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  • MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल

    MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल


    बुरहानपुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र (Khandwa-Burhanpur parliamentary constituency) से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल (MP Dnyaneshwar Patil) के छोटे भाई विश्वनाथ उर्फ बाडू पाटिल (58) ने आत्महत्या कर ली. यह घटना बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) के गृह ग्राम बोहरडा में सामने आई, जहां उन्होंने अपने ही खेत के कुएं में कूदकर जान दे दी. बताया गया कि बुधवार तड़के वे चुपचाप घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे.

    सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. जिले के डीएम और एसपी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद गोताखोरों की मदद से कुएं में तलाश शुरू की गई. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विश्वनाथ पाटिल का शव कुएं से बाहर निकाला गया।

    पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना का वास्तविक कारण अभी तक सामने नहीं आ सका है.


    घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर

    इस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र और पाटिल परिवार के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है. जानकारी के अनुसार, दिवंगत विश्वनाथ पाटिल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बोहरडा में किया जाएगा.

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल उस समय दिल्ली में थे. घटना की जानकारी मिलते ही वे तुरंत दिल्ली से बुरहानपुर के लिए रवाना हो गए. उधर, सांसद के गृह ग्राम बोहरडा स्थित निवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और रिश्तेदार पहुंचने लगे. नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित भाजपा और कांग्रेस के कई नेता भी सांसद निवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की. स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया।


    पुलिस जांच जारी

    बुरहानपुर एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि पुलिस को पहले विश्वनाथ पाटिल के लापता होने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. जांच के दौरान खेत के पास उनकी चप्पल मिली, जिसके बाद कुएं में तलाश की गई और शव बरामद किया गया. पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मृत्यु के कारणों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. घटना के बाद पूरे इलाके में गमगीन माहौल बना हुआ है।

  • दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील

    दूषित पानी से हुई मौतों पर भाजपा सांसद का शर्मनाक बयान, जनता से सरकार के भरोसे न बैठने की अपील


    खंडवा । मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से लगभग 18 लोगों की मौत हो गई जिसे लेकर शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं और अब भाजपा नेताओं के विवादास्पद बयानों ने इन उम्मीदों को और बिखेर दिया है। पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और अब खंडवा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने जनता से अपील की कि वे सरकार के भरोसे न बैठें और अपनी जिम्मेदारी खुद निभाएं।

    सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल खंडवा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। जब उनसे इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, चाहे खंडवा हो, नगर परिषद हो या ग्राम पंचायत हो, इंदौर की घटना से हम सभी को सबक लेना चाहिए। सिर्फ सरकार ही सब कुछ करे सरकार के भरोसे हम रहे, ये भी ठीक नहीं है। जनता की भी एक जिम्मेदारी बनती है। इस बयान से उन्होंने एक तरह से साफ कर दिया कि गंदगी और दूषित पानी की समस्या के लिए अब जिम्मेदारी सरकार के बजाय जनता पर डाल दी गई है।

    सांसद का यह बयान विवादों में घिर चुका है क्योंकि इसने सीधे तौर पर जनता पर सफाई का जिम्मा थोप दिया। सवाल यह उठता है कि क्या अब जनता खुद सड़कें खोदकर पाइपलाइन लगाएगी या फिर नगर निगम की टंकियों को साफ कर घर-घर पानी पहुंचाने का काम करेगी अगर यही जिम्मेदारी जनता की है, तो फिर सवाल यह भी है कि सांसद जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग क्या कर रहे हैं क्या उनके कर्तव्यों में ऐसी समस्याओं का समाधान करना नहीं आता ।

    यह पहली बार नहीं है जब भाजपा नेताओं के बयानों ने विवाद उठाया है। इससे पहले मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पत्रकार से अभद्रता करते हुए ‘घंटा’ शब्द कहा था, जिसके बाद कांग्रेस ने इस बयान के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। इस घटना के बाद विजयवर्गीय भी बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं। इंदौर में हुए हादसे के बाद से प्रशासन की नाकामी और नेताओं के विवादास्पद बयानों ने लोगों के विश्वास को तोड़ा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे या फिर इस बार भी जनता को ही दोषी ठहराया जाएगा।