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  • आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    आईफोन नहीं, माता-पिता को फिर साथ देखना चाहता था कुनाल, पुणे पहाड़ी हादसे में पारिवारिक विवाद का नया पहलू सामने आया

    नई दिल्ली । पुणे के पहाड़ी हादसे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। शुरुआती जानकारी में इस घटना को 19 वर्षीय कुनाल और उसके माता-पिता के बीच आईफोन तथा उसकी ईएमआई को लेकर हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा था, लेकिन अब जांच और परिवार से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद मामले का एक अलग पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि कुनाल की सबसे बड़ी चिंता आईफोन नहीं बल्कि अपने माता-पिता के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करना था। वह चाहता था कि उसके पिता मुरलीधर और मां संगीता फिर सामान्य तरीके से साथ रहें और परिवार में चल रही परेशानियां खत्म हों।

    घटना से जुड़े लोगों के अनुसार कुनाल के माता-पिता के रिश्ते पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण थे। संपत्ति से जुड़े विवाद और कथित वैवाहिक मतभेदों ने परिवार के माहौल को प्रभावित किया था। हालांकि आसपास रहने वाले लोगों ने उनके बीच किसी बड़े विवाद की जानकारी से इनकार किया है। परिवार के परिचितों के मुताबिक दोनों सामान्य व्यवहार करते दिखाई देते थे, लेकिन घर के भीतर की परिस्थितियां अलग थीं।

    परिवार के लिए यह पहला बड़ा सदमा नहीं था। कुनाल के एक भाई की करीब आठ वर्ष पहले मौत हो चुकी थी। इसके बाद परिवार पर मानसिक दबाव और तनाव बढ़ गया था। कुनाल पढ़ाई में अच्छा था। उसने दसवीं कक्षा में 82 प्रतिशत अंक हासिल किए थे और आगे चलकर एमबीबीएस की पढ़ाई करना चाहता था। परिवार से जुड़ी परेशानियों के बीच उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति को लेकर भी अब कई सवाल उठ रहे हैं।

    घटना वाले दिन कुनाल पहाड़ी क्षेत्र में पहुंच गया था। बताया गया कि आईफोन को लेकर घर में विवाद हुआ था और इसके बाद वह खुद को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहाड़ी की ओर चला गया। उसके माता-पिता उसे समझाने के लिए वहां पहुंचे। पुलिस और दमकल कर्मियों ने भी मौके पर पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। खाई में सुरक्षा के लिए जाल भी लगाया गया था, लेकिन कुनाल लगातार अपनी जगह बदल रहा था।

    इसी दौरान उसके पिता ने उसे पकड़कर सुरक्षित स्थान पर खींचने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इसी प्रयास में संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरी खाई में जा गिरे। इसके बाद मां संगीता ने भी खाई में छलांग लगा दी। इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए विवरणों ने इसे केवल एक पारिवारिक विवाद या आईफोन से जुड़ा मामला मानने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    मुरलीधर की बहन के अनुसार उन्होंने और संगीता ने करीब 22 वर्ष पहले प्रेम विवाह किया था। परिवार के कुछ सदस्य इस विवाह के पक्ष में नहीं थे और शादी के समय भी उनके शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। शादी के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव बना रहा। हालांकि मुरलीधर के परिचित उन्हें अनुशासित और शांत स्वभाव का व्यक्ति बताते हैं। वह करीब दस वर्षों से ड्राइवर के रूप में काम कर रहे थे।

    परिवार कुछ महीने पहले ही किराए के मकान में रहने आया था। घटना के बाद घर में पालतू कुत्ता शेरू अकेला रह गया, जिसे बाद में एक पशु कल्याण समूह अपने साथ ले गया। अब पुलिस और संबंधित अधिकारी पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। परिवार के रिश्तों, घटना से पहले की स्थिति और उस दिन हुए घटनाक्रम को जोड़कर देखा जा रहा है। नए तथ्यों ने यह संकेत जरूर दिया है कि इस दुखद घटना के पीछे केवल आईफोन का विवाद नहीं, बल्कि परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहा भावनात्मक और वैवाहिक तनाव भी महत्वपूर्ण भूमिका में हो सकता है।

  • श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर पहुंचीं कुणाल खेमू की बहन, बदली हवेली और बीते दिनों की कहानी की साझा

    श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर पहुंचीं कुणाल खेमू की बहन, बदली हवेली और बीते दिनों की कहानी की साझा

    नई दिल्ली ।अभिनेता कुणाल खेमू के परिवार का श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर एक बार फिर चर्चा में है। वर्षों बाद उनकी बहन करिश्मा खेमू अपने परिवार के साथ इस घर पहुंचीं और वहां बिताए गए बचपन के दिनों से जुड़ी यादों को साझा किया। इस यात्रा का एक भावनात्मक वीडियो सामने आया है, जिसमें परिवार अपने पुराने घर के हर हिस्से को देखते हुए अतीत की स्मृतियों को दोबारा जीता नजर आता है। यह दौरा केवल एक मकान तक लौटने का नहीं, बल्कि उन यादों और भावनाओं से दोबारा जुड़ने का अवसर बन गया, जो समय के साथ पीछे छूट गई थीं।

    वीडियो में करिश्मा खेमू अपने पुश्तैनी घर के अलग-अलग हिस्सों को दिखाते हुए बताती हैं कि कभी यह पूरा भवन उनके परिवार का था, लेकिन अब समय के साथ इसकी संरचना और उपयोग दोनों बदल चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले जिन कमरों में परिवार के सदस्य साथ रहते थे, वे अब अलग-अलग हिस्सों में विभाजित हो चुके हैं और उनमें अन्य लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद घर का हर कोना उनके बचपन की किसी न किसी याद को आज भी संजोए हुए है।

    करिश्मा की मां ने भी इस यात्रा के दौरान घर से जुड़ी कई पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद परिवार की शुरुआती जिंदगी इसी घर की ऊपरी मंजिल पर बीती थी। उन्होंने उन कमरों की ओर इशारा करते हुए पुराने दिनों को याद किया, जहां परिवार एक साथ समय बिताता था। घर की सीढ़ियां, आंगन और कमरे आज भी उन्हें बीते वर्षों की घटनाओं की याद दिलाते हैं। परिवार ने बताया कि इस मकान का हर हिस्सा किसी न किसी व्यक्तिगत अनुभव और पारिवारिक रिश्ते से जुड़ा हुआ है।

    समय के प्रभाव की छाप भी इस पुश्तैनी भवन पर स्पष्ट दिखाई देती है। हवेली की दीवारों का रंग फीका पड़ चुका है, लकड़ी की संरचनाओं पर उम्र के निशान साफ नजर आते हैं और कई हिस्सों में मरम्मत की आवश्यकता महसूस होती है। पारंपरिक कश्मीरी स्थापत्य शैली में बने इस मकान की लकड़ी की बालकनी, नक्काशीदार खंभे और पुराने दरवाजे आज भी इसकी ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखते हैं। हालांकि लंबे समय के दौरान भवन की स्थिति में काफी परिवर्तन आया है, लेकिन इसकी मूल संरचना अब भी अतीत की कहानी बयान करती है।

    करिश्मा ने बताया कि कभी पूरा परिवार जिस विशाल घर में एक साथ रहता था, आज वह कई छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि कई कमरे अब बंद रहते हैं और कुछ हिस्सों में किरायेदार निवास करते हैं। घर की सीढ़ियों और गलियारों में पहले जैसी रौनक नहीं रही, लेकिन वहां पहुंचते ही बचपन की अनेक यादें स्वतः ताजा हो गईं। परिवार के लिए यह यात्रा भावनात्मक अनुभव साबित हुई, क्योंकि वर्षों बाद वे अपने उस घर की दहलीज पर लौटे, जहां उनके जीवन की शुरुआती स्मृतियां जुड़ी हुई हैं।

    कुणाल खेमू का जन्म श्रीनगर में हुआ था और बचपन में ही उनका परिवार घाटी छोड़कर मुंबई आ गया था। इसके बाद उन्होंने फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि जीवन की नई यात्रा शुरू होने के बावजूद श्रीनगर स्थित पुश्तैनी घर उनके परिवार की पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा। करिश्मा खेमू की इस यात्रा ने एक बार फिर उन भावनात्मक संबंधों को सामने लाया है, जो किसी व्यक्ति और उसके पैतृक घर के बीच वर्षों बाद भी कायम रहते हैं। यह कहानी केवल एक भवन की नहीं, बल्कि स्मृतियों, पारिवारिक विरासत और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की भावना को भी दर्शाती है।