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  • राजस्थान की रसोई से ब्रिटिश रॉयल पैलेस तक का सफर: मोतिहारी के नंद किशोर यादव ने रचा नया इतिहास

    राजस्थान की रसोई से ब्रिटिश रॉयल पैलेस तक का सफर: मोतिहारी के नंद किशोर यादव ने रचा नया इतिहास


    नई दिल्ली । बिहार के मोतिहारी में जन्मे शेफ नंद किशोर यादव ने अपनी मेहनत और हुनर के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत से ब्रिटेन तक का उनका करीब ढाई दशक लंबा पाक कला का सफर अब ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़ गया है। नंद किशोर यादव को स्कॉटलैंड के एडिनबरा स्थित ऐतिहासिक पैलेस ऑफ होलीरूडहाउस में आयोजित प्रतिष्ठित रॉयल गार्डन पार्टी में शामिल होने का निमंत्रण मिला। इस खास समारोह की मेजबानी ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला ने की। नंद के लिए यह सिर्फ एक समारोह में शामिल होने का अवसर नहीं था बल्कि उनके लंबे संघर्ष और उपलब्धियों को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान भी थी।

    रॉयल गार्डन पार्टी ब्रिटिश शाही परिवार के प्रमुख आयोजनों में शामिल है। गर्मियों के दौरान ब्रिटिश सम्राट एक सप्ताह स्कॉटलैंड में बिताते हैं जिसे होलीरूड वीक या रॉयल वीक के नाम से जाना जाता है। इसी दौरान आयोजित होने वाली गार्डन पार्टी में समाज के अलग अलग क्षेत्रों और समुदायों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को आमंत्रित किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित आयोजन में नंद किशोर यादव का पहुंचना उनके लिए खास गौरव का विषय रहा।

    नंद किशोर यादव ने इस अनुभव को अपनी जिंदगी के यादगार पलों में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि पैलेस ऑफ होलीरूडहाउस में आमंत्रित किया जाना उनके लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। भारत से ब्रिटेन आकर जीवन और करियर बनाने के बाद इस तरह के महत्वपूर्ण अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए ऐसी याद है जिसे वह जीवनभर संजोकर रखेंगे। उन्होंने बताया कि पैलेस में खड़े होकर उन्होंने अपने अब तक के पूरे सफर को याद किया और अपनी जड़ों को लेकर गर्व महसूस किया।

    नंद किशोर यादव का जन्म मोतिहारी में हुआ था और उनके पाक कला करियर की शुरुआत वर्ष 1999 में हुई। उन्होंने राजस्थान के लग्जरी होटलों की रसोई से अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की और अलग अलग भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में Carnival Cruise पर काम किया जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय शेफ के साथ काम करने और दुनिया भर के व्यंजनों को समझने का मौका मिला। इस अनुभव ने उनके पाक कला के दायरे को और व्यापक बनाया।

    वर्ष 2007 में नंद ब्रिटेन पहुंचे। यहां उन्होंने फाइन डाइनिंग के क्षेत्र में काम किया और ब्रिटिश सेलिब्रिटी शेफ गॉर्डन रामसे के नेतृत्व में भी अनुभव हासिल किया। करीब 25 वर्षों के करियर में उन्होंने भारतीय फ्रेंच इटैलियन मेडिटेरेनियन और साउथ अमेरिकन कुजीन में विशेषज्ञता हासिल की। खास तौर पर फ्यूजन कुजीन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।

    आज नंद किशोर यादव लंदन के पास होलीपोर्ट गांव में लोकप्रिय पब The White Hart से जुड़े हैं। वह पुरस्कार विजेता शेफ और कैटरर के तौर पर भी काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि शाही समारोह का निमंत्रण उनकी भारतीय विरासत ब्रिटेन की हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री में उनके सफर और समुदाय के लिए किए गए काम का सम्मान है।

    नंद ने अपने पेशे को सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं रखा। वह Mission Possible पहल के जरिए The White Hart को समुदाय से जुड़ी जगह के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा पत्नी और बेटियों के नाम पर शुरू किए गए Ninaya Catering के जरिए दक्षिण पूर्व इंग्लैंड में प्रामाणिक भारतीय व्यंजनों को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। मोतिहारी से शुरू हुआ नंद किशोर यादव का सफर अब ब्रिटेन के शाही दरबार तक पहुंच चुका है और उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो हुनर और मेहनत के दम पर दुनिया में अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं।

  • ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता

    ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री बने एंडी बर्नहैम… किंग चार्ल्स III ने दिया सरकार बनाने का न्यौता


    लंदन।
    लेबर पार्टी (Labour Party) के सांसद एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) सोमवार को आधिकारिक तौर पर ब्रिटेन के 59वें प्रधानमंत्री (Britain’s 59th Prime Minister) बन गए हैं। बकिंघम पैलेस (Buckingham Palace) में किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) के साथ एक निजी मुलाकात के दौरान उन्हें सरकार बनाने का न्यौता दिया गया। इससे पहले सर कीर स्टार्मर ने प्रधानमंत्री पद से अपना इस्तीफा सम्राट को सौंप दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया।

    बकिंघम पैलेस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया कि सर कीर स्टार्मर ने आज सुबह सम्राट से मुलाकात की और प्रधानमंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया, जिसे महामहिम ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। बर्नहैम पिछले एक दशक में ब्रिटेन के सातवें प्रधानमंत्री बने हैं। सबसे खास बात है एंडी बर्नहैम का अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्ता। बर्नहैम, ट्रंप के मुखर आलोचक रहे हैं। अब प्रधानमंत्री बनने के बाद वह ट्रंप के साथ कैसे निभाते हैं, यह देखने वाली बात होगी।


    चुनौती होंगे ट्रंप के साथ संबंध

    बर्नहैम के सामने शुरुआती विदेश नीति की चुनौतियों में से एक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ संबंधों को संभालना होगा। बर्नहैम के पद संभालने से पहले ट्रंप ने उन्हें बेहद उदारवादी बताया था। बर्नहैम अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने अमेरिका की अत्यधिक ध्रुवीकृत राजनीति को ब्रिटेन में लाने के खिलाफ चेतावनी दी है। हालांकि उनकी इस आलोचना से अमेरिका के साथ ब्रिटेन के पुराने और मजबूत संबंधों पर असर पड़ने की संभावना कम है।


    हर तरफ से दबाव

    घरेलू मोर्चे पर, बर्नहैम को एक ऐसी सरकार विरासत में मिली है जिसे हर तरफ से राजनैतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका आगमन वर्षों की राजनैतिक अस्थिरता के बीच हुआ है, जिस दौरान बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर एक के बाद एक सत्ता में आए। ऐसे में श्री बर्नहैम के सामने न केवल अपने एजेंडे को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि मतदाताओं को यह विश्वास दिलाने की भी ज़िम्मेदारी है कि उनकी सरकार वह स्थिरता प्रदान करेगी जो उनके कई पूर्ववर्तियों के समय नहीं दिख सकी।


    ब्रिटेन को बड़े बदलाव की जरूरत

    ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर रहे बर्नहैम को ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ (उत्तर का राजा) के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी लेबर पार्टी की सरकारों में काम कर चुके हैं। बर्नहैम लंबे समय से लंदन से बाहर के क्षेत्रों में अधिक निवेश और प्रशासनिक शक्तियां देने की वकालत करते रहे हैं। उम्मीद है कि बर्नहैम प्रधानमंत्री के रूप में अपने पहले संबोधन में इस बात पर जोर देंगे कि ब्रिटेन को एक बड़े बदलाव की जरूरत है, जिसमें आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने, संघर्ष कर रहे सार्वजनिक क्षेत्रों में सुधार करने और ‘ब्रिटेन को फिर से सुदृढ़ करने’ की योजनाएं शामिल हैं।

    यह भी एक रिकॉर्ड
    स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ही ब्रिटेन में जीवित पूर्व प्रधानमंत्रियों की संख्या रिकॉर्ड नौ हो गई है। इनमें जॉन मेजर, टोनी ब्लेयर, गॉर्डन ब्राउन, डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज़ ट्रस, ऋषि सुनक और कीर स्टार्मर शामिल हैं। उम्मीद है कि ये सभी नेता इस साल लंदन के सेनोटैफ में आयोजित होने वाली ‘रिमेंब्रेंस संडे’ सेवा में एक साथ नजर आएंगे।

  • ट्रंप का बड़ा आर्थिक दांव: ब्रिटेन को राहत, स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ हटाकर रिश्तों में नई गर्माहट

    ट्रंप का बड़ा आर्थिक दांव: ब्रिटेन को राहत, स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ हटाकर रिश्तों में नई गर्माहट

    नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक अहम कदम उठाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की मशहूर स्कॉच व्हिस्की पर लगाए गए टैरिफ को हटाने का ऐलान किया है। यह फैसला तब सामने आया जब ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कैमिला ने चार दिन का अमेरिका दौरा पूरा किया। इस दौरे को सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं बल्कि ऐतिहासिक और रणनीतिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

    ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह निर्णय किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के सम्मान में लिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस उच्चस्तरीय मुलाकात ने अमेरिका के व्यापारिक रुख को प्रभावित किया है। स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ हटाने का फैसला न केवल आर्थिक दृष्टि से अहम है, बल्कि यह अमेरिका और ब्रिटेन के बीच वर्षों से चले आ रहे व्यापारिक तनाव को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    रिश्तों में सुधार की रणनीति
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के पीछे केवल कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति भी है। अमेरिका और ब्रिटेन के बीच हाल के वर्षों में व्यापारिक मुद्दों और टैरिफ विवादों को लेकर खटास देखी गई थी। ऐसे में स्कॉच व्हिस्की जैसे प्रतिष्ठित ब्रिटिश उत्पाद पर राहत देना एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    ट्रंप प्रशासन के इस कदम को तीन प्रमुख कारणों से जोड़ा जा रहा है। पहला, ब्रिटेन के साथ बिगड़ते रिश्तों को सुधारना। दूसरा, लंबे समय से चल रहे व्यापारिक दबाव को कम करना। और तीसरा, अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने जैसे ऐतिहासिक अवसर पर एक प्रतीकात्मक संदेश देना।

    प्रतीकात्मक कूटनीति और आर्थिक संकेत
    किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला का यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं था, बल्कि इसे अमेरिका-ब्रिटेन संबंधों में नई ऊर्जा भरने के प्रयास के रूप में देखा गया। ट्रंप का यह निर्णय इस बात का संकेत देता है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में प्रतीकात्मक घटनाएं भी बड़ी नीतिगत बदलावों को जन्म दे सकती हैं।

    स्कॉच व्हिस्की ब्रिटेन के सबसे महत्वपूर्ण निर्यात उत्पादों में से एक है, और इस पर टैरिफ हटने से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं अमेरिकी बाजार में भी इसकी उपलब्धता और व्यापारिक संतुलन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

    वैश्विक राजनीति में संदेश
    यह कदम वैश्विक स्तर पर भी एक संदेश देता है कि अमेरिका अपने पारंपरिक सहयोगियों के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा सहयोग में और मजबूती देखने को मिल सकती है।

    इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कूटनीति केवल बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि प्रतीकात्मक निर्णय भी वैश्विक रिश्तों की दिशा बदल सकते हैं।