Tag: Kharge

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री से सदन में बयान देने की मांग दोहराई।

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में राजनीतिक टकराव लगातार गहराता जा रहा है। विपक्ष इस पूरे मामले पर सरकार से विस्तृत जवाब की मांग कर रहा है, जबकि सदन की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हो रही है। इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह को स्वयं सदन में उपस्थित होकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देनी चाहिए ताकि सभी सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसे संवेदनशील मामलों पर संसद के भीतर खुली चर्चा होना आवश्यक है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा के सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री को विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री को अवगत कराने का निर्देश दिया है, जिससे इस विषय पर चर्चा का रास्ता निकल सके।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जानकारी प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस या अन्य बल प्रयोग किया है तो यह जानना जरूरी है कि ऐसे कदम उठाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था। उनके अनुसार संसद इस प्रकार के मुद्दों पर जवाबदेही तय करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है और सरकार को यहां विस्तृत स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    खड़गे ने अपनी पार्टी की ओर से दो प्रमुख मांगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दें और दूसरी ओर गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर विपक्ष के सवालों का जवाब दें। उनका कहना था कि यदि सरकार इस विषय पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाती है तो राजनीतिक विवाद और गहराने की संभावना बनी रहेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष संसद की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलाना चाहता है, लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने की स्थिति में गतिरोध समाप्त होना कठिन है। उनके अनुसार लोकतंत्र में संवाद और जवाबदेही दोनों समान रूप से आवश्यक हैं तथा जनता से जुड़े मामलों पर सरकार को पारदर्शी रुख अपनाना चाहिए।

    अपने बयान के दौरान खड़गे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों के हितों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाती रहेगी। उनका कहना था कि किसी भी राज्य में यदि युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रश्न सामने आते हैं तो उन पर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

    जंतर-मंतर की घटना को लेकर संसद में जारी गतिरोध के बीच अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होती है तो राजनीतिक दलों के बीच जारी टकराव कम होने की संभावना बन सकती है। फिलहाल विपक्ष अपने रुख पर कायम है और सरकार से आधिकारिक जवाब की मांग लगातार दोहरा रहा है।

  • राज्यसभा में विपक्ष की मांग पर बढ़ी सियासी तल्खी, सभापति ने रिजिजू से सरकार को संदेश देने का किया आग्रह

    राज्यसभा में विपक्ष की मांग पर बढ़ी सियासी तल्खी, सभापति ने रिजिजू से सरकार को संदेश देने का किया आग्रह


    नई दिल्ली
    । राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने गृह मंत्री की उपस्थिति की मांग उठाई, जिस पर सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से विपक्ष की भावना सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया। हालांकि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए और लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित होती रही।

    सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए केंद्रीय गृह मंत्री की मौजूदगी आवश्यक है। इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का निर्देश नहीं, बल्कि विपक्ष की ओर से रखा गया अनुरोध है। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि विपक्ष की इस भावना और मांग को सरकार के समक्ष रखा जाना चाहिए ताकि इस पर उचित निर्णय लिया जा सके।

    इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह तय करना सरकार का अधिकार है कि किस दिन कौन-सा मंत्री सदन में उपस्थित रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री की उपस्थिति को लेकर निर्देश नहीं दिए जा सकते। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उस समय सदन में प्रश्नकाल चल रहा था और लगातार हो रहे व्यवधान के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही प्रभावित हो रही है, जिससे महत्वपूर्ण संसदीय कार्य बाधित हो रहे हैं।

    सभापति ने एक बार फिर हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने किसी मंत्री को निर्देश देने का प्रयास नहीं किया है। उन्होंने केवल अपनी बात और विपक्ष की भावना सदन के सामने रखी है। सभापति ने संसदीय कार्य मंत्री से दोहराया कि विपक्ष के अनुरोध को सरकार तक पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी के दायरे में आता है और इसी भावना से उन्होंने यह आग्रह किया है।

    सदन में इस दौरान विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच संसदीय नियमों को लेकर भी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्हें संसदीय नियमों की जानकारी है और उन्हें नियम सिखाने की आवश्यकता नहीं है। इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी सदस्य पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल राज्यसभा के नियमों का उल्लेख किया है और सदन की कार्यवाही हमेशा निर्धारित नियमों के अनुरूप ही संचालित होनी चाहिए।

    रिजिजू ने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष वरिष्ठ और सम्मानित सदस्य हैं तथा सरकार उनके अनुभव का सम्मान करती है। हालांकि उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि किसी भी संसदीय मांग या तर्क के समर्थन में संबंधित नियमों का उल्लेख किया जाना आवश्यक होता है। इस बीच सभापति लगातार सभी सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने और प्रश्नकाल को सुचारु रूप से चलने देने की अपील करते रहे।

    लगातार शोर-शराबे और व्यवधान के कारण सदन की सामान्य कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। सभापति ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और संसदीय गरिमा बनाए रखने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा जारी रहा। अंततः लगातार बाधा उत्पन्न होने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय तक के लिए स्थगित कर दी गई। पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति और संवाद की आवश्यकता को रेखांकित किया।

  • राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    राम मंदिर ट्रस्ट से पुलिस कार्रवाई तक कई मुद्दों पर सरकार घिरी, संसद में चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष का प्रदर्शन

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के बीच विपक्षी दलों ने कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सदन में उपस्थित होकर जवाब देने की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जिन विषयों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उन पर संसद में खुली और विस्तृत चर्चा कराई जानी चाहिए ताकि सभी पक्षों के सामने स्थिति स्पष्ट हो सके।

    राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उनका आरोप था कि सरकार चर्चा से बच रही है, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद ही वह सर्वोच्च मंच है जहां सरकार को विपक्ष के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आकर अपना पक्ष रखना चाहिए ताकि उठाए गए मुद्दों पर सार्थक बहस हो सके।

    विपक्ष की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ मामलों को भी उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किसी धार्मिक आस्था या भगवान राम के प्रति नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के लिए मिले दान और उससे जुड़े विभिन्न मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग है। उनका कहना था कि यदि किसी भी प्रकार के सवाल उठते हैं तो उनका उत्तर सार्वजनिक रूप से दिया जाना चाहिए, जिससे किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न रहे।

    संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। पार्टी नेताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने और सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग दोहराई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का स्पष्ट उत्तर दे। उन्होंने कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने तथा निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा कि विपक्ष का विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक दायरे में है। उन्होंने कहा कि जिन घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके। विपक्षी दलों का कहना है कि संसद में चर्चा के माध्यम से ही लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत किया जा सकता है।

    वहीं सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर अलग-अलग स्तर पर जवाब दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। मानसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी इन विषयों को लेकर संसद में बहस और विरोध का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में दोनों पक्षों की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर संसद में तीखी नोकझोंक, खरगे और किरेन रिजिजू आमने-सामने, विपक्ष का जोरदार हंगामा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को राम मंदिर चढ़ावा से जुड़े आरोपों को लेकर राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच तीखा राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया, जबकि सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। लगातार शोर-शराबे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही निर्धारित समय से पहले कई बार स्थगित करनी पड़ी।

    राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चर्चा के दौरान कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन में केंद्र सरकार की भूमिका रही है और मंदिर निर्माण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चढ़ावे से जुड़े आरोपों के मामले में संबंधित एजेंसियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर सदन में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

    खरगे के वक्तव्य का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने अतीत में राम मंदिर आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों का विरोध किया था। रिजिजू ने आरोप लगाया कि अब वही दल इस मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी विषय पर तथ्यों के आधार पर जवाब देने के लिए तैयार है।

    सदन में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए स्थगित की गई और दोबारा शुरू होने के बाद भी व्यवधान जारी रहने पर फिर स्थगन करना पड़ा। विपक्षी दलों का कहना था कि राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और सरकार अपना पक्ष स्पष्ट करे। वहीं सत्तापक्ष ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और राजनीतिक माहौल बनाने का आरोप लगाया।

    संसद भवन परिसर में भी इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कई विपक्षी नेता शामिल हुए और उन्होंने सरकार से कथित आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने तथा सदन में जवाब देने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने विभिन्न नारे लगाकर अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाया। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि संसद में महत्वपूर्ण विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विपक्ष को चर्चा के लिए सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।

    मॉनसून सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार तथा विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे में राम मंदिर चढ़ावा विवाद भी संसद के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हो गया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर दोनों पक्षों के बीच बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सदन के सुचारु संचालन और लंबित विधायी कार्यों को लेकर भी राजनीतिक गतिरोध बना हुआ है।

  • वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की सतर्कता से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 77,500 के नीचे बंद, लार्जकैप शेयरों में बढ़ी बिकवाली

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से जारी संदेशों में उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना की गई। जन्मदिन के मौके पर नेताओं के शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की भावना को भी रेखांकित किया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने स्तर पर उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई संदेश भेजते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं। सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं की ओर से आए इन संदेशों को राजनीतिक सौहार्द का सकारात्मक उदाहरण माना जा रहा है।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक न्याय, संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनके समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। संदेशों में उनके सार्वजनिक जीवन के लंबे अनुभव, संगठन निर्माण में योगदान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, यशस्वी और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेशों ने यह भी दर्शाया कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का निर्वहन भारतीय राजनीति की महत्वपूर्ण परंपरा का हिस्सा है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक संगठन और संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। उनके राजनीतिक अनुभव और संसदीय कार्यशैली को राष्ट्रीय राजनीति में विशेष महत्व दिया जाता है।

    जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों की सहायता और अन्य जनकल्याणकारी गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का जन्मदिन आज, सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने दी बधाई; दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    नई दिल्ली । कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे आज अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता और विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सफल सार्वजनिक जीवन की कामना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए शुभकामना संदेशों ने लोकतांत्रिक परंपराओं और राजनीतिक शिष्टाचार की एक सकारात्मक तस्वीर भी प्रस्तुत की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए कहा कि वह उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और ईश्वर से उनके दीर्घायु तथा उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं। प्रधानमंत्री के संदेश के बाद विभिन्न दलों के नेताओं ने भी अपने-अपने संदेशों के माध्यम से उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनका अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, संविधान तथा जनसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों को मजबूती से आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित पार्टी की विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व को कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक बताया। शुभकामना संदेशों में उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और संगठन को मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका का उल्लेख किया गया। साथ ही उनके स्वस्थ, सक्रिय और यशस्वी जीवन की कामना भी की गई।

    समाजवादी पार्टी ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की। विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से आए इन संदेशों को लोकतांत्रिक परंपरा और राजनीतिक सौहार्द का प्रतीक माना जा रहा है, जहां वैचारिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत सम्मान और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान जारी रहता है।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका भी निभा रहे हैं। संसदीय राजनीति, संगठन और प्रशासनिक अनुभव के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख नेताओं में शामिल किया जाता है।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, पौधारोपण, जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री वितरण और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने संगठन को और मजबूत बनाने तथा जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

  • मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना

    मल्लिकार्जुन खरगे के जन्मदिन पर राजनीतिक दलों ने जताया सम्मान, प्रधानमंत्री और वरिष्ठ नेताओं ने की दीर्घायु व उत्तम स्वास्थ्य की कामना


    नई दिल्ली । 
    कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के 84वें जन्मदिन पर देशभर से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की। राजनीतिक मतभेदों से इतर कई नेताओं ने सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे अनुभव और योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि ईश्वर उन्हें स्वस्थ और लंबा जीवन प्रदान करें। प्रधानमंत्री का यह संदेश सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना और अनेक लोगों ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं का सकारात्मक उदाहरण बताया।

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उनके सुखद, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें बधाई देते हुए स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

    कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जन्मदिन पर विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दीं। पार्टी नेताओं ने उनके लंबे राजनीतिक जीवन, संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कई नेताओं ने कहा कि उनके नेतृत्व में पार्टी लगातार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाने का प्रयास कर रही है।

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस सहित विभिन्न प्रदेश इकाइयों ने भी मल्लिकार्जुन खरगे को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। पार्टी की ओर से जारी संदेशों में उन्हें अनुभवी नेता, कुशल संगठनकर्ता और करोड़ों कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत के रूप में बताया गया। साथ ही उनके स्वस्थ और सक्रिय जीवन की कामना भी की गई।

    सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। समाजवादी पार्टी ने भी अपने शुभकामना संदेश में मल्लिकार्जुन खरगे के स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की। विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से आए इन संदेशों ने राजनीतिक शिष्टाचार और लोकतांत्रिक परंपराओं को भी रेखांकित किया।

    मल्लिकार्जुन खरगे भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने लंबे समय तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। संगठन और संसदीय राजनीति दोनों में उनका अनुभव व्यापक माना जाता है। वर्तमान में वह कांग्रेस अध्यक्ष होने के साथ-साथ राज्यसभा में विपक्ष के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।

    उनके जन्मदिन के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम आयोजित किए। कई स्थानों पर सामाजिक सेवा गतिविधियां, पौधारोपण, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों की सहायता जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके नेतृत्व में संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

  • मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे

    मेलबर्न मीट्स मोदी कार्यक्रम में नहीं थी भाड़े की भीड़…. आयोजक बोले… माफी मांगे राहुल गांधी और खरगे


    नई दिल्ली।
    ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न (Melbourne, Australia) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के स्वागत के लिए आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ (Melbourne Meets Modi) कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) को एक खुला खत लिखा है. इस खत में उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तरफ से लगाए गए उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है, जिसमें कार्यक्रम में शामिल लोगों को ‘पेड क्राउड’ यानी पैसे देकर जुटाई गई भीड़ बताया गया था. आयोजकों ने दोनों नेताओं से यह आरोप वापस लेने के साथ ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

    यह खुला खत उन कम्युनिटी वॉलंटियर्स की तरफ से जारी किया गया है, जिन्होंने 9 जुलाई को मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में हुए कार्यक्रम के लिए सिडनी से मेलबर्न तक ‘मोदी एयरवेज’ नाम की चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम किया था. आयोजकों का साफ कहना है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के आने-जाने और रहने का खर्च बीजेपी, भारत सरकार या ऑस्ट्रेलिया सरकार ने नहीं उठाया था. उन्होंने बताया कि सभी लोगों ने अपना खर्च खुद उठाया, जबकि कुछ लोग सामुदायिक सहयोग से इस कार्यक्रम में पहुंचे थे।

    आयोजकों में से एक, अमित कारंत ने कहा कि कांग्रेस नेताओं की ऐसी टिप्पणी बेहद निराशाजनक है. उनके मुताबिक सिडनी, एडिलेड, पर्थ और ब्रिस्बेन समेत ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग शहरों से लोग अपनी मर्जी से मेलबर्न पहुंचे थे. किसी भी सरकारी एजेंसी या राजनीतिक दल ने उनके आने-जाने पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया. यह पूरी व्यवस्था स्थानीय वॉलंटियर्स ने आपस में मिलकर संभाली थी।

    आयोजकों का कहना है कि कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने कार्यक्रम को ‘प्रायोजित’ बताकर वहां पहुंचे हजारों भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की ईमानदारी और उनकी स्वतंत्र सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस चार्टर्ड फ्लाइट से सफर करने वालों में ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, वहां के पक्के निवासी, कामकाजी पेशेवर, कारोबारी, छात्र और बुजुर्ग शामिल थे.

    खत में लिखा गया है कि इन लोगों को भाड़े की राजनीतिक भीड़ कहना सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों प्रवासियों की गरिमा का अपमान है. ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला भारतीय समुदाय किसी एक राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ा है. वहां कांग्रेस को पसंद करने वाले लोग भी हैं, बीजेपी को चाहने वाले भी और ऐसे भी कई लोग हैं जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।


    महीनों की कड़ी मेहनत पर कांग्रेस ने फेरा पानी

    आयोजकों ने बताया कि इस चार्टर्ड फ्लाइट का इंतजाम करने में महीनों की प्लानिंग लगी थी, जिसके लिए यात्रियों से तालमेल बिठाने से लेकर कागजी कार्रवाई तक पर दिन-रात काम किया गया. कई वॉलंटियर्स ने अपने बिजनेस समेत परिवारों को छोड़कर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में पूरा योगदान दिया. इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के सामने तीन बड़ी मांगें रखी हैं. पहली, ये कि सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाए कि इस फ्लाइट के लिए बीजेपी या भारत सरकार ने कोई फंडिंग नहीं की थी. दूसरी, ‘पेड क्राउड’ वाले आरोप वापस लिए जाएं. वहीं, तीसरी मांग यह है कि सभी वॉलंटियर्स, यात्रियों सहित पूरे भारतीय समुदाय से सार्वजनिक माफी मांगी जाए।


    मार्वल स्टेडियम में जुटे थे 30 हजार लोग

    मेलबर्न के मार्वल स्टेडियम में 9 जुलाई को आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए थे. इस दौरान पीएम मोदी के साथ ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जैसिंटा एलन भी मंच पर मौजूद थीं. आयोजकों ने साफ कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन भारत की घरेलू राजनीति के चक्कर में विदेश में रह रहे भारतीय समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

  • IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    IRIS DENA पर मोदी सरकार की चुप्पी से भड़के खरगे, कहा-देश की विदेश नीति को बर्बाद कर रहे…

    नई दिल्‍ली। इजरायल और अमेरिका द्वारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले ने वैश्विक राजनीति के साथ-साथ भारत की घरेलू राजनीति को भी तेज कर दिया है। ईरानी जहाज को हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा डुबोए जाने पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हिंद महासागर में हुई इस घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की चुप्पी से साफ है कि देश के रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों की घोर उपेक्षा की जा रही है। यह न सिर्फ भारत के राष्ट्रीय सिद्धांतों का अपमान है, बल्कि हमारी उस विदेश नीति का भी अपमान है, जिसे तमाम सरकारों ने बड़ी मेहनत से बनाया और अपनाया है।

    सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखे एक पोस्ट में खरगे ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “ईरान का जो जहाज टारपीडो की चपेट में आने से डूबा है यह जहाज बिना सैन्य साजो सामान के था और भारत में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 से लौट रहा था।

    ईरानी नौसेना का जहाज ईरिस डेना भारत का आमंत्रित अतिथि था और यह विशाखापत्तनम में 15 से 26 फरवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू 2026 में शामिल हुआ था। इस आयोजन में 70 से ज्यादा देशों की नौसेनाएं शामिल हुईं थीं।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि इस अतिथि के डूबने पर भारत की तरफ से कोई चिंता या संवेदना व्यक्त नहीं की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर चुप हैं। पीएम मोदी पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि जब आप अपने ही आंगन में हो रही घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं तो हमें महासागर सिद्धांतों और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ होने के सिद्धांतों पर उपदेश क्यों दे रहे हैं।
    होर्मुज की खाड़ी में फंसे 1100 भारतीय नाविक: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने इस युद्ध की वजह से होर्मुज की खाड़ी में फंसे भारतीयों को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी में 38 भारतीय ध्वज वाले जहाज और 1100 नाविक फंसे हुए हैं।

    प्टन आशीष कुमार समेत दो भारतीय नाविकों की कथित तौर पर मौत हो गई है। समुद्री बचाव या राहत अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? पीएम मोदी कहते हैं कि कच्चे तेल और अन्य तेल का भंडार केवल 25 दिनों के लिए बचा है। तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, हमारी ऊर्जा संबंधी इमरजेंसी योजना क्या है, खासकर भारत सरकार द्वारा रूसी तेल का आयात रोकने की मांग को लगभग स्वीकार करने के बाद। खाड़ी देशों के साथ अन्य प्रमुख वस्तुओं के व्यापार का क्या होगा।
    विदेश नीति को बर्बाद कर रहे हैं: खरगे

    कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि विदेश मंत्रालय के 3 मार्च के बयान के अनुसार, “कुछ भारतीय नागरिकों की जान चली गई है या वे लापता हैं”। खाड़ी देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं। मेडिकल छात्र मदद की गुहार लगाते हुए हताश वीडियो संदेश जारी कर रहे हैं।

    भारत सरकार उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रही है? क्या प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकालने की कोई योजना बनाई गई है? उन्होंने कहा कि इन सब स्थितियों के बीच “स्पष्ट रूप से, मोदी जी का आत्मसमर्पण राजनीतिक और नैतिक दोनों है। यह भारत के मूल राष्ट्रीय हितों का अपमान करता है और हमारी उस विदेश नीति को खत्म कर रहा है, जिसे वर्षों से लगातार सरकारों द्वारा सावधानीपूर्वक और मेहनत से बनाया और अपनाया गया है।”

    गौरतलब है कि इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई यह जंग अब पश्चिम एशिया से आगे बढ़कर हिंद महासागर में पहुंच गई है।

    भारत में फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम के तहत आए ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के करीब डुबो दिया। इस घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। बाकियों को श्रीलंकाई नेवी से बचाव अभियान के तहत बचाया था। फिलहाल यह सैनिक श्रीलंका में मौजूद हैं।