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  • मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

    मुआवजे पर उठे सवालों के बीच केंद्र ने दिया हिसाब, 5039 प्रभावित परिवारों को 590 करोड़ से ज्यादा का भुगतान


    भोपाल । केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने मुआवजे और पुनर्वास को लेकर उठ रहे सवालों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जारी पीआईबी प्रेस नोट में कहा गया है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने से जुड़े आरोप सही नहीं हैं। सरकार के मुताबिक अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास संबंधी लाभ दिया जा चुका है जबकि कुछ मामलों में केवल जरूरी कागजी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में जनजातीय परिवारों के बिना मुआवजे विस्थापन के आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों के विरोध में चिता आंदोलन फांसी प्रदर्शन और जल सत्याग्रह जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन भी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों में मुआवजे और पुनर्वास को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं वे उपलब्ध सरकारी आंकड़ों से मेल नहीं खाते।

    सरकार के अनुसार परियोजना से प्रभावित कुल 5039 परिवारों की पहचान की गई है। इन परिवारों के लिए 629.87 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया है। इसमें से 590.74 करोड़ रुपए यानी करीब 93.78 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष राशि का भुगतान आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को किसी तरह का लाभ न छूटे इसके लिए भूमि रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है।

    कृषि भूमि के मुआवजे को लेकर भी सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। जुलाई 2026 तक 10913 प्रभावित लोगों की कृषि भूमि के लिए 360.66 करोड़ रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया था। इसमें से 320.45 करोड़ रुपए यानी 88.85 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं मकान और दूसरी आवासीय परिसंपत्तियों के लिए 149.63 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है।

    सरकार के मुताबिक भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से 13 सितंबर 2023 को स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के तहत की जा रही है। अधिगृहीत जमीन के लिए कानून के अनुसार निर्धारित मुआवजा या 12.50 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर में से जो राशि अधिक होगी वह दी जा रही है। इसके अलावा मकान पेड़ कुएं ट्यूबवेल और अन्य अचल संपत्तियों के लिए भी नियमानुसार मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है।

    पुनर्वास पैकेज में पात्र परिवारों के लिए प्लॉट से जुड़ी सहायता का भी प्रावधान है। ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए 7 लाख रुपए और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए 6.50 लाख रुपए दिए जाने की बात कही गई है। जो परिवार प्लॉट का विकल्प नहीं लेते हैं उन्हें एकमुश्त 12.50 लाख रुपए की सहायता देने का प्रावधान है। अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र एससी-एसटी परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता का भी प्रावधान बताया गया है।

    प्रभावित परिवारों की समस्याओं को मौके पर सुनने और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करौंदिया में विशेष शिविर भी लगाए गए हैं। सरकार के अनुसार इन शिविरों में पशुपालन सामाजिक सुरक्षा गरीबी रेखा लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई की गई। स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 178 लोगों को उपचार दिया गया और आयुष दवाओं का वितरण भी किया गया। हैंडपंपों की मरम्मत तथा विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग और किताबों के वितरण का काम भी किया गया। सरकार के मुताबिक पिछले दस दिनों में 86 प्रभावित लोगों के लिए 10.42 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है।

    विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार ने एक गंभीर दावा भी किया है। पीआईबी के प्रेस नोट के मुताबिक हाल के आंदोलनों में शामिल कुछ लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों की सूची भू-अभिलेखों या मुआवजा रजिस्टर में नहीं पाए गए हैं। सरकार ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से बाहरी तत्व शामिल हैं जो परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी पक्ष की ओर से इस दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है यह भी महत्वपूर्ण होगा।

    सरकार ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के संभावित लाभ भी गिनाए हैं। इसे नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। योजना के तहत केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी की ओर पहुंचाने का प्रस्ताव है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

    सरकार के मुताबिक परियोजना से करीब 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लाभ मिलने का दावा किया गया है। परियोजना की अनुमानित लागत 44604.99 करोड़ रुपए बताई गई है।

    केन-बेतवा परियोजना को लेकर एक तरफ सरकार मुआवजे और पुनर्वास प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा होने का दावा कर रही है तो दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर विरोध और विस्थापन से जुड़े सवाल लगातार उठ रहे हैं। ऐसे में परियोजना से प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित

    MP: केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में जल चिता व फांसी सत्याग्रह…. 15 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे विस्थापित


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुंदेलखंड क्षेत्र (Bundelkhand region) में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट (Ken-Betwa Link Project) और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में चल रहा आंदोलन शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया. छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं और परियोजना से प्रभावित परिवार अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला।

    इस आंदोलन का नेतृत्व अमित भटनागर कर रहे हैं और पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस दौरान भटनागर की केवल एक बार औपचारिक मेडिकल जांच की गई. प्रदर्शनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’, ‘चिता सत्याग्रह’ और आंदोलन के आठवें दिन से प्रतीकात्मक ‘फांसी सत्याग्रह’ भी शुरू किया है।

    बता दें कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट का मकसद केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाना है ताकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के सूखा-प्रवण बुंदेलखंड इलाके में सिंचाई और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।

    हालांकि, इस प्रोजेक्ट का विस्थापन, पुनर्वास और जंगलों व वन्यजीवों (जिसमें पन्ना टाइगर रिजर्व का हिस्सा भी शामिल है) पर इसके असर से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों के कुछ वर्गों और पर्यावरण समूहों ने विरोध किया है. मौजूदा आंदोलन में रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि अधिकारियों द्वारा किए गए पुनर्वास के वादों को पूरी तरह से लागू नहीं किया गया है।

    छतरपुर जिला प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शनकारियों में पड़ोसी पन्ना जिले के रुंझ और मझगांव सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित 176 लोग शामिल हैं और इनका छतरपुर जिले में किसी विस्थापन या मुआवजे की प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है.

    एक बयान में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से पन्ना लौटने और पुनर्वास का लाभ उठाने के लिए वहां के जिला अधिकारियों से संपर्क करने का आग्रह किया. इसमें कहा गया है कि राज्य सरकार ने पुनर्वास और पुनर्स्थापना के लिए अतिरिक्त 202.50 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं और प्रति प्रभावित परिवार पुनर्वास सहायता को 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये कर दिया है।

    प्रशासन ने कहा कि अतिरिक्त आवंटन पात्र लाभार्थियों के समय पर पुनर्वास में मदद करेगा. इसमें कहा गया कि कलेक्टर पार्थ जायसवाल के निर्देश पर मानवीय आधार पर विरोध स्थल पर पीने के पानी, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम किया गया था. पास के एक स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल स्टाफ और दवाइयां भी तैनात की गई थीं, जबकि स्थानीय अधिकारी इंतजामों पर नजर रखे हुए थे।

    प्रशासन ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधि, राजस्व और पुलिस अधिकारी, सरपंच और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि प्रभावित परिवारों को पन्ना लौटने और पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मना रहे थे. उसने दावा किया कि कुछ लोग प्रोजेक्ट के बारे में गलत जानकारी फैला रहे थे और जनता से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की।

    प्रशासन का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति और समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन पूरे नहीं किए गए।

    अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के साथ-साथ मझगांव और रुंझ सिंचाई प्रोजेक्ट से प्रभावित लोगों को न्याय नहीं मिला. उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापित परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल, जल संसाधन, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान खो दी है, जबकि कुछ लोगों पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए, उन्हें अवैध रूप से बेदखल किया गया, बिजली आपूर्ति काट दी गई और स्कूल तोड़ दिए गए। उन्होंने मांग की कि प्रशासन ग्रामीणों को डराना-धमकाना बंद करे और हर गांव में प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवारों की सूची सार्वजनिक रूप से दिखाए।

    बिजावर के SDM विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन को मीडिया रिपोर्टों के ज़रिए आंदोलन के बारे में पता चला, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने न तो पहले से कोई जानकारी दी थी और न ही कोई औपचारिक ज्ञापन सौंपा था. उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी लंबित मांगों का जायजा लिया।

    द्विवेदी ने कहा कि पन्ना जिले के लोगों की शिकायतों का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा, जबकि छतरपुर के निवासियों से जुड़े मुद्दों का समाधान छतरपुर प्रशासन करेगा. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की, खासकर मॉनसून को देखते हुए, और उन आरोपों को खारिज कर दिया कि फ़ायदे चुनिंदा लोगों को दिए गए थे; उन्होंने कहा कि अगर कोई खास मामला प्रशासन के ध्यान में लाया जाता है तो कार्रवाई की जाएगी।

  • केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गई है। लगभग 44,600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री स्तर पर हुई हालिया बैठक में इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से विचार किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए ताकि इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जा सके। यह परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा को मजबूत करना है।

    केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इस योजना के माध्यम से दोनों नदियों के जल प्रवाह को संतुलित कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पर केंद्र सरकार का बड़ा निवेश प्रस्तावित है, जबकि इसका अधिकांश वित्तीय भार केंद्र द्वारा वहन किया जा रहा है। इस योजना के तहत नहर प्रणाली, बांध निर्माण और जल वितरण ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभाव है। केन नदी मध्य प्रदेश के कैमूर क्षेत्र से निकलकर उत्तर प्रदेश में यमुना में मिलती है, जबकि बेतवा नदी रायसेन जिले से शुरू होकर आगे बढ़ते हुए यमुना में समाहित होती है। इन दोनों नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है, जिसमें बांध, नहरें और पावर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से कुछ क्षेत्रों में बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति को भी बेहतर बनाने की योजना है।

    हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों का पुनर्वास और विस्थापन है। परियोजना के कारण लगभग दो दर्जन गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें कई गांव जलभराव क्षेत्र में आते हैं, जबकि कुछ वन्यजीव अभयारण्यों के दायरे में स्थित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिसके चलते विरोध की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है, लेकिन समाधान पूरी तरह सामने नहीं आ सका है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन बेहद आवश्यक है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समाधान निकाला जाए ताकि परियोजना आगे बढ़ सके।

    फिलहाल केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की सबसे चर्चित जल परियोजनाओं में शामिल है, जो भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या को काफी हद तक हल कर सकती है। लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे इसे एक जटिल परियोजना भी बनाते हैं। आने वाले समय में इस पर होने वाले निर्णयों पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस

    नए साल 2026: भोपाल में 26 ट्रेनों की टाइमिंग बदली, बिजली कटौती नहीं, कृषि उद्योगों पर सरकार का फोकस


    भोपाल। नए साल 2026 की शुरुआत मध्यप्रदेश और राजधानी भोपाल के लिए कई महत्वपूर्ण अपडेट के साथ हुई। रेलवे शेड्यूल से लेकर बिजली, सरकारी योजनाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक-ज का दिन आम लोगों के लिए कई मायनों में खास रहा।

    रेलवे अपडेट:

    1 जनवरी से भोपाल, रानी कमलापति और संत हिरदाराम नगर रेलवे स्टेशन से चलने वाली 26 ट्रेनों की टाइमिंग में बदलाव किया गया है। रेलवे ने नया शेड्यूल जारी किया है और अब ट्रेन रिजर्वेशन चार्ट 10 घंटे पहले तैयार होगा।

    कुछ प्रमुख ट्रेनों का नया समय:

    22145 भोपाल-रीवा एक्सप्रेस: रात 11:05 → 11:00

    19324 भोपाल-डॉ. अंबेडकर नगर एक्सप्रेस: शाम 5:00 → 5:10

    14814 भोपाल-जोधपुर एक्सप्रेस: शाम 4:55 → 4:40

    12185 रानी कमलापति-रीवा एक्सप्रेस: रात 10:00 → 9:55

    22172 रानी कमलापति-पुणे एक्सप्रेस: दोपहर 3:50 → 3:40

    रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपडेटेड टाइमिंग देखने की अपील की है।

    बिजली की राहत:

    भोपालवासियों को नए साल की शुरुआत में बड़ी राहत मिली। आज शहर में कहीं भी बिजली मेंटेनेंस नहीं किया जाएगा, जिससे पूरे दिन निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित रहेगी।

    कृषि आधारित उद्योग वर्ष:

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में सरकार ने 2026 कोकृषि आधारित उद्योग वर्ष घोषित किया है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं:सिंचाई रकबा 100 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्यकेन-बेतवा परियोजना शुरू पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना पर काम जारी

    मेगा तापी रिचार्ज परियोजना को मंजूरी

    राजनीतिक गतिविधि:

    नए साल से कांग्रेस ने प्रदेशभर में गांव चलो अभियान’ की शुरुआत की। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भोपाल के गांवों से अभियान का आगाज किया। इसका मुख्य फोकस पंचायत स्तर पर संगठन को मजबूत करना है।

    सरकारी भर्ती: 

    मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडलMPESB ने 474 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
    अंतिम तिथि: 7 जनवरी 2026संशोधन की अंतिम तिथि: 12 जनवरी 2026

    सांस्कृतिक कार्यक्रम:

    भोपाल में नए साल के अवसर पर शलाका चित्र प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। स्थान: जनजातीय संग्रहालय समय: दोपहर 12 बजे से नए साल 2026 के पहले दिन मध्यप्रदेश और भोपालवासियों के लिए यह दिन परिवहन, ऊर्जा, कृषि और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से खास रहा।