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  • खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा

    खामेनेई की मौत पर PM मोदी की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना, कहा- भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा


    नई दिल्ली। इजरायल और अमेरिका के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद दुनिया भर में हलचल मची हुई है। अमेरिकी सहयोगी इसे जायज ठहरा रहे हैं जबकि विरोधी इसे क्रूर हत्या बता रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। विपक्षी दलों ने इस चुप्पी को लेकर मोदी सरकार पर तीखे आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न

    कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि मोदी सरकार की चुप्पी भारत की नैतिक नेतृत्व क्षमता पर प्रश्न उठाती है। उनका कहना था आयतुल्ला खामेनेई और अन्य ईरानी नेताओं की हत्या पर सरकार की चुप्पी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ कुछ भी कहने की उसकी अनिच्छा को दर्शाती है। यह भारत के मूल सिद्धांतों और विदेश नीति से समझौता है। इतिहास में भारत इतना कमजोर कभी नहीं दिखा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद भारत की मौन नीति उसके मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।

    समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि इस समय जब घातक हमले और युद्ध आम नागरिकों से लेकर शीर्ष नेताओं तक को प्रभावित कर रहे हैं सरकार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह बताना चाहिए कि भारत एक तटस्थ देश के रूप में शांति बहाली के लिए क्या कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।

    मोदी सरकार की मौन नीति और विदेश मंत्रालय का बयान
    ईरान की तरफ से रविवार को खामेनेई की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी थी। इसके बावजूद भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया। हालांकि विदेश मंत्रालय ने शनिवार देर रात अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को लेकर एक सामान्य बयान जारी किया। इसमें कहा गया भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम से गहरी चिंता में है। सभी पक्ष संयम बरतें तनाव बढ़ाने से बचें और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का मार्ग अपनाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान होना चाहिए।