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  • चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    चीन के 60 किलोमीटर घुसने के दावे पर किरेन रिजिजू का पलटवार, बोले सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखें

    नई दिल्ली ।केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन सीमा विवाद, सेना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और संसद में विपक्ष के हंगामे सहित कई मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े वास्तविक मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए जिनसे देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो। उन्होंने विशेष रूप से उस दावे को गलत बताया जिसमें चीन के भारत की सीमा में 60 किलोमीटर तक अंदर आने की बात कही गई थी।

    रिजिजू ने अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच सीमा संबंधी स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि कई इलाकों में अभी स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। कुछ स्थानों पर सीमा स्तंभ और जमीन पर सीमा की स्पष्ट पहचान भी नहीं है। उनके अनुसार स्थानीय लोगों की ओर से सीमा को लेकर जताई जाने वाली चिंताएं वास्तविक हैं, लेकिन इन परिस्थितियों को चीन के भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर तक घुस आने के दावे से जोड़ना सही नहीं है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीन ने सीमा के अपने हिस्से में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास पहले शुरू कर दिया था। भारत की ओर से भी वर्ष 2014 के बाद सीमावर्ती इलाकों में सड़क, संपर्क और अन्य सुविधाओं के निर्माण को गति दी गई। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्याप्त सड़क संपर्क नहीं होने से सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

    रिजिजू ने सीमावर्ती इलाकों में अपने दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सुरक्षा बलों और सेना के जवानों से मुलाकात की है तथा वहां सड़क निर्माण की स्थिति भी देखी है। उन्होंने ताकसिंग तक सड़क संपर्क मजबूत होने का जिक्र करते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास से सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है।

    लोंगजू और आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां भारत और चीन के बीच पुराना सीमा विवाद रहा है। उनके अनुसार कुछ क्षेत्रों में चीन की ओर से ढांचे और गांव जैसी इमारतें बनाई गई हैं। रिजिजू ने कहा कि इन परिस्थितियों को सीमा विवाद के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, लेकिन यह कहना सही नहीं है कि चीन ने भारतीय गांवों पर कब्जा कर लिया है।

    राहुल गांधी द्वारा चीन की कथित घुसपैठ को लेकर तस्वीरें दिखाए जाने के सवाल पर रिजिजू ने सेना को राजनीतिक विवादों से दूर रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेना देश की रक्षा करती है और उसे राजनीतिक बहस का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सेना के अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी कांग्रेस नेताओं से गंभीरता से विचार करने को कहा।

    संसद में विपक्ष के हंगामे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी से जुड़े आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि गृह मंत्री संसद में मौजूद रहते हैं और कार्यवाही के दौरान अपना समय देते हैं। उन्होंने विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही प्रभावित होती है।

    परिसीमन और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर रिजिजू ने कहा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है। उन्होंने विपक्षी दलों से सहयोग की अपील की। राहुल गांधी की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं, लेकिन कांग्रेस सांसदों की नारेबाजी और हंगामे को रोकने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

    वंदे मातरम को लेकर रिजिजू ने कहा कि यह राष्ट्रीय गीत है और सभी भारतीयों को इसका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने विपक्ष की स्थिति पर कहा कि चुनावी असफलता के बाद संसद में हंगामा करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक संसद को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकार और विपक्ष दोनों को संवाद और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

  • लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    लोकसभा में राहुल गांधी के संबोधन पर हंगामा, किरेन रिजिजू ने असंसदीय भाषा के इस्तेमाल पर जताई कड़ी आपत्ति

    नई दिल्ली । लोकसभा में एंटी पेपर लीक विषय पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संबोधन पर बुधवार को सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। भाषण के दौरान इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्तापक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने अपने संबोधन में असंसदीय भाषा का प्रयोग किया, जो संसदीय परंपराओं और नियमों के अनुरूप नहीं है।

    राहुल गांधी अपने संबोधन के दौरान एंटी पेपर लीक से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिन पर सत्तापक्ष के सांसदों ने आपत्ति दर्ज कराई। विरोध बढ़ने के साथ ही सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और कई सदस्य अपनी सीटों से खड़े होकर विरोध जताने लगे।

    स्थिति को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों के अनुसार किसी भी सदस्य को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका कहना था कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन चर्चा के दौरान असंसदीय शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

    रिजिजू ने नेता प्रतिपक्ष से आग्रह किया कि वे अपनी बात पूरी मजबूती से रखें, लेकिन संसदीय परंपराओं का पालन भी करें। उन्होंने कहा कि नियम सरकार ने नहीं बनाए हैं, बल्कि संसद की स्थापित प्रक्रियाओं के तहत सभी सदस्यों पर समान रूप से लागू होते हैं। उनके अनुसार किसी भी सदस्य को ऐसे शब्दों से बचना चाहिए, जिनसे सदन की कार्यवाही प्रभावित हो।

    इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया कि राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए कथित असंसदीय शब्दों को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाया जाए। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने स्थिति पर संज्ञान लिया और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। हंगामे के शांत होने के बाद अध्यक्ष ने राहुल गांधी को अपना भाषण आगे जारी रखने का अवसर भी दिया।

    चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने यह भी कहा कि पहले भी कई अवसरों पर विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों के संबोधन के दौरान व्यवधान उत्पन्न किया गया था। उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के समय हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद में स्वस्थ और सार्थक बहस लोकतंत्र की पहचान है, लेकिन इसके लिए सभी पक्षों को संसदीय मर्यादाओं का सम्मान करना आवश्यक है।

    दूसरी ओर, विपक्ष एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरता रहा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा युवाओं के हितों से जुड़े सवाल उठाता रहा। इस विषय पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

    लोकसभा की कार्यवाही के दौरान हुए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसदीय भाषा, सदन की गरिमा और बहस के स्तर को लेकर चर्चा तेज कर दी है। अब आगे की कार्यवाही में अध्यक्ष के निर्णय और संसदीय नियमों के तहत उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • भारत में लॉकडाउन नहीं लगेगा, तीन मंत्रियों ने किया स्पष्ट और जमाखोरों को दी चेतावनी

    भारत में लॉकडाउन नहीं लगेगा, तीन मंत्रियों ने किया स्पष्ट और जमाखोरों को दी चेतावनी


    नई दिल्ली:  पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक तेल संकट के बीच भारत में लॉकडाउन और ईंधन की किल्लत को लेकर फैल रही अफवाहों ने शुक्रवार को सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि केंद्र सरकार ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार करार देते हुए जनता को शांति बनाए रखने की अपील की है।

    सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरीने- स्पष्ट किया कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई इरादा नहीं है और जनता को पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जैसा लॉकडाउन देखा गया था, वैसा कोई प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

    इस अफवाह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए हालिया बयान के बाद हुई। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट के लंबे प्रभावों की चेतावनी दी थी और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए एकजुट रहने की बात कही थी। इसे कुछ लोगों ने गलत तरीके से लॉकडाउन से जोड़कर प्रचारित कर दिया।

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो और कोई भी आवश्यक वस्तुओं की होर्डिंग न करे। उन्होंने जमाखोरों को भी सख्त चेतावनी दी।

    पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईंधन की कमी की अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने साफ किया कि सरकार के पास लॉकडाउन का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति लगातार बनी हुई है।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राजनीतिक गलियारों में उठ रही इन चर्चाओं पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि कोविड के समय जैसा लॉकडाउन देखा गया, वैसा अब लागू नहीं होगा और अफवाहें केवल जनता में चिंता फैलाने के उद्देश्य से हैं।

    केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध जारी है। इस प्रकार जनता को किसी भी तरह की घबराहट या अफवाह पर ध्यान नहीं देना चाहिए और शांत एवं जिम्मेदार बने रहना चाहिए।

  • मोदी सरकार ने साफ किया रुख, लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह फर्जी, घबराने की जरूरत नहीं

    मोदी सरकार ने साफ किया रुख, लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह फर्जी, घबराने की जरूरत नहीं


    नई दिल्ली:
    देश में एक बार फिर लॉकडाउन को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। हाल ही में वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव विशेषकर ईरान और इजराइल से जुड़े घटनाक्रमों के कारण तेल संकट की आशंका ने लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। इसी के चलते सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि भारत में फिर से कोविड जैसी पाबंदियां लागू की जा सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और देश में हालात पूरी तरह सामान्य हैं।

    केंद्रीय मंत्रियों किरण रिजिजू और हरदीप सिंह पुरी ने सामने आकर इन अफवाहों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को लेकर जो भी खबरें फैलाई जा रही हैं वे पूरी तरह निराधार हैं और सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांत एवं जिम्मेदार व्यवहार बनाए रखें।

    किरण रिजिजू ने संसद के बाहर बातचीत में साफ कहा कि देश में लॉकडाउन नहीं लगेगा और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा आम जनता को न हो। उन्होंने जमाखोरी करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनी रहे और कृत्रिम संकट पैदा न हो।

    वहीं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल की कीमतों को लेकर सरकार की रणनीति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सरकार ने ऐसा रास्ता चुना है जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास विकल्प था कि अन्य देशों की तरह कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय भार उठाया जाए और सरकार ने नागरिकों के हित में दूसरा विकल्प चुना।

    पुरी ने यह भी कहा कि भारत ने पहले भी वैश्विक संकटों के दौरान अपनी मजबूती दिखाई है और इस बार भी समय पर और संतुलित निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि लॉकडाउन को लेकर फैल रही बातें पूरी तरह गलत हैं और इस तरह की अफवाहें फैलाना गैर जिम्मेदाराना है।दरअसल यह भ्रम उस समय बढ़ा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में वैश्विक हालात को देखते हुए सतर्क रहने और तैयार रहने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि दुनिया में बने कठिन हालात का असर लंबे समय तक रह सकता है और हमें मिलकर इसका सामना करना होगा। इस बयान को कुछ लोगों ने गलत तरीके से समझ लिया और सोशल मीडिया पर लॉकडाउन को लेकर अटकलें शुरू हो गईं।

    सरकार ने अब साफ कर दिया है कि देश में किसी भी प्रकार के लॉकडाउन की योजना नहीं है। ऐसे समय में जरूरी है कि लोग अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित कर रही है कि देश में सामान्य जीवन प्रभावित न हो।