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  • राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    राज्यसभा चुनाव में सपा के तीसरे उम्मीदवार पर केशव मौर्य का बड़ा बयान, बोले- नौवां प्रत्याशी उतारेगी भाजपा

    उत्तर प्रदेश: के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा नौवां प्रत्याशी मैदान में उतारेगी। उन्होंने विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति और चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी।

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को लखनऊ में राज्यसभा चुनाव की तैयारियों और विपक्षी दलों की रणनीति को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अगर राज्यसभा चुनाव में तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो भाजपा की ओर से नौवां प्रत्याशी उतारा जाएगा।

    केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश में भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में उतारे जा सकते हैं। अगर समाजवादी पार्टी तीसरे उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारती है तो भाजपा भी नौवां प्रत्याशी उतार सकती है। इस बयान के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के बीच मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।

    राज्यसभा चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सीटों के गणित के बीच उम्मीदवारों की संख्या महत्वपूर्ण हो गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की संभावना पर लगातार चर्चा हो रही है। ऐसे में भाजपा की ओर से नौवां उम्मीदवार उतारने की बात सामने आने से चुनावी समीकरण और अधिक चर्चा में आ गए हैं।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के साथ-साथ बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल साथ मिलकर चुनाव लड़ें या अलग-अलग, भाजपा वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता और चुनावी रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी।

    चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी केशव प्रसाद मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल चुनावी परिस्थितियों के अनुसार चुनाव व्यवस्था को लेकर अपना रुख बदलते हैं। उनके अनुसार, जब इन दलों को चुनाव में सफलता मिलती है तो उन्हें चुनाव व्यवस्था ठीक दिखाई देती है, जबकि भाजपा या एनडीए को सफलता मिलने पर वही व्यवस्था सवालों के घेरे में बताई जाती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने चुनाव परिणामों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी सुविधा के अनुसार परिभाषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने वर्ष 2004 और 2009 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बनने का उल्लेख किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की जीत और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन के प्रदर्शन का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में, जब अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भाजपा गठबंधन ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 73 सीटें जीती थीं। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें हासिल की थीं, जबकि समाजवादी पार्टी 47 सीटों तक सीमित रह गई थी। मौर्य ने कहा कि चुनावी परिणामों को अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखना उचित नहीं है।

    विपक्षी दलों की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ये दल अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या करते हैं। उन्होंने इसके लिए “मीठा-मीठा गप-गप और तीखा-तीखा थू-थू” वाली टिप्पणी का इस्तेमाल किया।

    केशव प्रसाद मौर्य ने अपने राजनीतिक और वैचारिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए राम, कृष्ण और विश्वनाथ से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीरामलला का भव्य मंदिर बन चुका है, जबकि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विश्वनाथ से जुड़े विषय अभी शेष हैं। तेलंगाना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयानों से भाजपा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और पार्टी संगठन के विस्तार तथा जनसेवा के संकल्प के साथ काम कर रही है।

  • PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार

    PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार



    नई दिल्ली। यूपी की चर्चित PCS अफसर ज्योति मौर्य और उनके सफाईकर्मी पति आलोक मौर्य का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद आलोक मौर्य ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि वे आगे आएं और समाज की सेवा करें, खासकर युवाओं के मुद्दों को लेकर।

    5 मई को जब डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, तो आलोक मौर्य अपने समर्थकों के साथ स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हैं और वे भी उसी राह पर आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी और जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

    इस बीच, ज्योति और आलोक के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला फिलहाल मीडिएशन सेंटर में है, जहां सुलह की कोशिशें जारी हैं। आलोक मौर्य का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं और उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा। लेकिन दूसरी तरफ PCS अफसर ज्योति मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना चाहतीं और पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं।

    गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात ज्योति मौर्य पहले भी कह चुकी हैं कि तलाक की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब यह रिश्ता बच पाना मुश्किल है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जहां एक ओर आलोक ने गुजारा भत्ता की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है, वहीं ज्योति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    आलोक मौर्य ने इस पूरे विवाद को एक बड़े सामाजिक मुद्दे से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने पुरुषों के अधिकारों की बात करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरुषों को अपनी बात रखने का मंच नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से कई लोग मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इस विवाद ने पहले भी देशभर में बहस छेड़ दी थी, जब आलोक ने ज्योति पर अफेयर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पाए और वापस लेना पड़ा। दूसरी ओर, ज्योति मौर्य ने आलोक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।

    एक साधारण परिवार से निकलकर PCS अफसर बनने तक का ज्योति मौर्य का सफर जितना प्रेरणादायक रहा, उतना ही उनका निजी जीवन विवादों में घिर गया। अब इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने इसे और ज्यादा चर्चित बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आलोक मौर्य सच में राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं, और कोर्ट में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल विवाद किस दिशा में जाता है।

  • यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया

    यूपी में गो माता पूरी तरह सुरक्षित: केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को चेताया



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में कहीं भी गोहत्या नहीं हो रही है और किसी में इतनी हिम्मत नहीं कि गो माता को खरोंच तक पहुंचा सके। उन्होंने यह बात सोमवार को वाराणसी के सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान कही। मौर्य ने कहा कि सरकार गो संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस दिशा में पहले भी व्यापक आंदोलन किए गए हैं।

    यह बयान Keshav Prasad Maurya ने उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक गोहत्या होने के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया, जो स्वामी Avimukteshwaranand द्वारा लगाए गए थे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी Avimukteshwaranand को कहीं भी आने-जाने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है, और सरकार उनके सम्मान की पूरी सुरक्षा करती है।

    केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सब समझती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनके शासनकाल में शिव भक्तों, राम भक्तों और गो भक्तों पर अत्याचार हुए, वे आज गो रक्षा की बात कर रहे हैं।

    राज्य सरकार ने लगातार गो संरक्षण को प्राथमिकता दी है। गौशालाओं और गो रक्षा समितियों के माध्यम से गो माता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है, और कानूनी प्रावधानों के तहत गोहत्या और हिंसा के मामलों पर सख्त कार्रवाई होती है। इस दिशा में सरकार ने पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर नियमित निगरानी प्रणाली लागू की है।

    Keshav Prasad Maurya का यह बयान प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या संगठन कानून का उल्लंघन करते हुए गो माता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    इस प्रकार के राजनीतिक और धार्मिक बयान समाज में चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन उपमुख्यमंत्री ने इसे संतुलित और शांतिपूर्ण तरीके से पेश किया है, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि गो माता की सुरक्षा और कानून की पालना दोनों सुनिश्चित हों।