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  • अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई में उमड़ा जनसैलाब, गालिबाफ और अराघची हुए भावुक, ईरान में छह दिवसीय श्रद्धांजलि कार्यक्रम शुरू

    नई दिल्ली । ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। राजधानी तेहरान में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। इस अवसर पर ईरान के शीर्ष राजनीतिक और सरकारी नेतृत्व की मौजूदगी रही, जबकि कई वरिष्ठ नेता भावुक दिखाई दिए। समारोह से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा की जा रही हैं।

    तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची तथा सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अंतिम प्रार्थना के दौरान गालिबाफ की आंखों में आंसू दिखाई दिए, जबकि अराघची भी श्रद्धांजलि अर्पित करते समय भावुक नजर आए। दोनों नेताओं की भावनात्मक प्रतिक्रिया समारोह का प्रमुख केंद्र बन गई।

    श्रद्धांजलि सभा के दौरान खामेनेई का ताबूत ईरान के राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से ढका हुआ रखा गया। बड़ी संख्या में नागरिकों ने अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच लोगों ने उनके सम्मान में प्रार्थनाएं कीं और देशभर से आए समर्थकों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

    ईरानी नेतृत्व ने नागरिकों से बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि छह दिनों तक चलने वाले अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसी को देखते हुए राजधानी तेहरान और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। तेहरान में मुख्य श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अंतिम यात्रा राजधानी की प्रमुख सड़कों से निकलेगी। इसके बाद पवित्र शहर कोम में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित होगा, जहां बड़ी संख्या में धार्मिक विद्वानों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। अंतिम चरण में उनका पार्थिव शरीर मशहद ले जाया जाएगा, जिसे उनका पैतृक शहर माना जाता है।

    मशहद में धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके साथ ही पड़ोसी देश इराक के नजफ और कर्बला जैसे प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में भी विशेष प्रार्थना सभाओं और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की तैयारी की गई है। विभिन्न देशों के शिया समुदायों द्वारा भी अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    गौरतलब है कि अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हालिया क्षेत्रीय सैन्य संघर्ष के दौरान हुए हमलों में हुआ था। उनके निधन के बाद मध्य पूर्व की राजनीतिक और सामरिक परिस्थितियों पर व्यापक असर देखा गया। अब अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बीच दुनिया की नजर ईरान के अगले राजनीतिक कदमों और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। फिलहाल देश में शोक का माहौल है और लाखों लोग अपने लंबे समय तक सर्वोच्च नेतृत्व संभालने वाले नेता को अंतिम विदाई देने के लिए श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल हो रहे हैं।

  • लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

    नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके ताबूत पर रखा गया विशेष लाल झंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह झंडा सबसे प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं, बल्कि शिया परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संदेश का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।

    खामेनेई के ताबूत पर रखा गया यह लाल झंडा उनके पैतृक शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। शिया परंपरा में इस प्रकार के लाल ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, शहादत की स्मृति और न्याय की मांग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी कारण अंतिम विदाई समारोह में इस झंडे की मौजूदगी ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की शहादत के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। सातवीं शताब्दी में कर्बला के युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत शिया समुदाय की आस्था का केंद्रीय आधार मानी जाती है। उनके बलिदान को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, नैतिक साहस और सत्य के पक्ष में अडिग रहने का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है।

    शिया धार्मिक परंपराओं में लाल झंडा अक्सर अधूरे न्याय, शहादत और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला झंडा शोक और मातम का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार स्थल पर लाल और काले दोनों रंगों के झंडे तथा बैनरों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से श्रद्धांजलि के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया।

    तेहरान में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। परिसर को धार्मिक प्रतीकों, शोक संदेशों और खामेनेई के चित्रों से सजाया गया। पूरे आयोजन में शिया धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया गया, जिससे समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्वरूप मिला।

    जानकारों का मानना है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिया समुदाय के बीच वैचारिक एकजुटता और ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करने का प्रयास है। इसी क्रम में अंतिम यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि शिया समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरा आयोजन केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिया धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और ईरान की वैचारिक निरंतरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • US बेस में सुरक्षित नहीं खाड़ी देश… खामेनेई- 'ढाल' की तरह नहीं कर पाएंगे काम

    US बेस में सुरक्षित नहीं खाड़ी देश… खामेनेई- 'ढाल' की तरह नहीं कर पाएंगे काम


    वाशिंगटन।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में जारी संकट बुरी तरह से उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) हैं, जो किसी भी हाल में इस युद्ध को अमेरिका (America) के लिए जीत साबित करने में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान (Iran) है, जो अपने दशकों पुराने अमेरिकी डर का सामना करके और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसी निडरता का परिचय देते हुए शांति समझौते के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Iranian Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने साफ कर दिया है कि अब से खाड़ी देश अमेरिकी ठिकानों के लिए ‘ढाल’ की तरह काम नहीं कर पाएंगे।

    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-अल-अजहा के मौके पर खामेनेई ने ईरानी लोगों के लिए एक लिखित बयान जारी किया। इस बयान में खामेनेई ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर भी बात की। इतना ही नहीं युद्ध की स्थिति को लेकर उन्होंने साफ किया कि अब ईरान अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से नहीं चूकेगा। उन्होंने कहा, “यह निश्चित है कि समय के हाथ अब पीछे की तरफ नहीं मुड़ेंगे और क्षेत्र की जनता और जमीन अब अमेरिकी ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेगी। अमेरिका को अब इस क्षेत्र में बुराई फैलाने या सैन्य अड्डा स्थापित करने का सुरक्षित आश्रय नहीं मिलेगा।” बता दें, खामेनेई का इशारा यहां पर युद्ध के समय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने को लेकर था। हालांकि, ईरान ने पिछले संघर्ष के समय भी इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन उस वक्त सभी देशों ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    इस बयान के साथ ही, खामेनेई ने संदेश दे दिया है कि ईरान अब खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। वैसे भी खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा समझौता करने के बदले में वहां बेस बनाकर बैठे अमेरिका की पोल ईरान युद्ध के दौरान खुल गई थी। ईरान के हल्के ड्रोन्स ने सुरक्षित माने जाने वाले इन देशों में काफी उत्पात मचाया था, जिसकी वजह से यह देश पहले ही अमेरिका के अलावा दूसरे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।


    अमेरिका के साथ 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा ईरान

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी कि ईरान और अमेरिका के बीच में इस वक्त 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत जारी है। इसमें से ज्यादातर मुद्दों को हल कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी समझौता बहुत दूर है।

    वरिष्ठ ईरानी राजनयिक होसैन नूशाबादी के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच में ज्यादातर मामलों में समझौता हो सकता है, लेकिन केवल परमाणु का मुद्दा फंसा हुआ है। अमेरिका इस बात को बार-बार कहता आ रहा है कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका का सौंपना होगा, इसके साथ ही उसे इस बात की भी पुष्टि करनी होगी कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु कार्यक्रम शुरू नहीं करेगा। इसके अलावा तेहरान केवल एक परमाणु रिएक्टर बना सकता है। इसके साथ ही उसे अपने मिसाइल कार्यक्रम को भी बंद करना होगा। दरअसल, ट्रंप की मजबूरी यह है कि उन्हें ओबामा से बेहतर ईरानी डील करनी ही होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी हार साबित होगी। इसलिए ट्रंप भी इस पर झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखे पोस्ट में साफ किया कि ईरान के साथ अगर डील होगी, तो वह बेहतर होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर कोई भी डील नहीं होगी।

    अमेरिका भले ही इन शर्तों के साथ आगे बढ़ रहा हो, लेकिन ईरान के लिए यह शर्तें स्वीकार करने योग्य नहीं है। दूसरी बात, दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना करने वाले ईरान के नेता अब निर्भीकता के साथ अमेरिका का सामना कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध नहीं चाहते, ऐसे में अब तेहरान भी बातचीत की टेबल पर सख्ती के साथ अपनी शर्तें रख रहा है।

  • J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद

    J&K: खामेनेई की मौत के बाद जारी प्रदर्शनों के बीच घाटी में तनावपूर्ण शांति, स्कूल-कॉलेज 7 मार्च तक बंद


    जम्मू।
    ईरान के सर्वोच्च नेता (Iran’s Supreme Leader) अयातुल्ला अली खामनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की हमले में मौत के विरोध में कश्मीर (Kashmir) में जारी प्रदर्शनों के बीच मंगलवार को तनावपूर्ण शांति रही। पाबंदियां लागू रहीं तो शिक्षण संस्थान बंद रहे। घाटी में स्कूल-कॉलेज की दो दिन की बंदी को एहतियात के तौर पर बढ़ाकर सात मार्च तक कर दिया गया है। राजोरी और पुंछ में बंद शांतिपूर्ण रहा। लद्दाख के कारगिल के बाजार भी बंद रहे।

    मंगलवार को श्रीनगर के सिविल लाइन इलाके में कुछ दुकानें खुली दिखीं और सड़कों पर वाहन चलते नजर आए। डाउनटाउन और शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन हुए। लाल चौक पर घंटा घर को अभी सील ही रखा गया है। इसके चारों ओर बैरिकेड लगे हुए हैं। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान तैनात हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को भी प्रतिबंध जारी रहेंगे। इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहेंगी। पुलिस ने लोगों से हिंसा और उकसावे से बचने की अपील की है।

    राजोरी शहर व आसपास के इलाकों में मुस्लिम संगठनों ने दुकानें बंद रखीं। पहाड़ी इलाकों में भी मुस्लिम समुदाय की ही दुकानें बंद रहीं। पुलिस की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रही। कहीं भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। पुंछ पूरी तरह से बंद रहा। इस दौरान हिंदू-सिख के धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों ने भी बंद को अपना समर्थन दिया।

    शांति बनाए रखना और समाज की तरक्की को बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। अफसर हाई अलर्ट पर रहें। शांति बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए। -मनोज सिन्हा, उपराज्यपाल

    कुछ लोग माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों से गुजारिश है कि वे संयम रखें। गुस्सा-नाराजगी, दुख-दर्द का इजहार करें लेकिन कानून हाथ में न लें। -उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री

  • ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाने वाले इरफान सोलतानी को फांसी की सजा की तैयारी, कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल


    नई दिल्ली । ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच एक और खौफनाक खबर सामने आई है। 26 वर्षीय इरफान सोलतानी जिन्होंने खामेनेई के खिलाफ 8 जनवरी को हुए प्रदर्शन में भाग लिया था अब उन्हें फांसी की सजा दिए जाने की तैयारी है। सोलतानी को 14 जनवरी को फांसी दी जा सकती है और उनके मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में गहरी चिंता जताई जा रही है।

    इरफान सोलतानी जो तेहरान के पास कराज शहर के फर्दीस इलाके के निवासी हैं, को खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता का अवसर नहीं दिया गया। वे बिना वकील से मिले ही अपनी सजा का सामना करने के लिए मजबूर हो गए हैं। उनका परिवार भी इस मामले से पूरी तरह अज्ञात रखा गया है और उन्हें इस बारे में कोई महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दी गई। 11 जनवरी को जब सोलतानी के परिवार को उनकी मौत की सजा के बारे में सूचित किया गया, तब भी उन्हें केवल 10 मिनट की मुलाकात करने की अनुमति दी गई।

    सोलतानी की बहन जो खुद एक लाइसेंस प्राप्त वकील हैं ने कानूनी तरीके से अपने भाई की सजा को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें केस की फाइल तक देखने और अपने भाई का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दी गई। यह मामले की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाता है। इसके अलावा लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी मारियो नॉफाल ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि ईरान में अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए डर का माहौल बना रही है।

    तेज ट्रायल और सख्त दंड की प्रक्रिया ईरान में बढ़ते विरोधों को दबाने के लिए अपनाई जा रही है। इजरायल और अमेरिका आधारित न्यूज आउटलेट जफीड के मुताबिक सोलतानी का मामला आने वाली सख्त सजाओं का संकेत हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान सरकार इस तरह के मामलों के माध्यम से आगे के प्रदर्शनों को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई कर रही है। नॉर्वे में पंजीकृत कुर्द मानवाधिकार संगठन हेंगॉ ने भी इस मामले की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की है।

    ईरान में खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला पिछले 16 दिनों से जारी है। इन प्रदर्शनों में अब तक 544 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। इस दौरान 10,681 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। तेहरान में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि हॉस्पिटल के बाहर शवों का ढेर लगा हुआ है, और लोग अपने परिजनों के शवों की तलाश कर रहे हैं। ईरान की सरकार की यह कठोर कार्रवाई और नफरत से भरी नीति विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए उठाए गए कदमों का हिस्सा है, लेकिन इनका परिणाम केवल और अधिक हिंसा और रक्तपात हो सकता है। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ईरान में इस तरह की कार्रवाई केवल सत्ता की तानाशाही को मजबूत करने के लिए की जा रही है।

  • ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    ईरान में विरोध प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय तनाव: खामेनेई ने चेताया, रजा पहलवी ने ट्रंप से संपर्क किया

    नई दिल्ली। ईरान में महंगाई और आर्थिक तंगी के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाला रूप ले चुका है। देश के 31 प्रांतों और 111 शहरों-कस्बों में विरोध प्रदर्शन फैल चुके हैं। हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 62 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 2,300 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

    सुप्रीम लीडर खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को विदेशी ताकतों और विरोधी संगठनों से प्रेरित बताते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेताया कि कोई भी विदेशी दबाव ईरान की सत्ता को नहीं झुका पाएगा। खामेनेई ने आरोप लगाया कि आंदोलन विदेशी एजेंडों के तहत देश में उथल-पुथल और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है।

    सड़कों पर नारे और इंटरनेट बंदी

    ईरान के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने “आजादी-आजादी” के नारे लगाए। ऐसे में सरकार को इंटरनेट और अंतरराष्ट्रीय कॉल सेवाएं पूरी तरह बंद करनी पड़ी। सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि कानून तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    खामेनेई का अमेरिका को चेतावनी संदेश

    सुप्रीम लीडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चेताया कि इतिहास में तानाशाहों का पतन तय रहा है और ट्रंप इससे अलग नहीं होंगे। उनका जोर था कि ईरान किसी भी विदेशी दबाव में नहीं झुकेगा और देश की सुरक्षा और एकता बनाए रखी जाएगी।

    रजा पहलवी का अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का आह्वान

    वहीं, निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाखों ईरानी प्रदर्शनकारियों को हिंसा का सामना करना पड़ रहा है और संचार सेवाएं ठप हैं। रजा पहलवी ने खामेनेई पर आम जनता पर बर्बरता करने का आरोप लगाया और लोगों से एकजुट होकर प्रदर्शन जारी रखने की अपील की।

    उन्होंने चेताया कि समय तेजी से निकल रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल कदम उठाना होगा, ताकि देश में जारी हिंसा और दमन को रोका जा सके।

  • ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    ईरानियों से इजरायली PM नेतन्याहू इस बात से खामेनेई हुए आग-बबूला

    तेहरान। ईरान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के कारण भड़के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका स्थित ‘ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी’ (HRANA) ने रविवार सुबह बताया कि ईरान के 31 प्रांतों में से 25 प्रांतों में 170 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। एजेंसी के अनुसार, मरने वालों की संख्या कम से कम 15 पहुंच गई है और 580 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने देश में अशांति पैदा करने वाले विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि दंगाइयों को उनके स्थान पर रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर इजरायल की ओर से ऐसा बयान सामने आया है, जिसे सुनकर खामनेई आग-बबूला हो जाएंगे।

    दरअसल, ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर अन्य देशों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि इस सप्ताह इस्लामी गणराज्य के कई शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इजरायल ईरान के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता के साथ खड़ा है। नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में कहा कि हम ईरानी जनता के संघर्ष तथा उनकी स्वतंत्रता, आजादी और न्याय की आकांक्षाओं के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि यह बहुत संभव है कि हम ऐसे क्षण में खड़े हैं जब ईरानी लोग अपना भाग्य अपने हाथों में ले रहे हैं। बता दें कि ईरान में प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले रविवार को हुई थी, जब दुकानदारों ने आर्थिक समस्याओं को लेकर हड़ताल की थी। उस वक्त से इसका दायरा और आकार लगातार बढ़ रहा है और प्रदर्शनकारी राजनीतिक मांगें भी उठा रहे हैं।
    जून 2025 में 12 दिनों का चला था युद्ध

    बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले साल जून में 12 दिनों तक युद्ध चला था, जब इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों पर हमलों की श्रृंखला शुरू की थी। यह कहते हुए कि इसका उद्देश्य इस्लामी गणराज्य की परमाणु अनुसंधान और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को नष्ट करना था। ईरान ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमले करके जवाब दिया। बाद में संघर्ष के दौरान अमेरिका ने इजरायल का साथ देते हुए ईरानी परमाणु स्थलों को निशाना बनाया, जिसके बाद युद्धविराम की घोषणा की गई।

    रविवार को नेतन्याहू ने तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की और कहा कि उन्होंने इस सप्ताह अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ इस पर बातचीत की थी। नेतन्याहू ने कहा कि हमने शून्य संवर्धन के अपने साझा रुख को दोहराया तथा ईरान से 400 किलोग्राम संवर्धित सामग्री हटाने और उन स्थलों को सख्त तथा वास्तविक निगरानी के अधीन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।