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  • पेट के दाईं हिस्से में दर्द है तो रहें सावधान गैस नहीं इन गंभीर बीमारियों का भी हो सकता है इशारा

    पेट के दाईं हिस्से में दर्द है तो रहें सावधान गैस नहीं इन गंभीर बीमारियों का भी हो सकता है इशारा


    नई दिल्ली। पेट में दर्द होना आम समस्या है और अक्सर लोग इसे गैस अपच या ज्यादा खाना खाने की वजह मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। खासतौर पर पेट के दाईं तरफ दर्द होने पर कई लोग बिना जांच के गैस की दवा ले लेते हैं लेकिन ऐसा करना हर बार सही नहीं होता। पेट के दाईं हिस्से में होने वाला दर्द कई बार शरीर के महत्वपूर्ण अंगों से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। इसके पीछे गैस और कब्ज जैसी सामान्य समस्या से लेकर पित्ताशय की पथरी अपेंडिसाइटिस किडनी की पथरी लिवर से जुड़ी बीमारी और आंतों के संक्रमण तक कई कारण हो सकते हैं। इसलिए दर्द को केवल उसकी जगह देखकर नहीं बल्कि उसकी तीव्रता अवधि और साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षणों के आधार पर समझना जरूरी है।

    पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में लिवर और पित्ताशय जैसे महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं। अगर इस हिस्से में दर्द खासकर तला भुना या ज्यादा वसायुक्त भोजन खाने के बाद बढ़ता है और पीठ या दाएं कंधे तक महसूस होता है तो यह पित्ताशय में पथरी की ओर संकेत कर सकता है। ऐसे मामलों में मतली और उल्टी भी हो सकती है। वहीं दर्द के साथ बुखार या आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ने लगे तो लिवर या पित्त नलिकाओं से जुड़ी परेशानी की संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए।

    पेट के निचले दाएं हिस्से में अचानक बढ़ने वाला दर्द अपेंडिसाइटिस का संकेत भी हो सकता है। कई बार इसकी शुरुआत नाभि के आसपास दर्द से होती है और धीरे धीरे दर्द दाईं निचली तरफ केंद्रित होने लगता है। चलने खांसने या शरीर को हिलाने पर दर्द बढ़ सकता है। इसके साथ भूख कम लगना मतली उल्टी और बुखार जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे दर्द को गैस समझकर लगातार दवा लेते रहना नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि गंभीर अपेंडिसाइटिस में अपेंडिक्स के फटने जैसी जटिलता हो सकती है।

    दाईं तरफ पेट या कमर में होने वाला दर्द किडनी की पथरी या मूत्र मार्ग की समस्या से भी जुड़ा हो सकता है। यदि दर्द पीठ या कमर की तरफ फैल रहा है और पेशाब करते समय जलन पेशाब में खून या बार बार पेशाब आने जैसी समस्या भी है तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है। दूसरी ओर गैस कब्ज या आंतों की सामान्य परेशानी में पेट फूलना ऐंठन भारीपन और मल त्याग में बदलाव जैसे लक्षण हो सकते हैं और कई बार मल त्याग के बाद राहत भी मिल जाती है।

    इसलिए पेट के दाईं तरफ होने वाले दर्द को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि दर्द कब शुरू हुआ लगातार है या रुक रुककर हो रहा है और उसके साथ कौन से दूसरे लक्षण मौजूद हैं। तेज या लगातार बढ़ता दर्द बुखार बार बार उल्टी मल में खून पीलापन बेहोशी या पेट में अत्यधिक जकड़न जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार शारीरिक जांच के साथ खून और पेशाब की जांच या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच करा सकते हैं। सही समय पर कारण की पहचान होने से गंभीर बीमारी और संभावित जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है।

  • यूरिक एसिड बढ़ा है? इन 9 संकेतों से पहचानें और बिना दवा भी करें कंट्रोल

    यूरिक एसिड बढ़ा है? इन 9 संकेतों से पहचानें और बिना दवा भी करें कंट्रोल


    नई दिल्ली । अगर अचानक जोड़ों में दर्द, सूजन या पैरों के अंगूठे में जलन महसूस हो तो इसे नजरअंदाज न करें। इसके पीछे हाई यूरिक एसिड (Uric Acid) की संभावना हो सकती है। शरीर भोजन के पाचन और मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं के दौरान यूरिक एसिड बनाता है। आमतौर पर किडनी इसे पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन अगर इस प्रक्रिया में गड़बड़ी हो जाए तो यूरिक एसिड शरीर में जमा होने लगता है और गाउट यानी गठिया जैसी परेशानी पैदा कर सकता है।

    लक्षण

    यूरिक एसिड बढ़ने के सबसे सामान्य लक्षण जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और जकड़न हैं। खासकर पैरों के अंगूठे, घुटने और टखने प्रभावित होते हैं। दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है और रात में बढ़ सकता है। कुछ मामलों में किडनी पर असर पड़ सकता है, जिससे पेशाब में जलन या किडनी स्टोन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    कॉम्प्लिकेशन्स

    यूरिक एसिड लंबे समय तक हाई रहने पर जोड़ों में यूरिक एसिड के क्रिस्टल जम सकते हैं, जिससे परमानेंट डैमेज हो सकता है। गाउट के कारण जोड़ों में लगातार सूजन और तेज दर्द रहता है। इसके अलावा किडनी स्टोन का खतरा भी बढ़ जाता है।

    नॉर्मल लेवल

    एक स्वस्थ वयस्क में यूरिक एसिड का सामान्य स्तर पुरुषों में 3.4–7.0 mg/dL और महिलाओं में 2.4–6.0 mg/dL होता है। इसके ऊपर जाने पर जोड़ों और किडनी को असर पड़ सकता है।

    टेस्ट

    यूरिक एसिड लेवल जानने के लिए सीरम यूरिक एसिड ब्लड टेस्ट या यूरिन यूरिक एसिड टेस्ट करवाया जा सकता है। ये टेस्ट सुरक्षित और आसान होते हैं।

    इलाज और कंट्रोल

    हल्का बढ़ा यूरिक एसिड लाइफस्टाइल सुधार से कंट्रोल किया जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, वजन नियंत्रित रखना और हेल्दी डाइट अपनाना मददगार है। अगर गाउट अटैक हो रहे हैं, तो डॉक्टर दवा देते हैं।

    डाइट और खान-पान

    लो-प्यूरिन और फाइबर से भरपूर फूड जैसे हरी सब्जियां, मौसमी फल, होल ग्रेन्स और लो-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स फायदेमंद हैं। विटामिन-C वाले फल जैसे संतरा, नींबू और आंवला यूरिक एसिड को किडनी से बाहर निकलने में मदद करते हैं। इसके विपरीत रेड मीट, ऑर्गन मीट, सी-फूड, शराब, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और बहुत मीठे जूस से परहेज करें।

    डॉक्टर से कंसल्ट कब करें: बार-बार गाउट अटैक लंबे समय तक दर्द बना रहना चलने-फिरने में दिक्कत पेशाब में जलन या खून आना बहुत कम पेशाब किडनी स्टोन की समस्या समय रहते लक्षण पहचानकर सही इलाज और संतुलित जीवनशैली अपनाने से यूरिक एसिड को नियंत्रित किया जा सकता है।