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  • 40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह

    40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह


    भोपाल । आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना और घंटों एक ही मुद्रा में रहना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठे रहना हो या घर में लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठना हो इन आदतों का असर शरीर के जोड़ों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक घुटनों को लंबे समय तक मोड़कर रखने और उसके बाद गलत तरीके से चलने की आदत से घुटने के जोड़ पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ सकता है। समय के साथ यह समस्या दर्द और जोड़ से जुड़ी दूसरी परेशानियों का कारण बन सकती है।

    ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना के अनुसार लंबे समय तक घुटने मोड़कर रहने के बाद चलने के तरीके में बदलाव दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों में घुटना हल्का मुड़ा रहता है और पैर के पंजे बाहर की ओर निकल जाते हैं। इस तरह के वॉकिंग पैटर्न को आमतौर पर डक वॉकिंग कहा जाता है। लगातार ऐसा होने पर घुटने के जोड़ पर दबाव का वितरण सामान्य नहीं रहता और इससे लंबे समय में परेशानी बढ़ सकती है।

    घुटने की संरचना शरीर का वजन संभालने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब पैर सामान्य स्थिति में सीधा रहता है तो घुटने का लॉकिंग मैकेनिज्म शरीर का भार संभालने में मदद करता है। लेकिन घुटना लगातार मुड़ी हुई स्थिति में रहने पर यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक इससे जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना रहती है। कार्टिलेज कमजोर होने पर दर्द और चलने फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    अर्थराइटिस की समस्या बढ़ने पर इसे अलग अलग ग्रेड में देखा जाता है। गंभीर अवस्था में घुटने के जोड़ को काफी नुकसान हो सकता है और कुछ मरीजों में डॉक्टर नी रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में बीमारी का कारण और उसकी गंभीरता अलग हो सकती है इसलिए केवल किसी एक आदत को इसका सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    डॉ. सक्सेना के मुताबिक पहले घुटनों के अर्थराइटिस के मरीज अधिकतर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में देखने को मिलते थे। अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी घुटने से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने करीब 40 वर्ष की उम्र में अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही है। उनके अनुसार गलत लाइफस्टाइल शारीरिक गतिविधि की कमी लंबे समय तक बैठे रहना और गलत वॉकिंग पैटर्न इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं।

    घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचना जरूरी है। यदि काम के कारण लगातार बैठना पड़ता है तो बीच बीच में उठकर पैर सीधा करना और कुछ देर चलना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर ने हर दो घंटे के अंतराल में कुछ समय पैर सीधा रखने की एक्सरसाइज करने की सलाह दी है।

    चलते समय हील टो पैटर्न अपनाना भी मददगार हो सकता है। इसमें कदम रखते समय पहले एड़ी जमीन पर आती है और इसके बाद पंजा आगे बढ़ता है। शुरुआत में थोड़े कदमों के साथ इसका अभ्यास किया जा सकता है। इसके अलावा बैठकर पैर को सीधा उठाने वाली एक्सरसाइज घुटने के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि अगर घुटने में लगातार दर्द सूजन जकड़न या चलने में परेशानी हो रही है तो इसे केवल गलत बैठने या चलने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। सही समय पर कारण पता चलने और उचित सलाह मिलने से घुटनों की समस्या को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम

    चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम


    नई दिल्ली । घुटनों में दर्द चलने में तकलीफ सुबह उठते समय अकड़न या चलते समय कट कट की आवाज आना आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली बढ़ता वजन लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी जोड़ों की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जोड़ों की चिकनाई कम होने का संकेत हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर के प्रत्येक जोड़ के बीच एक विशेष प्रकार का द्रव मौजूद होता है जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। जब किसी कारण से इस द्रव की मात्रा कम होने लगती है या जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है तब घुटनों में दर्द अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यही स्थिति आम भाषा में घुटनों की ग्रीस कम होना कहलाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती उम्र मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस पुरानी चोट शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक भारी वजन उठाने की आदत इस समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण भी जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज विटामिन डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी घुटनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

    यदि सुबह उठते समय घुटनों में जकड़न महसूस हो बैठने के बाद उठने में दर्द हो सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई आए या चलते समय घुटनों से आवाज आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से समस्या बढ़ सकती है और चलने फिरने में भी परेशानी होने लगती है।

    जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर अखरोट अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन लाभदायक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां दूध दही और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। विटामिन डी और कैल्शियम भी जोड़ों और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ऑलिव ऑयल का सीमित उपयोग शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके साथ ही कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है। तला भुना भोजन जंक फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। यदि वजन अधिक है तो उसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों पर पड़ता है। रोजाना तेज चाल से चलना तैराकी साइकिल चलाना और योग जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज जोड़ों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घुटनों की ग्रीस कम होने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं फिजियोथेरेपी सही खानपान और नियमित व्यायाम की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि लंबे समय से घुटनों में दर्द या अकड़न बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच और उपचार जरूर कराएं।