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  • सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर उठे सवाल, मौलाना ने शरीयत का हवाला देकर दिया बड़ा बयान, जानिए पूरा मामला

    सारा अली खान के केदारनाथ दौरे पर उठे सवाल, मौलाना ने शरीयत का हवाला देकर दिया बड़ा बयान, जानिए पूरा मामला

    नई दिल्ली । अभिनेत्री सारा अली खान एक बार फिर केदारनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा करने को लेकर विवादों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश के बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उनके मंदिर में पूजा करने पर आपत्ति जताई है। मौलाना ने इस मामले में फतवा जारी करते हुए कहा कि इस्लाम और शरीयत के अनुसार किसी मुसलमान का दूसरे धर्म के धार्मिक स्थल पर जाकर वहां की परंपरा के मुताबिक पूजा करना जायज नहीं है। उन्होंने सारा से अपने इस कदम के लिए अल्लाह से माफी मांगने और तौबा करने की बात भी कही है।

    जानकारी के मुताबिक, 25 अक्टूबर को सारा अली खान को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते देखा गया था। इस दौरान वह मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की कतार में अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं। दर्शन और पूजा करने के बाद उनकी एक तस्वीर और वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह मंदिर के बाहर हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दीं। उनके इसी धार्मिक दौरे को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।

    मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने वीडियो बयान में कहा कि कई युवाओं ने उनसे यह सवाल किया था कि क्या सारा अली खान का केदारनाथ मंदिर में जाकर पूजा करना शरीयत के मुताबिक सही है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे धर्म की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार पूजा करना इस्लामिक कानून के तहत जायज नहीं माना जाता। उन्होंने इसे हराम बताते हुए अभिनेत्री से अल्लाह के सामने तौबा करने की सलाह दी। मौलाना के मुताबिक, सारा को अपने इस कदम के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    सारा अली खान का केदारनाथ जाना कोई पहली घटना नहीं है। अभिनेत्री पिछले चार वर्षों से लगातार इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर पहुंच रही हैं। उनकी पहली फिल्म भी केदारनाथ नाम से ही रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ काम किया था। वर्ष 2018 में फिल्म रिलीज होने के समय भी सारा को उत्तराखंड में विरोध का सामना करना पड़ा था। उस दौरान कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने फिल्म और अभिनेत्री की धार्मिक पहचान को लेकर आपत्ति जताई थी।

    सारा अली खान अभिनेत्री अमृता सिंह और अभिनेता सैफ अली खान की बेटी हैं। वह कई मौकों पर धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जाती रही हैं। केदारनाथ में उनकी मौजूदगी और पूजा को लेकर समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। ताजा मामला भी इसी धार्मिक यात्रा से जुड़ा है, जिसमें मौलाना की टिप्पणी के बाद विवाद ने नया रूप ले लिया है।

    इस बीच बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने गैर-हिंदू श्रद्धालुओं के लिए दर्शन और पूजा से पहले शपथ-पत्र जमा करने की व्यवस्था लागू की है। इस नियम के तहत मंदिर में पूजा करने के इच्छुक गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को पहले निर्धारित शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया गया है।

    समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रंगार ने बताया कि सारा अली खान की टीम ने उनके केदारनाथ दौरे से पहले आवश्यक शपथ-पत्र जमा कराया था। इस तरह उनके दौरे से संबंधित औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई थी। अब मौलाना की ओर से जारी फतवे के बाद अभिनेत्री की केदारनाथ यात्रा एक बार फिर धार्मिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गई है।

  • Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल

    Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल


    रुद्रप्रयाग।
    केदारनाथ (Kedarnath)- बासुकीताल ट्रेक (Vasuki Taal Trek) पर गए पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता हो गया। इनमें दो पीएसी जवान (Two PAC personnel) भी शामिल हैं। दल से संपर्क टूटने के बाद मंगलवार को रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। इनमें से एक ट्रेकर के परिजन यशवंत सिंह चौहान (Yashwant Singh Chauhan) ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) को सूचना दी कि उनका भाई प्रवेश चौहान अपने पांच साथियों के साथ 25 सितंबर को केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए थे। दल की योजना ओडिन कॉल होते हुए गंगोत्री पहुंचने की थी। परिजनों का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

    जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस नियंत्रण कक्ष और वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर को अवगत कराया गया। साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी से समन्वय स्थापित किया गया।


    कौन-कौन हैं लापता

    लापता ट्रेकर्स में अमित फर्सवाण (40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार), नवीन रावत (40वीं वाहिनी पीएसी रुद्रप्रयाग), प्रवेश चौहान (फॉरेस्टर, उत्तरकाशी), विवेक (निवासी जग्गी बगवान) और संजय सिंह रावत (पशुपालन विभाग केदारनाथ) शामिल हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमों ने खोजबीन शुरू कर दी है। हेलीकॉप्टर से भी सर्च अभियान चलाया गया किन्तु कम दृश्यता से अभियान स्थगित करना पड़ा।


    कालिंदी पास पर रेस्क्यू पूरा, 67 ट्रेकर्स निकाले

    उत्तरकाशी। कालिंदी पास और ओडिन कॉल क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के बीच फंसे 139 पर्वतारोही, ट्रेकर्स और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षित वापसी के लिए मंगलवार को रेस्क्यू अभियान चलाया गया। दूसरे दिन भी 27 पर्वतारोही, ट्रेकरों और पोर्टर्स को हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित निकाला गया। इसके साथ मंगलवार दोपहर तक तक यह अभियान पूरा हो गया है। दूसरी ओर क्षेत्र में पर्वतारोहण अभियानों पर गए 72 पर्वतारोहियों और ट्रेकरों ने अभियान जारी रखने का निश्चय किया है।

    उनका कहना है कि वे स्वयं वापस लौट जाएंगे। अभियान में अब तक कुल 67 सदस्यों को हेलीकॉप्टरों से निकाला जा चुका है। इनमें ओडिन कॉल पास से 29, जोगिन वन से आठ, सतोपंथ से 08, कालिंदी पास से 19 और वासुकीताल से तीन लोग शामिल हैं। सभी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि गत सप्ताह बारिश-बर्फबारी से 139 ट्रेकर फंस गए थे।


    सुरक्षित निकाले गए 27 ट्रेकर्स

    सोमवार को पहले दिन 40 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। मौसम अनुकूल न होने पर अभियान रोकना पड़ा। मंगलवार को मौसम साफ होने पर सुबह से फिर अभियान शुरू किया गया। इस दौरान कालिंदी पास से आठ, जोगिन वन से आठ और सतोपंथ पीक बेस कैंप से नौ ट्रेकर्स को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित हर्षिल लाया गया। वासुकीताल क्षेत्र से दो आर्मी पोर्टर्स को भी रेस्क्यू किया गया।

  • केदारनाथ में 5 माह में निकला 50.3 मीट्रिक टन कचरा…. पिछले पूरे साल से ढाई गुना ज्यादा

    केदारनाथ में 5 माह में निकला 50.3 मीट्रिक टन कचरा…. पिछले पूरे साल से ढाई गुना ज्यादा


    देहरादून।
    केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) से इस साल कचरे के बढ़ते आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं. दरअसल, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच यहां 50.30 मीट्रिक टन कचरा (50.30 Metric Tonnes Waste) निकला है. यह कचरा पिछले साल पूरे टूरिस्ट सीजन (Tourist season) में जुटाए गए कचरे से ढाई गुना से भी ज्यादा है।

    यह जानकारी नगर पंचायत ने आरटीआई के जवाब में दी है. दरअसल, नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने केदारनाथ में कचरे को लेकर यह सवाल उठाया था. जवाब मिलने के बाद केदारनाथ की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण पर फिर बहस शुरू हो गई है।

    पिछले तीन सालों के मुकाबले तेजी से बढ़ा कचरा
    नगर पंचायत की ओर से जारी आकंड़ो के मुताबिक केदारनाथ में 2023 में 32.58 मीट्रिक टन कचरा निकला था. 2024 में यह आंकड़ा 26.10 मीट्रिक टन रहा. 2025 में कचरा और घटकर 21.40 मीट्रिक टन रह गया था. लेकिन 2026 में सिर्फ पांच महीनों में ही 50.30 मीट्रिक टन कचरा निकल गया।

    2026 का यह आकंड़ा 2023 के कुल कचरे से करीब 54 प्रतिशत ज्यादा है. 2024 के मुकाबले यह लगभग 93 प्रतिशत ज्यादा है. 2025 की तुलना में यह करीब 135 प्रतिशत ज्यादा है.

    महीनेवार आंकड़े भी यही कहानी बता रहे हैं. अप्रैल 2026 में 1.7 मीट्रिक टन कचरा निकला. मई में यह बढ़कर 16.3 मीट्रिक टन हो गया. वहीं जून में 11.5 मीट्रिक टन, जुलाई में 10.5 मीट्रिक टन और अगस्त में 10.3 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया. मई का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा. इससे साफ है कि तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ कचरा भी तेजी से बढ़ रहा है.


    पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक का निपटान भी मुश्किल

    नगर पंचायत ने प्लास्टिक कचरे का भी ब्योरा दिया है. इन आकंड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकला है. इसमें से 18.5 मीट्रिक टन, यानी 92.5 प्रतिशत, प्रोसेस कर दिया गया है. करीब 1.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक अभी बचा हुआ है. यह आंकड़ा बताता है कि प्लास्टिक का दबाव भी कम नहीं है. पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक का निपटान और भी मुश्किल हो जाता है।

    नगर पंचायत का कहना है कि केदारनाथ में लैंडफिल की कुल क्षमता 30,000 वर्ग फुट है. इसमें 28,000 वर्ग फुट जगह अभी बची हुई है. पिछले पांच साल में केदारनाथ में चार लैंडफिल बनाए गए हैं. लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता का कहना है कि बढ़ते कचरे के बीच लैंडफिल पर निर्भरता हिमालयी पर्यावरण के लिए खतरनाक हो सकती है. इतने संवेदनशील क्षेत्र में यह हाल किसी गंभीर चेतावनी से कम नहीं है।

    आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने कहा कि इस साल अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके हैं. इतनी बड़ी भीड़ से वहां की सफाई और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है. गुप्ता ने कहा कि हमें ही अपने पवित्र और संवेदनशील तीर्थ स्थान को कचरे का ढेर बनने से बचाना होगा. यात्रा व्यवस्था के साथ पर्यावरण सुरक्षा को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा।

  • केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    केदारनाथ गर्भगृह की वायरल रील से मचा हड़कंप, मंदिर समिति ने जांच शुरू कर कार्रवाई के संकेत दिए

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के केदारनाथ धाम से गर्भगृह से जुड़ा एक कथित वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर सामने आई इस रील को लेकर मंदिर की धार्मिक मर्यादा और निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन पर सवाल उठ रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए बद्री-केदार मंदिर समिति ने वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करने वाले लोगों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    केदारनाथ धाम में इन दिनों यात्रा का दौर जारी है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी बीच गर्भगृह से संबंधित वीडियो और रील सोशल मीडिया पर सामने आने लगीं। इनमें से एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद मंदिर व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर गया।

    बताया गया है कि ‘हर्षित किचरा’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल से गर्भगृह के अंदर का वीडियो पोस्ट किया गया था। वीडियो सामने आने के बाद इसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। इसके बाद मंदिर के भीतर वीडियो बनाने की अनुमति और वहां लागू नियमों के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई।

    मामले पर बद्री-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने गंभीरता जताई है। उन्होंने कहा कि गर्भगृह से संबंधित वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वालों को चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे वीडियो की निगरानी भी की जा रही है।

    मंदिर समिति की ओर से पूरे मामले के कानूनी और धार्मिक पहलुओं की भी जांच कराई जा रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि वीडियो किस परिस्थिति में बनाया गया और मंदिर में लागू नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि जांच के दौरान मंदिर समिति या मंदिर की व्यवस्था से जुड़े किसी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यानी जांच का दायरा केवल वीडियो बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रखा जाएगा।

    गर्भगृह मंदिर का अत्यंत महत्वपूर्ण और धार्मिक रूप से संवेदनशील हिस्सा माना जाता है। ऐसे स्थान से वीडियो सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के बीच भी इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर व्यवस्था से जुड़े नियमों का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं और पूजा की निर्धारित प्रक्रिया की मर्यादा बनाए रखना है।

    फिलहाल मंदिर समिति की जांच जारी है और वायरल वीडियो से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि वीडियो किसने बनाया, उसे किस तरह सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया और इस दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं से जुड़े किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।

    मंदिर समिति ने संकेत दिया है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। साथ ही समिति की ओर से यह संदेश भी दिया गया है कि धार्मिक स्थल की व्यवस्था और निर्धारित नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।

  • Chardham Yatra: केदारनाथ में उमड़ रही भारी भीड़…वीडियो देख CM धामी ने किया बड़ा ऐलान

    Chardham Yatra: केदारनाथ में उमड़ रही भारी भीड़…वीडियो देख CM धामी ने किया बड़ा ऐलान


    देहरादून।
    पिछले दिनों केदारनाथ दर्शन (Kedarnath Darshan) को लेकर लोगों की भारी-भरकम भीड़ और रोते-बिलखते श्रद्धालुओं (Devotees.) की आपबीती वाले वायरल वीडियो सामने आए थे। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami.) ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान धामों की धारण क्षमता के अनुरूप दर्शन को लेकर व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्होंने चारधाम यात्रा को लेकर अधिकारियों को कई निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धामों में दर्शन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें। किसी भी धाम या पड़ाव के लिए तय क्षमता से अधिक लोगों के आने की स्थिति में नीचे के होल्डिंग एरिया-प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों व श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित की जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को भेजा जाए ताकि धामों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।


    भीड़ नियंत्रण पर क्या प्लान

    सीएम ने कहा कि भीड़ नियंत्रण के तहत श्रद्धालुओं को रोकने पर उन्हें इस के कारण, संभावित प्रतीक्षा समय और आगे की व्यवस्था की सूचना नियमित उपलब्ध कराई जाए। यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में जानकारी के अभाव का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एफएम रेडियो से सूचनाएं पहुंचाई जाएं। मौसम में बदलाव, सड़क बंद होने, यातायात जाम या दर्शन में देरी जैसी स्थितियों के बारे में यात्रियों को समय रहते बताया जाए ताकि उनमें भ्रम और असंतोष पैदा न हो। सीएम ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय समेत सभी जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


    रात 10 से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों पर रोक

    चारधाम यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अफसरों को यह व्यवस्था सख्ती से लागू करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि, ट्रक और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात के समय संचालन की अनुमति दी जाएगी। उनके अनुसार, चारधाम यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां प्रतिकूल मौसम की सबसे बड़ी चुनौती होगी। लिहाजा, संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड व सैटेलाइट फोन के साथ एम्बुलेंस और राहत-बचाव के जरूरी उपकरणों की व्यवस्था कराई जाए। सभी अफसरों को फील्ड में रहकर सारे इंतजाम का निरीक्षण और श्रद्धालुओं को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


    दिन में मालवाहक वाहनों पर रोक

    चारधाम यात्रा रूट पर दिन में मध्यम व भारी मालवाहक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। तीर्थयात्रियों को जाम से निजात के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चारधाम यात्रा के नोडल अफसर संदीप सैनी ने यह आदेश किए।


    हेली एम्बुलेंस के लिए नोडल अफसर बनेंगे

    मुख्यमंत्री ने गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार दिलाने के लिए हेली एम्बुलेंस के लिए राज्य स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर डीएम समन्वय बनाकर मरीजों को मदद मुहैया करवा सकेंगे। उन्होंने केदारनाथ पैदल मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शेड और बारिश-धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था के साथ स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। इस बैठक में मंत्री सतपाल महाराज, भरत सिंह चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन आदि मौजूद रहे।


    होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में अनिवार्य होगी रेट लिस्ट

    मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग पर संचालित होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग को कहा। गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को नियमित समीक्षा, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही इस यात्रा से जुड़े जिलों के जिला अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा प्रबंधन की निरंतर निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया।

  • चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

    चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है।

    हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।

    चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

    सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है।

    स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें।

    चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

    आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

  • पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा

    पंच केदार के दर्शन से मिलता है पुण्य फल, जानिए भगवान शिव के पांच पवित्र धामों की महिमा


    नई दिल्ली। देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि माना जाता है। यहां स्थित चारधाम यात्रा जितनी प्रसिद्ध है, उतनी ही खास मानी जाती है पंच केदार यात्रा। पंच केदार भगवान शिव को समर्पित पांच पवित्र मंदिरों का समूह है, जिनका हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन मंदिरों के दर्शन करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन धामों की यात्रा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

    पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की शरण में पहुंचे। लेकिन भगवान शिव पांडवों से नाराज थे और उनसे मिलने से बचने के लिए बैल का रूप धारण कर उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में चले गए। जब पांडवों ने उनका पीछा किया, तब शिवजी बैल के रूप में धरती में समाने लगे। इसी दौरान उनके शरीर के अलग-अलग अंग पांच स्थानों पर प्रकट हुए। यही पांच स्थान आगे चलकर पंच केदार कहलाए।

    इनमें सबसे प्रमुख और प्रथम केदार केदारनाथ धाम है, जहां भगवान शिव के पृष्ठ भाग की पूजा की जाती है। रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    दूसरा केदार मध्यमहेश्वर है, जहां भगवान शिव की नाभि की पूजा होती है। करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर चौखंबा पर्वत की गोद में बसा है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां के दर्शन से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

    तीसरा केदार तुंगनाथ धाम है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान शिव की भुजाओं और हृदय स्थल की पूजा की जाती है। चोपता के पास स्थित यह धाम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम माना जाता है।

    चौथा केदार रुद्रनाथ मंदिर है, जहां भगवान शिव के मुख की पूजा होती है। गुफा के भीतर स्थित यह मंदिर बेहद रहस्यमयी और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यहां शिवजी को नीलकंठ महादेव के रूप में पूजा जाता है।

    पंचम और अंतिम केदार कल्पेश्वर मंदिर है, जो चमोली जिले की उर्गम घाटी में स्थित है। यहां भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि कल्पेश्वर मंदिर के कपाट पूरे साल खुले रहते हैं, जिससे श्रद्धालु किसी भी समय यहां दर्शन कर सकते हैं।

    पंच केदार यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव का अनोखा संगम भी है। माना जाता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ इन पांचों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति को पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

  • हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम

    हिमालय की पवित्र वादियों में शुरू हुई आस्था की यात्रा, प्रशासन ने किए व्यापक सुरक्षा इंतजाम


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में आस्था और आध्यात्मिकता के प्रतीक चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत रविवार 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से हो गई। इस शुभ दिन पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे भक्तों की भारी भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र भक्ति भाव और जयकारों से गूंज उठा।

    गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया उत्तरकाशी जिले में स्थित इन पवित्र स्थलों पर प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों की मौजूदगी में संपन्न हुई। पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जिससे यात्रा के प्रारंभिक चरण में ही उत्साह और आस्था का वातावरण बन गया। चारधाम यात्रा के इस शुभारंभ के साथ ही हिमालय की पवित्र वादियों में धार्मिक गतिविधियों ने गति पकड़ ली है।

    आने वाले दिनों में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार खोले जाएंगे। केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने की तैयारी है। इन दोनों प्रमुख धामों के कपाट खुलने के बाद पूरी चारधाम यात्रा अपने चरम पर पहुंच जाएगी और लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।

    राज्य सरकार और प्रशासन ने इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन टीमें और स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय किया गया है। प्रमुख पड़ावों पर चिकित्सा शिविर, सहायता केंद्र और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    डिजिटल पंजीकरण और ट्रैकिंग व्यवस्था को भी इस बार और अधिक सख्त किया गया है ताकि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की निगरानी और सुविधा सुनिश्चित की जा सके। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें और सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है।

    चारधाम यात्रा का हिंदू धर्म में अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन से जीवन के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। हिमालय की गोद में स्थित ये चारों धाम श्रद्धालुओं को न केवल आस्था से जोड़ते हैं बल्कि उन्हें प्रकृति की दिव्यता का अनुभव भी कराते हैं।

    हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस यात्रा में भाग लेते हैं, जिससे उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। स्थानीय होटल, परिवहन, दुकानें और छोटे व्यवसाय इस दौरान सक्रिय हो जाते हैं और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है। पर्यटन आधारित गतिविधियों में भी इस अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जाती है।

    इस वर्ष प्रशासन का अनुमान है कि यात्रियों की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रह सकती है, जिसके चलते सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है। जैसे ही केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलेंगे, यात्रा पूरी तरह से अपने चरम पर पहुंच जाएगी और श्रद्धालुओं का विशाल प्रवाह हिमालय की ओर बढ़ेगा।

  • केदारनाथ के लिए इस दिन शुरू होगी हेली सेवा बुकिंग… जानिए फुल डिटेल

    केदारनाथ के लिए इस दिन शुरू होगी हेली सेवा बुकिंग… जानिए फुल डिटेल


    देहरादून।
    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (Uttarakhand Civil Aviation Development Authority- यूकाडा) ने बताया कि केदारनाथ (Kedarnath) के लिए हेली सेवा बुकिंग ( Heli Service Booking) 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू होगी। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने बताया कि इस बार यात्रा व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने को कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।


    टिकटों की कालाबाजारी रोकने पर जोर

    चौहान ने रविवार को बताया, हेली सेवा के टिकटों की कालाबाजारी रोकने और व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 100% ऑनलाइन टिकटिंग की जाएगी। बुकिंग का जिम्मा इस बार भी आईआरसीटीसी के पास ही रहेगा। शुरू में टिकट लगभग 20-20 दिनों के स्लॉट (चरणबद्ध तरीके) में खोले जाएंगे। इस के बाद मौसम की स्थिति और यात्रियों की भीड़ का आकलन करते हुए आगे के चरणों की बुकिंग खोली जाएगी।


    भुगतान प्रक्रिया में सुधार

    यूकाडा व आईआरसीटीसी की हालिया बैठक में स्पष्ट किया जा चुका है कि कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं के लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया गया है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड,हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनमें से तीन, चारधाम रूट पर पहली बार सेवाएं देंगी। इधर, चौहान ने निर्देश दिए हैं कि ऑपरेटरों के भुगतान में देरी न की जाए ताकि हेली सेवाओं के संचालन में कोई बाधा न आए।


    रिफंड और शिकायतों पर सख्त रुख

    पिछली बार यात्रा के दौरान कुछ मामलों में यात्रियों को हेली सेवा का रिफंड मिलने में देरी को यूकाडा ने गंभीरता से लिया है। इसके चलते यूकाडा ने इस बार क्लेम व्यवस्था को आसान बनाने का निर्णय लिया है। चौहान ने आश्वस्त किया कि ऐसे मामलों में अब से जिन ऑपरेटरों के खिलाफ शिकायतें मिलेंगी, उन्हें नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एडवाइजरी भी जारी करेंगे, जिससे उन्हें नियमों के साथ अपने अधिकारों की पूर्व जानकारी रहे।


    किराया

    यूकाडा द्वारा तय नई दरों के अनुसार इस वर्ष केदारनाथ हेली सेवा के किराए में मिश्रित बदलाव देखने को मिल रहा है। गुप्तकाशी से आने-जाने का किराया 12,154 रुपये प्रति यात्री तय किया गया है, जो पिछले साल के 12,444 रुपये के मुकाबले 290 रुपये कम है। वहीं, फाटा से किराया बढ़ाकर 9,680 रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 8,842 रुपये से 838 रुपये अधिक है। दूसरी ओर, सिरसी रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत मिली है—इस बार किराया 6,086 रुपये रखा गया है, जो पिछले साल के 8,839 रुपये से 2,753 रुपये कम है। इन सभी किरायों पर जीएसटी और आईआरसीटीसी पोर्टल का ऑनलाइन बुकिंग शुल्क अलग से देना होगा।