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  • लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल

    लक्ष्मी के साथ सरस्वती और गणेश की पूजा क्यों है जरूरी धन बुद्धि और ज्ञान का संतुलन ही बनाता है जीवन सफल


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल आस्था का विषय नहींबल्कि जीवन में संतुलन और सही दिशा पाने का माध्यम मानी जाती है। विशेष रूप से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि केवल धन की देवी मां लक्ष्मी की उपासना की जाए और ज्ञान व बुद्धि की अधिष्ठात्री शक्तियों को असंतुलित हो सकता है।
    मां लक्ष्मी को धनवैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति अपने जीवन में सुख-सुविधाओं और ऐश्वर्य की कामना करता हैजिसके लिए धन आवश्यक है। लेकिन धर्मशास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धन अपने आप में न तो शुभ है और न ही अशुभबल्कि उसका उपयोग ही उसे शुभ या अशुभ बनाता है। धन का सही उपयोग तभी संभव है जब व्यक्ति के पास ज्ञान और विवेक हो। यहीं पर मां सरस्वती और भगवान गणेश का महत्व सामने आता है। मां सरस्वती ज्ञानविद्या और विवेक की देवी हैं। उनके आशीर्वाद से व्यक्ति सही-गलत में भेद करना सीखता है और अपने निर्णयों को समझदारी से ले पाता है। वहीं भगवान गणेश को बुद्धिविवेक और विघ्नहर्ता माना जाता है। वे व्यक्ति को सोचने-समझने की शक्ति देते हैंजिससे वह जीवन में आने वाली बाधाओं को पार कर सके।
    मान्यता है कि यदि किसी घर में केवल मां लक्ष्मी की पूजा की जाए और ज्ञान व बुद्धि की उपेक्षा की जाएतो धन आने के बावजूद उसका सदुपयोग नहीं हो पाता। ऐसा धन व्यक्ति को अहंकारलालच और मोह की ओर ले जा सकता है। परिणामस्वरूप न केवल बुद्धि भ्रष्ट होती हैबल्कि व्यक्ति की नीयत और व्यवहार में भी नकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। धन की ऊर्जा अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती हैऔर यदि इसे संतुलित ढंग से न संभाला जाए तो यह जीवन में अशांति और पतन का कारण भी बन सकती है।
    इसी कारण धार्मिक परंपराओं में मां लक्ष्मी के साथ मां सरस्वती और भगवान गणेश की पूजा का विधान बताया गया है। इन तीनों की संयुक्त आराधना से व्यक्ति को धन के साथ-साथ ज्ञान और बुद्धि का भी आशीर्वाद मिलता है। इससे न केवल आर्थिक समृद्धि आती हैबल्कि जीवन में संतुलनविवेक और सद्बुद्धि भी बनी रहती है। कलियुग में धन की आवश्यकता से कोई इनकार नहीं कर सकतालेकिन केवल धन के पीछे भागना जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। जब धनज्ञान और बुद्धि का संतुलन बनता हैतभी व्यक्ति सच्चे अर्थों में सुखी और सफल बन पाता है। यही कारण है कि धार्मिक दृष्टि से मां लक्ष्मीमां सरस्वती और भगवान गणेश की एक साथ पूजा को जीवन को सही दिशा देने वाला मार्ग माना गया है।

  • प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया

    प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया


     
    नई दिल्ली ।  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज भारतीय परंपरा और शास्त्रीय ज्ञान के शाश्वत मूल्यों पर विचार करते हुए देशवासियों को जीवन में इनका पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संदेश में बल दिया कि सच्ची सुंदरता सद्गुणों से निखरती है वंश गौरव चरित्र से परिलक्षित होता है ज्ञान का वास्तविक मूल्य सफलता में है और धन का अर्थ केवल भोग नहीं बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण आनंद और समाज कल्याण में योगदान है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये मूल्य न केवल प्राचीन काल में महत्वपूर्ण रहे हैं बल्कि आधुनिक समाज और वर्तमान समय में भी ये उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने इसे देश की प्रगति सामूहिक जिम्मेदारी और समाज में सद्भाव कायम रखने की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में बताया। उन्होंने अपने संदेश में एक संस्कृत श्लोक साझा किया जो सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करता है:

    गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्।
    सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥

    प्रधानमंत्री ने इस श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता उसके गुणों में होती है। शिष्टाचार नैतिकता और चरित्र ही किसी वंश या परिवार का गौरव बढ़ाते हैं। शिक्षा और ज्ञान जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं जबकि धन का उपयोग केवल भोग के लिए नहीं बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं जो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करते हैं।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में ये मूल्य पीढ़ियों से संचित हैं और इन्हें जीवन में अपनाना न केवल नैतिक कर्तव्य है बल्कि आधुनिक जीवन में भी ये अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में इन मूल्यों को आत्मसात करें और दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

    इस संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन केवल व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति और विकास का मार्गदर्शन करने वाले शाश्वत मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि जब ये मूल्य समाज में व्यापक रूप से अपनाए जाएंगे तब ही भारत की सामूहिक शक्ति संस्कृति और नैतिकता का सही परिप्रेक्ष्य उजागर होगा।प्रधानमंत्री के इस संदेश को विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही प्रेरणादायक मान रहे हैं। यह न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है बल्कि आधुनिक जीवन में नैतिक सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।