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  • पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    पानी पीने के बाद भी बार-बार लगती है प्यास तो इन स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत, जानें कब सावधान हों

    नई दिल्ली । गर्मी, ज्यादा पसीना आने, शारीरिक मेहनत करने या पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने पर बार-बार प्यास लगना सामान्य स्थिति हो सकती है। हालांकि, अगर पानी पीने के बाद भी प्यास जल्दी बुझती नहीं है और यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे केवल सामान्य प्यास मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार और असामान्य प्यास शरीर में पानी या इलेक्ट्रोलाइट संतुलन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकती है।

    बार-बार प्यास लगने की सबसे आम वजह डिहाइड्रेशन हो सकती है। तेज गर्मी में रहने, व्यायाम करने या अधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है। अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ खाने से भी प्यास बढ़ सकती है। कैफीन युक्त पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में पेशाब बढ़ाकर शरीर के तरल संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

    लगातार अत्यधिक प्यास डायबिटीज से जुड़ा एक महत्वपूर्ण लक्षण भी हो सकती है। जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक बढ़ जाता है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है। इस प्रक्रिया में शरीर से अधिक मात्रा में पानी निकल सकता है और व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने के साथ ज्यादा प्यास महसूस हो सकती है। इसके साथ थकान, वजन में बदलाव या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।

    किडनी शरीर में पानी, नमक और दूसरे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किडनी के कामकाज में समस्या होने पर शरीर के तरल संतुलन में बदलाव आ सकता है। हालांकि केवल ज्यादा प्यास लगने के आधार पर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यदि इसके साथ पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    बार-बार प्यास लगने की एक अपेक्षाकृत कम सामान्य वजह डायबिटीज इन्सिपिडस भी हो सकती है। यह डायबिटीज मेलिटस से अलग स्थिति है और इसमें शरीर के पानी के संतुलन को नियंत्रित करने वाली हार्मोनल व्यवस्था प्रभावित होती है। इसके कारण बहुत अधिक मात्रा में पतला पेशाब आ सकता है और उसके बाद अत्यधिक प्यास महसूस हो सकती है।

    कई बार व्यक्ति को वास्तविक रूप से शरीर में पानी की कमी न होने के बावजूद मुंह सूखने के कारण प्यास जैसा महसूस होता है। इसे ड्राई माउथ कहा जाता है। इसमें मुंह और जीभ में सूखापन, चिपचिपापन या होंठों के सूखने जैसी शिकायत हो सकती है। कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, तनाव और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी मुंह सूखने की वजह बन सकती हैं।

    इसलिए केवल प्यास लगने के आधार पर किसी बीमारी की पहचान करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समस्या लगातार बनी रहे, बहुत ज्यादा पेशाब आए, रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना पड़े, असामान्य कमजोरी महसूस हो या वजन में बिना वजह बदलाव आए तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। आवश्यकता के अनुसार डॉक्टर रक्त शर्करा, किडनी की कार्यक्षमता, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

    बच्चों और बुजुर्गों में शरीर में पानी की कमी तेजी से गंभीर हो सकती है। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, भ्रम, बेहोशी या पानी न पी पाने जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सहायता जरूरी हो सकती है। लगातार प्यास को समझने का सबसे सही तरीका इसके साथ मौजूद दूसरे लक्षणों और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखना है।

  • 'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    'ठाकुर सज्जन सिंह' से घर-घर मशहूर हुए अनुपम श्याम, बीमारी के दौर में योगी सरकार ने की थी 20 लाख रुपये की मदद

    नई दिल्ली । अभिनेता अनुपम श्याम ओझा भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। खास तौर पर लोकप्रिय धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ में ठाकुर सज्जन सिंह के किरदार ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई। फिल्मों से लेकर छोटे पर्दे तक अपने अभिनय की मजबूत छाप छोड़ने वाले अनुपम श्याम ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए। हालांकि, जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें गंभीर बीमारी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिली आर्थिक सहायता भी चर्चा में रही थी।

    अनुपम श्याम का जन्म 20 सितंबर 1957 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान अभिनय की ओर था। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने अवध विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी से रंगमंच और अभिनय का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद वह दिल्ली के श्रीराम सेंटर रंगमंडल से जुड़े और थिएटर के जरिए अभिनय की बारीकियों को समझा। रंगमंच पर अनुभव हासिल करने के बाद उन्होंने अभिनय के बड़े सपने के साथ मुंबई का रुख किया।

    मुंबई में शुरुआती दौर आसान नहीं था। उन्हें छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत करनी पड़ी, लेकिन उनकी प्रतिभा ने धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा। उनके फिल्मी करियर की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय फिल्म ‘लिटिल बुद्धा’ से हुई। इसके बाद शेखर कपूर की चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ में भी उन्होंने अभिनय किया। आगे चलकर वह ‘लगान’, ‘नायक’, ‘शक्ति’, ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’, ‘वांटेड’, ‘हल्ला बोल’ और ‘रक्त चरित्र’ जैसी फिल्मों का हिस्सा बने। कई फिल्मों में उन्होंने दबंग और नकारात्मक भूमिकाओं को प्रभावी तरीके से पर्दे पर उतारा।

    हालांकि फिल्मों में लंबे समय तक काम करने के बाद भी उन्हें सबसे बड़ी लोकप्रियता वर्ष 2009 में शुरू हुए धारावाहिक ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा’ से मिली। इसमें ठाकुर सज्जन सिंह की भूमिका ने उनकी पहचान को एक अलग मुकाम दिया। उनका संवाद बोलने का अंदाज और किरदार की प्रभावशाली प्रस्तुति दर्शकों को बेहद पसंद आई। इस भूमिका की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि बड़ी संख्या में दर्शक उन्हें उनके वास्तविक नाम के बजाय ठाकुर सज्जन सिंह के नाम से पहचानने लगे। बाद में उन्होंने ‘प्रतिज्ञा 2’, ‘कृष्णा चली लंदन’ और ‘डोली अरमानों की’ सहित कई धारावाहिकों में अभिनय किया।

    जीवन के अंतिम दौर में अनुपम श्याम गंभीर किडनी संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी और लंबे इलाज के कारण आर्थिक परेशानियां भी बढ़ गई थीं। इसी दौरान उनके परिवार की ओर से मदद की अपील की गई थी। अनुपम श्याम ने बाद में एक बातचीत में बताया था कि उनकी बीमारी की जानकारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, जिसके बाद इलाज के लिए 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता अस्पताल के खाते में भेजी गई। अभिनेता ने इस मदद के लिए आभार भी जताया था और बताया था कि इससे उनके इलाज को आगे बढ़ाने में सहायता मिली।

    इलाज के दौरान उनकी तबीयत में कुछ समय के लिए सुधार आया और उन्होंने दोबारा काम शुरू करने की कोशिश की। वह ‘मन की आवाज प्रतिज्ञा 2’ की शूटिंग से भी जुड़े, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बनी रहीं। आखिरकार 8 अगस्त 2021 को मुंबई के एक अस्पताल में 63 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके जाने के बाद फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर दौड़ गई। अनुपम श्याम भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन ठाकुर सज्जन सिंह सहित उनके यादगार किरदार और अभिनय की विरासत दर्शकों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेगी।

  • नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

    नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।

    डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है।

    किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है।

    हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं।

    डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।