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  • कोटा में शिवपुरी के 18 वर्षीय जेईई छात्र की मौत, छह महीने पहले गया था पढ़ाई करने..

    कोटा में शिवपुरी के 18 वर्षीय जेईई छात्र की मौत, छह महीने पहले गया था पढ़ाई करने..


    मध्य प्रदेश :
    के शिवपुरी जिले के 18 वर्षीय छात्र अजीत धाकड़ की राजस्थान के कोटा में मौत हो गई। वह जवाहर नगर क्षेत्र में एक पीजी में रहकर जेईई की तैयारी कर रहा था। रविवार रात उसका शव कमरे में फंदे पर लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अस्पताल भिजवाया। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    अजीत शिवपुरी जिले के सिरसौद थाना क्षेत्र के रातीकिरार गांव का रहने वाला था। वह छह महीने पहले ही इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई की तैयारी के लिए कोटा गया था। शिवपुरी से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने आगे की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा में रहना शुरू किया था। घटना की खबर मिलने के बाद उसके परिवार और गांव में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे अजीत के साथ रहने वाले छात्र उसे टहलने के लिए बुलाने पहुंचे थे। उन्होंने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद पाया। काफी कोशिश के बाद भी दरवाजा नहीं खुला, जिसके बाद साथियों ने खिड़की से अंदर झांककर देखा। इस दौरान अजीत का शव फंदे पर लटका दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। छात्र के शव को कोटा के एमबीएस अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने कमरे की जांच भी की, लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

    प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि पढ़ाई से जुड़े तनाव के कारण छात्र ने यह कदम उठाया हो सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिलने के कारण घटना के पीछे की परिस्थितियों को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच के बाद ही मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    अजीत के परिवार पर पहले भी दुख का पहाड़ टूट चुका था। उसके पिता अशोक धाकड़ का करीब चार साल पहले निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई दिव्यांश ने संभाली थी। उन्होंने छोटे भाई की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया और उसे आगे बढ़ाने के लिए सहयोग किया। अजीत जेईई की तैयारी के लिए कोटा गया था, लेकिन उसकी मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    घटना के बाद रातीकिरार गांव में शोक का माहौल है। परिवार के लिए यह क्षति बेहद कठिन है, क्योंकि अजीत अपनी पढ़ाई के जरिए भविष्य बनाने की तैयारी कर रहा था। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और घटना के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

    कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परीक्षा से जुड़ा दबाव अक्सर चर्चा का विषय रहता है। हालांकि, अजीत की मौत के पीछे पढ़ाई का तनाव ही कारण था, यह अभी स्थापित नहीं हुआ है। फिलहाल पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही घटना की परिस्थितियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया

    कोटा एक्सप्रेसवे हादसे में 8 श्रद्धालुओं की मौत, CM मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। इस दुर्घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भोपाल और बैतूल जिले के निवासी मृतकों के परिवारों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि देने और उन्हें हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने को कहा है।

    यह हादसा 17 अक्टूबर की सुबह कोटा क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुआ। श्रद्धालुओं से भरी एक मिनी बस अचानक चालक के नियंत्रण से बाहर हो गई। इसके बाद बस सड़क से फिसलकर खाई में जा गिरी। दुर्घटना में आठ लोगों की जान चली गई। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव की कार्रवाई की गई तथा घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बस में सवार लोग मध्य प्रदेश से राजस्थान के खाटूश्यामजी मंदिर में दर्शन करने जा रहे थे। बस में भोपाल के 21 लोगों के सवार होने की जानकारी सामने आई थी। इन यात्रियों में बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल बताए गए। दुर्घटना के बाद यात्रियों और उनके परिजनों के बीच चिंता का माहौल बन गया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान और प्रभावित परिवारों से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई।

    कोटा के जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने हादसे में आठ लोगों की मौत की पुष्टि की थी। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई की। बस के खाई में गिरने के कारण यात्रियों को नुकसान पहुंचा। हादसे के कारणों और परिस्थितियों से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने आने के साथ ही प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना को अत्यंत दुखद और पीड़ादायक बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में दिवंगत लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को सहायता देने के साथ हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को भोपाल और बैतूल जिले के मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए बाबा महाकाल से प्रार्थना भी की। उन्होंने शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय में दुख सहने की शक्ति देने की कामना की। इसके साथ ही दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की।

    इस हादसे ने धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के परिवारों को गहरे दुख में डाल दिया है। खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए जा रहे यात्रियों की बस दुर्घटनाग्रस्त होने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से घोषित आर्थिक सहायता का उद्देश्य मृतकों के परिजनों को इस कठिन समय में राहत देना है। अधिकारियों को सहायता राशि उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को जरूरी सहयोग देने के निर्देश दिए गए हैं।

    दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुई इस दुर्घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा और सड़क हादसों को रोकने के उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चालक का बस से नियंत्रण खोना दुर्घटना का तत्काल कारण बताया गया है, लेकिन हादसे से जुड़े अन्य कारणों के बारे में कोई विस्तृत निष्कर्ष सामने नहीं आया है। फिलहाल, आठ लोगों की मौत के बाद प्रभावित परिवारों को सहायता पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

  • कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति

    कोटा की 5 महिलाओं ने की किडनी ट्रांसप्लांट की मांग… राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु की अनुमति


    कोटा।
    राजस्थान (Rajasthan) के कोटा में बच्चे के जन्म के बाद किडनी फेलियर (Kidney failure) से जूझ रही पांच महिलाओं ने डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है। ये महिलाएं किडनी ट्रांसप्लांट (Kidney transplant) की मांग कर रही हैं। उनके परिवारों ने अब राष्ट्रपति को पत्र लिखकर कहा है कि अगर सरकार उनके सही इलाज का इंतजाम नहीं कर सकती तो इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। इन महिलाओं ने जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था।


    70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं

    उधर, न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (एनएमसीएच) के अधिकारियों का कहना है कि उनका इलाज चल रहा है और सभी मरीजों की हालत स्थिर है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, धन्नी सुमन, रागिनी मीणा, सुशीला महावर, पिंकी एयरवाल और आरती चौबदार नाम की महिलाओं की सेहत मई की शुरुआत में बच्चे के जन्म के बाद बिगड़ने के बाद से अब तक 32 बार डायलिसिस हो चुका है। वे 70 से ज्यादा दिनों से अस्पताल में हैं। इसके अलावा, कोटा के एनएमसीएच और जेके लोन हॉस्पिटल में सी-सेक्शन सर्जरी के बाद हुई दिक्कतों की वजह से पांच और महिलाओं की मौत हो गई थी।


    डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं

    मई के पहले हफ्ते से भर्ती सुमन के पति मोहन लाल ने बताया कि उनकी पत्नी अब डायलिसिस शब्द से ही डरने लगी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के एक घंटे के अंदर ही उसे उल्टी होने लगती है। वह बुरी तरह कांपने लगती हैं और बुखार आ जाता है। वहीं, रागिनी ने कहा कि डायलिसिस की प्रक्रिया बहुत दर्दनाक होती है। लंबे समय तक इलाज के बावजूद उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ है।

    पिंकी और आरती डायलिसिस से इनकार करते हुए अस्पताल से बाहर चली गईं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। रागिनी के पति लोकेश मीना ने दावा किया कि वार्ड स्टाफ उन पर रोजाना डिस्चार्ज लेने का दबाव डाल रहा है।


    राष्ट्रपति को चिट्ठी

    बुधवार को इन पांचों महिलाओं के परिवारों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर या तो किडनी ट्रांसप्लांट या फिर मौत की मांग की। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि अगर किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पाता है तो उन्हें इच्छामृत्यु (यूथेनेशिया) की इजाजत दी जाए। यह कदम महिलाओं द्वारा जिला अधिकारियों को किडनी ट्रांसप्लांट पक्का करने के लिए दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के खत्म होने के बाद उठाया गया।


    चलती-फिरती लाशों की तरह जी रहीं

    मोहन लाल ने कहा था कि हम उन्हें इस तरह तड़पते हुए और नहीं देख सकते। अगर हमें 48 घंटे के अंदर किडनी ट्रांसप्लांट का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो हम उन्हें डायलिसिस के लिए लाना बंद कर देंगे और उन्हें मरने देंगे। वे तो चलती-फिरती लाशों की तरह जी रही हैं।


    डायलिसिस से मना करना जानलेवा हो सकता है

    एनएमसीएच के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने बताया कि सभी पांच महिलाओं का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर है। उन्होंने कहा कि उन्हें 20 दिन पहले ही डिस्चार्ज करने की मंजूरी मिल गई थी और वे डायलिसिस सेशन के लिए अस्पताल आ सकती हैं। उन्होंने चेताया कि डायलिसिस से इनकार करना जानलेवा हो सकता है।


    प्रशासन को समस्या बताना चाहिए

    उन्होंने बताया कि ऐसे मरीजों के लिए डॉक्टर पहले तीन महीने तक इलाज के जरिए किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। उसके बाद ही कोई स्पेशलिस्ट तय करता है कि ट्रांसप्लांट की जरूरत है या नहीं। अस्पताल प्रशासन पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए प्रिंसिपल जैन ने कहा कि मरीजों को अपनी समस्याओं के बारे में प्रशासन को बताना चाहिए ताकि उनका समाधान निकाला जा सके।