Tag: kitchen

  • रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    रसोई के नमक को सिर्फ खाने तक न रखें सीमित, सिंक से कटिंग बोर्ड तक इन कामों में आएगा उपयोग

    नई दिल्ली । रसोई में इस्तेमाल होने वाला नमक केवल खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं है। घर की सफाई से जुड़ी कुछ सामान्य परेशानियों में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। सिंक से आने वाली बदबू, कप या मग पर लगे हल्के दाग और लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर रह जाने वाली गंध जैसी स्थितियों में नमक घरेलू सफाई के काम आ सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल हर सतह या हर समस्या के लिए सही नहीं माना जाता।

    नमक में हल्का घर्षण होता है, इसलिए कुछ बर्तनों की सतह से सामान्य गंदगी हटाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। कप या मग के अंदर चाय-कॉफी के हल्के दाग होने पर थोड़ी मात्रा में नमक पानी के साथ लगाकर नरम स्पंज से हल्के हाथ से रगड़ा जा सकता है। इसके बाद बर्तन को साफ पानी से अच्छी तरह धोना जरूरी है। ज्यादा जोर लगाने से सतह को नुकसान पहुंच सकता है।

    किचन सिंक में खाने के छोटे टुकड़े या गंदगी फंसने से कई बार दुर्गंध आने लगती है। ऐसी स्थिति में थोड़े नमक को गर्म पानी के साथ सिंक में डालकर बहाया जा सकता है। यह सामान्य सफाई में मदद कर सकता है और सिंक की बदबू कम करने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, अगर नाली जाम है या बदबू लगातार बनी हुई है तो केवल नमक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।

    लकड़ी के कटिंग बोर्ड पर प्याज, लहसुन और मसाले काटने के बाद उनकी गंध रह सकती है। ऐसे में बोर्ड पर थोड़ा नमक छिड़ककर नींबू के कटे हुए हिस्से से हल्के हाथ से रगड़ने का घरेलू तरीका अपनाया जा सकता है। सफाई के बाद बोर्ड को पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए। लकड़ी के कटिंग बोर्ड को बहुत ज्यादा पानी में भिगोना उचित नहीं माना जाता।

    कांच या स्टील की कुछ चीजों पर हल्की जमी गंदगी की सफाई में भी नमक का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसे नाजुक सतह पर सीधे और जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। पानी या उपयुक्त सफाई सामग्री के साथ सावधानी से इस्तेमाल करना बेहतर है। कांच, पॉलिश वाली सतह और आसानी से खरोंच आने वाली चीजों पर विशेष सावधानी जरूरी है।

    कपड़ों के दाग हटाने के लिए भी कई घरेलू नुस्खों में नमक का इस्तेमाल बताया जाता है, लेकिन हर तरह के कपड़े और दाग पर इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। किसी कपड़े पर इसे आजमाने से पहले उसके देखभाल संबंधी निर्देश देखना चाहिए। जरूरत हो तो पहले कपड़े के किसी छिपे हिस्से पर थोड़ी मात्रा से परीक्षण किया जा सकता है।

    घर की सफाई में नमक का इस्तेमाल करते समय सतह की प्रकृति को ध्यान में रखना जरूरी है। मार्बल, प्राकृतिक पत्थर, नाजुक पॉलिश, कोटेड सतह या ऐसी चीजों पर नमक रगड़ने से बचना चाहिए जिन पर आसानी से खरोंच पड़ सकती है। सफाई पूरी होने के बाद संबंधित सतह को अच्छी तरह पोंछना भी जरूरी है।

    बागवानी में नमक का इस्तेमाल करते समय खास सावधानी रखनी चाहिए। पौधों की मिट्टी में ज्यादा नमक जमा होने से जड़ों और पौधों की बढ़त को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए पौधों को हरा-भरा रखने के लिए मिट्टी में नमक डालना सामान्य घरेलू उपाय नहीं माना जाना चाहिए। यदि किसी खास पौधे के लिए नमक के इस्तेमाल की सलाह दी गई हो तो उसकी किस्म और उचित मात्रा की जानकारी लेना जरूरी है।

  • किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    किचन के कपड़े से बदबू नहीं जा रही तो अपनाएं ये आसान उपाय, नमी और तेल की गंध होगी कम

    नई दिल्ली ।रसोई में बर्तन पोंछने, गैस के आसपास गिरे पानी या तेल को साफ करने और किचन की अलग-अलग सतहों को पोंछने के लिए कपड़े का इस्तेमाल रोज किया जाता है। लगातार इस्तेमाल के कारण कई बार कपड़े में ऐसी बदबू आने लगती है, जो बार-बार धोने के बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं होती। कपड़ा देखने में साफ हो सकता है, लेकिन उसमें बासी या तेल जैसी गंध बनी रह सकती है।

    इस समस्या की एक वजह कपड़े को इस्तेमाल करने और धोने का तरीका भी हो सकता है। केवल ज्यादा डिटर्जेंट डालने या तेज खुशबू वाले प्रोडक्ट का इस्तेमाल करने से बदबू की असली वजह खत्म नहीं होती। कुछ आसान आदतों में बदलाव करके किचन के कपड़े को साफ और गंधमुक्त रखने में मदद मिल सकती है।

    इस्तेमाल के बाद गीले कपड़े को तुरंत बंद जगह में रखने से बचना चाहिए। अगर कपड़े को बिना सुखाए टोकरी, बैग या किसी बंद स्थान में डाल दिया जाए, तो उसमें नमी बनी रहती है। ऐसी स्थिति बदबू पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों के बढ़ने के लिए अनुकूल हो सकती है।

    इसलिए इस्तेमाल के बाद कपड़े को अच्छी तरह फैलाकर सुखाना जरूरी है। इसे रसोई में किसी हवादार जगह पर लटकाया जा सकता है। ओवन के हैंडल या छोटे ड्राइंग रैक जैसी जगह का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, बशर्ते कपड़ा वहां अच्छी तरह सूख सके। गीले कपड़े को पूरी तरह सूखने से पहले बंद स्थान पर रखने से बचना चाहिए।

    एक ही किचन कपड़े को लगातार कई दिनों तक इस्तेमाल करने से भी समस्या बढ़ सकती है। खाना बनाने के दौरान कपड़े में तेल, खाने के छोटे कण और नमी जमा होती रहती है। समय के साथ इन्हें पूरी तरह साफ करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए किचन के कपड़े नियमित रूप से बदलना बेहतर तरीका है। रोज इस्तेमाल होने वाले कपड़े को रोज बदलने की आदत रखी जा सकती है।

    इसके लिए घर में कई किचन कपड़े रखना उपयोगी हो सकता है। इस्तेमाल किया हुआ कपड़ा धोने के लिए अलग रखा जा सकता है और उसकी जगह साफ कपड़ा इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे एक ही कपड़े पर लगातार गंदगी और नमी जमा होने की स्थिति कम होगी।

    बदबू आने पर कपड़े को सिर्फ पानी से धोना पर्याप्त नहीं हो सकता। किचन में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की नियमित और अच्छी तरह धुलाई जरूरी है। कपड़ों की सफाई के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल करते समय भी उसकी जरूरत से ज्यादा मात्रा नहीं डालनी चाहिए। ज्यादा डिटर्जेंट का मतलब हमेशा ज्यादा सफाई नहीं होता। एंजाइम वाले डिटर्जेंट गंदगी और दाग को हटाने में मदद कर सकते हैं।

    बदबू को केवल तेज खुशबू वाले उत्पाद से ढकने के बजाय उसकी वजह दूर करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर धोने के दौरान बेकिंग सोडा का इस्तेमाल किया जा सकता है या कपड़े को सिरके में कम से कम 30 मिनट तक भिगोया जा सकता है। हालांकि, ऐसे किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले कपड़े के फैब्रिक और केयर लेबल की जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    किचन के कपड़ों को दूसरे घरेलू कपड़ों से अलग रखना भी बेहतर है। इनमें तेल, खाने के अवशेष और अन्य गंदगी हो सकती है। इसलिए इन्हें निजी कपड़ों के साथ एक ही टोकरी में रखने से बचना चाहिए। अलग टोकरी या बैग रखने से किचन के गंदे कपड़ों को अलग रखना और समय पर धोना आसान हो जाता है।

  • चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    चावल में घुन और कीड़े लगने से बचाना है तो स्टोरेज के दौरान अपनाएं ये आसान घरेलू तरीके

    नई दिल्ली । घर में चावल को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है तो सिर्फ उसे डिब्बे में भरकर रखना पर्याप्त नहीं होता। खासकर नमी वाले मौसम में अगर चावल को सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो उसमें घुन या छोटे कीड़े दिखाई दे सकते हैं। कंटेनर में मौजूद नमी, ढीला ढक्कन और गीले चम्मच का इस्तेमाल इस समस्या का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए चावल को सुरक्षित रखने के लिए कुछ छोटी लेकिन जरूरी सावधानियां अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

    सबसे पहले चावल को हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए। खुले पैकेट या ढीले ढक्कन वाले डिब्बे में चावल रखने से नमी और कीड़ों के संपर्क का खतरा बढ़ सकता है। इसके लिए कांच, स्टील या फूड-ग्रेड प्लास्टिक का साफ कंटेनर इस्तेमाल किया जा सकता है। कंटेनर में चावल भरने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसमें किसी तरह की नमी न हो।

    चावल को कीड़ों से बचाने के लिए कुछ लोग सूखे तेजपत्ते का भी इस्तेमाल करते हैं। चावल के डिब्बे में कुछ पूरी तरह सूखे तेजपत्ते रखे जा सकते हैं। इसकी तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है। हालांकि पत्तियां सूखी होनी चाहिए, क्योंकि नमी बढ़ने पर समस्या उलटे बढ़ सकती है।

    सूखी नीम की पत्तियों का इस्तेमाल भी अनाज को कीड़ों से बचाने के पारंपरिक घरेलू तरीकों में किया जाता है। अगर इस उपाय को अपनाया जाए तो नीम की पत्तियां बिल्कुल सूखी होनी चाहिए। इसी तरह कुछ लोग चावल के डिब्बे में साबुत लौंग रखने का तरीका भी अपनाते हैं। लौंग की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, लेकिन इसे चावल की सुरक्षा का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

    कुछ घरेलू तरीकों में चावल के साथ साबुत और सूखी लहसुन की कलियां रखने की सलाह भी दी जाती है। अगर लहसुन का इस्तेमाल किया जा रहा है तो वह सूखा होना चाहिए। गीली या छिली हुई लहसुन की कलियां डालने से कंटेनर में अतिरिक्त नमी पहुंच सकती है, जिससे चावल खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

    चावल के डिब्बे को ऐसी जगह रखना भी जरूरी है जहां भाप या नमी अधिक न हो। सिंक, गैस या नमी वाली जगह के आसपास चावल रखने से बचना चाहिए। चावल निकालते समय हमेशा सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। गीले चम्मच से कंटेनर में नमी पहुंच सकती है और लंबे समय में चावल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

    एक और जरूरी बात यह है कि नया चावल पुराने चावल के साथ सीधे नहीं मिलाना चाहिए। पहले पुराने चावल का इस्तेमाल करें। इसके बाद कंटेनर को अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखाएं और फिर उसमें नया चावल भरें। इससे पुराने स्टॉक से किसी संभावित कीट या उसके अंडों के नए चावल तक पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।

    अगर चावल में पहले से थोड़े कीड़े दिखाई दे रहे हैं, तो उसे अलग करके अच्छी तरह जांचना चाहिए। चावल को कुछ दिनों के लिए फ्रीजर में रखने का विकल्प भी अपनाया जाता है। इसके बाद चावल को छानकर और अच्छी तरह सुखाकर साफ, एयरटाइट डिब्बे में रखा जा सकता है। लेकिन अगर चावल में बहुत ज्यादा कीड़े, फफूंद, नमी या खराब गंध दिखाई दे, तो उसे इस्तेमाल करने के बजाय फेंक देना बेहतर है।

  • रातभर सिंक में बर्तन भिगोकर रखना पड़ सकता है भारी, जानिए किचन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें

    रातभर सिंक में बर्तन भिगोकर रखना पड़ सकता है भारी, जानिए किचन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें

    नई दिल्ली । खाना खाने के बाद बर्तनों को सिंक में पानी और साबुन डालकर रातभर छोड़ देना कई घरों में आम आदत है। इसका मकसद बर्तनों पर चिपके खाने को नरम करना होता है, ताकि सुबह उन्हें आसानी से साफ किया जा सके। हालांकि, लंबे समय तक गंदे बर्तनों को पानी में छोड़ना किचन की स्वच्छता के लिहाज से सही तरीका नहीं माना जाता।

    बर्तनों को कुछ समय के लिए पानी में भिगोना अपने आप में गलत नहीं है। खासकर जब किसी बर्तन में खाना बुरी तरह चिपक गया हो, तब थोड़ी देर भिगोने से उसे साफ करना आसान हो सकता है। समस्या तब शुरू होती है जब गंदे बर्तन पूरी रात पानी में पड़े रहते हैं और उनमें मौजूद खाने के अवशेष लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहते हैं।

    गंदे बर्तनों से निकले भोजन के छोटे-छोटे कण पानी में मिलते रहते हैं। लंबे समय तक ऐसा रहने पर पानी गंदा और चिपचिपा हो सकता है। बर्तनों की सतह पर भी एक परत जम सकती है, जिससे सुबह उन्हें साफ करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। इसलिए केवल रातभर भिगोकर रखना सफाई का बेहतर विकल्प नहीं है।

    इस आदत का असर किचन की गंध पर भी पड़ सकता है। सिंक में खाने के अवशेष और गंदे बर्तन लंबे समय तक पड़े रहने से बदबू बढ़ सकती है। खासकर तेज गंध वाले भोजन के अवशेष आसपास रखी लकड़ी, कपड़े और स्पंज जैसी चीजों पर भी गंध छोड़ सकते हैं।

    लकड़ी से बनी किचन की वस्तुएं नमी और गंध को अपेक्षाकृत ज्यादा सोख सकती हैं। उनकी छोटी दरारों और सतहों में नमी बनी रहने से सफाई मुश्किल हो सकती है। इसी वजह से गंदे बर्तनों के साथ सिंक और उसके आसपास के हिस्से को भी साफ रखना जरूरी है।

    रातभर सिंक में गंदे बर्तन पड़े रहने से चींटियों और कॉकरोच जैसे कीटों के आने की संभावना भी बढ़ सकती है। बर्तनों पर बचे खाने के टुकड़े और उनकी गंध कीड़ों को आकर्षित कर सकती है। अगर उन्हें नियमित रूप से भोजन और पानी मिलता रहे तो वे उसी जगह बार-बार आने लग सकते हैं।

    बर्तनों को साफ रखने का बेहतर तरीका यह है कि खाना खाने के बाद उन्हें जल्द से जल्द धो लिया जाए। अगर तुरंत धोना संभव नहीं हो तो कम से कम बर्तनों से खाने के अवशेष हटाकर उन्हें पानी से अच्छी तरह धो दें। इससे खाना सूखकर सतह पर ज्यादा मजबूती से चिपकने से बच सकता है।

    अगर किसी बर्तन पर खाना ज्यादा चिपका है तो उसे गर्म पानी और थोड़े डिश सोप में कुछ समय के लिए भिगोया जा सकता है। हालांकि, उसे पूरी रात पानी में छोड़ने के बजाय थोड़ी देर बाद साफ कर देना बेहतर है। डिशवॉशर का इस्तेमाल करने वाले लोग गंदे बर्तनों को सिंक में रखने के बजाय सीधे उसमें रख सकते हैं।

    सोने से पहले सिंक को खाली करना किचन की रोजाना सफाई का हिस्सा बनाया जा सकता है। सिंक में बचे खाने के टुकड़े हटाने, नाली को साफ रखने, स्पंज और कपड़े को नियमित रूप से धोने तथा कूड़ेदान को समय पर खाली करने से किचन को साफ रखने में मदद मिल सकती है। कच्चे मांस के संपर्क में आई सतहों को भी साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करना जरूरी है।

  • कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    कॉकरोच और कीड़े-मकोड़ों से हैं परेशान तो घर की इन चीजों का करें इस्तेमाल, बिना तेज केमिकल गंध के पाएं राहत

    नई दिल्ली । घर में अचानक कॉकरोच या दूसरे कीड़े-मकोड़े दिखाई देने लगें तो परेशानी बढ़ जाती है। खासकर रसोई में इनका नजर आना साफ-सफाई को लेकर चिंता पैदा कर सकता है। इनसे छुटकारा पाने के लिए लोग अक्सर बाजार में मिलने वाले स्प्रे और दूसरे केमिकल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इन उत्पादों की गंध तेज हो सकती है और कुछ समय बाद समस्या दोबारा सामने आने की बात भी कही जाती है।

    अगर आप घर में मौजूद चीजों के जरिए कॉकरोच को दूर रखने का तरीका तलाश रहे हैं, तो किचन में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें मददगार हो सकती हैं। तेज पत्ता, लौंग और दालचीनी ऐसी ही चीजें हैं, जिनकी तेज खुशबू कॉकरोच को कुछ जगहों से दूर रखने में सहायक मानी जाती है।

    सबसे पहले तेज पत्ते की बात करें। आमतौर पर इसका इस्तेमाल खाने में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी गंध कॉकरोच को पसंद नहीं आती। इसके लिए सूखे तेज पत्ते लेकर उन्हें हल्का सा कुचल सकते हैं। ऐसा करने से उनमें मौजूद खुशबू और प्राकृतिक तेल बाहर आने लगते हैं।

    कुचले हुए तेज पत्तों को रसोई के कोनों, दराजों के किनारों और फ्रिज या गैस जैसे उपकरणों के पीछे रखा जा सकता है। इन जगहों पर इसकी खुशबू कॉकरोच को दूर रखने में मदद कर सकती है। जब तेज पत्ते की खुशबू कम होने लगे तो उन्हें बदल देना बेहतर रहेगा।

    दूसरा घरेलू विकल्प साबुत लौंग है। लौंग की तेज और तीखी खुशबू भी कॉकरोच को असहज कर सकती है। इसे किचन के उन हिस्सों में रखा जा सकता है जहां कॉकरोच दिखाई देते हैं या उनके आने की संभावना रहती है।

    सिंक के नीचे, मसाले रखने वाली अलमारी और कूड़ेदान के आसपास कुछ साबुत लौंग रखने का तरीका अपनाया जा सकता है। इसकी खुशबू कॉकरोच को उन जगहों से दूर रखने में मदद कर सकती है। साथ ही किचन में लौंग की प्राकृतिक सुगंध भी बनी रहती है।

    तीसरा विकल्प दालचीनी है। इसकी तेज खुशबू को भी कॉकरोच दूर रखने में उपयोगी माना जाता है। इसके लिए खिड़की की चौखट, दरवाजे के किनारे और फ्रिज के पीछे जैसी जगहों पर थोड़ी मात्रा में दालचीनी पाउडर रखा या छिड़का जा सकता है।

    किचन की अलमारी या पेंट्री में साबुत दालचीनी की स्टिक भी रखी जा सकती है। इसकी सुगंध कॉकरोच को उन स्थानों से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हालांकि, घरेलू उपायों का असर हर घर और हर स्थिति में एक जैसा होना जरूरी नहीं है। अगर कॉकरोच की समस्या लगातार बनी हुई है या बहुत ज्यादा बढ़ गई है, तो केवल खुशबू आधारित उपायों पर निर्भर रहने के बजाय घर की साफ-सफाई और कीड़ों के संभावित ठिकानों पर भी ध्यान देना जरूरी है। रसोई को साफ और सूखा रखने से भी कीड़ों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

  • वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की अलग-अलग दिशाओं और उनमें रखी जाने वाली वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि वस्तुओं को सही दिशा में रखने से घर के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह नमक को लेकर भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। नमक सामान्य तौर पर हर रसोई का जरूरी हिस्सा होता है, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे रखने की दिशा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    कई बार परिवार में कमाई अच्छी होने के बावजूद बचत नहीं हो पाती। पैसा आता है, लेकिन किसी न किसी वजह से खर्च हो जाता है। ऐसी स्थिति को लेकर वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और वस्तुओं की स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। नमक को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार नमक को किचन में उचित स्थान पर रखना चाहिए। रसोई घर का ऐसा हिस्सा है जहां भोजन तैयार होता है और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं रखी जाती हैं। इसलिए नमक रखने के स्थान को लेकर भी वास्तु के नियमों का पालन करने की बात कही जाती है।

    नमक को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। इसी वजह से घर में नमक के इस्तेमाल और उसके रखरखाव को लेकर कई तरह के उपाय बताए जाते हैं।

    वास्तु के अनुसार किचन में नमक को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहे। नमक का डिब्बा खुला छोड़ने के बजाय उसे अच्छी तरह बंद करके रखने की सलाह दी जाती है। इससे नमक नमी से भी बचा रहता है और रसोई में साफ-सफाई बनी रहती है।

    घर में नमक रखने को लेकर दिशाओं का भी उल्लेख किया जाता है। वास्तु मान्यताओं में कुछ दिशाओं को नमक रखने के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का उद्देश्य घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना बताया जाता है।

    नमक को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे बिखरा हुआ नहीं रखना चाहिए। यदि नमक गिर जाए तो उसे तुरंत साफ कर देना चाहिए। वास्तु में नमक के बिखरने को अच्छा संकेत नहीं माना जाता। हालांकि, ये बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं और इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    इसी तरह नमक का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। रसोई में जरूरी सामान को व्यवस्थित तरीके से रखने से रोजमर्रा के काम आसान होते हैं। नमक जैसी नियमित उपयोग की वस्तु को निर्धारित स्थान पर रखने से किचन भी व्यवस्थित रहता है।

    पैसे के टिकने और आर्थिक स्थिति को लेकर वास्तु में बताए गए इन उपायों को मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। केवल नमक को किसी विशेष दिशा में रखने से धन दोगुना होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। आर्थिक स्थिति पर आय, खर्च, बचत और वित्तीय प्रबंधन जैसे वास्तविक कारकों का प्रभाव पड़ता है।

    इसलिए यदि कोई व्यक्ति वास्तु मान्यताओं का पालन करता है तो नमक रखने से जुड़े इन नियमों को अपनी आस्था के अनुसार अपना सकता है। साथ ही आर्थिक स्थिरता के लिए आय और खर्च का संतुलन बनाए रखना तथा नियमित बचत पर ध्यान देना भी जरूरी है।

  • चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    चूहों को बिना मारे घर से भगाने के आसान उपाय, खाने की चीजें सुरक्षित रखने और प्रवेश के रास्ते बंद करने से घटेगा खतरा

    नई दिल्ली । घर में चूहों की मौजूदगी छोटी परेशानी से शुरू होकर धीरे धीरे बड़ी समस्या बन सकती है। चूहे खाने की चीजों को दूषित करने के अलावा कपड़ों, फर्नीचर और बिजली के तारों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में कई लोग उन्हें मारने के बजाय घर से दूर रखने के घरेलू उपाय तलाशते हैं। हालांकि, हर इंटरनेट आधारित नुस्खा सुरक्षित नहीं होता और किसी भी जहरीले या रासायनिक पदार्थ को खाने वाली चीज में मिलाकर चूहों को खिलाना नुकसानदायक हो सकता है।

    चूहों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका उनके लिए घर में भोजन और सुरक्षित ठिकाने की उपलब्धता कम करना है। रसोई में खुले में रखे अनाज, बिस्किट, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थों को ढक्कन वाले मजबूत डिब्बों में रखना चाहिए। खाने के बाद बचे टुकड़ों को तुरंत साफ करना और रात में रसोई को अच्छी तरह साफ करके रखना भी जरूरी है।

    चूहे अक्सर सिंक के नीचे, रसोई की अलमारियों के पीछे, स्टोर रूम, पाइप के आसपास और दरवाजों के नीचे मौजूद छोटे रास्तों से घर में प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए इन स्थानों की नियमित जांच करनी चाहिए। दीवार में दिखाई देने वाले छोटे छेद, दरार या पाइप के आसपास की खाली जगह को उपयुक्त सामग्री से बंद करना घर में उनकी आवाजाही रोकने का महत्वपूर्ण उपाय है।

    घर में बेकार सामान, पुराने डिब्बे, कागज और कबाड़ लंबे समय तक जमा रहने पर चूहों को छिपने की जगह मिल सकती है। स्टोर रूम और रसोई के आसपास अनावश्यक सामान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सफाई के दौरान उन कोनों और जगहों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जहां आमतौर पर पहुंचना मुश्किल होता है।

    कुछ घरेलू उपायों में तेज गंध वाली चीजों का इस्तेमाल चूहों को किसी स्थान से दूर रखने के लिए किया जाता है, लेकिन इनकी प्रभावशीलता हर स्थिति में समान नहीं होती। खासकर फिनाइल, डिटर्जेंट या अन्य रासायनिक पदार्थों को आटे, चीनी या घी जैसी खाने की चीजों में मिलाकर चूहों के लिए रखना सुरक्षित तरीका नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मिश्रण बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    यदि चूहे पहले से घर में मौजूद हैं, तो उन्हें पकड़कर सुरक्षित तरीके से बाहर छोड़ने वाले उपयुक्त मानवीय ट्रैप का इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रैप को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां बच्चे या पालतू जानवर आसानी से न पहुंच सकें। समस्या ज्यादा होने पर प्रशिक्षित कीट नियंत्रण विशेषज्ञ की सहायता लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।

    घर में चूहों की संख्या कम करने के लिए केवल उन्हें भगाने पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। यदि भोजन आसानी से उपलब्ध रहेगा और प्रवेश के रास्ते खुले रहेंगे, तो चूहे दोबारा घर में आ सकते हैं। इसलिए सफाई, भोजन का सुरक्षित भंडारण और प्रवेश मार्गों को बंद करना एक साथ जरूरी है।

    रसोई की नियमित सफाई के अलावा कूड़ेदान को खुला नहीं छोड़ना चाहिए। रातभर सिंक में गंदे बर्तन और खाने के अवशेष पड़े रहने से भी चूहों को आकर्षण मिल सकता है। घर के बाहर भी कचरा और भोजन के अवशेष जमा नहीं होने देने चाहिए।

    इस तरह चूहों को बिना मारे दूर रखने के लिए सबसे सुरक्षित रणनीति उनके भोजन, पानी और छिपने की जगहों को सीमित करना है। साथ ही घर में मौजूद संभावित प्रवेश मार्गों को बंद करके समस्या की पुनरावृत्ति रोकी जा सकती है। रासायनिक पदार्थों वाले ऐसे घरेलू नुस्खों से बचना बेहतर है जिनसे चूहों, बच्चों या पालतू जानवरों को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।

  • चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल

    चींटियों की गंध पहचानने की क्षमता पर असर डालते हैं ये घरेलू उपाय, जानिए रसोई में कैसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली ।
    रसोई और घर में चींटियों का दिखाई देना आम समस्या है। खासकर गर्मी और बारिश के मौसम में खाने-पीने की चीजों के आसपास इनकी संख्या बढ़ सकती है। चीनी, मिठाई और अन्य मीठी चीजें चींटियों को जल्दी आकर्षित करती हैं। कई बार खाने के छोटे कण या चिपचिपे अवशेष अच्छी तरह सफाई करने के बाद भी रह जाते हैं, जिनकी गंध चींटियों को उस स्थान तक पहुंचा देती है।

    एक बार चींटियां किसी जगह पर लगातार आने लगें तो उन्हें रोकना आसान नहीं होता। ऐसे में केवल उन्हें हटाने के बजाय उस जगह की नियमित सफाई करना और उनके आने के रास्ते को बाधित करना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है। कुछ घरेलू चीजों की तेज गंध भी चींटियों की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकती है।

    लौंग को चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज खुशबू उन स्थानों पर रखी जा सकती है जहां चींटियां बार-बार दिखाई देती हैं। खासतौर पर चीनी या अन्य मीठी चीजों के डिब्बों के आसपास लौंग रखने से चींटियों की आवाजाही को रोकने में मदद मिल सकती है।

    तेजपत्ता भी रसोई में आसानी से उपलब्ध होने वाला विकल्प है। तेजपत्ते को हल्का तोड़कर उन जगहों पर रखा जा सकता है जहां से चींटियां आती हैं। इसकी गंध चींटियों के लिए अप्रिय मानी जाती है और यह उनके आने वाले रास्ते को बदलने में मदद कर सकती है।

    दालचीनी का इस्तेमाल भी इसी तरह किया जा सकता है। इसे पाउडर के रूप में रसोई के दरवाजे, खिड़की या उन दरारों के पास रखा जा सकता है जहां से चींटियां अंदर आती हैं। इसकी तेज खुशबू चींटियों को उस रास्ते से दूर रखने में मदद कर सकती है।

    हल्दी भी एक घरेलू उपाय है। इसे उन जगहों पर हल्की रेखा के रूप में रखा जा सकता है जहां से चींटियों के घर के अंदर आने की संभावना होती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल साफ और सूखी सतह पर करना बेहतर रहता है, ताकि रसोई में गंदगी न फैले।

    नींबू का रस भी चींटियों की गंध आधारित राह को प्रभावित करने में मदद कर सकता है। इसके लिए नींबू के रस को पानी में मिलाकर उन स्थानों पर छिड़का जा सकता है जहां चींटियां दिखाई देती हैं। रसोई के फर्श, खिड़की और दरवाजे के आसपास सफाई के बाद इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सफेद सिरके और पानी का घोल भी चींटियों की आवाजाही वाले स्थानों की सफाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे फर्श, खिड़की, दरवाजे और डस्टबिन के आसपास छिड़कने से चींटियों के छोड़े हुए गंध संकेत कम करने में मदद मिल सकती है।

    पुदीने या पेपरमिंट की तेज खुशबू भी चींटियों को दूर रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है। पानी में थोड़ी मात्रा में पेपरमिंट एसेंशियल ऑयल मिलाकर चींटियों के आने वाले रास्तों पर हल्का स्प्रे किया जा सकता है। हालांकि, इसे खाने की चीजों, बर्तनों और बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए।

    इन उपायों के साथ रसोई में मीठी और खाने की वस्तुओं को अच्छी तरह बंद डिब्बों में रखना, गिरे हुए खाद्य पदार्थों को तुरंत साफ करना और पानी या नमी जमा न होने देना जरूरी है। अगर चींटियों का प्रकोप लगातार बना रहे या बड़ी संख्या में चींटियां घर में फैल जाएं, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय उचित कीट नियंत्रण उपाय अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है।

  • रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    रसोई में बची ताजी मिर्च से भी तैयार किया जा सकता है पौधा, सही नमी, धूप और देखभाल से अच्छी पैदावार संभव

    नई दिल्ली । घर की रसोई में रखी हरी मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर सब्जी और चटनी का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन अगर आप चाहें तो इसी मिर्च की मदद से घर में नया पौधा तैयार करने की कोशिश भी कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है कि पूरी तरह बीजरहित मिर्च से सीधे नया पौधा तैयार नहीं किया जा सकता। पौधा विकसित करने के लिए मिर्च के अंदर मौजूद विकसित बीज या किसी उपयुक्त पौधे की कटिंग की जरूरत होती है। इसलिए बाजार से लाई गई मिर्च को इस्तेमाल करने से पहले उसके अंदर मौजूद छोटे बीजों को ध्यान से अलग किया जा सकता है।

    अगर मिर्च में बीज मौजूद हैं तो सबसे पहले उन्हें सावधानी से निकालकर साफ पानी से धो लें। इसके बाद बीजों को कुछ समय के लिए छाया में सुखाना बेहतर रहता है। बीजों में नमी पूरी तरह खत्म होने के बाद इन्हें हल्की और उपजाऊ मिट्टी में लगाया जा सकता है। मिर्च के बीजों को बहुत अधिक गहराई में दबाने की जरूरत नहीं होती। लगभग आधा सेंटीमीटर गहराई पर्याप्त रहती है।

    गमले का चुनाव भी पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। शुरुआत में छोटे गमले या सीडलिंग ट्रे का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पानी आसानी से निकल सके और वह लंबे समय तक पानी से भरी न रहे। सामान्य गार्डन मिट्टी के साथ जैविक खाद और थोड़ी रेत या अन्य जलनिकासी वाली सामग्री मिलाने से मिट्टी को बेहतर बनाया जा सकता है।

    बीज लगाने के बाद मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है। बहुत ज्यादा पानी देने से बीज सड़ सकते हैं और नई जड़ें विकसित होने में परेशानी हो सकती है। गमले को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी और गर्माहट मिले। मिर्च के पौधे को अच्छी वृद्धि के लिए धूप पसंद होती है, इसलिए पर्याप्त प्रकाश मिलने पर पौधा मजबूत बनने की संभावना बढ़ती है।

    कुछ समय बाद जब छोटे पौधे दिखाई देने लगें और उनमें कई वास्तविक पत्तियां विकसित हो जाएं, तब उन्हें बड़े गमले में स्थानांतरित किया जा सकता है। पौधे को निकालते समय उसकी जड़ों को नुकसान न पहुंचाएं। बड़े गमले में लगाने के बाद मिट्टी को हल्का दबाएं और जरूरत के अनुसार पानी दें।

    मिर्च का पौधा बढ़ने के दौरान नियमित देखभाल मांगता है। जब पौधा पर्याप्त ऊंचाई हासिल कर ले तो उसकी ऊपरी बढ़त को हल्का पिंच करने से शाखाएं ज्यादा निकलने में मदद मिल सकती है। इससे पौधा अधिक घना हो सकता है और आगे चलकर उसमें ज्यादा फूल और मिर्च आने की संभावना बढ़ सकती है।

    फूल आने के समय पौधे को पोषक तत्वों की जरूरत बढ़ जाती है। इस दौरान अच्छी तरह सड़ी जैविक खाद या उपयुक्त संतुलित खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। मिट्टी में लगातार नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। पौधे पर एफिड, सफेद मक्खी या अन्य छोटे कीट दिखाई दें तो समय रहते उनकी जांच और नियंत्रण करना जरूरी है।

    अच्छी धूप, सही मिट्टी, संतुलित पानी और नियमित देखभाल मिलने पर मिर्च का पौधा कुछ महीनों में फल देना शुरू कर सकता है। लगभग दो महीने में मिर्च आने का दावा परिस्थितियों और पौधे की किस्म पर निर्भर करता है, इसलिए हर पौधे में बिल्कुल इसी समय पर फल लगना जरूरी नहीं है। फल अच्छी लंबाई हासिल कर लें तो उन्हें हरा रहते हुए तोड़ा जा सकता है। नियमित रूप से तैयार मिर्च तोड़ने से पौधे पर नई फलियों के विकास को बढ़ावा मिल सकता है। इस तरह थोड़ी मेहनत और धैर्य के साथ बालकनी या छत के छोटे से हिस्से में भी घर की ताजी हरी मिर्च उगाई जा सकती है।

  • किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    किचन में कांच के बर्तनों का इस्तेमाल बनाता है सामान व्यवस्थित, स्टोरेज से सफाई तक मिलते हैं ये आठ आसान फायदे

    नई दिल्ली ।किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों का चुनाव केवल उनकी खूबसूरती के आधार पर नहीं किया जाता। रोजमर्रा के कामों में ऐसे बर्तन अधिक उपयोगी माने जाते हैं, जिन्हें साफ रखना आसान हो और जिनमें खाद्य सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखा जा सके। इसी वजह से आजकल कई घरों में प्लास्टिक और स्टील के साथ कांच के कंटेनर, जार, बाउल और सर्विंग डिश भी इस्तेमाल किए जाते हैं।

    कांच के बर्तनों की सबसे खास बात उनकी पारदर्शिता है। कंटेनर के अंदर रखी दाल, मसाले, ड्राई फ्रूट्स या अन्य खाद्य सामग्री बाहर से दिखाई देती है। इससे सामान पहचानने के लिए बार बार डिब्बे खोलने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरत की चीज आसानी से ढूंढी जा सकती है।

    कांच की चिकनी सतह के कारण इसे साफ करना भी अपेक्षाकृत आसान होता है। सही तरीके से सफाई करने पर खाद्य पदार्थों के दाग और अवशेष हटाए जा सकते हैं। हालांकि, सफाई के दौरान कांच के बर्तन को गिरने या तेज झटके से बचाना जरूरी होता है।

    कांच की सतह आमतौर पर नॉन पोरस होती है, इसलिए यह कई तरह की तेज गंध को प्लास्टिक जैसी कुछ सामग्रियों की तुलना में कम सोखता है। मसालेदार भोजन, सॉस या अन्य सुगंध वाली चीजें रखने के बाद भी उचित सफाई के साथ कंटेनर को दोबारा इस्तेमाल करना सुविधाजनक हो सकता है।

    ग्लास कंटेनर बचे हुए खाने, फलों, ड्राई फूड और अन्य खाद्य पदार्थों के भंडारण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं। कुछ विशेष ग्लास कंटेनर फ्रिज या फ्रीजर में इस्तेमाल के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि, किसी भी कांच के बर्तन को कम या ज्यादा तापमान में रखने से पहले उसके इस्तेमाल संबंधी निर्देश देखना जरूरी है।

    कांच के बर्तन केवल स्टोरेज तक सीमित नहीं हैं। ग्लास बाउल और सर्विंग डिश में सलाद, मिठाई और रंगीन व्यंजन आकर्षक दिखाई देते हैं। पारदर्शी बर्तन में भोजन का रंग और उसकी प्रस्तुति साफ नजर आती है, जिससे खाने की मेज पर भी बेहतर लुक मिल सकता है।

    उपयुक्त ग्लास कंटेनर कई कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। जरूरत के अनुसार एक ही बर्तन में खाना स्टोर करने, सर्व करने और कुछ मामलों में गर्म करने की सुविधा मिल सकती है। इससे अलग अलग कामों के लिए अतिरिक्त बर्तनों की जरूरत कम हो सकती है।

    पारदर्शी कांच में रखी खाद्य सामग्री का रंग और मात्रा भी आसानी से दिखाई देती है। इससे यह पता लगाने में सुविधा होती है कि कंटेनर में कितना सामान बचा है और उसे दोबारा कब भरने की जरूरत पड़ेगी। इस तरह किचन की सामग्री को व्यवस्थित रखना आसान हो सकता है।

    एक जैसे ग्लास जार और कंटेनर किचन की शेल्फ को साफ और व्यवस्थित रूप दे सकते हैं। खासकर छोटे किचन में अलग अलग सामान को पारदर्शी कंटेनरों में रखने से उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और जरूरी सामग्री आसानी से दिखाई देती रहती है।

    हालांकि, कांच के बर्तनों का इस्तेमाल करते समय सावधानी जरूरी है। गर्म ग्लासवेयर को अचानक ठंडे पानी या बहुत ठंडी सतह पर रखने से बचना चाहिए, क्योंकि तापमान में तेज बदलाव से कुछ प्रकार के कांच टूट सकते हैं। माइक्रोवेव, ओवन या फ्रीजर में रखने से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंटेनर उसके लिए उपयुक्त है या नहीं।