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  • नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन

    नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव, बालेन शाह ने बढ़ाया सत्ता केंद्रीकरण की ओर कदम, खुफिया एजेंसी सीधे PMO के अधीन




    नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रधानमंत्री Balen Shah की सरकार ने सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में अहम कदम उठाया है। सरकार ने राष्ट्रीय जांच विभाग को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अधीन कर दिया है, जिससे देश की प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस शुरू हो गई है।

    नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार को मंजूर की गई “सरकार कार्य विभाजन नियमावली” के तहत इस खुफिया एजेंसी को गृह मंत्रालय से हटाकर PMO के नियंत्रण में लाया गया है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया गया है जब देश में यह चर्चा चल रही थी कि खुफिया तंत्र को फिर से गृह मंत्रालय के अधीन किया जाए या प्रधानमंत्री कार्यालय के सीधे नियंत्रण में रखा जाए।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli की नीतियों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम विभागों को PMO के अधीन कर सत्ता को केंद्रीकृत किया था। उस समय उनकी सरकार पर विपक्ष और जनता ने तानाशाही शैली में शासन करने के आरोप लगाए थे।

    बाद में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इन फैसलों को पलटते हुए खुफिया और अन्य एजेंसियों को उनके मूल मंत्रालयों के अधीन वापस कर दिया था। लेकिन अब बालेन शाह सरकार द्वारा इन्हें दोबारा PMO के अधीन लाने के फैसले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

    जानकारों के मुताबिक, इस बदलाव के साथ ही राजस्व जांच विभाग को भी भंग कर दिया गया है, जिसे पहले ओली सरकार के दौरान PMO के अधीन किया गया था। इसे सीधे तौर पर सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

    नेपाल की राजनीति में इस फैसले के बाद नई बहस छिड़ गई है कि क्या यह प्रशासनिक सुधार है या फिर सत्ता को एक ही केंद्र में सीमित करने की कोशिश। विपक्षी दलों और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संस्थागत संतुलन प्रभावित हो सकता है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बता रही है।

  • लिपुलेख विवाद पर फिर गरमाए भारत-नेपाल संबंध! क्या ओली की राह पर चल रहे हैं बालेन शाह?

    लिपुलेख विवाद पर फिर गरमाए भारत-नेपाल संबंध! क्या ओली की राह पर चल रहे हैं बालेन शाह?



    नई दिल्ली। नेपाल की नई सरकार ने सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद एक बार फिर India के साथ पुराने सीमा विवाद को हवा दे दी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग खोले जाने पर आपत्ति जताते हुए भारत और China को राजनयिक नोट भेजा है।

    नेपाल का दावा है किलिपुलेख दर्रा उसका हिस्सा है और इस मार्ग का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जा सकता। वहीं भारत का कहना है कि लिपुलेख ऐतिहासिक रूप से भारतीय क्षेत्र का हिस्सा रहा है और लंबे समय से इसका उपयोग व्यापार और तीर्थ यात्रा के लिए होता आया है।

    फिर क्यों उठा विवाद?
    लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है। नेपाल की राजनीति में यह मुद्दा अक्सर घरेलू असंतोष और राजनीतिक दबाव से ध्यान हटाने के लिए इस्तेमाल होता रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli ने इस मुद्दे को काफी आक्रामक तरीके से उठाया था। अब बालेन शाह सरकार भी उसी राह पर चलती नजर आ रही है, हालांकि उनका राजनीतिक उदय भ्रष्टाचार और आंतरिक अव्यवस्था के खिलाफ आंदोलन से हुआ था।

    भारत के लिए क्यों अहम है लिपुलेख?
    कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सामरिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अहम क्षेत्र है। भारत इस इलाके को अपनी प्रशासनिक सीमा का हिस्सा मानता है और यहां लंबे समय से उसका नियंत्रण रहा है।

    घरेलू राजनीति का दबाव
    विशेषज्ञों का कहना है कि नेपाल में भारत के प्रति नरम रुख अपनाना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा माना जाता है। यही वजह है कि नई सरकार भी सीमा विवाद पर सख्त रुख दिखाने की कोशिश कर रही है। हालांकि नेपाल के विदेश मंत्रालय का बयान अपेक्षाकृत संयमित माना जा रहा है और उसमें सीधे टकराव की भाषा से बचा गया है।

    चीन भी बना समीकरण का हिस्सा
    इस पूरे विवाद में चीन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा और व्यापार मार्ग सीधे तिब्बत क्षेत्र से जुड़े हैं। हालांकि बीजिंग ने अब तक संप्रभुता के मुद्दे पर खुलकर कोई पक्ष नहीं लिया है, लेकिन नेपाल-भारत संबंधों में यह मुद्दा एक बार फिर संवेदनशील बन गया है।