेरोजगारी और आसान कमाई के लालच में यह तरीका अपना रहे थे।

    RPF की हालिया कार्रवाई में पकड़े गए तीन संदिग्धों के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि वे महिलाएं या वास्तविक किन्नर नहीं, बल्कि युवक हैं जो पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से वेश बदलकर ट्रेनों में यात्रियों से पैसे वसूलते हैं।

    सूत्रों के अनुसार, यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा नेटवर्क है, जिसमें यूपी और बिहार के कई युवक शामिल हैं। ये लोग जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और इटारसी जैसे बड़े रेलवे जंक्शन वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं और किराए के मकानों में रहकर अपना संचालन करते हैं।

    पकड़े गए आरोपियों में कानपुर के रहने वाले आशीष (बदला हुआ नाम आशी), महेश (माही) और पिंचू (तरन्नुम) शामिल हैं। ये लोग घर से सामान्य कपड़ों में निकलते हैं, लेकिन स्टेशन के पास पहुंचते ही साड़ी और सूट पहनकर किन्नर का रूप धारण कर लेते हैं। भारी मेकअप, सिंदूर और व्यवहारिक शैली अपनाकर ये यात्रियों को भ्रमित करते हैं और वसूली करते हैं।

    RPF जांच में सामने आया कि ये लोग यात्रियों से प्रति व्यक्ति ₹10 से ₹100 तक वसूलते हैं। रोजाना इनकी कमाई ₹1,500 से ₹2,000 तक पहुंच जाती है। कई मामलों में तो ये QR कोड के जरिए डिजिटल भुगतान भी स्वीकार करते हैं।

    पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि इनमें से कुछ युवकों ने पहले नौकरी की तलाश की, लेकिन रोजगार न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया से प्रेरित होकर यह रास्ता चुना। आसान कमाई और कम कानूनी जोखिम को देखते हुए यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

    RPF अधिकारियों के अनुसार, पिछले छह महीनों में करीब 120 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 60 प्रतिशत युवक निकले हैं। यह गिरोह यात्रियों की असहज स्थिति और डर का फायदा उठाकर लगातार अवैध वसूली कर रहा था।

    इस मामले के सामने आने के बाद असली किन्नर समुदाय ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नकली वसूली करने वाले युवक पूरे समुदाय की छवि खराब कर रहे हैं और प्रशासन को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

    रेलवे सुरक्षा बल अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि इसके पीछे मौजूद बड़े गिरोह और आर्थिक कनेक्शन का पता लगाया जा सके।

  • कटनी में स्कूटी से 7 पेटी अवैध शराब जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार कर भेजे गए जेल

    कटनी में स्कूटी से 7 पेटी अवैध शराब जब्त, दो तस्कर गिरफ्तार कर भेजे गए जेल


    कटनी । कटनी जिले में अवैध शराब कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एनकेजे थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके पास से कुल 63 लीटर देशी प्लेन और मसाला शराब बरामद की है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 30 हजार रुपये बताई जा रही है। तस्करी में इस्तेमाल की जा रही स्कूटी को भी जब्त कर लिया गया है।

    यह कार्रवाई उस समय हुई जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि दो युवक स्कूटी पर भारी मात्रा में अवैध शराब लेकर झलवारा से हिरवारा की ओर जा रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रूपेन्द्र राजपूत के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और बताए गए रूट पर घेराबंदी की गई।

    घेराबंदी कर पकड़े गए आरोपी
    पुलिस टीम ने संदिग्ध स्कूटी को आते देख रोक लिया और दोनों युवकों को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान स्कूटी के आगे पैरदान और पीछे सीट पर रस्सी से बंधे कुल 7 कार्टून मिले, जिनमें अवैध देशी शराब भरी हुई थी।  दोनों आरोपी किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके बाद उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में सामने आई पहचान
    कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान सतीष चौधरी (27) और विकास चौधरी (27), निवासी झर्रा टिकुरिया, कटनी के रूप में बताई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके बाद 63 लीटर शराब और स्कूटी को जब्त कर लिया गया। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जिला जेल कटनी भेज दिया गया।

    अवैध शराब पर सख्ती जारी
    पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले में अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है ताकि अवैध कारोबार पर रोक लगाई जा सके।

  • कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला

    कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित लगभग 25 एकड़ भूमि पर यह परियोजना अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या वीआईपी कार्यक्रम के आगे बढ़ाई जा रही है।

    यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की जा रही है। हालांकि, शुरुआत से ही इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियां सामने आती रही हैं।

    लगातार विरोध के चलते टला भूमिपूजन
    स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जिले में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। विरोध के कारण इस परियोजना का भूमिपूजन दो बार टालना पड़ा। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विरोध की आशंका के चलते उसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने बिना किसी वीआईपी आयोजन के सीधे निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया है।

    सरकार का तर्क: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा मजबूत आधार
    सरकारी पक्ष का मानना है कि यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही जिले में मिल सकेंगे। पीपीपी मॉडल को लेकर सरकार का दावा है कि इससे परियोजना तेजी से पूरी होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।

    जनता की चिंता: निजीकरण पर उठे सवाल
    हालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस मॉडल को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को निजी प्रबंधन के हवाले करने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि इलाज और मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए पहुंच कठिन हो जाएगी।

    “शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो वोट नहीं” का नारा
    स्थानीय समाजसेवी विंधेश्वरी पटेल ने कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन शासकीय नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा और इसका नारा होगा- “कटनी को शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।”

    आगे की राह पर नजर
    फिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें पहले चरण में बाउंड्री वॉल का निर्माण और भूमि की सुरक्षा शामिल है। प्रशासन का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक विकास परियोजना है, जबकि विरोधी इसे निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप लेता है या सरकार और जनता के बीच कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।

  • जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव

    जातिसूचक टिप्पणी के आरोप से गरमाया मामला, प्रशासन पर दबाव


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले के कोतवाली थाने में दर्ज एक FIR को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि FIR में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने शिकायत दर्ज करते समय जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले के सामने आने के बाद सामाजिक संगठन भीम आर्मी आजाद समाज पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने कटनी पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही उन्होंने FIR से आपत्तिजनक शब्दों को हटाने की भी अपील की है।

    30 मई की घटना से शुरू हुआ मामला
    मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 30 मई का है। कोतवाली थाना क्षेत्र के खरहनी फाटक निवासी अशोक अहिरवार (42) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पड़ोसियों मुरेरी चौधरी, उनकी पत्नी, अजुदन चौधरी और संजय चौधरी ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। पीड़ित जब रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो ड्यूटी पर मौजूद प्रधान आरक्षक नितिन जायसवाल ने उनकी शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की। आरोप है कि इसी FIR के विवरण में मोहल्ले के नाम का उल्लेख करते समय अनुचित रूप से जातिसूचक शब्द शामिल कर दिए गए।

    सामाजिक संगठन का विरोध, कार्रवाई की मांग
    घटना सामने आने के बाद भीम आर्मी आजाद एकता मिशन ने इसे अनुसूचित जाति समाज का अपमान बताया है। संगठन के जिला उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने कहा कि पुलिस का कार्य निष्पक्ष रूप से पीड़ित की सहायता करना और समानता बनाए रखना है, लेकिन इस तरह के शब्दों का उपयोग गंभीर आपत्ति का विषय है। उन्होंने मांग की कि संबंधित प्रधान आरक्षक पर तत्काल कार्रवाई की जाए और FIR रिकॉर्ड को संशोधित कर आपत्तिजनक शब्द हटाए जाएं।

    पुलिस अधीक्षक का बयान, जांच के आदेश
    इस मामले पर पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संभवतः FIR में वही विवरण दर्ज किया गया होगा जो शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    जांच पर टिकी निगाहें
    फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। एक ओर सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब

    भू-अधिकार की लड़ाई में सड़क पर उतरे ग्रामीण, प्रशासन से जवाब तलब


    मध्य प्रदेश । कटनी जिले में मंगलवार को आदिवासी समुदाय के सैकड़ों लोगों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी वन विभाग द्वारा उनकी जमीनों के कथित अधिग्रहण की कार्रवाई से नाराज थे। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी जमीनों पर अधिकार बहाल करने की मांग उठाई।

    प्रदर्शन का केंद्र रीठी तहसील के अंतर्गत आने वाला ग्राम ललितपुर रहा, जहां के कई आदिवासी परिवार वर्षों से खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। धरने में शामिल ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनके भू-अधिकार पट्टे वापस नहीं किए गए तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    1989 से काबिज जमीन पर अब विवाद, वन विभाग पर आरोप
    प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि शासन द्वारा उन्हें वर्ष 1989 में विधिवत भू-अधिकार पट्टे दिए गए थे। इन पट्टों के आधार पर वे लगातार लगभग तीन दशकों से अधिक समय से जमीन पर काबिज हैं और खेती कर अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं।आदिवासी परिवारों का आरोप है कि अब वन विभाग उनकी इसी जमीन को अपना बताकर जबरन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

    पीड़ितों का दर्द: “रोजी-रोटी छीनी जा रही है”
    प्रदर्शन में शामिल पीड़ित बृजलाल ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से इस जमीन पर मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस जमीन पर खून-पसीना बहाया है। शासन ने ही हमें पट्टा दिया था, अब वन विभाग इसे अपनी जमीन बता रहा है। यह हमारे साथ अन्याय है और हमारी रोजी-रोटी छीनी जा रही है।”

    कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय जांच की मांग
    धरना प्रदर्शन के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसे डिप्टी कलेक्टर को दिया गया। ज्ञापन में वन विभाग की कार्रवाई को पूरी तरह से अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रदर्शनकारियों ने अपने भू-अधिकार पट्टों को यथावत रखने और वन विभाग के हस्तक्षेप पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की कि उन्हें उनकी जमीन पर शांतिपूर्वक खेती करने का अधिकार फिर से सुनिश्चित किया जाए।

    प्रशासन पर निगाहें, आंदोलन की चेतावनी
    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

  • ठेका व्यवस्था पर सवाल, खन्ना बंजारी साइडिंग में श्रमिकों की अनदेखी से बढ़ा संकट

    ठेका व्यवस्था पर सवाल, खन्ना बंजारी साइडिंग में श्रमिकों की अनदेखी से बढ़ा संकट


    कटनी । कटनी जिले के बरही क्षेत्र स्थित खन्ना बंजारी रेलवे साइडिंग पर मजदूरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां करीब 800 से अधिक श्रमिक बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के जोखिम भरे हालात में काम करने को मजबूर हैं। भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हैं कि कई मजदूरों को राहत पाने के लिए मालगाड़ी के नीचे बैठकर आराम करना पड़ रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका लगातार बनी हुई है।

    रेलवे साइडिंग पर गिट्टी लोडिंग का कार्य चौबीसों घंटे जारी रहता है। इस काम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हैं। एक रैक में मौजूद 59 डिब्बों को भरने के लिए लगभग 826 मजदूरों की जरूरत होती है, जो लगातार भारी श्रम करते हुए अपनी जीविका चलाते हैं। लेकिन इस कठिन कार्य के बावजूद उन्हें सुरक्षा के नाम पर लगभग कुछ भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।

    नियमानुसार इस तरह के उच्च जोखिम वाले कार्यों में मजदूरों को दस्ताने, जूते, मास्क और अन्य सुरक्षा उपकरण दिए जाने चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार और माइंस प्रबंधन सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी कर रहे हैं। न केवल सुरक्षा उपकरणों की कमी है, बल्कि पीने के लिए ठंडा पानी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे भीषण गर्मी में उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

    मजदूरों का कहना है कि उन्हें केवल गर्मी ही नहीं, बल्कि कड़कड़ाती ठंड और बारिश में भी इसी तरह बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करना पड़ता है। गिट्टी लोडिंग के दौरान उड़ने वाली बारीक धूल लगातार उनके शरीर और फेफड़ों में जा रही है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। कई मजदूरों ने आशंका जताई है कि वे सिलिकोसिस जैसी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ सकते हैं, जो लंबे समय में जानलेवा साबित हो सकती है।

    श्रमिकों में अशोक कोल, प्रेम बाई और वंदना सहित कई मजदूरों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। काम के दौरान लगातार दुर्घटना का खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी हालात में काम करना पड़ रहा है।

    इस पूरे मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों ने प्रतिक्रिया दी है कि स्थिति को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा है कि जल्द ही माइंस प्रबंधन और संबंधित ठेकेदारों को तलब किया जाएगा और पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। साथ ही श्रमिकों की सुरक्षा, उन्हें मिलने वाली सुविधाओं और नियमों के पालन की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी और समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

    फिलहाल खन्ना बंजारी साइडिंग पर काम कर रहे मजदूरों की स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच एक गंभीर सवाल बनकर खड़ी है, जिसका समाधान अब समय की मांग बन चुका है।

  • दबंगों ने महंत पर किया हमला, गला दबाकर हत्या की कोशिश का आरोप

    दबंगों ने महंत पर किया हमला, गला दबाकर हत्या की कोशिश का आरोप


    मध्य प्रदेश । Katni जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चिरहुली चांदन में रविवार शाम एक गंभीर हिंसक घटना सामने आई, जहां वेंकटेश्वर मठ की जमीन के सीमांकन के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट और जानलेवा हमले तक पहुंच गया।

    जानकारी के अनुसार, प्रयागराज स्थित वेंकटेश्वर मठ के महंत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल अपनी संस्था की लगभग 5 एकड़ जमीन के सीमांकन के लिए राजस्व विभाग की टीम और स्थानीय कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे थे। प्रक्रिया शांतिपूर्वक चल रही थी, लेकिन इसी दौरान सटे हुए भूमि मालिकों ने वहां पहुंचकर विवाद शुरू कर दिया।

    आरोप है कि हरि प्रसाद उर्फ भोला पांडेय और अवधेश पांडेय ने जमीन को लेकर आपत्ति जताई और मौके पर गाली-गलौज शुरू कर दी। इसके बाद विवाद इतना बढ़ा कि उन्होंने फोन कर अपने अन्य परिजनों को भी बुला लिया, जिसके बाद माहौल पूरी तरह हिंसक हो गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाबू पांडेय और सचिन पांडेय ने मौके पर पहुंचकर मठ के सेवादार संतलाल विश्वकर्मा पर लाठी-डंडों और लात-घूसों से हमला कर दिया। घटना के दौरान महंत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनका गला दबाकर जान से मारने की कोशिश भी की।

    इस हमले में सेवादार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनके गले, चेहरे और पैरों पर गंभीर चोटें आई हैं। मौके पर मौजूद अन्य लोगों के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया गया और जान बचाई जा सकी।

    Katni पुलिस ने पीड़ित पक्ष की शिकायत और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर तुरंत कार्रवाई करते हुए चार नामजद आरोपियों हरि प्रसाद उर्फ भोला पांडेय, अवधेश पांडेय, बाबू पांडेय और सचिन पांडेय के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों में बढ़ती हिंसा और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कटनी में दुर्लभ कछुओं के गायब होने से हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन

    कटनी में दुर्लभ कछुओं के गायब होने से हड़कंप, जांच में जुटा प्रशासन


    मध्य प्रदेश । Katni में ऐतिहासिक लल्लू भैया की तलैया के गहरीकरण कार्य के दौरान सामने आई एक घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रविवार को खुदाई के दौरान तीन दुर्लभ प्रजाति के कछुए पाए गए थे, जिन्हें तत्काल मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने एक तसले में सुरक्षित रखा था। इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कछुओं को जीवित अवस्था में संभालते हुए देखा जा सकता है।

    लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया। कुछ ही समय में ये तीनों दुर्लभ कछुए अचानक लापता हो गए। न तो उनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है और न ही यह स्पष्ट जानकारी कि उन्हें वन विभाग को सौंपा गया या कहीं और ले जाया गया। इस घटना के बाद वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण प्रजाति के जीवों के साथ इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है। आशंका जताई जा रही है कि या तो इन कछुओं को अनजाने में कहीं छोड़ दिया गया या फिर उनकी अवैध तस्करी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह घटना सीधे तौर पर वन्यजीव संरक्षण नियमों की अनदेखी को दर्शाती है।

    Katni में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कछुओं को संरक्षित श्रेणी में रखा गया है। कानून के अनुसार किसी भी जंगली कछुए को नुकसान पहुंचाना, उसे गायब करना या अवैध रूप से अपने पास रखना एक गंभीर अपराध है, जिसमें 3 से 7 वर्ष तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

    नियमों के मुताबिक, यदि किसी भी निर्माण या रिहायशी क्षेत्र में कोई वन्यजीव मिलता है, तो उसकी तुरंत सूचना वन विभाग को देना और सुरक्षित रूप से उन्हें सौंपना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं होने से नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने स्वीकार किया है कि तलैया की खुदाई के दौरान कछुए मिले थे, लेकिन फिलहाल वे कहां हैं, इसकी जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कराई जा रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

    यह घटना केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं मानी जा रही, बल्कि वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर करती है। अब सवाल यह है कि आखिर ये दुर्लभ कछुए गए कहां और इसके पीछे जिम्मेदार कौन है।

  • मानसून से पहले नगर निगम का एक्शन, सिल्वर टॉकीज रोड पर ढहाया गया खतरनाक भवन

    मानसून से पहले नगर निगम का एक्शन, सिल्वर टॉकीज रोड पर ढहाया गया खतरनाक भवन


    कटनी । कटनी नगर निगम ने मानसून से पहले संभावित हादसों को रोकने के उद्देश्य से जर्जर भवनों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में रविवार को सिल्वर टॉकीज रोड स्थित एक पुराने और बेहद जर्जर भवन को हटाने की कार्रवाई की गई। यह भवन बॉम्बे टेलर के पास स्थित था और लंबे समय से खराब हालत में खड़ा हुआ था, जिससे आसपास के लोगों में हमेशा खतरे की आशंका बनी रहती थी।

    यह इलाका शहर के व्यावसायिक क्षेत्र को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है, जहां दिनभर बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों का आवागमन रहता है। स्थानीय निवासियों और दुकानदारों द्वारा इस भवन को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं कि मानसून के दौरान इसके गिरने का खतरा बढ़ सकता है और किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम प्रशासन ने भवन को हटाने का निर्णय लिया। निगमायुक्त के निर्देश पर नगर निगम का अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता, लोक निर्माण विभाग की तकनीकी टीम और पुलिस बल मौके पर पहुंचा और पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया।

    भवन को गिराने के लिए भारी मशीनों जैसे जेसीबी, पोकलेन, क्रेन और हाइड्रोलिक कटर का उपयोग किया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र में कड़ी व्यवस्था की गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या अव्यवस्था न हो। कार्रवाई के दौरान आसपास के मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया और यातायात को वैकल्पिक रास्तों से डायवर्ट किया गया।

    स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई को राहतभरा कदम बताया है, क्योंकि लंबे समय से यह जर्जर भवन क्षेत्र के लिए खतरा बना हुआ था। व्यापारियों और राहगीरों का कहना है कि बारिश के मौसम में इसकी स्थिति और भी खतरनाक हो सकती थी।

    नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मानसून को देखते हुए शहर में चिन्हित सभी जर्जर और असुरक्षित भवनों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।