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  • माता वैष्णो देवी हेलीपैड टर्मिनल में तड़के लगी आग, टिकट और डोनेशन काउंटर समेत कॉफी शॉप का सामान जलकर राख

    माता वैष्णो देवी हेलीपैड टर्मिनल में तड़के लगी आग, टिकट और डोनेशन काउंटर समेत कॉफी शॉप का सामान जलकर राख

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित माता वैष्णो देवी के बेस कैंप कटड़ा स्थित हेलीपैड टर्मिनल में कल तड़के करीब 3:15 बजे आग लग गई। इसकी चपेट में आने से टिकट बुकिंग काउंटर, डोनेशन काउंटर और एक कॉफी शॉप का सारा सामान जल गया। घटना के समय टर्मिनल बंद था और यात्रियों की आवाजाही नहीं थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

    त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित विश्व प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलीपैड टर्मिनल एक बेहद महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र है। यह एक ट्रांजिट पॉइंट है और यहां से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिर की ओर रवाना होते हैं। हेलिकॉप्टर सेवा से संबंधित टिकटों की बुकिंग, यात्रियों का पंजीकरण, सुरक्षा जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं इस ट्रांजिट पॉइंट पर पूरी की जाती हैं।

    आग की सूचना मिलते ही हेलीपैड के कर्मचारी, वहां मौजूद सुरक्षा कर्मी और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीम तुरंत हरकत में आ गई। त्वरित कार्रवाई के चलते 30 मिनट में आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। दमकल कर्मियों ने आग को टर्मिनल के अन्य संवेदनशील हिस्सों में फैलने से रोक लिया, अन्यथा नुकसान कहीं अधिक हो सकता था। घटना के बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों ने मौके का मुआयना कर स्थिति का जायजा लिया है। अधिकारियों ने कहा कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है।

    महत्वपूर्ण दस्तावेज, टिकट काउंटर के कुछ कंप्यूटर जले

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि महत्वपूर्ण दस्तावेज, टिकट काउंटर के कुछ कंप्यूटर और अन्य सामान कुछ ही देर में जलकर राख हो गए। आग से टर्मिनल को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचा है। आग के चलते सुबह हेलीकॉप्टर भी करीब डेढ़ घंटे देरी से शुरू हो सका। सामान्य परिस्थितियों में हेलीकॉप्टर सुबह सात बजे से उड़ान भरने लगते हैं।

  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि