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  • सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    सीहोर में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में भोपाल कूच, 35 से अधिक गांवों के हजारों लोगों ने उठाई न्याय की मांग

    मध्य प्रदेश। के सीहोर जिले के कोसमी गांव में 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचाने के मामले में विरोध तेज हो गया है। खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के एक हजार से ज्यादा आदिवासी न्याय की मांग को लेकर भोपाल की ओर कूच कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही है। इस आंदोलन के कारण प्रदेश की सियासत में भी हलचल बढ़ गई है।

    आदिवासियों की ओर से निकाली जा रही पदयात्रा में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हैं। प्रदर्शनकारी बैनर और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में कोसमी गांव के 12 आदिवासी परिवारों को बेदखल किए जाने के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब आसपास के दर्जनभर गांवों के लोग भी इसमें शामिल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उनके साथ हुई कार्रवाई की जांच हो और प्रभावित परिवारों को न्याय मिले।

    इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, सीहोर के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित अधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। आयोग की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े गए थे। प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस कार्रवाई में उनकी फसलें बर्बाद कर दी गईं और एक कुएं को मिट्टी से भर दिया गया। घटना के विरोध में ग्रामीणों ने गांव में लगातार तीन दिन तक धरना दिया था। उनका कहना है कि मकान टूटने और फसलें नष्ट होने से परिवारों के सामने रहने और आजीविका से जुड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

    घटना के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक रमाकांत भार्गव प्रभावित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे थे। केंद्रीय कृषि मंत्री ने वन विभाग की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे अत्याचार की पराकाष्ठा बताते हुए धरने पर बैठकर प्रभावित परिवारों की शिकायतें सुनी थीं। इस घटनाक्रम के बाद मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया।

    दूसरी ओर, प्रशासन की रिपोर्ट में संबंधित जमीन पर कब्जे को अवैध बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वन विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आरक्षित वन भूमि पर पौधे काटकर अतिक्रमण किया गया था। इस तरह मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और प्रशासन का पक्ष अलग-अलग हैं। जमीन पर कब्जे की स्थिति और कार्रवाई से जुड़े मुद्दे विवाद के प्रमुख बिंदु बने हुए हैं।

    प्रदर्शनकारी आदिवासी परिवारों की मांग है कि जिस जमीन पर वे पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, उसका पट्टा दिया जाए। इसके अलावा बेदखल परिवारों के पुनर्वास, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने तथा नष्ट हुई फसलों के लिए मुआवजा देने की मांग भी उठाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित परिवारों की जरूरतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए और उन्हें रहने तथा आजीविका के लिए उचित व्यवस्था मिलनी चाहिए।

    आंदोलन में शामिल लोग कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। भोपाल कूच का उद्देश्य मुख्यमंत्री के सामने अपनी शिकायतें और जमीन से संबंधित दस्तावेज रखना है। अब इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगे गए जवाब, प्रशासन के पक्ष और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    बुधनी के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़ने पर शिवराज की नाराजगी, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए

    मध्य प्रदेश। के बुधनी क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के 12 घर तोड़े जाने का मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे मामले की रिपोर्ट अधिकारियों से मांगी गई है। उन्होंने मुख्य सचिव को भी इस संबंध में निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जांच के बाद मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    शिवराज सिंह चौहान रविवार को कोसमी गांव पहुंचे थे। वहां उन्होंने आदिवासी परिवारों के घर तोड़े जाने की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने कहा था कि इन्हीं लोगों के वोटों से डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बने हैं। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

    सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और यदि पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने कोई बात उठाई है, तो उसकी जांच कराने में कोई हर्ज नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, अधिकारियों से घटना की रिपोर्ट तलब की गई है। उन्होंने निष्पक्ष जांच के जरिए पूरे मामले की स्थिति सामने आने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जांच के निष्कर्ष या घर तोड़े जाने की कार्रवाई के पीछे के कारणों का विवरण नहीं दिया गया है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल की सराहना करते हुए मध्य प्रदेश में पिछले करीब 12 वर्षों के विकास कार्यों का उल्लेख किया। उन्होंने रोजगार, निवेश, नदी जोड़ो परियोजनाओं, मेट्रो विस्तार, ऊर्जा उत्पादन और धार्मिक पर्यटन से जुड़े कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली का जिक्र करते हुए कहा कि उनका मूल मंत्र असंभव दिखाई देने वाले कार्यों को भी संकल्प के साथ पूरा करना है।

    राहुल गांधी के हालिया वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ उनकी बहन योजनाओं और काम की बात करती हैं, जबकि राहुल गांधी तांडव की बात करते हैं। उन्होंने भगवान शिव के तांडव को सृजन और विसर्जन से जुड़ा बताते हुए इसे अराजकता से अलग रखने की बात कही। साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेताओं को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उदाहरण देते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं और मर्यादाओं का पालन करने की सलाह दी।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि वह जितनी बार विधायक बने, उतनी बार मुख्यमंत्री रहे और जितनी बार सांसद बने, उतनी ही बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2014 और 2019 में भाजपा को मिले पूर्ण बहुमत का भी जिक्र किया। इसके अलावा गरीब कल्याण योजनाओं, मुफ्त राशन, आयुष्मान भारत, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, पीएम स्वनिधि और जल जीवन मिशन जैसी पहलों की जानकारी दी।

    डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक स्थलों के विकास और अंतरिक्ष कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने धारा 370 हटाने, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। अयोध्या के राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के श्री महाकाल लोक के विकास के साथ चंद्रयान मिशन को भी उपलब्धियों में शामिल किया।

    मध्य प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और ताप्ती नदी जोड़ो परियोजनाओं, गांधी सागर की 2,000 मेगावाट क्षमता वाली पंप स्टोरेज परियोजना, कूनो में चीता संरक्षण और भोपाल-इंदौर मेट्रो का उल्लेख किया। उन्होंने महिला सशक्तीकरण और रोजगार के बारे में बताते हुए कहा कि प्रदेश में 65 लाख से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। उनके अनुसार, 85 हजार सरकारी पदों पर भर्तियां हो चुकी हैं और एक लाख नए पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य के अनुरूप दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने की बात भी कही।