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  • मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच

    मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच


    नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सेहत और औषधीय गुणों का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट वाली हल्दी की समस्या बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में हल्दी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार हल्दी में चमकदार पीला रंग देने के लिए मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसके अलावा चॉक पाउडर या घटिया क्वालिटी के कच्चे पदार्थों की मिलावट भी की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता पर असर पड़ता है।

    पानी से करें आसान टेस्ट
    घर पर हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका है वॉटर टेस्ट। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो हल्दी को शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर पानी ज्यादा गहरा पीला हो जाए या हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है।

    हथेली से भी पता चलेगा सच
    एक और आसान तरीका है हथेली टेस्ट। एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखकर उसे अंगूठे से 10–20 सेकंड तक रगड़ें। असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर अलग या फीका होता है।

    मिलावटी हल्दी के नुकसान
    विशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी हल्दी के सेवन से पेट दर्द, अपच, मतली और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक इसका सेवन लिवर और पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है।

    खरीदते समय रखें ये सावधानी
    हल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड चुनें और ज्यादा चमकदार पीले रंग पर भरोसा न करें। समय-समय पर घर में इसकी जांच करना भी सुरक्षित माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी मिलावट भी लंबे समय में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।

  • घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

    घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान


    नई दिल्ली:भारतीय रसोई में Ghee का महत्व बेहद खास होता है, चाहे पूजा पाठ हो या रोजमर्रा का खाना, घी हर घर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आजकल बाजार में मिलावटी घी की बढ़ती समस्या लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन गई है, ऐसे में जरूरी है कि हम असली और नकली घी की पहचान करना सीखें ताकि अपने परिवार को सुरक्षित और शुद्ध भोजन दे सकें

    घी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका हथेली टेस्ट माना जाता है, इसके लिए थोड़ा सा घी हथेली पर रखें, असली घी शरीर की गर्माहट से धीरे धीरे पिघलता है, जबकि नकली घी या तो तुरंत पिघल जाता है या फिर बिल्कुल नहीं पिघलता, यह तरीका तुरंत परिणाम देने वाला और बेहद सरल है

    खुशबू के जरिए भी घी की पहचान की जा सकती है, शुद्ध घी में हल्की मीठी और दूध जैसी सुगंध होती है, जबकि मिलावटी घी में केमिकल जैसी गंध आ सकती है या फिर उसमें कोई खास खुशबू नहीं होती, अगर घी को हल्का गर्म किया जाए तो असली घी की खुशबू और ज्यादा उभरकर सामने आती है

    स्वाद भी घी की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेत देता है, असली घी का स्वाद हल्का मीठा और मुंह में घुल जाने वाला होता है, वहीं नकली घी जीभ पर चिपचिपा लग सकता है या उसका स्वाद अजीब सा महसूस हो सकता है, ऐसे संकेत मिलते ही सतर्क हो जाना चाहिए

    फ्रिज टेस्ट भी काफी प्रभावी माना जाता है, इसके लिए घी को एक कटोरी में डालकर कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें, शुद्ध घी जमने पर एक समान और दानेदार टेक्सचर दिखाता है, जबकि मिलावटी घी अलग अलग परतों में जम सकता है या असमान दिखाई देता है

    पानी में घी डालकर भी उसकी शुद्धता जांची जा सकती है, एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी डालें, असली घी नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली घी पानी में घुल सकता है या ऊपर तैरने लगता है, यह तरीका भी घर पर आसानी से किया जा सकता है

    एक और तरीका है घी को जलाकर देखना, एक चम्मच में थोड़ा घी लेकर जलाएं, शुद्ध घी साफ लौ के साथ जलता है और उसमें अच्छी खुशबू आती है, जबकि नकली घी जलने पर धुआं देता है या बदबू पैदा करता है

    घी खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है, बहुत सस्ता घी खरीदने से बचें, खुले में बिकने वाले घी पर भरोसा न करें और हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या डेयरी से ही खरीदारी करें, इसके अलावा घी का रंग बहुत ज्यादा सफेद या अत्यधिक पीला होना भी संदेह का संकेत हो सकता है

     थोड़ी सी जागरूकता और ये आसान घरेलू तरीके अपनाकर आप मिलावटी घी से बच सकते हैं और अपने परिवार को शुद्ध, स्वादिष्ट और सेहतमंद भोजन दे सकते हैं

  • जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका

    जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका


    नई दिल्ली। सर्दियों के खत्म होते ही ताजी मटर बाजार से गायब होने लगती है, ऐसे में फ्रोजन मटर ही एकमात्र विकल्प बचती है। ‘रेडी-टू-यूज’ होने के कारण यह न केवल समय बचाती है, बल्कि छीलने के झंझट से भी मुक्ति दिलाती है। लेकिन क्या यह उतनी ही पौष्टिक है जितनी ताजी मटर? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके से चुनी और इस्तेमाल की जाए, तो फ्रोजन मटर ताजी मटर का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।

    फ्रोजन मटर: ताजी मटर से कितनी अलग?
    अक्सर लोग इसे ‘प्रोसेस्ड फूड’ मानकर घबराते हैं, लेकिन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि फ्रोजन मटर को ‘ब्लांचिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मटर को पहले उबलते पानी में डाला जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर फ्रीज किया जाता है। यह प्रक्रिया मटर के प्राकृतिक रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को ‘लॉक’ कर देती है। कई मामलों में, फ्रोजन मटर उन ताजी मटर से बेहतर हो सकती है जो कई दिनों तक ट्रांसपोर्टेशन या धूप में रखी रहती हैं।

    खरीदते समय बरतें ये 6 सावधानियां
    बाजार से फ्रोजन मटर का पैकेट उठाते समय इन बातों का खास ख्याल रखें:पैकेट को हिलाकर देखें: मटर के दाने अलग-अलग महसूस होने चाहिए। यदि वे एक बड़े बर्फ के गोले की तरह जमे हुए हैं, तो इसका मतलब है कि पैकेट को पहले पिघलाया गया और फिर दोबारा फ्रीज किया गया है । ऐसे पैकेट न खरीदें। बर्फ की परत: अगर पैकेट के अंदर बहुत अधिक बर्फ जमी है, तो यह नमी और खराब स्टोरेज की निशानी है।

    एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले।

    इस्तेमाल करने का सही तरीका

    डायरेक्ट कुकिंग न करें: फ्रोजन मटर को फ्रीजर से निकालकर सीधे गरम तेल या तड़के में न डालें।गुनगुना पानी: इस्तेमाल से 5-10 मिनट पहले मटर को सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे इसकी बर्फ पिघल जाएगी और यह अपनी प्राकृतिक कोमलता में आ जाएगी। ओवरकुकिंग से बचें: चूंकि फ्रोजन मटर पहले से ही ‘ब्लांच’ होती है, इसलिए इसे ताजी मटर की तुलना में बहुत कम पकाने की जरूरत होती है। ज्यादा पकाने से इसके विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो सकते हैं।

  • मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के

    मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के


    नई दिल्ली ।सर्दियों के मौसम में ताजी हरी मटर की बहार आना किसी खुशखबरी से कम नहीं होता। चाहे मटर का निमोना हो गरमागरम मटर पनीर या मटर पराठे सर्दियों का स्वाद इनसे ही पूरा होता है। लेकिन मटर छीलना खासकर जब ज्यादा मात्रा में हो एक थकाऊ काम बन जाता है। नाखूनों से छिलके निकालते वक्त उंगलियों में दर्द और मटर की फलियों से एक-एक दाना निकालने में लगने वाला समय अक्सर हमें इस काम से बचने का कारण बन जाता है।
    लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक ऐसी स्मार्ट ट्रिक’ वायरल हो रही है जिससे आप मात्र 5 से 10 मिनट में 2 किलो तक मटर आसानी से छील सकते हैं। जी हां यह तरीका न सिर्फ आपके समय की बचत करेगा बल्कि मटर छीलने का वह थका देने वाला काम भी अब बिना दर्द और आलस्य के खत्म हो जाएगा।

    मटर छीलने में क्यों आती है नानी याद

    मटर के छिलके काफी सख्त होते हैं और नाखूनों से इन्हें छीलते वक्त उंगलियों में दर्द हो सकता है। खासकर जब घर में मेहमान हों या बड़े आयोजन की तैयारी हो तो मटर छीलने का काम एक पहाड़ जैसा लगता है। लेकिन अब यह नई मैजिक ट्रिक’ इस समस्या का हल लेकर आई है।

    क्या है वह मैजिक ट्रिक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

    यह तरीका बहुत आसान है और इसके लिए आपको केवल गर्म पानी का सही इस्तेमाल करना है। आइए जानते हैं कैसे गर्म पानी तैयार करें सबसे पहले एक बड़े भगौने में पर्याप्त पानी गर्म करें। ध्यान रखें कि पानी उबालने तक न जाए बस उसे अच्छे से गर्म करें। मटर डालें जब पानी अच्छे से गर्म हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसमें साबुत मटर की फलियों को डालें। दो से तीन मिनट के लिए ढकें बर्तन को ढक्कन से ढक कर 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें।

    गर्म पानी और भाप के संपर्क में आने से मटर के छिलके मुलायम हो जाएंगे। ठंडे पानी में डालें अब मटर को गर्म पानी से निकाल कर तुरंत ठंडे पानी में डालें। इससे मटर के दाने का हरा रंग बरकरार रहेगा और मटर ज्यादा पकेंगे नहीं।मटर छीलना अब जैसे ही आप मटर की फली को हल्का सा दबाएंगे सारे दाने एक झटके में बाहर आ जाएंगे। इस ट्रिक से न केवल आपको नाखूनों में दर्द नहीं होगा बल्कि आपका समय भी बच जाएगा।

    फायदे

    मटर छीलने में लगने वाला समय अब मात्र 5-10 मिनट में खत्म हो जाएगा।इस ट्रिक से मटर के दाने पूरी तरह से intact रहते हैं और उनका हरा रंग भी बरकरार रहता है।मटर छीलने का काम अब बिना दर्द और आलस्य के आसानी से किया जा सकता है। आप मटर छीलने के बाद उन्हें सुखाकर जिप-लॉक बैग में स्टोर भी कर सकते हैं जिससे भविष्य में जल्दी कुकिंग हो सके। मटर छीलना अब पहले से कहीं आसान और तेज़ हो गया है। तो अगली बार जब आपको मटर छीलने का मन हो इस स्मार्ट ट्रिक को अपनाकर आप इस थकाऊ काम को मिनटों में कर सकते हैं। अब से मटर की हर रेसिपी को बनाना और उसका स्वाद लेना और भी मजेदार होगा!