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  • पहलवानी के माहौल में पले दीपक पूनिया ने कम उम्र से ही कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

    पहलवानी के माहौल में पले दीपक पूनिया ने कम उम्र से ही कुश्ती में अपनी अलग पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर

    नई दिल्ली । पहलवानी की परंपरा और अखाड़े की मिट्टी में पले-बढ़े भारतीय पहलवान Deepak Punia की कहानी संघर्ष, अनुशासन और असाधारण प्रतिभा का ऐसा उदाहरण है, जिसने उन्हें कम उम्र में ही अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर पहचान दिला दी। हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव में जन्मे दीपक का बचपन कुश्ती के माहौल में बीता, जहां उनके पिता सुभाष स्वयं एक पहलवान रह चुके थे और उन्होंने ही बेटे को पहलवानी की शुरुआती ट्रेनिंग दी। मात्र पांच साल की उम्र में अखाड़े से जुड़कर दीपक ने जिस तरह से अपनी क्षमता दिखानी शुरू की, उसने आसपास के लोगों को भी हैरान कर दिया। दंगलों में छोटी उम्र में ही जीत हासिल कर उन्होंने अपनी मजबूत नींव तैयार कर ली थी।

    धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी और स्कूल स्तर की प्रतियोगिताओं के दौरान उनके खेल में निखार साफ दिखाई देने लगा। इसी दौरान उन्हें प्रसिद्ध कोचिंग सिस्टम और प्रशिक्षण सुविधाओं से जुड़ने का अवसर मिला, जिसने उनके करियर को नई दिशा दी। मिट्टी पर पारंपरिक कुश्ती से निकलकर मैट पर मुकाबला करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगातार अभ्यास से खुद को ढाल लिया। यह बदलाव उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, जहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी यात्रा शुरू हुई।

    साल 2016 उनके करियर का शुरुआती सुनहरा दौर रहा, जब उन्होंने जूनियर एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने वर्ल्ड कैडेट चैंपियनशिप और अन्य जूनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में भी गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। 2019 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद वह वैश्विक स्तर पर सबसे चर्चित युवा पहलवानों में शामिल हो गए।

    ओलंपिक मंच पर पहुंचकर उन्होंने भारत की उम्मीदों को नई ऊंचाई दी। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने पुरुषों के 86 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक मुकाबले तक पहुंचकर मजबूत प्रदर्शन किया, हालांकि अंतिम मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ा संकेत था कि देश के युवा खिलाड़ी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं।

    इसके बाद भी उनका करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, जहां कभी चोट तो कभी तकनीकी कारणों ने उनकी राह मुश्किल की। कई महत्वपूर्ण क्वालीफाइंग इवेंट्स में चुनौतियों का सामना करने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार वापसी की कोशिश करते रहे। एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े मंचों पर उन्होंने भारत के लिए कई पदक जीतकर अपनी जगह मजबूत की।

    आज दीपक पूनिया को उन खिलाड़ियों में गिना जाता है, जिन्होंने बेहद साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी यात्रा इस बात का प्रमाण है कि अगर अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास हो, तो किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। युवा खिलाड़ियों के लिए वे आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, जो यह दिखाते हैं कि संघर्ष से ही सफलता की असली कहानी लिखी जाती है।

  • इतिहास रचते हुए केएल राहुल ने खेली शानदार शतकीय पारी, भारत ने न्यूजीलैंड को मात दी

    इतिहास रचते हुए केएल राहुल ने खेली शानदार शतकीय पारी, भारत ने न्यूजीलैंड को मात दी

    नई दिल्ली।  निरंजन शाह स्टेडियम में खेले गए वनडे में केएल राहुल ने 92 गेंदों में 1 छक्का और 11 चौकों की मदद से नाबाद 112 रन की पारी खेली। इस पारी के साथ ही उन्होंने वनडे करियर का 8वां शतक पूरा किया। राहुल की इस पारी ने टीम को संकट से बाहर निकालते हुए शानदार स्थिति में पहुंचाया।

    रिकॉर्ड तोड़ा, ग्लेन फिलिप्स को पछाड़ा

    केएल राहुल ने साल 2025 से अब तक 41-50 ओवरों में सर्वाधिक रन बनाने वाले फुल मेंबर टीम के खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने 140.09 की स्ट्राइक रेट के साथ 283 रन बनाए और ग्लेन फिलिप्स (157.4 स्ट्राइक रेट, 244 रन) को पीछे छोड़ा। इस लिस्ट में जनिथ लियानागे (201), जस्टिन ग्रीव्स (194) और कॉर्बिन बॉश (162) क्रमशः तीसरे, चौथे और पांचवें पायदान पर हैं।

    मैच की स्थिति और साझेदारियां

    भारतीय टीम ने टॉस हारकर बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 284 रन बनाए। सलामी जोड़ी रोहित शर्मा और कप्तान शुभमन गिल ने 12.2 ओवरों में 70 रन की साझेदारी की। रोहित 24 रन बनाकर आउट हुए, जबकि गिल ने 53 गेंदों में 56 रन जोड़े। शुरुआती दौर में विराट कोहली ने 23 रन का योगदान दिया।

    केएल राहुल की महत्वपूर्ण साझेदारियां

    टीम 118 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी थी। तब केएल राहुल ने रवींद्र जडेजा के साथ पांचवें विकेट के लिए 73 रन की साझेदारी निभाई। जडेजा 27 रन बनाकर आउट हुए। इसके बाद राहुल ने नितीश रेड्डी (20) के साथ छठे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। इन साझेदारियों ने टीम को मजबूती प्रदान की और अंत तक 284 रन तक पहुँचाया।

    विपक्षी गेंदबाजों का प्रदर्शन

    न्यूजीलैंड की ओर से क्रिस्चियन क्लार्क ने सर्वाधिक 3 विकेट लिए। काइल जैमीसन, जैक फाउलकेस, जेडेन लेनोक्स और कप्तान माइकल ब्रेसवेल ने 1-1 विकेट अपने नाम किया। हालांकि, केएल राहुल की पारी ने विपक्षी गेंदबाजों की कोशिशों को बेअसर कर दिया।

    केएल राहुल की नाबाद 112 रन की पारी ने न सिर्फ व्यक्तिगत रिकॉर्ड तोड़ा बल्कि टीम को संकट से उबारते हुए मैच में मजबूत स्थिति दिलाई। इस प्रदर्शन से वह वनडे क्रिकेट में अपने स्थान को और मजबूत करते हुए इतिहास रचने में सफल रहे।